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clicks 211 View   Vote 0 Like   3:22pm 14 Nov 2014   Catogery:   
Blogger: devduttaprasoon at प्रसून...
  प्यार के फूलों से महकाओ, साथी अपने मन का आँगन !कभी काम की कुटिल कामना, धधक रहे अंगार उगलती |कभी क्रोध की गर्मी पाकर, धीरे-धीरे प्रीति सुलगती ||कई तरह की आग यहाँ है, बुझ-बुझ कर है जलती रहती- मन-मधुवन में किसी आग से, जल मत जाए महका चन्दन !  प्यार के फूलों से महकाओ, साथी अपने ...
 
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