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Tag: अकविता

Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at आपका ब्लॉग...
'बदलता वक्त'परिवर्तित होता जा रहा आज मौसमजाड़ा, गर्मी और बरसातहाय रे ! तीनों भयानक, तीनों निर्ममसह नहीं पाता मेरा बदनएक के गुजरने पर दूसरा बिन बतायेशुरू कर देता अपनी चुभनकैसा है ये परिवर्तनक्यों होता है ये परिवर्तनसमय बदलता रहता हैकाल का पहिया चलता रहता हैजमाने प... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   10:27am 20 Jun 2015 #अकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
शेरा के छोले एक आने में भरकर दोना अब शेरा तो रहा नहीं उसका बेटा 10 रुपये में बेच रहा है सिर्फ आधा दोनाइतने पर भी उसके हैं कठिन गुजारेऔर नेताओं के हो रहे हैं वारे-न्यारेआजादी का तोहफा 50 साल की उपलब्धियाँ 500 गुनी मँहगाई खुशहाली के बदले तबाही ही तबाही लोकतन्त्र का अर्थख... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   3:18am 10 Jun 2013 #अकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
यह व्यंग्य नहीं हक़ीक़त है!दबंग दीदी की ऐंठसरकार से किया किनारा बंसल की पैंठ सोनिया का इशारा मनमोहन का सहारा बन गये मन्त्री हो गये ठाठ रिश्तेदार और सन्तरी करने लगे बन्दरबाँट -- बकरे की माँ कब तक खैर मनाती घूस आखिर कब तक छिप पाती? -- मन्त्री के नाती रँगे हाथ पकड़े गये ... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   5:40am 11 May 2013 #अकविता
Blogger: devduttaprasoon at प्रसून...
========================================रात मैने देखा अजीब सा सपना !डराबना सपना !!तालाब के किनारे नन्हीं नन्हीं जोंकें थीं |धीरे धीरे बड़ी होने लगीं |उनके दो दो हाथ, दो दो पाँव उग आये |वे अपने पैरों पर खड़ी होने लगीं ||कुछ समय बाद-उनके बड़े बड़े पेट निकल आये |सिरों पर उनके ‘टोपियाँ’ लग गयीं |रंग विरंग... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   12:30pm 20 Apr 2013 #अकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
हर रोज सुबह आयेगी शाम ढलेगी  रात हो जायेगी और फिर होगा नया सवेरा  मिट जायेगा धरा से अंधेरा लेकिन... मन के कोटर में न कभी धूप आयेगी और न कभी सवेरा होगा अंधेरा था और अंधेरा ही रहेगा फिर भी..क्यों करते हैं हम ख़त्म न होने वालाये इन्तजार सोचते हैं शायद हो जाये कोई चमत्कार... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   12:17pm 11 Apr 2013 #अकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
उनकी और उनके बच्चों की बातें,चुप होकर सह लेती है।सब के दर्द को,अपने दिल में दबा कर,रख लेती है।वह एक माँ है,अच्छी पत्नी भी हैवह भारत की नारी है।परिवार की हर वस्तु,उसे प्यारी है।सबकी जली-कटी,झेलती है,और बदले में,पतली-पतली,रोटियाँ भी बेलती है।इसने माँ-बहन औरबेटी का दर्... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   7:41am 8 Apr 2013 #अकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
उनकी और उनके बच्चों की बातें,चुप होकर सह लेती है।सब के दर्द को,अपने दिल में दबा कर,रख लेती है।वह एक माँ है,अच्छी पत्नी भी हैवह भारत की नारी है।परिवार की हर वस्तु,उसे प्यारी है।सबकी जली-कटी,झेलती है,और बदले में,पतली-पतली,रोटियाँ भी बेलती है।इसने माँ-बहन औरबेटी का दर्... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   7:41am 8 Apr 2013 #अकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
आजादी को छः दशक बीत गये मगर अब भी गांधी जिन्दा हैंहमारे देश में...! –कोई बनता है गांधीशौक से..और कोई बनता है मजबूरी में...!--कोई पहनता है चप्पल मुलायम चमड़े की ...और कोई पहनता है प्लास्टिक की खाली बोतलों में कत्तरों की पट्टी बनाकर ..! मेरे देश के.यही तो हैं असली गांधी !क्यों... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   5:16am 21 Feb 2013 #अकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
तन हैमोम का पुतलाधूप देखीतो रूप बदलाशीत आयातो अकड़ गयापानी पायातो जकड़ गयाताप में पिघल गयाआग में जल गयायही है अस्तित्वकाया कालेकिन फिर भीरोना है माया का... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   6:27am 31 Dec 2012 #अकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
मानवाधिकारकोई नही सुनता पुकारआयोग हैराजनीति का शिकारकहने पर प्रतिबन्धसुनने पर प्रतिबन्धखाने पर प्रतिबन्धपीने पर प्रतिबन्धजाने पर प्रतिबऩ्धजीने पर प्रतिबऩ्धमँहगाई की माररिश्वत का बाजारनिर्धन की हारदहेज की भरमारनौकरशाही का रौबपुलिस का खौफदलित की पुकारबेरहम ... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   9:34am 12 Dec 2012 #अकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
रोटी है, बेटी है, बँगला है, खेती है,सभी जगह घोटाले हैं, कपड़े उजले हैं,दिल काले हैं,उनके भइया हैं,इनके साले हैं,जाल में फँस रहे, कबूतर भोले-भाले हैं,गुण से विहीन हैंअवगुण की खान हैंजेबों में रहते,इनके भगवान हैंइनकी दुनिया कानया विज्ञान हैदिन में इन्सान हैंरात क... Read more
clicks 46 View   Vote 0 Like   8:10am 25 Sep 2012 #अकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
हमारे पुरखों नेबरगद का एक पेड़ लगाया था,आदर्शों के ऊँचे चबूतरे पर,इसको सजाया था।कुछ ही समय में,यह देने लगा शीतल छाया,परन्तु हमको,यह फूटी आँख भी नही भाया।इसकी शीतल छाया में,हम पूरी तरह डूब गये,और जल्दी ही,इसके सुखों से ऊब गये।हमने काट डाली,इसकी एक बड़ी साख,और अप... Read more
clicks 270 View   Vote 0 Like   12:09pm 20 Aug 2012 #अकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
सावन का महीनाबादलों कीआँख-मिचौलीऔरपानी नदारत है,-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-चारों ओरसूखा और सिर्फ सूखाप्यासे हैं बाग, तड़ाग,व्यर्थ हो गईसब प्रार्थनाऔरइबादत हैं-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-खेतों मेंउड़ रही है धूलचमन मेंमुरझा रहे हैं फूलक्याआने वालीकयामत है?-०-०-०-... Read more
clicks 35 View   Vote 0 Like   11:39am 31 Jul 2012 #अकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
मुद्रा का निरन्तर प्रकाशन,बढ़ती हुई मँहगाई।निर्घनों का स्वेद,धनवानों की कमाई।--वादाखिलाफी है टूटते हुए अनुबन्ध। स्वप्न का हकीकत से,नहीं है सम्बन्घ।--फिर से चलने लगी है,जनता की नब्ज़।अब हो रहा है,शासकों को कब्ज़।--अन्ना हजारे,गांधी का अवतार।हिल उठी है,काले अंग्रेजों ... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   1:24am 16 May 2012 #अकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
पर्वत की महिलाएँ,हँसिया लेकर जंगल जातीं।पेड़ों से सूखी शाखाएँ,काट-काटकर लातीं।।कभी न मेहनत से घबड़ातीं,नित्य-नियम से श्रम करती हैं।अपने साथ समूचे घर का,ये नारियाँ उदर भरती हैं।।दुनियादारी के जंगल में,चुनना होता पथ अपना है।देती हैं सन्देश जगत को,जीवन श्रम के लिए बना ... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   11:37am 8 Apr 2012 #अकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
 जबभावनाओं काज्वार बढ़ जाता हैतबबुद्धि मन्द हो जाती हैलाचारगीऔर बेचारगीका सायामन पर अधिकार कर लेता हैनिश्चय और अनिश्चय मेंझूलने लगता हैमन प्राण और देहआते रहते हैंनकारात्मक भावलेकिन कुछ समय बादज्वार निकल जाता हैसोच बदलने लगती हैतोबुद्धि भी काम करने लगती हैऔरहो ज... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   4:22am 24 Feb 2012 #अकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
ग्राह्य है सुगन्धत्याज्य है दुर्गन्धइसीलिएन्यायपालिका ने लिया है संज्ञानफेसबुक और गूगल कोदेना होगा ध्यानहटाना होगाऐसे लोगों का पिटाराजो प्रवाहित कर रहे हैंमलिनता की धारासभी तरह का मालपरोसता है अन्तरजालसाहित्य में तो लालित्य हैलेकिन अश्लीलता क्या ये साहित्य ह... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   8:28am 17 Jan 2012 #अकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
पिंजड़े का जीवनतोते का मनफाके मस्ती में भीरहता था परिवार के संगहमेशा ही लड़ता थामेहनत की जंगउड़ता था ऊँची-ऊँची उड़ानकभी नही होती थीथकानजाता था रेगिस्तानी रेत मेंआता था धान के खेत मेंचखता थाखट्टे-मीठे आमयही था उसकारोजमर्रा का कामएक दिन वहबहेलिए को भा गयालालचवश्उस... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   10:28am 16 Jan 2012 #अकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
विनीत संग पल्लवी(चित्र में मेरा छोटा पुत्र विनीत और पुत्रवधु पल्लवी)ममता की भेंट लिएतुम्हारे चरणकमलों कीआहट सुनने को आतुरहम तो कब सेपलक-पाँवड़े बिछाए बैठे हैंघर के सूने आँगन मेंतुम्हारे आने सेबहार आयेगीसूर्यरश्मियों सेदुख की बदलीछँट जाएगीबदल जाएगा मौसमआयेगा मध... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   8:03am 8 Jan 2012 #अकविता
Blogger: कंचन सिंह चौहान at हृदय गवाक्ष...
सोचतीहूँकिवोरातें,जो इस तसल्ली मिली बेचैनी से बिता दी जाती थीं,कि इधर हम इस लिये जग रहे हैं क्योंकिउधर कोई जागती आँखें ले कर जगा रहा है हमें....कितनी आसानी से कट जातीं,११ रू के एसएमएस पैक से,सायलेंट मोड मोबाईल के साथ।यावोदिन,जो इस सोच में कटते थे कितुमजानेकहाँहोगेआज....?क... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   2:30am 7 Mar 2011 #अकविता
Blogger: कंचन सिंह चौहान at हृदय गवाक्ष...
लोग कहते हैं किअब मेरे लिखने में नही रही वो बात जो पहले थी।कैसे बताऊँ उन्हे,कि लिखना तो दर्द से होता है।और मेरा दर्द तो बहुत पुराना हो गया है अब,इतना ....कि अब ये दर्द हो गया है साँसों की तरह सहज और अनायास।चाहे जितनी भी असह्य पीड़ा हो,आप कितनी देर तक चिल्ला सकते हैं उस पीड़ा से... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   1:30am 27 Sep 2010 #अकविता
Blogger: कंचन सिंह चौहान at हृदय गवाक्ष...
जी करता है तुम्हारी चैट का प्रिंट आउट निकाल कर सिरहाने रख लूँ, और पुराने खतों की तरह पढ़ूँ रोज सोते समय ... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   1:30am 30 Aug 2010 #अकविता
Blogger: Sanu Shukla at राष्ट्र सर्व...
मै गंगा हूँवही गंगा जिसे देवलोक सेभूलोक पर भागीरथ लाये थे थेकड़ी तपस्या करकेअपने पूर्वजों के पापों का उद्धार  करने हेतु,और मैंने भी सबको मातृत्व प्रदान किया धर्म को आयाम दियाभारत को खुशहाली दीखेतों को हरियाली दी,मै दौड़ी भारत में उसकी नस बनकर पर अफ़सोस ये क़ि आज भागीरथ... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   7:22am 20 Jul 2010 #अकविता
Blogger: Sanu Shukla at राष्ट्र सर्व...
चुनाव जीतने के बाद पहली बार  आये हैं नेता जी अपने क्षेत्र में पुलिस मौजूद है पहरेदारी में और सभी करीबी भक्त व्यस्त है उनकी आरती ,पूजा  करने में पर विडंबना यह है क़ि देखो तो अभी चुनाव से ठीक पहले यही नेता जिस जनता के सामने हाथ जोड़कर गिडगिडा रहे थे अपने पक्ष में वोट देने क... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   6:48am 17 Jul 2010 #अकविता
Blogger: Sanu Shukla at राष्ट्र सर्व...
अरे देखो तोइन पर्वतों के कन्धों पर लदे है येशरारती बच्चों क़ि तरहशरारत करते हुए खेलते उमड़ते घुमड़ते बादल|ठीक वैसे ही जैसे क़ि मेरे  दिमाग पर मेरी याददाश्त पर लदे हों बरस जाने को एक दम आतुरतुम्हारी याद के बादल...!!... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   2:58pm 3 Jul 2010 #अकविता
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