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clicks 126 View   Vote 0 Like   3:58pm 9 Mar 2015   Catogery:   
Blogger: Divyabh Aryan at Divine India...
आगोश में निशा के करवटें बदलता रहता है सवेरालिपटकर उसकी संचेतना में बिखेरता है वह प्रांजल प्रभा…संभोग समाधि का है यह या अवसर गहण घृणा काफिर-भी तरल रुप व्यक्त श्रृंगार, उद्भव है यह अमृत का…उत्साह मदिले प्रेम का…जागते सवेरे में समाधि…अवशेष मुखरित व्यंग…या व्यंग इस रच...
 
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