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Tag: जीवन

Blogger: मधुलिका पटेल at मेरी स्याही क...
एक उम्र जो गुम हो गई आज बहुत ढूंढा मैंनेअपनी उम्र को पता नहीं कहाँ चली गई नहीं मिलीरेत की तरह मुट्ठी से फिसल गईया रेशा रेशा हो कर हवा में उड़ गईबारिश की बूँद की तरहमिट्टी में गुम हो गईसूरज की किरणों के साथपहाड़ों के पीछे छिप गईवो मुझे जैसे छू करकहीं ठहरी ही नहींग... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   4:57pm 5 Jun 2018 #जीवन
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
   मैंने अपनी साइकिल खड़ी की, और साहस तथा सांत्वना के लिए केम्ब्रिज के नक़्शे को सहलाया। क्योंकि दिशानिर्देश पता लगाना मेरी कमजोरी था, इसलिए मैं जानती थी कि कैम्ब्रिज की उन ऐतिहासिक इमारतों की भूल-भुलैया में मैं सरलता से खो जाऊँगी।   मेरे लिए जीवन सुखद होना चाहिए थ... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   3:15pm 10 Mar 2018 #जीवन
Blogger:  राजीव कुमार झा at यूं ही कभी...
दूर गगन का कोई अंत नहीं है मन प्रफुल्लित न हो तो बसंत नहीं है जीवन के सफ़र में कांटे भी मिलेंगेकुछ जख्मों से जीवन का अंत नहीं है मन के भावों को गर समझ पाए कोई गम एक भी हो तो खुशियाँ अनंत नहीं है टूटते हैं मूल्य स्वार्थ भरी दुनियां में कैसे कहें अब कोई संत नहीं है&n... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   4:47am 1 Mar 2018 #जीवन
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
   हमारे घर की खिड़कियों के पल्ले ठीक करने का समय हो गया था। इसलिए मैंने उन पल्लों को खुरचा, रेगमाल से रगड़ा, और पट्टी मिश्रण लगा कर गढ्ढों और टूटे हुए किनारों को समतल तथा सपाट किया, और फिर उन्हें रंगने के लिए तैयार किया, उन पर अच्छा महंगा रंग भी लगाया। मेरी काफी मेहनत के ब... Read more
clicks 231 View   Vote 0 Like   3:15pm 31 Oct 2017 #जीवन
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
   हमारे जीवनों में शायद ही कभी कोई समस्याओं से रहित समय होता होगा, परन्तु कभी-कभी समस्याओं का अविरल प्रहार भयावह तथा असहनीय हो जाता है।   रोज़ ने अपनी दो छोटी बेटियों को छोड़ अपने शेष समस्त परिवार को, रवांडा में हुए 1994 के जाति-गत जनसंहार में वध होते हुए देखा। अब वह अने... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   3:15pm 23 Oct 2017 #जीवन
Blogger: Kopal at नन्ही कोपल...
                                              आप जब स्वयं पेड़ लगाते है तभी पेड़ो का महत्व समझ पाते है                              नहीं तो इन्ही हाथों से ही कुदाल चलाकर पेड़ काट लेते हैहमारे बगीचे में मम्मी पापा पेड़ लगाते हुए        पेड़ -पौध... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   10:46am 5 Oct 2017 #जीवन
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
एक कलश मस्ती का जैसे बरस रहा सावन मधु बन कर या मदिर चाँदनी मृगांक की, एक कलश मस्ती का जैसे भर सुवास किसी मृदु छंद की ! जीवन बँटता ही जाता है अमृत का एक स्रोत बह रहा, लहराता सागर ज्यों नाचे अंतर में नव राग उमगता ! टूट गयी जब नींद हृदय की गाठें खुल-खुल कर बिखरी हैं, एक अजा... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   9:35am 18 Sep 2017 #जीवन
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
    मेरी युवावस्था में, 1950 के दशक में, मैं अकसर शनिवार की दोपहर को स्थानीय सिनेमा हॉल में फिल्म देखने जाया करता था। वहाँ कार्टून और मुख्य फिल्म के अतिरिक्त एक रोमाँचक सीरियल भी दिखाया जाता था। इस रोमाँचक सीरियल के प्रदर्शन का अन्त सदा ही एक ऐसे बिन्दु पर आकर होता था जि... Read more
clicks 139 View   Vote 0 Like   3:15pm 6 Sep 2017 #जीवन
Blogger: सुनील दीपक at जो न कह सके...
हिन्दी फ़िल्में देखिये तो लगता है कि छोटे शहरों में रहने वाली लड़कियों के जीवन बदल गये हैं. "बरेली की बरफ़ी", "शुद्ध देसी रोमान्स", और "तनु वेड्स मनु"जैसी फ़िल्मों में, छोटे शहरों की लड़कियों को न सड़कों पर डर लगता हैं, न वह लड़कों से वे स्वयं को किसी दृष्टि से पीछे समझती हैं. जान... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   3:18pm 23 Aug 2017 #जीवन
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
गुरू पूर्णिमा के अवसर पर युगों-युगों से राह दिखाते उर-अंतर का तमस मिटाते, ज्योति शिखा सम सदा प्रज्ज्वलित सीमाओं में नहीं समाते ! प्रेम, ज्ञान, सुख पुंज शांति के सुमन खिलाते परा भक्ति के बिना भेद दिल से अपनाया बंधन तोड़कर आसक्ति के ! विश्व बना परिवार तुम्हारा सदा ... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   5:30am 9 Jul 2017 #जीवन
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
सुकून अगर मिल सकता बाज़ार में तो कितना अच्छा होता ... दो किलो ले आता तुम्हारे लिए भी ... काश की पेड़ों पे लगा होता सुकून ... पत्थर मारते भर लेते जेब ... क्या है किसी के पास या सबको है तलाश इसकी ...नहीं चाहता प्यार करना के जीना चाहता हूं कुछ पल सुकून के अपने आप से किये वादों से परे उड़ना ... Read more
clicks 231 View   Vote 0 Like   3:25am 27 Jun 2017 #जीवन
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
लौट चलें क्यों ना अपने घर गर तलाश सुकून की दिल में भटक-भटक यदि ऊब गया उर, राह तके कोई बैठा है लौट चलें क्यों ना अपने घर ! ठोकर ही खायी हो जिसने पलकों पर यह उसे बिठाये, सदा मुखौटा ही ओढ़ा हो सहज सादगी से देगा भर ! स्वर्ग-नर्क, सुख-दुःख के सपने नहीं दिखाता कभी किसी को, सौगात... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   5:42am 12 Jun 2017 #जीवन
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
   उस पहेली ने मुझे चकरा दिया; किसी ने पूछा, ऐसा क्या है जो परमेश्वर से महान और शैतान से भी अधिक दुष्ट है? वह गरीबों के पास होता है, अमीरों को उसकी आवश्यकता है, और यदि आप उसका सेवन करोगे तो मर जाओगे? क्योंकि मेरा मस्तिष्क प्रगट से भटक गया था, इसलिए मैं उत्तर देने से चूक गया... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   3:15pm 28 May 2017 #जीवन
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
   प्रत्येक वर्ष स्कूलों एवं कॉलेजों में दीक्षान्त समारोह आयोजित होते हैं, उन छात्रों के उपलक्ष में जिन्होंने अपना पाठ्यक्रम पूरा कर के उससे संबंधित उपाधियों को प्राप्त करने की योग्यता प्राप्त की है। उस दीक्षान्त समारोह के उपरान्त वे छात्र संसार में जाकर चुनौति... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   3:15pm 22 May 2017 #जीवन
Blogger: vijay kumar sappatti at कविताओं के मन...
हमें लिखना होंगा जीवन की असफलताओं के बारे मेंताकि फिर उड़ सके हम इतिहास के नभ मेंहमें फूंकना होंगा टूटे हुए सपनो में नयी उर्जा ताकि मृत जीवन की अभिव्यक्ति को दे सकेकुछ और नयी साँसे !© विजय... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   6:08am 20 May 2017 #जीवन
Blogger: अनामिका at कविता...
याद आता है ख़ूब वो गांव का मकानवो खुली सी ज़मीन वो खुला आसमानवो बड़ा सा आंगन और ऊंचा रोशनदानवो ईंटों का छत और पतंगों की उड़ानवो बचपन की शरारत नानी बाबा का दुलारउस आंगन में मनता था छोटे बड़े त्योहारबच्चों की किलकारियां और खुशियां हजारकई रिश्तों का घर था वो था रिश्तों में प्य... Read more
clicks 201 View   Vote 0 Like   5:22pm 2 May 2017 #जीवन
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
अनजाने गह्वर भीतर हैं पल-पल बदल रहा है जीवन क्षण-क्षण सरक रही हैं श्वासें, सृष्टि चक्र अविरत चलता है किन्तु न हम ये राज भुला दें ! अनजाने गह्वर भीतर हैं नहीं उजास हुआ है जिनमें, कौन कहाँ से कब प्रकटेगा भनक नहीं जिनकी ख्वाबों में ! फसल काटनी स्वयं को ही है जितने बीज गि... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   5:04am 19 Apr 2017 #जीवन
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
जीवन स्वप्नों सा बहता है  आज नया  दिन  अग्नि समेटे निज दामन में  उगा गगन में अरुणिम सूरज  भर उर में सुर की कोमलता  नये राग छेड़े कोकिल ने  भीगी सी कुछ शीतलता भर  नई सुवास हवा ले आयी मंद स्वरों में गाती वसुधा   पल भर में हर दिशा गुंजाई  उड़ी अनिल संग शुष्क पत्तियां  कहीं ... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   5:50am 11 Mar 2017 #जीवन
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
एक दिन एक दिन आएगा   जब सही अर्थों में समान होंगे हम  परमात्मा की ज्योति से दीप्त  मनु और शतरूपा की भांति  एक समान आवश्यक  उसे जन्माने में  पंछी के दो परों की भांति  जीवन के हर द्वंद्व की भांति  अपरिहार्य एक से  नहीं होगी कोई प्रतिद्वंद्वता  न कोई स्पर्धा  न कोई छोट... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   10:43am 9 Mar 2017 #जीवन
Blogger: vijay kumar sappatti at बस यूँ ही..........WR...
विजय की सेल्फी विजय एक बन्दर है वो तो एक thunder है सब कहते है कि wonder है दिखने में वो सुन्दर है लेकिन वो एक बन्दर है .कविता / फोटो / बन्दर – विजय Jokes apart , भुवनेश्वर के एक पर्वत पर मैं फोटोशूट कर रहा था तब ये महाशय मुझे दिखे , बहुत परेशान थे , मैंने इन्हें बुलाया और पानी की बोतल दी . खाने क... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   5:01am 7 Mar 2017 #जीवन
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
   मेरा एक मित्र मोन्टाना प्रांत के मैदानों में स्थित एक फार्म में रहता है। उसके घर जाने वाला लंबा मार्ग सूखी और बंजर भूमि से होकर निकलता है। उसके घर के निकट आते समय अनेकों प्रकार की हरियाली और वनस्पति के भू-भागों को देखा जा सकता है जो आस-पास के उस सूखे और बंजर इलाके के... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   3:15pm 12 Feb 2017 #जीवन
Blogger: Anita nihalani at मन पाए विश्रा...
सीधे घर वापस ले चल दी कितने ख्वाब अधूरे मन में  कितनी  आशाएं पलती थीं,  मृत्यु ने दस्तक भी न दी  सीधे घर वापस ले चल दी ! कुछ भी न कह पाये मन की  जीवन एक अधूरी गाथा, साथ जियेंगे साथ मरेंगे  घबराहट में  भूला वादा  ! कितनी यात्रायें शेष थीं    अंतिम होगी यह  खबर किसे, जीवन भी ... Read more
clicks 86 View   Vote 0 Like   10:52am 8 Feb 2017 #जीवन
Blogger: पत्रकार रमेश कुमार जैन उर्फ निर्भीक at निर्भीक-आजाद ...
1 दिसम्बर 2015 : मोहजीत अपनी देह से भी नष्टो मोहा होते हैं.2 दिसम्बर 2015 : कथनी और करनी में समरूपता रखना ही महान आत्मा का लक्षण है.3 दिसम्बर 2015 : सच्ची सेवा वह है जिसमें सर्व की दुआओं के साथ ख़ुशी की अनुभूति हो.4 दिसम्बर 2015 : ईश्वर से बुध्दि की लगन लगाना ही ईश्वर का सहारा... Read more
clicks 213 View   Vote 0 Like   2:06pm 30 Jan 2017 #जीवन
Blogger: सतीश at खुदी को कर बु...
(Based on Post : “Be a Fun Broke Person” by Steve Pavlina)   दोस्तों हम सभी के जीवन में कभी न कभी ऐसा मुकाम जरूर आता है जब हम जीवन में एक स्तर पर आकर ठहर जाते हैं| हम आगे तो बढना चाहते हैं लेकिन असफल होने का डर हमें आगे बढ़ने नहीं देता| उदाहरण के तौर पर अगर आप अपनी जॉब से खुशनहीं हैं और आप इसे छोड़ कर अपना बिज़... Read more
clicks 173 View   Vote 0 Like   12:30am 25 Dec 2016 #जीवन
Blogger: rozkiroti at रोज़ की रोटी -...
   चार्ल्स डिकिन्स का उपन्यास A Christmas Carol सर्वप्रथम 19 दिसंबर 1843 को प्रकाशित हुआ, और तब से लेकर आज तक उसकी माँग बनी रही है, तथा वह प्रकाशन में रहा है। यह उपन्यास एबेनेज़र स्क्रूज नामक एक धनी परन्तु रूखे और कंजूस व्यक्ति की कहानी है जो कहता था, "प्रत्येक ’मेरी क्रिसमस’ कहने वाल... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   3:15pm 19 Dec 2016 #जीवन

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