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clicks 112 View   Vote 0 Like   2:22pm 16 May 2018   Catogery:   
Blogger: mohinder at दिल का दर्पण...
वंदना जी की एक कविता से प्रेरित रचना 



ओस में भीगी औरत

पूर्ण औरत नहीं होती

धवल चपल

नवयौवना की तरुणाई

औस की बूंदों को

यौवन के ताप से

वाष्पित कर

एक कोहरे की चादर

तान देती है

जिसमें अलसाया यौवन

सावन की फ़ुहारों को तरसता

किसी मनचाही छुवन को प्रतीक्षारत

अंधेरों से निकल

र...
 
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