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Tag: बालकविता

Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
ठण्डी-ठण्डी हवा खिलाये।इसी लिए कूलर कहलाये।।जब जाड़ा कम हो जाता है।होली का मौसम आता है।।फिर चलतीं हैं गर्म हवाएँ।यही हवाएँ लू कहलायें।।तब यह बक्सा बड़े काम का।सुख देता है परम धाम का।।कूलर गर्मी हर लेता है।कमरा ठण्डा कर देता है।।चाहे घर हो या हो दफ्तर।कूलर सजा हुआ ख... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   1:23am 6 Jun 2017 #बालकविता
Blogger: Archana saxena at राहें ...
आओ बच्चों तुम्हे समझाऊँएक बात पते की मैं बतलाऊँजीवन में कुछ हांसिल कर सकोउस रास्ते पर चलना सिखलाऊँघर से ही तुम यह शुरुवात करोमाता–पिता,बड़ों का सम्मान करोगुरुओं को भी हमेशा करो नमनऔर सत्य के मार्ग पर बढ़े चलोनित्य सुबह तुम जल्दी से उठकेनहा–धोकर प्रभु से विनती करकेनि... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   12:08pm 31 May 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
जब गर्मी का मौसम आता,सूरज तन-मन को झुलसाता। तन से टप-टप बहे पसीना, जीना दूभर होता जाता।  ऐसे मौसम में पेड़ों पर, फल छा जाते हैं रंग-रंगीले। उमस मिटाते हैं तन-मन की, खाने में हैं बहुत रसीले।  ककड़ी-खीरा औ'खरबूजा, प्यास बुझाता है तरबूजा।जामुन पाचन करने वाली,... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   1:15am 25 May 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
मित्रों...!गर्मी अपने पूरे यौवन पर है।ऐसे में मेरी यह बालरचना आपको जरूर सुकून देगी!पिकनिक करने का मन आया!मोटर में सबको बैठाया!!पहुँच गये जब नदी किनारे!खरबूजे के खेत निहारे!!ककड़ी, खीरा और तरबूजे!कच्चे-पक्के थे खरबूजे!!प्राची, किट्टू और प्रांजल!करते थे जंगल में मंगल!!... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   1:20am 11 May 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at नन्हे सुमन...
झूम-झूमकर मच्छर आते।कानों में गुञ्जार सुनाते।।नाम ईश का जपते-जपते।सुबह-शाम को खूब निकलते।। बैठा एक हमारे सिर पर।खून चूसता है जी भर कर।।नहीं यह बिल्कुल भी डरता।लाल रक्त से टंकी भरता।। कैसे मीठी निंदिया आये?मक्खी-मच्छर नहीं सतायें।मच्छरदानी को अपनाओ।चैन-अमन से स... Read more
clicks 413 View   Vote 0 Like   12:21am 1 Mar 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at नन्हे सुमन...
कितना सुन्दर और सजीला।खट्टा-मीठा और रसीला।।हरे-सफेद, बैंगनी-काले।छोटे-लम्बे और निराले।।शीतलता को देने वाले।हैं शहतूत बहुत गुण वाले।।पारा जब दिन का बढ़ जाता।तब शहतूत बहुत मन भाता। इसका वृक्ष बहुत उपयोगी।ठण्डी छाया बहुत निरोगी।।टहनी-डण्ठल सब हैं बढ़िया।इनसे बनत... Read more
clicks 346 View   Vote 0 Like   1:30am 21 Feb 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at नन्हे सुमन...
सीधा-सादा. भोला-भाला।बच्चों का संसार निराला।।बचपन सबसे होता अच्छा।बच्चों का मन होता सच्चा।पल में रूठें, पल में मानें।बैर-भाव को ये क्या जानें।।प्यारे-प्यारे सहज-सलोने।बच्चे तो हैं स्वयं खिलौने।।बच्चों से होती है माता।ममता से है माँ का नाता।।बच्चों से है दुनियादा... Read more
clicks 317 View   Vote 0 Like   12:09am 20 Feb 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at नन्हे सुमन...
तीखी-तीखी और चर्परी।हरी मिर्च थाली में पसरी।।तोते इसे प्यार से खाते।मिर्च देखकर खुश हो जाते।।सब्ज़ी का यह स्वाद बढ़ाती।किन्तु पेट में जलन मचाती।।जो ज्यादा मिर्ची खाते हैं।सुबह-सुबह वो पछताते हैं।।दूध-दही बल देने वाले।रोग लगाते, मिर्च-मसाले।।शाक-दाल को घर में लान... Read more
clicks 317 View   Vote 0 Like   2:01pm 15 Feb 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at नन्हे सुमन...
चित्रांकन - कु. प्राचीमम्मी देखो मेरी डॉल।खेल रही है यह तो बॉल।।पढ़ना-लिखना इसे न आता।खेल-खेलना बहुत सुहाता।।कॉपी-पुस्तक इसे दिलाना।विद्यालय में नाम लिखाना।।मैं गुड़िया को रोज सवेरे।लाड़ लड़ाऊँगी बहुतेरे।।विद्यालय में ले जाऊँगी।क.ख.ग.घ. सिखलाऊँगी।।... Read more
clicks 409 View   Vote 0 Like   1:46pm 10 Feb 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at नन्हे सुमन...
काले रंग का चतुर-चपल,पंछी है सबसे न्यारा।डाली पर बैठा कौओं का, जोड़ा कितना प्यारा।नजर घुमाकर देख रहे ये,कहाँ मिलेगा खाना।जिसको खाकर कर्कश स्वर में,छेड़ें राग पुराना।।काँव-काँव का इनका गाना,सबको नहीं सुहाता।लेकिन बच्चों को कौओं का,सुर है बहुत लुभाता।।कोयलिया की ... Read more
clicks 316 View   Vote 0 Like   2:27pm 6 Feb 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at नन्हे सुमन...
रंग-बिरंगी पेंसिलें तो, हमको खूब लुभाती हैं। ये ही हमसे ए.बी.सी.डी., क.ख.ग. लिखवाती हैं।। रेखा-चित्र बनाना, इनके बिना असम्भव होता है।कला बनाना भी तो, केवल इनसे सम्भव होता है।। गल्ती हो जाये तो,लेकर रबड़ तुरन्त मिटा डालो।गुणा-भाग करना चाहो तो,बस्ते में से इसे... Read more
clicks 348 View   Vote 0 Like   1:39am 24 Jan 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at नन्हे सुमन...
मई महीना आता है और, जब गर्मी बढ़ जाती है।नानी जी के घर की मुझको, बेहद याद सताती है।।तब मैं मम्मी से कहती हूँ, नानी के घर जाना है।नानी के प्यारे हाथों से, आइसक्रीम भी  खाना है।।कथा-कहानी मम्मी तुम तो, मुझको नही सुनाती हो।नानी जैसे मीठे स्वर में, गीत कभी नही ... Read more
clicks 381 View   Vote 0 Like   2:39am 22 Jan 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at नन्हे सुमन...
यह कुत्ता है बड़ा शिकारी।बिल्ली का दुश्मन है भारी।।बन्दर अगर इसे दिख जाता।भौंक-भौंक कर उसे भगाता।।उछल-उछल कर दौड़ लगाता।बॉल पकड़ कर जल्दी लाता।।यह सीधा-सच्चा लगता है।बच्चों को अच्छा लगता है।।धवल दूध सा तन है सारा।इसका नाम फिरंगी प्यारा।।आँखें इसकी चमकीली हैं।भूरी स... Read more
clicks 332 View   Vote 0 Like   2:09am 18 Jan 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at नन्हे सुमन...
 मैं अपनी मम्मी-पापा के,नयनों का हूँ नन्हा-तारा। मुझको लाकर देते हैं वो,रंग-बिरंगा सा गुब्बारा।।मुझे कार में बैठाकर,वो रोज घुमाने जाते हैं।पापा जी मेरी खातिर,कुछ नये खिलौने लाते हैं।। मैं जब चलता ठुमक-ठुमक,वो फूले नही समाते हैं।जग के स्वप्न सलोने,उनकी आँखों में छ... Read more
clicks 415 View   Vote 0 Like   3:05am 17 Jan 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at नन्हे सुमन...
बच्चों को लगते जो प्यारे।वो कहलाते हैं गुब्बारे।।गलियों, बाजारों, ठेलों में।गुब्बारे बिकते मेलों में।।काले, लाल, बैंगनी, पीले।कुछ हैं हरे, बसन्ती, नीले।।पापा थैली भर कर लाते।जन्म-दिवस पर इन्हें सजाते।।गलियों, बाजारों, ठेलों में।गुब्बारे बिकते मेलों में।।फूँ... Read more
clicks 313 View   Vote 0 Like   2:22am 13 Jan 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at नन्हे सुमन...
गैस सिलेण्डर कितना प्यारा।मम्मी की आँखों का तारा।।रेगूलेटर अच्छा लाना।सही ढंग से इसे लगाना।।  गैस सिलेण्डर है वरदान।यह रसोई-घर की है शान।। दूघ पकाओ, चाय बनाओ। मनचाहे पकवान बनाओ।। बिजली अगर नही है घर में।यह प्रकाश देता पल भर में।। बाथरूम में इसे लगाओ। गर्म-... Read more
clicks 300 View   Vote 0 Like   12:00am 12 Jan 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at नन्हे सुमन...
मेरा बस्ता कितना भारी।बोझ उठाना है लाचारी।।मेरा तो नन्हा सा मन है।छोटी बुद्धि दुर्बल तन है।।पढ़नी पड़ती सारी पुस्तक।थक जाता है मेरा मस्तक।।रोज-रोज विद्यालय जाना।बड़ा कठिन है भार उठाना।।कम्प्यूटर का युग अब आया।इसमें सारा ज्ञान समाया।।मोटी पोथी सभी हटा दो।बस्ते ... Read more
clicks 341 View   Vote 0 Like   1:59am 11 Jan 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at नन्हे सुमन...
मन को बहुत लुभाने वाली,तितली रानी कितनी सुन्दर।भरा हुआ इसके पंखों में,रंगों का है एक समन्दर।।उपवन में मंडराती रहती,फूलों का रस पी जाती है।अपना मोहक रूप दिखाने,यह मेरे घर भी आती है।।भोली-भाली और सलोनी,यह जब लगती है सुस्ताने।इसे देख कर एक छिपकली,आ जाती है इसको खाने।।आहट... Read more
clicks 307 View   Vote 0 Like   3:05am 9 Jan 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at नन्हे सुमन...
“नन्हे सुमन” ब्लॉग!बच्चों अर्थात् नन्हीं कलियों और सुमनों को समर्पित हैः चिड़िया रानी फुदक-फुदक कर,मीठा राग सुनाती हो।आनन-फानन में उड़ करके,आसमान तक जाती हो।।मेरे अगर पंख होते तो,मैं भी नभ तक हो आता।पेड़ो के ऊपर जा करके,ताजे-मीठे फल खाता।।जब मन करता मैं उड़ कर क... Read more
clicks 286 View   Vote 0 Like   2:12am 8 Jan 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at नन्हे सुमन...
मुश्किल हैं विज्ञान, गणित,हिन्दी ने बहुत सताया है।अंग्रेजी की देख जटिलता,मेरा मन घबराया है।।  भूगोल और इतिहास मुझे,बिल्कुल भी नही सुहाते हैं।श्लोकों के कठिन अर्थ,मुझको करने नही आते हैं।। देखी नही किताब उठाकर,खेल-कूद में समय गँवाया,अब सिर पर आ गई परीक्षा,माथा मेर... Read more
clicks 279 View   Vote 0 Like   1:29am 6 Jan 2017 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
कहाँ चले ओ बन्दर मामा,मामी जी को साथ लिए।इतने सुन्दर वस्त्र आपको,किसने हैं उपहार किये।।हमको ये आभास हो रहा,शादी आज बनाओगे।मामी जी के साथ, कहींउपवन में मौज मनाओगे।।दो बच्चे होते हैं अच्छे,रीत यही अपनाना तुम।महँगाई की मार बहुत है,मत परिवार बढ़ाना तुम।चना-चबेना खाकर,&nb... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   2:08am 27 Jun 2016 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
रंग-रूप से लगता काला। दिखता बिल्कुल भोला-भाला।। जब खतरे की आहट पाता। काँव-काँव करके चिल्लाता।। उड़ता पंख पसार गगन में। पहुँचा बादल के आँगन में।। शीतल छाया मन को भायी। नाप रहा नभ की ऊँचाई।।  चतुर बहुत है काला कागा।किन्तु नही बन पाया राजा।। पितृ-जनों का इससे नाता।यह ... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   2:10am 7 Jun 2016 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
कितने सुन्दर और सजीले।खट्टे-मीठे और रसीले।।हरे-सफेद, बैंगनी-काले।छोटे-लम्बे और निराले।।शीतलता को देने वाले।हैं शहतूत बहुत गुण वाले।।पारा जब दिन का बढ़ जाता।तब शहतूत बहुत मन भाता।इसका वृक्ष बहुत उपयोगी।ठण्डी छाया बहुत निरोगी।।टहनी-डण्ठल सब हैं बढ़िया।इनसे बनती ... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   10:47am 15 Apr 2016 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
 मुश्किल हैं विज्ञान, गणित, हिन्दी ने बहुत सताया है। अंग्रेजी की देख जटिलता, मेरा मन घबराया है।।  भूगोल और इतिहास मुझे, बिल्कुल भी नही सुहाते हैं। श्लोकों के कठिन अर्थ, मुझको करने नही आते हैं।। देखी नही किताब उठाकर, खेल-कूद में समय गँवाया, अब सिर पर आ ग... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   10:43am 18 Feb 2016 #बालकविता
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
 सड़क  किनारे जो भी पाया,पेट उसी से यह भरती है।मोहनभोग समझकर,भूखी गइया कचरा चरती है।।  कैसे खाऊँ मैं कचरे को,बछड़ा मइया से कहता है।दूध सभी दुह लेता मालिक,उदर मेरा भूखा रहता है।। भोजन की आशा में बछड़ा,इधर-उधर को ताक रहा है।कोई चारा लेकर आये,दरवाजे को झाँक रहा है... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   6:27am 20 Nov 2015 #बालकविता

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