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Tag: कर्म

Blogger: Sudha Singh at मेरी जुबानी : ...
कल गिरा जमीं पर मुट्ठी बांध,कल खोल हथेली जाएगा!दो गज धरती के ऊपर से यादो गज जमीन के नीचे ही,तू माटी में मिल जाएगा!माटी ही तेरी है सब कुछ,माटी पर रहना सीख ले!यह माटी सब कुछ देती है,पर वापस भी ले लेती है!माटी से जीना सीख ले!तेरा नेम प्लेट पढ़ - पढ़ करवह भूमि तुझ पर हंसती है-"तेरे ब... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   5:53pm 29 Jan 2018 #कर्म
Blogger: kuldeep thakur at मन का मंथन [man ka ...
हम आए अकेले, इस दुनियां में,न लाए साथ कुछ दुनियां में,शक्स ही रहे तो मर जाएंगे,बनो शक्सियत इस दुनियां में।जो भी मन में प्रश्न हैं,उनका उत्तर गीता में पाओ,जब ज्ञान दिया खुद ईश्वर ने,क्यों भटक रहे हो दुनियां में।जो ज्ञान न मिला भिष्म  को,न द्रौण को, न विदुर को,वो ही  ज्ञान ... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   10:03am 13 Jan 2017 #कर्म
Blogger: सुशील बाकलीवाल at नजरिया...
          एक पान वाला है, जब भी पान खाने जाओं ऐसा लगता है कि वह हमारा ही रास्ता देख रहा हो हर विषय पर बात करने में उसे बड़ा मज़ा आता है, कई बार उसे कहा की भाई देर हो जाती है जल्दी पान लगा दिया करों पर उसकी बात ख़त्म ही नही होती ।          एक दिन अचानक कर्म और भा... Read more
clicks 253 View   Vote 0 Like   12:01am 19 Apr 2016 #कर्म
Blogger: विजय राज बली माथुर at विद्रोही स्व-...
जी हाँ 'कर्म'से ही भाग्य बनता है। मैं तो ज्योतिष का घोर विरोधी था और मेरा मानना था कि हमारा भाग्य हमारे हाथ में (मतलब अपने ही काबू में ) है। 1976 में ITC के निर्माणाधीन होटल मोगुल, ओबेराय , आगरा के एकाउंट्स विभाग में था अपने साथ साक्षात्कार में मिले और जाब पाने से रह गए विनोद श्र... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   3:02pm 1 Dec 2015 #कर्म
Blogger: पत्रकार रमेश कुमार जैन उर्फ निर्भीक at निर्भीक-आजाद ...
1 नवम्बर  2015 : हर स्थिति में सबको सम्मान देते चलें. घृणित भावनाओं से अपनी रक्षा करने के लिए दूसरों को सम्मान दीजिये. 2 नवम्बर  2015 : कभी-कभी सम्मान देना ही सबसे बड़ा योगदान सिद्ध होता है. 3 नवम्बर  2015 : यदि कोई आप पर हंसता है तो खिन्न न हो, क्योंकि कम-से-कम आप उसे ख़ुशी तो दे ... Read more
clicks 509 View   Vote 0 Like   3:57am 10 Nov 2015 #कर्म
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी at उलूक टाइम्स...
कुछ मत कहना लिखने दे ना लिख ही तो रहें हैं कुछ कर तो नहीं रहे हैं वैसे भी जो करते हैं वो ना लिखते हैं ना लिखे हुऐ को पढ़ते हैं गीता पर दिये गये कृष्ण भगवान के कर्म के संदेश को अपने दिल में रखते है बीच बीच में लिखने वाले को याद दिलाते हैं अपना खुद काम पर लग जाते हैं करने के साथ स... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   4:18pm 24 Nov 2014 #कर्म
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at आपका ब्लॉग...
ईशोपनिषद के प्रथम मन्त्र  के द्वितीय भाग ..”तेन त्यक्तेन भुंजीथा..."का काव्य-भावानुवाद...... सब कुछ ईश्वर की ही माया, तेरा मेरा कुछ भी नहीं है |जग को अपना समझ न रे नर !तू तेरा सब कुछ वह ही है |पर है कर्म-भाव आवश्यक,कर्म बिना कब रह पाया नर |यह जग बना भोग हित तेरे,जीव अंश तू, तू ही ... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   6:20pm 24 Sep 2014 #कर्म
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at सृजन मंच ऑनला...
                        मूल गीता एवं गीता का मूल         भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमदभागवत गीता का उपदेश अर्जुन को महाभारत के युद्ध में दिया | वह विश्व का सर्वश्रेष्ठ व्यवहार, दर्शन, ज्ञान व कर्म का मूलतत्व का उपदेश विश्वभर में गीता क... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   3:59am 14 Jul 2014 #कर्म
Blogger: केवल राम : at चलते -चलते...!...
जीवन का क्रम है ही कुछ ऐसा कि आपको कहीं भी किसी भी परिस्थिति का सामना कर पड़ सकता है. लेकिन अगर आप अपने दृढ निश्चय के साथ आगे बढ़ रहे हैं तो फिर आपके लिए हर परिस्थिति एक नया जोश, एक नयी ऊर्जा पैदा करती है. हालाँकि जीवन का यह क्रम भी है कि गिरते वही हैं जो चढ़ने की कोशिश करते हैं, ... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   1:57am 26 Jun 2014 #कर्म
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at सृजन मंच ऑनला...
ईशोपनिषद के द्वितीय मन्त्र ....                                               '  कुर्वन्नेवेह कर्माणि  जिजीविषेच्छतम समा |                                             &... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   2:13pm 13 Apr 2014 #कर्म
Blogger: shikha kaushik at भारतीय नारी...
 जिसका जैसा भाग्य लिखा है, वही कर्म का लेख दिखा है |........ज़िंदगी ,जंग और सफलता -१ ज़िंदगी की  जंग -२चित्र ...-दैनिक जागरण साभार ....... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   11:50am 17 Jun 2013 #कर्म
Blogger: विजय राज बली माथुर at क्रांति स्वर...
चित्र साभार-डी पी दुबे जी कायस्थसभा,आगरा के अध्यक्ष श्री चंद्र मोहन शेरी के आग्रह पर मैंने यह लेख "जागृति"-स्मारिका-सन2002 ,कायस्थसभा,आगरा के लिए संक्षिप्त रूप मे लिखा था। इसे और स्पष्ट करने हेतु ऊपर एक 'हस्त'चित्र भी यहाँ दिया जा रहा है। इसमे सातों ग्रहों को आसानी स... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   3:05pm 18 Mar 2013 #कर्म
Blogger: विजय राज बली माथुर at क्रांति स्वर...
ज़्यादातर लोग धर्म का मतलबकिसी मंदिर,मस्जिद/मजार ,चर्च या गुरुद्वारा अथवा ऐसे ही दूसरे स्थानों  पर जाकर  उपासना करने से लेते हैं। इसी लिए इसके एंटी थीसिस वाले लोग 'धर्म' को अफीम और शोषण का उपक्रम घोषित करके विरोध करते हैं । दोनों दृष्टिकोण अज्ञान पर आधारित हैं। 'ध... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   2:58pm 5 Mar 2013 #कर्म
Blogger: विजय राज बली माथुर at पूनम वाणी ...
वैर -विरोध का अब तो हो अंत आयेँ अब खुशियाँ और बसंत सत्य कर्म करने मे हो मस्त जीयेँ  औरों के लिए कर्म मे रहें व्यस्त हों सदैव कर्मरत हों सब सम्मत  हों पूरी  अभिलाषाएं शत-प्रतिशत। (जन्मदिन पर -पूनम माथुर द्वारा Sunday, February 5, 2012 at 10:05am को लिखित )... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   10:15am 5 Feb 2013 #कर्म
Blogger: डॉ टी एस दराल at अंतर्मंथन...
कहते हैं , हँसना और गाल फुलाना एक साथ नहीं होता। लेकिन लगता है कवियों के जीवन में ये प्रक्रियाएं साथ साथ ही चलती हैं। तभी तो ख़ुशी हो या ग़म, एक कवि का धर्म तो कविता सुनाना ही है। विशेषकर हास्य कवियों के लिए यह दुविधा और भी महत्त्वपूर्ण होती है। भले ही दिल रो रहा हो, लेकिन ... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   3:00am 11 Jan 2013 #कर्म
Blogger: डा.राजेंद्र तेला "निरंतर at "निरंतर" क...
मेरीइच्छाओं और यथार्थ केबीच के सभी पुल ढहतेजा रहे हैंजैसे किसी फलदारपेड़ से कच्चे फलबिन पके ही गिरतेजा रहे हैंमेरी आकांशाओं केआसमान धूल धूसरितहोते जा रहे हैंअब सोचने लगा हूँइच्छाओं आकांशाओं केसमुद्र से निकल जाऊंयथार्थ के रेगिस्तान मेंचैन ढूंढ लूंपरमात्मा की हा... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   10:00am 29 Dec 2012 #कर्म
Blogger: sidharth joshi at ज्योतिष दर्श...
जातक के सामने कुण्‍डली लेकर बैठे ज्‍योतिषी के सामने दो चुनौतियां एक साथ होती हैं। एक तो उसे यह प्रदर्शित करना होता है कि वह दुनिया में सबकुछ जानने वाला बंदा है, दूसरा उसका परमात्‍मा से सीधा संबंध है, ऐसे में वह आपके सभी पुराने कर्मों का लेखा-जोखा “सैट” कर देगा। एक अकेला... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   10:36am 16 Jul 2012 #कर्म
Blogger: ali at ummaten...
कीमाहनाह का ख्याल था कि वह एक अप्सरा से ब्याह करे सो उसने अप्सरा के पिता सूर्य देव को एक पत्र लिखा, इसके बाद वो खरगोश के पास गया और पूछा, क्या तुम पत्र को स्वर्ग ले जा सकते हो ? खरगोश ने कहा कि मैं स्वर्ग नहीं जा सकता, फिर वह मृग के पास गया किन्तु मृग ने भी स्वर्ग जाने में अपन... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   8:18pm 9 Jul 2012 #कर्म
Blogger: केवल राम : at चलते -चलते...!...
गतांक से आगेधर्म गुरु कहते हैं कि तेरे कर्मों से कुछ भी नहीं होने वाला है, जोकुछ भी होगा ईश्वर की कृपा से ही होगा और दूसरी बात वह यह भी कहते हैं कि "भगवान् हमेशा भक्त के वश में रहते हैं " दोनों बातों पर अगर विचार करते हैंतो विरोधाभास स्वतः ही पैदा हो जाता है . अब मनुष्य क्या ... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   9:13am 23 May 2012 #कर्म
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar at "लिंक-लिक्खाड...
नायक या निर्णायक न दैन्यं न पलायनम्दूजे पर निर्णय दे देना, निर्णायक का है सहज कर्म ।समझा खुद के कुछ सही गलत, या निभा रहा वो मात्र धर्म ।नायक इंगित कुछ किये बिना, चुपचाप दिखाता राह चला -आदर्श करे इ'स्थापित वो,  अनुसरण करे जग समझ मर्म ।।यादों का हसीं कारवाँ....!!!  .ashok saluja . at याद... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   1:44am 18 Apr 2012 #कर्म
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar at "लिंक-लिक्खाड...
बातें ही बातेंSushil Kumar Joshi at "उल्लूक टाईम्स "बातें ही बातें यहाँ, धनी बात का होय ।परहित बातें कर रहा, अपना *आपा खोय ।   अपना *आपा खोय, हास्य को है अपनाता ।हँसने का सन्देश,  सभी को सदा सुनाता ।कुछ लोगों को किन्तु, नहीं हम दोनों भाते ।ग्यानी उल्लू देख, लोग अक्सर मुँह बाते ।*विनीत भाव ... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   9:04am 15 Apr 2012 #कर्म
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
   जर्मनी के बवेरिया में स्थित एक सुन्दर स्थल डाकाओ (Dachau) संसार में अपनी सुन्दरता के नहीं वरन एक भयानक नरसंहार का स्थल होने के कारण जाना जाता है। दूसरे विश्वयुद्ध के समय नाट्ज़ी जर्मनी की सेनाओं ने यहूदियों के संहार के लिए जो योजना कार्यान्वित की थी उसका एक भाग था यहां पर ... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   3:15pm 5 Apr 2012 #कर्म
Blogger: प्रवीण at सुनिये मेरी भ...
...कई हजार साल का सभ्य इंसान का यह सफर और उतना ही पुरानी दास्तान सभ्यता की... फिर भी हैरान करने वाली बात यह है कि हमारी यह दुनिया कभी भी न्यायपूर्ण नहीं रही... इसमें मालिक रहे व गुलाम भी... शोषक रहे व शोषित भी... शासक  रहे व शासित भी.. सबके लिये न्याय के, सबको समानता के, हर किसी के लि... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   4:10pm 22 Jan 2012 #कर्म
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