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Tag: इंसान

Blogger: मधुलिका पटेल at मेरी स्याही क...
यह जीवन जब भीड़ में गुम हो जाने के बाद धीरे - धीरे तन्हा होता है धीरे - धीरे पंखुड़ियों से सूख कर बिखर जाते हैं यह रिश्ते प्यार स्नेह और अपनेपन की टूट जाती है माला धीरे - धीरे हर मन का गिरता जाता है धीरे - धीरे कम हो जाता है अपनों की आवाज़ों का कोलाहल अल्फ़ाज़ ब... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   7:34am 29 Jan 2018 #इंसान
Blogger: Sanjay Grover at saMVAdGhar संवादघर...
पहले वे यहूदियों के लिए आएमैं वहां नहीं मिलाक्योंकि मैं यहूदी नहीं थाफिर वे वामपंथियों के लिए आएमैं उन्हें नहीं मिलाक्योंकि मैं वामपंथी नहीं थावे अब संघियों के लिए आएमैं नहीं मिलाक्योंकि मैं संघी नहीं थावे आए मंदिरों में, मस्ज़िदों में, गुरुद्वारों मेंउन्होंने कोन... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   10:47am 22 Sep 2017 #इंसान
Blogger: vijay kumar sappatti at कविताओं के मन...
रूह की मृगतृष्णा मेंसन्यासी सा महकता है मनदेह की आतुरता मेंबिना वजह भटकता है मनप्रेम के दो सोपानों मेंयुग के सांस लेता है मनजीवन के इन असाध्यध्वनियों पर सुर साधता है मनरे मनबावला हुआ जीवन रेमृत्यु की छाँव में बस जा रेप्रभु की आत्मा पुकारे तुझे रेआजा मन रे मन  !© विजय... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   4:40am 6 Sep 2017 #इंसान
Blogger: vijay kumar sappatti at कविताओं के मन...
नज़्म :मुझ से तुझ तक एक पुलिया हैशब्दों का,नज्मो का,किस्सों का,औरआंसुओ का .............और हां; बीच में बहता एक जलता दरिया है इस दुनिया का !!!!© विजय... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   2:51pm 13 Feb 2016 #इंसान
Blogger: vijay kumar sappatti at कविताओं के मन...
...............और अंत में कुछ भी न रह जायेंगा !!न ही ये सम्मान , न ही ये मान ,न ही ये धन और न ही ये यश !बस ...चंद यादें कुछ अपनों के मन में और वो शब्द भी जो मैंने कभी लिखे थे !!!एक अनंत की जिज्ञासा भी साथ में थी ,साथ में ही रही औरअंत में साथ ही चली गयी !प्रभु तुम ही तो हो एक मेरेबाकी तो सब जग झूठ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   6:10am 11 Sep 2015 #इंसान
Blogger: मधुलिका पटेल at मेरी स्याही क...
मै कौन हूँ और क्या हूँक्या तुम मुझे हो जानतेबस चंद है मेरी ज़रूरतें किताब की दुकान देख रुक जाती हूँ अच्छे और सुंदर सफे लिए बिना रह नहीं पाती हूँसुंदर कलम तलाशती आँखेंसांसारिक रंग ढ़ंग कुछ नहीं आता बस कुछ लिख़ने के लिए एकांत मुझे है भाता सुकून मिलते ही मृगमरिच... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   9:22pm 11 Jul 2015 #इंसान
Blogger: vijay kumar sappatti at बस यूँ ही..........WR...
दोस्तों, आज पिताजी को गुजरे एक माह हो गए. इस एक माह में मुझे कभी भी नहीं लगा कि वो नहीं है. हर दिन बस ऐसे ही लगा कि वो गाँव में है और अभी मैं मिलकर आया हूँ और फिर से मिलने जाना है. कहीं भी उनकी कमी नहीं लगी. यहाँ तक कि संक्रांति की पूजा में भी ऐसा लगा कि वो है. बस कल अचानक लगा कि फ़ो... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   1:45am 22 Jan 2015 #इंसान
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी at उलूक टाइम्स...
पेड़ के इधर पेड़ पेड़ के उधर पेड़ बहुत सारे पेड़ एक दो नहीं ढेर सारे पेड़ चीड़ के पेड़ देवदार के पेड़ नुकीली पत्तियों वाले कुछ पेड़ चौड़ी पत्तियों वाले कुछ पेड़ सदाबहार पेड़ पतझड़ में पत्तियाँ झड़ाये खड़ेकई कई हजार पेड़ आदमी के आस पास के पेड़ बहुत दूर आदमी की पहुँच से बाहर के पेड़ पेड़ के पास ... Read more
clicks 22 View   Vote 0 Like   12:12pm 13 Nov 2014 #इंसान
Blogger: अविनाश वाचस्पति at अविनाश वाचस्...
चलने वाले दो पैर परअचरज नहीं होतान मुझे, न तुझे औरन किसी अन्‍य को।धरती पर मौजूदइंसान से गिनें तोउपकरणों पर रुकेंपक्षी भी मिलेंसंतुलन का पर्यायसाइकिल से शुरू करेंटू व्‍हीलर तक सबसंतुलन धर्म निबाह रहे हैं।जानवर चलते-दौड़तेचार पैरों पर तेज गति सेगति से होकर मुक्‍तदु... Read more
clicks 228 View   Vote 0 Like   9:50am 11 Oct 2014 #इंसान
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