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Tag: आशा

Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
      मुझे और मेरी पत्नि को पैरिस में लुवरे संग्रहालय जाने के सौभाग्य मिलने बाद, हमने अपनी ग्यारह वर्षीय पोती से फोन पर बात की। जब हमने उसे बताया कि हमने वहाँ पर सुविख्यात “मोना लिसा” चित्र को देखा, तो उसने तुरंत पूछा, “क्या वह मुस्कुरा रही है?” इस चित्र से संबंधित... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   3:15pm 4 Nov 2019 #आशा
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
   चिकित्सा-शास्त्र से संबंधित जर्नल Surgical Technology International में एक लेख में बताया गया कि जब कोई व्यक्ति सर झुकाकर अपने फोन की ओर देखता है, तो यह गर्दन पर 60 पाउंड भार को उठाने के बराबर होता है। जब हम इसका विचार करते हैं कि सँसार भर में प्रतिदिन लाखों लोग औसतन 2-4 घंटे सर झुकाए हुए फोन ... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   3:15pm 15 Mar 2018 #आशा
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
   लंडन में स्थित वेस्टमिनिस्टर ऐब्बी (विशाल चर्च और उसके मैदान) की भव्य एतिहासिक पृष्ठभूमि है। दस्वीं शताब्दी में बेनेडिक्ट मठ के मठवासियों ने यहाँ परमेश्वर की दैनिक आराधना की प्रथा का आरंभ किया था, जो आज भी बना हुआ है। यह एब्बी अनेकों प्रसिध्द लोगों को दफनाने का स... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   3:15pm 18 Oct 2017 #आशा
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   सभी पाठकों को नव-वर्ष की शुभ-कामनाएं   प्रत्येक नए वर्ष के आरंभ होने पर, विशेषज्ञ उस वर्ष के लिए अर्थव्यवस्था, राजनीति, मौसम और अनेकों अन्य विषयों के बारे में अपनी भविष्यवाणियाँ देते हैं। क्या युद्ध होंगे या शान्ति रहेगी? दरिद्रता होगी या समृद्धि? विकास होगा या... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   3:15pm 1 Jan 2017 #आशा
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   अपनी पुस्तक God in the Dock (कटघरे में परमेश्वर) में सुप्रसिद्ध मसीही विश्वासी और लेखक सी. एस. ल्युईस ने लिखा: "कलपना कीजिए कि एक इमारत में, जिसमें कई लोग साथ रहते हैं, आधे यह मानते हैं कि वह इमारत के होटल है, और शेष आधे यह मानते हैं कि वह इमारत एक कैदखाना है। जो उसे होटल मानते है... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   3:15pm 9 Oct 2016 #आशा
Blogger: सुशील बाकलीवाल at नजरिया...
           अमेरिका की बात है, एक युवक को व्यापार में बहुत नुकसान उठाना पड़ा, उसपर बहुत कर्ज चढ़ गया,  तमाम जमीन-जायदाद गिरवी रखना पड़ी,  दोस्तों ने भी मुंह फेर लिया, जाहिर हैं वह बहुत हताश था, कहीं से कोई राह नहीं सूझ रही थी, आशा की कोई किरण बाकि न बची थी । एक द... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   5:25am 24 Aug 2016 #आशा
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   क्या कभी आप ने खरीददारी के पछतावे का अनुभव किया है? मैंने किया है। कभी कभी कोई नई चीज़ खरीदने से ठीक पहले मेरे अन्दर कुछ नया पा लेने की उत्तेजना होती है, लेकिन उसे खरिद लेने के बाद पछतावे का भाव मुझे अभिभूत कर देता है; मैं सोचने लगता हूँ, क्या वास्तव में मुझे इस चीज़ की आ... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   3:15pm 31 Jan 2016 #आशा
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   एक बार मैंने लोगों के परस्पर संबंधों को सुधारने की सलाह-मश्वरा देने का कार्य करने वाले एक व्यक्ति से पूछा कि मुख्यतः वे कौन सी समस्याएं हैं जिनके कारण लोग उनके पास आते हैं, या जो संबंध बिगड़ने का अकसर कारण होती हैं। बिना झिझके उसका उत्तर था, "अनेकों समस्याओं की जड़ हो... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   3:15pm 29 Jan 2016 #आशा
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
   हमें ऐसा लगा जैसे कि हमारा क्रिसमस रद्द कर दिया गया है। कई वर्षों से हमारी पारिवारिक परंपरा रही है कि हम क्रिसमस पर अपने परिवार जनों से मिलने जाते हैं और उन्हीं के साथ वहाँ मिसूरी में क्रिसमस मनाते हैं; लेकिन अब की बार बर्फ के कारण हमें बीच रास्ते में मिनिसोटा से ह... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   3:15pm 15 Dec 2015 #आशा
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
   परमेश्वर के वचन बाइबल में वर्णित संसार के अन्त के बारे में अनेक मनुष्यों द्वारा कही गई अनेक भविष्यवाणियाँ गलत साबित हो चुकी हैं। ये भविष्यवाणियाँ लोगों के मन में भय उत्पन्न करती हैं, उन्हें अस्थिर करती हैं, और जब वे पूरी नहीं होतीं, तो परमेश्वर के वचन के प्रति मन म... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   3:15pm 12 Aug 2015 #आशा
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
नेह घट सजाने हैं आशा के नहीं आस्था के दीप जलाने हैं आकाश कुसुम नहीं श्रद्धा पुष्प खिलाने हैं, हर लेंगे तम, जो भर देंगे सुवास मन में प्रीत की अल्पना पर नेह घट सजाने हैं ! मोहपाश तोड़कर मुक्ति राग बज उठें गगन में उड़ान भर मन मयूर गा उठें, पाषणों से ढके स्रोत जो सिमटे थे हु... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   7:55am 27 Mar 2015 #आशा
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
   स्पेन के बार्सिलोना शहर से दो घंटे उत्तर दिशा की यात्रा करके एक रेस्टोरां आता है, ’एल बुल्ल”। यह रेस्टोरां अपने ग्राहकों में इतना लोकप्रीय है कि लोगों को यहाँ भोजन करने के लिए 6 महीने पूर्व अपने लिए एक मेज़ आरक्षित करवानी पड़ती है। अपनी उत्कृष्ट सेवा के लिए यह रेस्ट... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   3:15pm 5 Jan 2015 #आशा
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
   हाल ही में मैंने टेलिविज़न पर एक रेस्टोरां श्रंखला का विज्ञापन देखा जिसमें एक लुभावना दावा किया गया था; उस विज्ञापन के अनुसार, आप उस श्रंखला के किसी भी रेस्टोरां मे जाकर अपना मनपसन्द भोजन द्वारा आनन्दित हो सकते हैं। क्या ही अच्छा होता यदि अपने मनपसन्द भोजन के द्वा... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   3:15pm 4 Jan 2015 #आशा
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
उसने भी कर दिया इशारा रंग हमारे हाथ लगे हैं कैनवास है यह जग सारा, रंगी इसे बना डालें अब उसने भी कर दिया इशारा ! कोई गीत रचे जाता है हम भी सुर अपने कुछ गा लें, गूँजे स्वर्णिम स्वर लहरियाँ उन संग आशाएं सजा लें ! रचा जा रहा पल-पल यह जग सृजन हमारे हाथों कुछ हो, कोई मौन सजाता ... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   3:13am 13 Aug 2014 #आशा
Blogger: प्रवीण पाण्डेय at न दैन्यं न पल...
है अभी दिन शेष अर्जुन,लक्ष्य कर संधान अर्जुन ।सूर्य भी डूबा नहीं है,शत्रु भी तेरा यहीं है,शौर्य के दीपक जला दे, विजय की हुंकार भी सुन ।है अभी दिन शेष अर्जुन ।।१।।सही की चाहे गलत की,पार्थ तुमने प्रतिज... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   10:30pm 15 Jul 2014 #आशा
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   बात सन 2009 के अगस्त माह की है, ब्लेयर और रौना मार्टिन का 9 वर्षीय पुत्र मैट्टी जो सदा ही अपनी चहलकदमी से उनको व्यस्त रखता था, अचानक ही एक दुर्घटना में मारा गया। मुझे अवसर मिला कि मैं इस परिवार से मिलूँ और उनके शोक में संभागी बनूँ; और मैं जानता हूँ कि यह दुर्घटना उनके लिए ... Read more
clicks 30 View   Vote 0 Like   3:15pm 1 Apr 2014 #आशा
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
आना वसंत का जब नहीं रह जाती शेष कोई आशा  निराशा के भी पंख कट जाते हैं तत्क्ष्ण ! जब नहीं रह जाती ‘मैं’ की धूमिल सी छाया भी उसकी झलक मिलने लगती है उसी क्षण निर्भर, निर्मल वितान सा जब फ़ैल जाता है मन का कैनवास  प्रेम के रंग बिखेर जाता है कोई अदृश्य हाथ माँ की तरह साया बन ... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   9:43am 4 Mar 2014 #आशा
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   मैं मानती हूँ कि परमेश्वर के वचन बाइबल का हर भाग परस्पर संबंधित है और समस्त पवित्र-शास्त्र प्रासंगिक तथा महत्वपूर्ण है। लेकिन फिर भी मुझे अचरज हुआ जब नवंबर माह के मेरे बाइबल पाठ में पतरस प्रेरित द्वारा लिखित प्रथम पत्री में से मैंने पाया कि प्रभु यीशु के आगमन से ... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   3:15pm 1 Dec 2013 #आशा
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   मेरे दादा को किसी को विदा करते समय ’गुडबाय’ कहना बिलकुल पसन्द नहीं था; उनका मानना था कि ’गुडबाय’ शब्द बहुत निर्णायक और अन्तिम सा लगता है। इसलिए जब हम उनके साथ अपने पारिवारिक मिलन के समय के बाद वापस जाने के लिए यात्रा पर निकलते तो वे अपने घर के सामने खड़े होकर हाथ हि... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   3:15pm 22 Oct 2013 #आशा
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
नया जब दिन उगा नूतन उच्छ्वास भरें श्वासों में हर्ष के, नया सा दिन उगा वृक्ष पर वर्ष के ! आशा कुम्हलायी जो बंधी अभी छोर में ?  लिए बासी मन जगे क्यों कोई भोर में ? ताजा समीर बहे क्षमता भी बढ़ी है, कल से आज तलक उम्र सीढ़ी चढ़ी है ! जैसा भी हो समय नया उत्कर्ष हो, हँसी ... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   7:57am 4 Jul 2013 #आशा
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   अपनी पुस्तक Through the Valley of the Kwai में स्कॉटलैंड के एक सेना अधिकारी, 6 फुट 2 इन्च कद के एर्नेस्ट गौर्डन, ने दूसरे विश्वयुद्ध में कैदी बनाए जाने के अपने संस्मरण लिखे हैं। युद्ध बंदी बनाए जाने के समय गौर्डन एक नास्तिक था। बन्दीयों को रखने की दशा के कारण उसे मलेरिया, डिप्थीरिया, टाय... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   3:15pm 29 Jun 2013 #आशा
Blogger: Nihar Ranjan at बातें अपने दि...
ज़ब्त कर लोह्रदय की उफान बेरोक आँसू सिसकियों की तान म्लिष्ट शब्दतुम्हारे और ये बधिर कान व्यर्थ रोदन में नहीं है त्राण समय देख प्रियतम !तचित मन की दाझ ये बादल बेकार बस नहीं इनका दें तुझको तार अंधियारी रातों से एकल आवार सपने! हाँ वही रहे जिंदा तो होंसाकार  समय देख प्रियत... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   11:30pm 9 Jun 2013 #आशा
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
   अमरीकी मुद्रा की सबसे छोटी इकाई है ’पेनी’ या एक सेंट और यह बहुत तुच्छ समझी जाती है। बहुत से लोग तो, यदि उन्हें सड़क पर एक पेनी पड़ा दिखाई दे तो उसे उठाने के लिए झुकते ही नहीं। लेकिन लोगों के दान पर चल रही कुछ धर्मार्थ संस्थाओं ने पाया है कि एक एक पेनी जोड़ने से एक अच्छी ख... Read more
clicks 219 View   Vote 0 Like   3:15pm 11 Apr 2013 #आशा
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   प्रति इतवार दो युवा भाई चर्च की प्रथम पंक्ति में बैठे होते थे और वे अपने पिता को चर्च में हो रही आराधना सभा की अगुवाई तथा संचालन करते हुए देखते थे। एक रात उन्हें सो जाने के लिए भेजने के पश्चात पिता ने एक पुत्र के रोने की आवाज़ सुनी। पिता ने पुत्र के पास जाकर जानना चाहा क... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   3:15pm 10 Apr 2013 #आशा
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