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Tag: कहानी

Blogger: bhavana lalwani at Life with Pen and Papers...
दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट  "फ्लाइट  आने में अभी और कितनी देर है ?"उसने अपने आप से पूछा।सिक्योरिटी चेक का कॉल आने पर थोड़ी राहत महसूस हुई।  अचानक ये मुल्क, ये खूबसूरत आसमान छूता,  सपनों की दुनिया जैसा ये शहर ,  अब उसके लिए बिलकुल अजनबी हो गया था। एकदम अचानक से कि आज सु... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   6:35am 3 Jul 2017 #कहानी
Blogger: साहित्य शिल्पी at साहित्य शिल्...
रचनाकार परिचय:- आलोक कुमार सातपुते 832 हाउसिंग बोर्ड कालोनी सड्डू रायपुर छग मोबाइल नं 09827406575 ... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   6:30pm 21 Jun 2017 #कहानी
Blogger: साहित्य शिल्पी at साहित्य शिल्...
रचनाकार परिचय:- आलोक कुमार सातपुते 832 हाउसिंग बोर्ड कालोनी सड्डू रायपुर छग मोबाइल नं 09827406575 ... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   6:30pm 18 Apr 2017 #कहानी
Blogger: Vibha Rani at chhammakchhallo kahis...
आज पढ़िए "कथादेश"के अप्रैल,2017 के अंक में छपी एक कहानी। अपनी राय और टिप्पणियां पोस्ट करना न भूलें।माई के पास भर मुट्ठी पैसा लेकर आया तो झुनिया ने उसकी बंधी हुई दोनों मुट्ठी को भरपूर हथेली से चटाक से मारकर ऐसे झटकारा कि उसकी दोनों मुट्ठियों में फंसे पैसे छिटक कर पूरे घर में ... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   7:34am 16 Apr 2017 #कहानी
Blogger: दिगम्बर नासवा at स्वप्न मेरे...
वो एक ऐहसास था प्रेम का जिसकी कहानी है ये ... जाने किस लम्हे शुरू हो के कहाँ तक पहुंची ... क्या साँसें बाकी हैं इस कहानी में ... हाँ ... क्या क्या कहा नहीं ... तो फिर इंतज़ार क्यों ... हालांकि छंट गई है तन्हाई की धुंध समय के साथ ताज़ा धूप भी उगने लगी है  पर निकलने लगे हैं यादों के नुकीले ... Read more
clicks 176 View   Vote 0 Like   7:15am 27 Mar 2017 #कहानी
Blogger: सुनील दीपक at जो न कह सके...
परिवार के पुराने कागजों में कुछ खोज रहा था, तो उनके बीच में कुछ पत्र भी दिखे. इन पत्रों में हिन्दी साहित्य के जाने माने लेखक भी थे. उनमें से कुछ पत्र प्रस्तुत हैं।यह पत्र मेरे पिता स्व. श्री ओमप्रकाश दीपक के नाम थे, जो कि १९५०-६० की कुछ समाजवादी पत्रिकाओं, जैसे कल्पना, चौखम... Read more
clicks 286 View   Vote 0 Like   11:30am 12 Mar 2017 #कहानी
Blogger: समीर लाल at उड़न तश्तरी .......
उस शाम बड़े तालाब के किनारे शबनम के इन्ताजर में बैठा वो ख्यालों की भीड़ में बहुत दूर निकल गया था. उसे लगने लगा था कि माँ बाप के उलाहने शायद सही ही हैं. उन्होंने पढ़ाया लिखाया है. बड़ा किया है और वो उन्हीं से बगावत किये बैठा है. शबनम से मोहब्बत की बात उनके गले से उतरती नहीं थी और ... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   2:30am 3 Feb 2017 #कहानी
Blogger: उमेश कुमार साहू at सफल जीवन जीने...
नववर्ष नवप्रारंभ - स्तंभ : सबरंग 'सफलता सूत्र'में अपनी रचनाएं प्रकाशित कराएं एवं पारिश्रमिक पाएं                                                  'सबरंग'स्तंभ उन प्रतिभाशाली रचनाकारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रारंभ की जा रही है, जिनकी र... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   5:31am 4 Jan 2017 #कहानी
Blogger: Sudheer Maurya at कलम से.....
कितना भोलापन था उस दिन तुम्हारे चेहरे पर, मंदिर में राधा-कृष्ण की मूर्ति के आगे जब तुम हाथ जोड़कर खड़ी थी। मैं कभी तुम्हें और कभी मूर्ति को निहार रहा था। मंदिर से बाहर आकर गार्डन में टहलते हुए जब मैंने तुमसे पूछा, मुझसे शादी करोगी उस समय तुम्हारा चेहरा लाज से लाल हो गया थ... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   8:14am 1 Jan 2017 #कहानी
Blogger: Sudheer Maurya at कलम से.....
Add caption                  माँ ने उसे सहारा दे कर कार की पिछली सीट पर बैठा दिया और खुद उसके बगल में बैठ गयी। मुझे गाड़ी चलाने की हिदायत देकर, माँ उसे अपनी बोटल से पानी पिलाने लगी। न जाने क्यूँ आज मुझ... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   5:54pm 29 Dec 2016 #कहानी
Blogger: vandana a dubey at किस्सा-कहानी...
लगातार बजती फोन की घंटी से झुंझला गयी थीं आभा जी. अभी पूजा करने बैठी ही थीं, कि फोन बजने लगा. एक बार टाल गयीं, दो बार टाल गयीं लेकिन तीसरी बार उठना ही पड़ा. अब उठने –बैठने में दिक़्क़त भी तो होती है न!! एक बार बैठ जायें, तो काम पूरा करके ही उठने का मन बनाती हैं आभा जी.  बार-बार उठक-... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   1:24pm 26 Nov 2016 #कहानी
Blogger: Sujit Shah at Mithilanchal Shayari...
                                   __✍ आरती झा आइ रधिया माय समयसँ पहिने आबि गेल छल काज करय । कारण पुछलहुँ तऽ बड्ड हुलसि के'बाजल, "मलिकाइन, आइ रधिया के देखा-सुनि हइ"हलुमान मंडील मे तऽ सोचली जे हाली-हाली सबटा काम नेपटा ली । इ बात सुनिते आँखि के आगूमे नान्हिटा बा... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   7:26am 17 Aug 2016 #कहानी
Blogger: Sudheer Maurya at कलम से.....
प्रतिलिपि कथा उत्सव २०१६ में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित। प्रियानेमुझसेपूछाये BHMB क्याहोताहै।मैनेगौरसेप्रियाकोदेखकरकहा'नहींजानता।'मेराजवाबसुनकरप्रियानेकहा'उऊह , तुमकुछनहींजानतेचलोमै  किसीऔरसेपूछलूंगी।'कहकरप्रियाजानेलगीतोमैनेउसेरोककरकहनाचाहा'मैइसक... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   4:04pm 11 Aug 2016 #कहानी
Blogger: Hemant Kumar at क्रिएटिव कोन...
(फ़ोटो:गूगल से साभार)        उसका रंग एकदम काला था।एकदम चेरी बूट पालिश की तरह।लम्बाई कुल जमा साढ़े चार फ़ीट।उमर ग्यारह साल।नाम कलुआ। वैसे तो उसका नाम था राजकुमार लेकिन उसके घर वाले उसे रजुआ कह कर बुलाते थे और जब से वह नईम मियां की साइकिल रिपेयरिंग की दूकान पर काम करने आ... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   5:20pm 15 May 2016 #कहानी
Blogger: Vibha Rani at chhammakchhallo kahis...
"सैराट"आज अंतत: देख ही ली। इतनी तारीफ इसके पक्ष में सुनी कि रहा नहीं गया।यह कहना गलत होगा कि हमारा समाज बहुत आधुनिक हो गया है। आधुनिक वह घर के इंटीरियर, मोबाईल और वाहन से हो गया है। प्रेम के मामलों में वह कृष्ण राधा और शंकर पार्वती के प्रेमवाले देश में कैसे इतना क्रूर हो ग... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   12:37pm 14 May 2016 #कहानी
Blogger: साहित्य शिल्पी at साहित्य शिल्...
लेख..........................लेख। रचनाकार परिचय:- बलराज सिंह सिद्धू 45 Rosefield Road Smethwick West Midlands B67 6DX England UK 00447713038541 (Whatsapp) नित्य की तरह आज भी चन्नी समय से कालेज से पढ़कर लौटी थी। रोज़ की तरह ही वह नहाई-धोई थी। पहले की तरह ही उसने कपड़े बदले थे और रोज़ाना की भाँति ही वह रसोई में रोटी खाने बैठ गई थी। पर आज जबस... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   6:30pm 24 Apr 2016 #कहानी
Blogger: Sujit Shah at Mithilanchal Shayari...
करम के डोर सँ बान्धल अछि जिनगीकऽ एक कहानीजन्म दैत अछि माँ बाप करम तऽ अपनेहीभाग ~ ८ ( साँझ होइते राक्षस अपन बासस्थान पर वापस आवै छथि आ अपन बेटी के मूडी लाल तलवार सँ जोडैत छथि । लाल कनियाँ उठि के अपन पिता के प्रणाम करैत छैक । )लाल कनियाँ :प्रणाम पिता जी ।र... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   7:16am 13 Dec 2015 #कहानी
Blogger: Sujit Shah at Mithilanchal Shayari...
करम के डोर सँ बान्धल अछि जिनगीकऽ एक कहानीजन्म दैत अछि माँ बाप करम तऽ अपनेहीभाग ~ ७ ( नवधिया चलि दैत छथि ओई लाल के जोडी लएबाक लेल । जाएत - जाएत नवधिया वही नदी लग पहुंचैय । फेर देखैत छैक ऊ लाल एकदम सँ भासैत रहैय । नवधिया  चलैत - चलैत भुखा गेल छल । ओ सोचैत&n... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   9:00am 6 Dec 2015 #कहानी
Blogger: Sujit Shah at Mithilanchal Shayari...
करम के डोर सँ बान्धल अछि जिनगीकऽ एक कहानीजन्म दैत अछि माँ बाप करम तऽ अपनेहीभाग ~ ६ ( नवधिया राजा के घर जाएत छथि। राजा द्वार पर रहै छथि । नवधिया जा के राजा के नमस्कार करैत छथि। )नवधिया :नमस्कार राजा साहब !राजा :नमस्कार ! आऊ बैसू !नवधिया :राजा साहब हमरा किए बोलैलौं ह  ?राजा ... Read more
clicks 52 View   Vote 0 Like   9:33pm 29 Nov 2015 #कहानी
Blogger: Sujit Shah at Mithilanchal Shayari...
करम के डोर सँ बान्धल अछि जिनगीकऽ एक कहानीजन्म दैत अछि माँ बाप करम तऽ अपनेहीभाग ~ ६ ( नवधिया राजा के घर जाएत छथि। राजा द्वार पर रहै छथि । नवधिया जा के राजा के नमस्कार करैत छथि। )नवधिया :नमस्कार राजा साहब !राजा :नमस्कार ! आऊ बैसू !नवधिया :राजा साहब हमरा किए बोलैलौं ह  ?राजा ... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   9:33pm 29 Nov 2015 #कहानी
Blogger: Sujit Shah at Mithilanchal Shayari...
करम के डोर सँ बान्धल अछि जिनगीकऽ एक कहानीजन्म दैत अछि माँ बाप करम तऽ अपनेहीभाग ~ ५ ( राजा महलकऽ भीतर जाइत अछि आ बेटी सँ पुछैत छथि । )राजा: बेटी सुमैना ! कि भेल किए नै बजैत छी, कोई किछ कहलकऽ  की ?सुमैना : पहिने अहाँ हमरा पिता जी वचन दिय जे हम कहब से अहाँ ... Read more
clicks 56 View   Vote 0 Like   1:31pm 22 Nov 2015 #कहानी
Blogger: Sujit Shah at Mithilanchal Shayari...
करम के डोर सँ बान्धल अछि जिनगीकऽ एक कहानीजन्म दैत अछि माँ बाप करम तऽ अपनेहीभाग ~ ५ ( राजा महलकऽ भीतर जाइत अछि आ बेटी सँ पुछैत छथि । )राजा: बेटी सुमैना ! कि भेल किए नै बजैत छी, कोई किछ कहलकऽ  की ?सुमैना : पहिने अहाँ हमरा पिता जी वचन दिय जे हम कहब से अहाँ ... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   1:31pm 22 Nov 2015 #कहानी
Blogger: Sujit Shah at Mithilanchal Shayari...
करम के डोर सँ बान्धल अछि जिनगीकऽ एक कहानी जन्म दैत अछि माँ बाप करम तऽ अपनेहीभाग - ४( मेनुका अप्पन पति के लऽक बुढ़िया माँ संगमें हुन्का घरमें रहे लगैत अछि। मेनुका के पतिके ओई गावँके लोग नवधिया कहिके बजबे लगैत अछि। २/४ दिन के बाद मेनुका के पति नदीमें सँ जे लाल लौने रहैय ओकर... Read more
clicks 48 View   Vote 0 Like   3:12pm 15 Nov 2015 #कहानी
Blogger: rishabh shukla at Hindi Sahitya Ka Jharokha...
"अरे मुर्ख, ये क्या कर रहा है?... Read more
clicks 211 View   Vote 0 Like   8:34pm 4 Nov 2015 #कहानी
Blogger: Sujit Shah at Mithilanchal Shayari...
जिनगी एक अजीब दास्तान छैक जे जन्म तऽ माँ बाप दैत छथिन मुदा करम अपनेही होयत अछि। जे जेहन काज करैत छैक हुनका ओहि अनुसार जिनगीकऽ फल मिलैत अछि। आ संगे विधाता छठी के रातिमें जे विधना लिख दैत छैक ओकरा कियो नै काटि सकैत अछि, आ उ प्रत्येक प्राणी के भोगही टा परैत अछि। इहे विषय प... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   5:06am 25 Oct 2015 #कहानी

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