POPULAR ENGLISH+ SIGNUP LOGIN

Tag: कबूतर

Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी at उलूक टाइम्स...
किस लिये रोता है तेरे सामने तेरे घर को तोड़ कर एक टुकड़ा देखता क्यों नहीं है फैंका नहीं है गुलाब की कलम है माली नहीं भी है तो क्या हुआ रोपने के लिये सोच ले कोई जरूर होगा मवाली सही कहीं ना कहीं उसके सामने जा कर दीदे फाड़ लेना पूछ लेना क्यों नहीं बोता है घर तेरा टूट गया क्या हुआ ... Read more
clicks 23 View   Vote 0 Like   1:24pm 11 Dec 2019 #कबूतर
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी at उलूक टाइम्स...
सारे शरीफ हैं और एक भीड़ हो गयी है शरीफों की तू नहीं है उसमें और तुझे अफसोस भी नहीं होना चाहिये किसलिये होना है होना हीनहीं चाहिये किसलिये लपेट कर बैठा है कुछ कपड़े ये सोच कर ढक लेंगे सारा सब कुछ नंगों का कुछ नहीं होना है नंगा भगवान होता है होना भी चाहियेएक मन्दिर में मन्द... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   3:50pm 2 Nov 2018 #कबूतर
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी at उलूक टाइम्स...
खीज मत कुछ खींच मुट्ठियाँ भींच मूल्य पढ़ा मौका पा थोड़ा सा बेच भी आ ना कर पाये व्यक्त ना दे सके अभिव्यक्ति ऐसी निकाल कुछ युक्ति मूल्यों के जाल बना जालसाजी मूल्यों कामूल है पढ़ा कर फंसा झूठ पर कपड़ा चढ़ा चमकीला दिखा गाँधी जैसों की सोच पर आग लगा जमाने के साथ चल चाँद तारे पा लेने... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   4:04pm 20 Oct 2018 #कबूतर
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी at उलूक टाइम्स...
किसी से उधार ली गई बैसाखियों पर करतब दिखाना सीख लेना एक दो का नहीं पूरी एक सम्मोहित भीड़ का काबिले तारीफ ही होता है सोच के हाथ पैरों को आराम देकर खेल खेल ही में सही बहुत दूर के आसमान को छू लेने का प्रयास अकेले नहीं मिलजुल कर एक साथ एक मुद्दे चाँद तारे उखाड़ कर जमीन पर बिछा दे... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   4:06pm 15 Aug 2017 #कबूतर
Blogger: Dr T S Daral at अंतर्मंथन...
आजकल शहरों में चिड़ियाएं लगभग गायब ही हो चुकी हैं । लेकिन ऐसा लगता है कि इनकी जगह कबूतरों ने ले ली है।  कबूतरी रंग के ये कबूतर झुण्ड के झुण्ड नज़र आते हैं।  इनकी  बहुतायत से शहरी लोग भी परेशान हो गए हैं क्योंकि ये बालकनी में बैठ कर अपनी बीट से सारी बालकनी को गन्दा ... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   8:00am 4 Jan 2014 #कबूतर
Blogger: Hardeep Rana at kunwarji's...
दिन में भी मध्यरात्रि  सा सन्नाटा पसरा था!सूरज जैसे कोई नाराजगी दिखा रहा हो!हवा भी खीजी सी पड़ी थी,तपी हुयी चीखती-चिल्लाती बस वही जहाँ-कहाँ  धुल उडाती सी जलाती फिर रही थी!ऐसे में कबूतर का एक परिवार जिसमे दो व्यस्क और दो बच्चे थे,उड़ने का साहस दिखा रहे थे!जीने की चाह भी मर... Read more
clicks 267 View   Vote 0 Like   5:26am 5 Jul 2013 #कबूतर
[Prev Page] [Next Page]

Share:

Members Login

    Forget Password? Click here!
  • Latest
  • Week
  • Month
  • Year
  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
और सन्देश...
कुल ब्लॉग्स (3969) कुल पोस्ट (190596)