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clicks 75 View   Vote 0 Like   10:21am 17 Oct 2020   Catogery:   
Blogger: अर्चना तिवारी at पंखुड़ियाँ...
जगन, छगन, गगन। मध्यावकाश की घंटी बजी नहीं कि इनकी गेंद तड़ी चालू।"जगन हमें दे! जगन हमें दे!"चूँकि गेंद जगन की है तो वह जिसको चाहता पहली चाल उसी की होती। ऐसे में छगन नंबर मार जाता। यह कमाल उसकी जेब का है। जो कभी अंबियों, तो कभी जामुनों से फूली रहती है। "ओ छगन, एक अंबी दे ना!"भाव त...
 
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