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Tag: संस्मरण

Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
गंगा किनारे फैले बनारस की गलियों में जिसे पक्का महाल कहते हैं, प्रायः घर घर में मन्दिर है। मेरे घर में भी मन्दिर था, मेरे मित्र के घर में भी। मेरे राम काले थे। मेरे मित्र के गोरे। मेरे काले संगमरमर से बने, मित्र के सफेद संगमरमर वाले। बचपन में जब हम दोनों में झगड़ा होता तो ... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   3:22pm 25 Mar 2018 #संस्मरण
Blogger: अरविन्दनाभ शुक्ल at चरैवेति...
घर के सामने एक कटहल का पेड़ है; भरा-भरा, घना-घना, चमकदार पत्तों वाला| पेड़ के डालियों पर कुछ मिट्टी के बर्तन टंगे हुए हैं जिनमें पानी और कुछ दाना मुसलसल पड़ा रहता है| सुबह के समय तोते आते हैं, टें-टें करते हुए दाना चुगते हैं| उनके बाद गौरैय्या, कौए और जंगली फाख्ता आसपास मंडराते ... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   1:57pm 4 Dec 2016 #संस्मरण
Blogger: jyoti dehliwal at आपकी सहेली ज्...
                                 बेटी ने नया-नया दुपहिया वाहन चलाना सीखा था। मैं जब भी उसके साथ कहीं जाती, तो मन में हमेशा एक संशय बना रहता कि वह गाड़ी ठीक से चला पाएगी या नहीं, कहीं किसी से टकरा तो नहीं जाएगी? हालांकि उसकी ड्रायविंग अच्छी थी, फिर भी मैं गाड़ी पर प... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   4:45am 28 Aug 2016 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
      मुझे पालतू जानवरों का बचपन से ही शौक रहा है। 65 साल की जिन्दगी में लगभग दो दर्जन से अधिक पिल्ले पाले होंगे। दो बार तोते पाले, 3 बार खरगोश और आधादर्जन बिल्लियाँ पाली ही होंगी।     मगर इनमें मुझे सफेद रंग की मादा कुतिया जूली, उसका बच्चा पिल्लू, मिंकू, टॉम, फिरंग... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   5:21am 4 May 2016 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
पहाड़ में मामा-मामी उपहार में मिले   यह बात 1966की है। उन दिनों मैं कक्षा 11में पढ़ रहा था। परीक्षा हो गईं थी और पूरे जून महीने की छुट्टी पड़ गई थी। इसलिए सोचा कि कहीं घूम आया जाए। तभी संयोगवश् मेरे मामा जी हमारे घर आ गये। वो उन दिनों जिला पिथौरागढ़ में ठेकेदारी करते थे... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   2:33am 27 Nov 2015 #संस्मरण
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
आज भी ट्रेन छुक-छुक, छुक-छुक चलती है ।  नहीं बन पाई धड़-धड़, धड़-धड़ चलने वाली बुलेट। एक सपना देखा है हमारे प्रधान मंत्री जी ने, एक सच से सामना होता है रोज। पूरे 7 घण्टे लेट कोटा-पटना मेरे लिए सही समय बन कर मिली जौनपुर के भंडारी स्टेशन पर। अपनी किसान भी लेट है, वह किसी दुसरे के लि... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   3:23pm 12 Oct 2015 #संस्मरण
Blogger: jyoti dehliwal at आपकी सहेली ज्...
                            आठ - नऊ साल पुरानी बात है। हम ( मैं,मेरे पतिदेव एवं दोनों बच्चें ) मुंबई घूमने गए थे। वहां पर हम एक रिश्तेदार के यहां रुके। हमें लोकल ट्रेन से बोरीवली जाना था। हमारा लोकल ट्रेन में सफर करने का यह पहला मौका था। अतः मन में थोड़ी घबराहट, थ... Read more
clicks 132 View   Vote 0 Like   1:30am 23 Aug 2015 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at सृजन मंच ऑनला...
मित्रों आज मुझे अमन 'चाँदपुरी'का भेजा संस्मरण प्राप्त हुआ।जिनका संक्षिप्त विवरण निम्नवत् है-नाम- अमन सिहं जन्मतिथि- 25 नवम्बर 1997 ई. पता- ग्राम व पोस्ट- चाँदपुर तहसील- टांडा जिला- अम्बेडकर नगर (उ.प्र.)-224230संपर्क : 09721869421ई-मेल : kaviamanchandpuri@gmail.com     यह संस्मरण ह... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   11:30am 15 Jun 2015 #संस्मरण
Blogger: अर्चना चावजी at मेरे मन की...
वो पडोस में बर्तन,झाडू-पोछा करके रोजी कमाती है , छोटी उम्र की ही है, उसके दो बच्चे हैं , पिछले माह की तनख्वाह मिली तो पति से छुपाकर रखी क्यों कि पति दारू पीता था  बस कुछ काम नहीं करता ... काम पर आई तो पति ने पैसे खोज लिये और इतनी दारू पी कि सोया तो उठा ही नहीं ... :-( .....अब भी वो काम पर... Read more
clicks 199 View   Vote 0 Like   9:28am 3 May 2015 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
    आज मुझे विख्यात चित्रकार श्री हरिपाल त्यागी का एक संस्मरण याद आ रहा है! यह सन् 1989 की घटना है मगर ऐसा लगता है जैसे कल की ही बात हो।उन दिनों त्यागी जी दाढ़ी नहीं रखते थे। बाबा नागार्जुन उन्हीं के मुहल्ले सादतपुर में रहते थे और खटीमा प्रवास पर आए हुए थे। वे राजक... Read more
clicks 29 View   Vote 0 Like   4:37am 16 Mar 2015 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at सृजन मंच ऑनला...
पहाड़ में मामा-मामी उपहार में मिले!यह बात 1966की है। उन दिनों मैं कक्षा 11में पढ़ रहा था। परीक्षा हो गईं थी और पूरे जून महीने की छुट्टी पड़ गई थी। इसलिए सोचा कि कहीं घूम आया जाए। तभी संयोगवश् मेरे मामा जी हमारे घर आ गये। वो उन दिनों जिला पिथौरागढ़ में ठेकेदारी करते थे। उन द... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   2:37pm 28 Nov 2014 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
उन दिनों मेरे दोनों पुत्र बहुत छोटे थे। तब अक्सर पिकनिक का कार्यक्रम बन जाता था। कभी हम लोग पहाड़ पर श्यामलाताल चले जाते थे, कभी माता पूर्णागिरि देवी के मन्दिर में माथा टेकने चले जाते थे और कभी नेपाल के शहर महेन्द्रनगर में घूम आते थे। यहाँ से 20-25 किमी की दूरी पर गुरू नानक ... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   10:17am 22 Nov 2014 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
मेरी प्यारी जूलीबात 1975 की है! मैं नया-नया बनबसा में आकर बसा था। किराये का मकान था और कुत्ता पालने का शौक भी चर्राया हुआ था। इसलिए मैं अपने एक गूजर मित्र के यहाँ गया और उसके यहाँ से भोटिया नस्ल का प्यारा सा पिल्ला ले आया।बहुत प्यार से इसे एक दिन रखा मगर मकान मलिक से मेरा यह ... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   6:40am 1 Nov 2014 #संस्मरण
Blogger: देवेन्द्र पाण्डेय at बेचैन आत्मा...
जब यात्रा लम्बी होती है तो कभी-कभी पैसिंजर ट्रेन के यात्रियों को भी करना पड़ता है ए.सी. में सफ़र। यात्री पुराना किताबी कीड़ा हुआ, नयाँ-नयाँ ब्लॉगर हुआ, हजारों मित्र सूची वाला फेसबुकिया हुआ और लैपटॉप नेट का जुगाड़ साथ-साथ लिये घूम रहा है तब तो  फिर कोई चिंता नहीं। सफ़र त... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   5:36am 20 Jul 2014 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
मातृ दिवस के अवसर पर...    बात पचास साल पुरानी है हमारे पड़ोस में एक वृद्ध महिला रहती थी। जिसको पूरा मुहल्ला अम्मा के नाम से पुकारता था।     उन दिनों हमने एक गइया पाली हुई थी। घर में हम लोग सुबह गुड़ के साथ मट्ठा पी लिया करते थे। और माता जी उसके लिए घास लेने चली ज... Read more
clicks 30 View   Vote 0 Like   10:19am 11 May 2014 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at शब्दों का दंग...
      बात 1989 की है। उन दिनों बाबा नागार्जुन खटीमा प्रवास पर थे। उस समय खटीमा में डिग्री कॉलेज में श्री वाचस्पति जी हिन्दी के विभागाध्यक्ष थे। बाबा उन्हीं के यहाँ ठहरे हुए थे। वाचस्पति जी से मेरी मित्रता होने के कारण बाबा का भरपूर सानिध्य मुझे मिला था। अपने एक मही... Read more
clicks 408 View   Vote 0 Like   3:10pm 15 Feb 2014 #संस्मरण
Blogger: Krishna Kumar Yadav at शब्द-सृजन की ...
नस्लवाद के खिलाफ जंग के मसीहा और दक्षिण अफ्रीका के महान अश्वेत नेता नेल्सन मंडेला नहीं रहे। मंडेला  ऐसे महान व्यक्तित्व थे, जिनसे आज की  पीढ़ी भी उतनी ही शिद्दत से  प्रेरणा पाती थी। 27साल से अधिक अवधि तक जेल में रहे दक्षिण अफ्रीका के इस नेता ने दुनिया को नैतिक नेतृ... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   4:29pm 6 Dec 2013 #संस्मरण
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at शब्दों का दंग...
हिलक्रेस्ट ओर्चार्ड, जॉर्जिया, USAपुरुषोत्तम पाण्डेय का एक संस्मरण      मेरा बचपन उत्तरांचल के आँचल में ही बीता. मैंने बसंत ऋतु के आगमन पर आड़ू और सेव को बौराते हुए देखा था. शिशिर/हेमंत की ठण्ड की मार के बाद पेड़ों में एक भी पत्ता नहीं रह जाता है, और थोड़ी सी गर्माहट मिल... Read more
clicks 527 View   Vote 0 Like   3:31am 1 Aug 2013 #संस्मरण
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
मुझे अपने साथ घटी अप्रिय घटनाओं को भूल जाने की आदत है. इसका लाभ ये होता है कि घाव हरे नहीं रहते है. यह स्वभाव की बात है, लेकिन मेरे साथ घटी तीन सच्ची घटनायें ऐसी हैं जो याद करने पर आज भी सिहरन पैदा करती हैं. इनको मैंने मौत से साक्षात्कार के रूप में अनुभव किया है.पहली घटना:तब ... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   2:00am 13 Jun 2013 #संस्मरण
Blogger: अर्चना चावजी at मेरे मन की...
गर्मी की छुट्टियाँ आए और ननिहाल न जाएँ सम्भव नहीं होता ...हाँ बचपन खूब सजा होता है नानी के घर की यादों से ,फिर हम बड़े होते जाते हैं,स्कूल-कॉलेज और अपने कार्यों में व्यस्त होने लगते हैं, और ननिहाल जाना सिर्फ़ उत्सव, त्योहारों शादी-ब्याह तक सिमट जाता है ,और जब घर की लड़की हो तो व... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   8:09am 9 Jun 2013 #संस्मरण
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
२७ मई १९६४ के दिन मैं ट्रेन से बड़े सवेरे जयपुर पँहुच गया था. मैं उन दिनों ‘लाखेरी सीमेंट कामगार बहुधंधी सहकारी समिति' का अवैतनिक महामंत्री भी था. सोसाइटीज के रजिस्ट्रार के कार्यालय में अपने विधान में संशोधन कराने के लिए कागजात पेश करने थे. मैं रात की ट्रेन से सवाईमाधो... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   12:53am 27 May 2013 #संस्मरण
Blogger: Purushottam Pandey at जाले...
अब शहरों में सीमेंट के पक्के मकानों में चिड़ियों की रिहाइश नहीं रही क्योंकि घरों में उनके लिए कोई ‘कोटर’ नहीं छोड़े जाते हैं. हमारे शहर के कुछ पर्यावरण प्रेमियों ने पिछले ‘गौरैय्या दिवस’ पर कुछ खास किस्म के लटकने वाले लकड़ी के डिब्बे घोसलों के लिए लोगों में बांटे थे, ... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   1:06am 25 May 2013 #संस्मरण
Blogger: युग मानस YUGMANAS at युग मानस YUG MA...
स्मरण:साज़ गया आवाज शेष है...संजीव* सनातन सलिल नर्मदा तट पर पवित्र अग्नि के हवाले की गयी क्षीण काया चमकती आँखों और मीठी वाणी को हमेशा-हमेशा के लिए हम सबसे दूर ले गयी किन्तु उसका कलाम उसकी किताबों और हमारे ज़हनों में चिरकाल तक उसे जिंदा रखेगा. साज़ जबलपुरी एक ऐसी शख्सियत है ... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   8:14am 23 May 2013 #संस्मरण
Blogger: devduttaprasoon at प्रसून...
=============(१)        मेरे प्रेरणा-स्रोत==================================== यह चित्र मात्र एक चित्र न हो कर मरे मानस-पटल पर छपी एक प्रतिमा है जो मरे ध्यान का केंद्र है |  ये विभूति  मेरी प्रेरणा का स्रोत हैं  | मेरे जीवन की डोर इनसे जुड़ी है तो मेरी हर घटना के संचालक हैं ये | मेरे हर दुःख-सुख के स्वामी हैं ... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   4:11pm 18 May 2013 #संस्मरण
Blogger: Shikha at स्पंदन SPANDAN...
 आह हा आज तो त्रिशूल दिख रही है. नंदा देवी और मैकतोली आदि की चोटियाँ तो अक्सर दिख जाया करती थीं हमारे घर की खिडकी से। परन्तु त्रिशूल की वो तीन नुकीली चोटियाँ तभी साफ़ दिखतीं थीं जब पड़ती थी उनपर तेज दिवाकर की किरणें.एकदम किसी तराशे हुए हीरे की तरह लगता था हिमालय। सात रंग... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   10:54am 9 May 2013 #संस्मरण

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