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Tag: आशु कविता

Blogger: vani sharma at गीत मेरे ...........
मृगतृष्णातपते मरुस्थल मेंरेत के फैले समंदर परप्यासे पथिक कोमृगतृष्णा  भरमाती है शहरों मेंकोलतार सनी सड़कें भीभरी दुपहरी मेंभ्रम का संसार रचाती है ...प्रकृति का कोई खेल या भ्रमयूँ ही नहीं होता ...प्रकृति रच कर मायासचेत रहना सिखाती है ...सीख सके मानव इनसेजीवन के दुष्कर प... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   1:43am 8 Jun 2012 #आशु कविता
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