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clicks 152 View   Vote 0 Like   2:11am 3 Oct 2013   Catogery: प्रेम  
Blogger: kamal k. jain at मंतव्य...
मुझे शब्द पसंद थे तुम्हे मौन..मुझे भीड़ चाहिए थी, तुम्हे एकांत..मुझे अफसाने उकसाते थे, तुम्हे जमीन की हकीकत..मुझे बागी बन जाना था, तुम्हे तुम्हारे संस्कार रोकते थे.....फिर भी मुझे तुम पसंद थे, तुम्हे मैंऔर अब जान मैं बिलकुल तुम्हारे जैसा हो गया हूँ..ना मुझे शब्दों से प्यार रह...
 
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