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clicks 268 View   Vote 0 Like   12:26pm 29 Dec 2012   Catogery: अनामिका  
Blogger: veena at वीणा के सुर...
वो रोज जलाती है चूल्हायादों की लकड़ियों सेभावों के कंडे परसेंकती है रोटी मुस्कुराहटों  कीपकाती है भातअरमानों केअश्कों से पकाती है दालरख देती है कल के लिएअच्छे खाने कालालच देकरबांट देती है रोटीसिल पर घिसकरचटनी की सुगंध के साथखुद चाट लेती है सिलपीकर पानीबुझा लेती ...
 
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