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clicks 305 View   Vote 0 Like   7:37am 8 Nov 2013   Catogery: अलग  
Blogger: अज्ञात मित्र Agyatmitra at अनकही...
पानी
पहाड़ों का,रिसता
हुआ,बूंद-बूंदमिट्टियों
से सट के,तिनकों
से लिपट के, हर
कण को तर के,गोद
भर के, बिन
ड़र खोते हुए,किसी
और का होते हुएपहचान?खोने
का ड़र है . . . .
.?आप
जरूर इंसान होंगे!आपके
ड़र आपके भगवान होंगेऔर
उधर वो एक बुंद धारा
बनी है, गुजरने
वालों का सहारा बनी है,हर
मोड़ बद...
 
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