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clicks 186 View   Vote 0 Like   5:46am 22 Jul 2013   Catogery:   
Blogger: Madan Mohan saxena at काव्य संसार...
आँखों  में  जो सपने थे सपनो में जो सूरत थीनजरें जब मिली उनसे बिलकुल बैसी  मूरत थी जब भी गम मिला मुझको या अंदेशे कुछ पाए हैंबिठा के पास अपने  उन्होंने अंदेशे मिटाए हैंउनका साथ पाकर के तो दिल ने ये ही  पाया है अमाबस की अँधेरी में ज्यों चाँद निकल पाया ...
 
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