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clicks 188 View   Vote 0 Like   5:23am 7 Feb 2012   Catogery: कविता  
Blogger: induravisinghj at हृदयानुभूति...
दूर रहता जो सदा वही भातापास की निगाह कमज़ोर क्यों होतीदूर की हँसी की,दिल में गूँज उठतीपास का दर्द नज़र अंदाज़ हो जाता।दूर के अल्फ़ाज़ भी मिश्री से घुलते,पास की मासूमियत पे सदा शक आता।रिश्ते तो रिश्ते हैं,होते सदा’रिश्ते’हीफिर क्यूँ दूर-पास का फर्क नज़र आता।...
 
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