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clicks 31 View   Vote 0 Like   8:03am 15 Jan 2022   Catogery: हँसलोपैथी  
Blogger: डॉ टी एस दराल at अंतर्मंथन...
 कभी दो कमरों में छह जनें रहते थे,अब छह कमरों में दो जनें रहते हैं। घरवाले तकलीफ़ तब भी सहते थे,घर के बुजुर्ग दुखी अब भी रहते हैं। मकां छोटा था पर दिल बड़ा रखते थे,अब मकां बड़े और दिल छोटे दिखते हैं। रोज शाम सब हिल मिल कर हँसते थे,अब पार्क में हँसी भी नकली हँसते हैं।डिग्...
 
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