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Tag: उम्र

Blogger: मधुलिका पटेल at मेरी स्याही क...
चाँदनी रात के साये में जागते और भागते लोग आँखों में नींद कहाँ है सपने आँखों से भी बड़े हैं न नींद में समाते न आँखों को आराम पहुँचाते आज की रात खत्म होती नहीं उससे पहले कल का दामन थामने की जल्दी ज़िन्दगी ने तो जैसेजद्दो - जहद की हद कर दी कासिब का हिसाब कदो... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   7:11pm 18 Aug 2018 #उम्र
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
सभी मित्रों को नव वर्ष की हार्दिक मंगल कामनाएं ... २०१८ सबके लिए शुभ हो. नव वर्ष की शुरुआत एक रचना के साथ ... जाने क्यों अभी तक ब्लॉग पे नहीं डाली ... अगर आपके दिल को भी छू सके तो लिखना सार्थक होगा ...तेरे चले जाने के बाद पतझड़ की तरह कुछ पत्ते डाल से झड़ने लगे थे  गमले में लगी तुल... Read more
clicks 192 View   Vote 0 Like   6:04am 3 Jan 2018 #उम्र
Blogger: मधुलिका पटेल at मेरी स्याही क...
वह छत के कोने में धूप का टुकड़ा बहुत देर ठहरता है उसे पता हैअब मुझे काफी देर यहीं वक़्त गुज़ारना है क्योंकि वह शाम की ढलती धूप जो होती है उम्र के उस पड़ाव की तरह और मन डर कर ठहर जाता है ठंडी धूप की तरहजब अपने स्वयं के लिए वक़्त ही वक़्त हैअब घोंसले में अकेले ... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   9:24pm 21 Jul 2017 #उम्र
Blogger: Rachana Dixit at रचना रवीन्द्...
इज़हारे- ख़यालये उम्र अपनी इतनी भी कम न थी,अपनों को ढूंढने में गुजार दी दोस्तों.पांव में छाले पड़े है इस कदर,अपनों में, अपने को खो दिया दोस्तों.कसमें वादों पे न रहा यकीं अब हमें,बंद आँखों से सच को टटोलते हैं दोस्तों.वो इश्क वो चाँद तारे जमीं पर,सब किताबों की बाते है दोस्तो... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   9:02am 28 Jun 2015 #उम्र
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
बूढ़े अक्षरों की बनावट कहानी कह रही,दास्तान अजीब है,खुरदरापन लिए चेहरे,हाथों में नमीं नहीं,ढहने को विवश लोग,बर्तन दर्द से भरे,हंसी तो मानो गायब है।उम्र है ऐसी,बातें हैं ऐसी,तन्हाई का दौर है,सिमट रहा कोई,अकेलापन घेर रहा,वह मैं हूं,हां मैं ही।सजावट नहीं रही बाकि,रुलता भी ह... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   1:44pm 24 May 2015 #उम्र
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
बूढ़े अक्षरों की बनावट कहानी कह रही,दास्तान अजीब है,खुरदरापन लिए चेहरे,हाथों में नमीं नहीं,ढहने को विवश लोग,बर्तन दर्द से भरे,हंसी तो मानो गायब है।उम्र है ऐसी,बातें हैं ऐसी,तन्हाई का दौर है,सिमट रहा कोई,अकेलापन घेर रहा,वह मैं हूं,हां मैं ही।सजावट नहीं रही बाकि,रुलता भी ह... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   1:44pm 24 May 2015 #उम्र
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
सफर के दौरान बहुत कम लोगों से हम बात कर पाते हैं। अक्सर हमें फिक्र गंतव्य तक पहुंचने की अधिक रहती है। मुझे पिछले दिनों एक बुजुर्ग मिले जिन्होंने तीन घंटे से अधिक के सफर को कुछ मिनटों की तरह बना दिया। उनसे बातें हुए, ढेरों बातें जिनके सिर भी थे और पैर भी। रामसरन गुप्ता की ... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   12:29pm 27 Apr 2015 #उम्र
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
वक्त दौड़ते एहसासों की तरह है। दौड़ जो मुमकिन है, नहीं है। मुश्किल दौर, विषादों की चटाई के कोने जो घिसटते ख्वाबों की याद द&#... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   5:20pm 15 Mar 2015 #उम्र
Blogger: तुषार राज रस्तोगी at तमाशा-ए-जिंदग...
सूर्य की पहली रूपहली किरण जब इस धरातल पर पड़ी दमक उठा पर्वतों पर उसका सोना झरनों नदियों में चमकी चांदी की लड़ीउसके हँसते ही अंकुर भी लहलहा उठेकलियों की आँखों में आया पानी कहता है चमन 'निर्जन'ऐ मुझे रौशन करने वाले ख़ुदा अब कोई माली ही मुझे मिटाएगाहर फूल को चमन से जुदा कराएग... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   8:03pm 26 Feb 2015 #उम्र
Blogger: harminder singh at वृद्धग्राम...
बूढ़ी काकी ने कहा -‘हम जानते हैं कि मौसम भी करवट लेता है। आज कुछ, कल कुछ ओर। यही जिंदगी का दस्तूर है। जिंदगी हमें क्या नहीं सिखाती, क्या नहीं दिखाती। जब चाहे हम आसमान में होते हैं। जब चाहे हम जमीन पर। यह खेल बड़ा ही अनोखा है। इसकी कल्पना भी शायद हम न कर पायें।’ मैंने काकी क... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   4:39pm 31 Jul 2014 #उम्र
Blogger: rajneesh at रजनीश का ब्लॉ...
( साल भर पुरानी कविता पुन: पोस्ट कर रहा हूँ )बहता है पसीनातब सिंचती है धरती जहां फूटते है अंकुर और फसल आती है बहता है पसीना तब बनता है ताज जिसे देखती है दुनियाऔर ग़ज़ल गाती है बहता है पसीना तब टूटते है पत्थर चीर पर्वत का सीना राह निकल आती हैबहता है पसीना तब बनता है मंदि... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   7:46am 1 May 2013 #उम्र
Blogger: Kajal Kumar at कथा कहानी...
वाह गांव से नया-नया शहर आया था. उसके कि‍सी रि‍श्‍तेदार ने उसे हमारे दफ़्तर में, प्राइवेट सि‍क्‍योरि‍टी एजेंसी के गार्ड की ड्यूटी पर लगवा दि‍या था. यह दफ़्तर एक बहुमंज़ि‍‍ला इमारत में था. उसका बदन छरहरा था और वह पांच फुट का सा लगता था. सि‍क्‍योरि‍टी एजेंसी की वर्दी और टो... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   10:23pm 6 Feb 2013 #उम्र
Blogger: डा.राजेंद्र तेला "निरंतर at "निरंतर" क...
जब चुपके से बुढापा आयातो बढ़ती उम्र से घबरा गयामन की व्यथा छुपा ना सकाएक दिन उम्र से ही पूछ लियाक्यों इतनी तेज़ी से बढ़ती होतारीख बदलती हैज़िन्दगी एक दिन कमहो जाती हैतुम एक दिन बढ़ जाती होथोड़ा सा धीरे नहीं चलसकती होजितना एक दिन में बढ़ती होउतना पांच सात दिन मेंनहीं ब... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   6:27am 19 Jan 2013 #उम्र
Blogger: डा.राजेंद्र तेला "निरंतर at "निरंतर" क...
हम तो गुजर जायेंगेयाद करोगे वो बातेंजो कह कर जायेंगेजब भी परेशान हो करखड़े होगे चौराहे पररास्ता पूछोगेजब मिलेगा नहींकोई भी बताने वालाआसूं बहाओगेहम याद आयेंगेखुदा से दुआएं करोगेएक बार हमें ज़मीन परभेज दोफिर कभी लौट करजाने ना देंगेइज्ज़त मोहब्बत सेअपने पास रखेंगे... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   5:56am 8 Oct 2012 #उम्र
Blogger: vijay kumar sappatti at बस यूँ ही..........WR...
जिंदगी की अपनी एक राह होती है .. चलते चलते ही उम्र बीत जाती है .... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   5:30am 9 May 2012 #उम्र
Blogger: rajneesh at रजनीश का ब्लॉ...
बहता है पसीनातब सिंचती है धरती जहां फूटते है अंकुर और फसल आती है बहता है पसीना तब बनता है ताज जिसे देखती है दुनियाऔर ग़ज़ल गाती है बहता है पसीना तब टूटते है पत्थर चीर पर्वत का सीना राह निकल आती हैबहता है पसीना तब बनता है मंदिर चलती है मशीनें जन्नत मिल जाती है जो बहा... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   1:53am 1 May 2012 #उम्र
Blogger: sandhya arya at हमसफ़र शब्द...
चलते रहे बहुत मगर मंजिल का साथ ना मिला सुखनसाज़  बहुत बजते रहे पर करारे-सुकून ना मिला तख्तों ताज़ पर बैठे रहे वोपर वादों पर फूलों सा चमन ना मिलामिलती जो उन्हे इक खुशी चाँद साचाँदनी जो छुपती,पर बादलो का साथ ना मिलापहाड हर तरफ रहे पिघल भी जाते मगर उगते सूरज का इन्हें साथ ना म... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   11:07am 27 Feb 2012 #उम्र
Blogger: Kajal Kumar at कथा कहानी...
 उसेजाने-माने साहित्‍यकारों की फ़ेहरिस्‍त में शामिल होने की को‍शिश करते करते ज़मानाबीत गया. जाने-माने तो क्‍या, उसके ख़ुद के अलावा कोई दूसरा उसे साहित्‍यकार तककहने को तैयार न होता था. पर किस्‍मत का खेल देखो, एक दिन उसे किसी की पुस्‍तक के विमोचनका न्‍योता आ गया. समारोह ... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   2:27pm 26 Feb 2012 #उम्र
Blogger: डा.राजेंद्र तेला "निरंतर at "निरंतर" क...
उम्र के प्रश्न नेसदा झंझोड़ा मुझकोसमझ नहीं पाताक्यों उसेअनुभव से जोड़ा जाताअब तक जीवन मेंछोटी उम्र के बड़ों को देखाउन्हें अनुभव सेसरोबार देखाबड़ी ऊम्र के छोटों कोभी देखाउनकी कथनी,करनी मेंछिछोरेपन को झांकतेदेखा मैं नहीं मानताअनुभव सदा उम्र सेही आतानहीं जानताअन... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   6:42pm 21 Jan 2012 #उम्र
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