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clicks 54 View   Vote 0 Like   3:44pm 3 May 2021   Catogery: पठान  
Blogger: मीनाक्षी at "प्रेम ही सत्...
सागर की लहरों से बतियाती रेत पर लकीरें खींचती पीठ करके बैठी कोस रही थी चिलचिलाती धूप को सूरज की तीखी किरणें तीलियों सी चुभ रहीं थींहवा भी लापरवाह अलसाई  हुई कहीं दुबकी हुई थी बैरन बनी चुपके से छिपकर कहीं से देख रही होगी सूरज के साथ मिल कर मुझे सता कर खुश होती है ...
 
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