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clicks 1 View   Vote 0 Like   12:59am 21 Jan 2021   Catogery: रिवाज़-रीत बन गये  
Blogger: डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" at उच्चारण...
भूमिका"प्रीत का व्याकरण"'प्रीत का बहुआयामी सागर'(डॉ- महेन्द्र प्रताप पाण्डेय ‘नन्द’)जाको ताहि कुछ लहन की, चाह न लिए मैं होय।जयति जगत पावन करन, प्रेम वरन यह दोय।। (भारतेन्दु)    प्रीत के संवाहक कवि आदरणीय डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’ जी की नौवीं पुस्तक ‘प्रीत का व...
 
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