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Blog: Yaadein

Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ाएक ज़ोरदार दारू पार्टी चल रही थी। इंजीनियर, बाबू, अकाउंटेंट, ठेकेदार आदि हर प्रोफेशन के लोग जमा थे। उनमें हिंदू भी थे और मुसलमान भी, सिख और ईसाई भी, यानि हर धर्म और जाति के लोग थे। दारू ने सारे भेद-भाव मिटा दिए। पुरषोत्तम जी भरी महफ़िल में अपनी ईमानदारी के जो... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   8:16am 15 Jun 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-वीर विनोद छाबड़ाआज के शोर-शराबे और हर तरफ़ ट्रैफ़िक जाम के दौर की तुलना में गुज़रा ज़माना ख़्वाब जैसा लगता है। पहले मोटरकार होती थी। अब मोटर ग़ायब है, सिर्फ़ कार रह गयी है। अब कार रसूखदारों और बड़ों की बपौती नहीं है, बड़ी आसानी से आम आदमी की पहुंच में है। शुरुआत मारूति ने की थी और ... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   6:49am 14 Jun 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-वीर विनोद छाबड़ाहमारे पड़ोस में एक डॉक्टर हैं, पक्के एमबीबीएस। लेकिन बहुत ही ख़तरनाक, उनके लिए जिन्हें उनकी दवा सूट नहीं करती। कभी इमरजेंसी में हमने भी उनसे दवा ली है। लेकिन एक से ज्यादा ख़ुराक कभी नहीं खा पाये। बहुत सस्ती दवा देते हैं। गरीबों के लिए तो यों समझिए मसीहा हैं... Read more
clicks 107 View   Vote 0 Like   7:24am 13 Jun 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ावो सब्ज़ी वाला फेरी लगाता है। हमारी गली में रोज़ आता है। हरी-भरी ताज़ी सब्ज़ी होती हैं। हमें दूर मंडी से सब्ज़ी लाने की ज़हमत से बचाता है। हमने कई बार आजमाया है कि मंडी के मुक़ाबले भाव भी सही हैं। किसी-किसी आईटम पर शक़ होता है कि तीन-चार परसेंट ज्यादा चार्ज कर रहा ... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   5:28am 12 Jun 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ाबचपन में पढ़ी एक कहानी की धुंधली याद आ रही है। शायद पाठ्य क्रम का हिस्सा होती थी। आज की पीढ़ी ने शायद यह कहानी नहीं पढ़ी सुनी है। एक थे बाबा भारती। बड़े दयालु और ज्ञानी। उनके पास एक सफ़ेद घोडा था। जान से भी ज्यादा प्यारा। उसका नाम था सुल्तान। हष्ट-पुष्ट, बलिष्... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   6:58am 11 Jun 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ा वो ज़माना मोबाईल और ऑनलाईन सिस्टम का नहीं था। बाहर के अखबारों में लेख प्रकाशनार्थ प्रेषित करने का एक ही जरिया था - पोस्ट ऑफिस। कई बार पैकेट खो भी जाता था और कभी-कभी पहुंचते पहुंचते विलंब हो जाता। कारण दो तीन छुट्टियां पड़ गयीं। या पोस्टमैन बीमार पड़ गया।... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   4:42am 10 Jun 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-वीर विनोद छाबड़ाजब होश संभाला था तो उन दिनों हर तरफ मुझे सिगरेट पीने वाले ही नज़र आये। घर में पिताजी को धूंआधार सिगरेट पीते देखा।  दादाजी और अन्य रिश्तेदार भी सिगरेट के लती थे। दादाजी को तो मुट्ठी में दबाकर कैवेंडर पीते देखा। स्कूल में भी टीचर्स रूम में कई अध्यापक कश ख... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   6:28am 9 Jun 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ाकुछ अपवादों को छोड़ दें तो सरकारी नौकरी में कोई किसी का सगा नहीं होता। सबको अपने प्रमोशन का ख्याल होता है। होना भी चाहिए। लेकिन दुःख होता है कि संकट के समय सब दूर चले जाते हैं। कोई डूब रहा होता है तो उसे बचाने की बजाए एक धक्का और दे दिया, जा जल्दी से पूरा ही ... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   7:24am 8 Jun 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-वीर विनोद छाबड़ा आजकल मार्केटिंग का ज़माना है। बढ़िया पैकिंग। किसी विदेशी कंपनी की मुहर। आर्डर दें या न दें, आपके द्वारे पर आ जायेंगे। ये मेक इन जापान और ये जर्मनी। बाज़ार में किसी बड़े शो रूम से खरींदेंगे तो दस हज़ार में मिलेगा। लेकिन हम तीन हज़ार में ही दे देंगे। ज़बरदस्त क... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   7:58am 7 Jun 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-वीर विनोद छाबड़ाजेठ महीने का चौथा और आख़िरी बड़ा मंगल। क़रीब पांच-छह हज़ार भंडारे आयोजित होंगे। पूड़ी और आलू सब्जी और कहीं सूजी का हलवा और चावल के साथ कढ़ी। लखनऊ वालों और लखनऊ में आज पधारे मेहमानों के मौज। जम कर सेवन करें। जुगाली करने वालों की भी मौज है। इसी बहाने दो-तीन दिन के... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   7:29am 6 Jun 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-वीर विनोद छाबड़ाकई साल पहले की बात है। हम एक बीमार सहकर्मी का हाल जानने अस्पताल जा रहे थे। अपने अधिकारी से दो घंटे का अवकाश मांगा। उन्होंने सहर्ष आज्ञा दे दी। हम निकलने को ही थे कि एक महिला सहकर्मी ने रोका। हम भी चलें। हम थोड़ा अचकचाये, थोड़ा झिझके। कुछ पल सोच में गुज़र गए। ... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   3:01am 5 Jun 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ाअस्सी के मध्य का ज़माना था। मस्ती भरा दौर था। कम आमदनी में भी जनता खुश थी, ज़रूरतें जो कम थीं। हमारे बड़े बाबू इलाहाबाद के रहने वाले थे। उन्हें अपने घर और ज़मीन से बहुत लगाव था। यों बाबू के बैग में बहानों की कोई कमी तो रहती नहीं है। फिर हमारे बड़े बाबू के डीएनए ... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   6:37am 4 Jun 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ाआज फ़ोन आया है, कज़िन सिस्टर का। बेटी की शादी है, अक्टूबर की फलां तारीख़ को। आने-जाने का रिज़र्वेशन आज ही करवा लो भैया। अभी तो क़रीब चार महीना बाकी है। लेकिन अब ज़माना बदल गया है। ट्रेन में बर्थ के लिए मारामारी है। कई कई दिन पहले रिजर्वेशन करना पड़ता है। हमें वो ज़... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   8:19am 3 Jun 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-वीर विनोद छाबड़ाएक बादशाह अपनी ईमानदारी और रहम दिल होने के लिए बहुत मशहूर हुआ करते थे।उनके दरबार से कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटा। उसने रोज़ाना सैकड़ों दीन-दुखियों की सेवा की और हुनरमंदों को नौकरी और ईनाम से नवाज़ा। अहंकार तो उसे छू तक नहीं पाया। यही नहीं उसने कभी दूसरों से स... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   9:56am 1 Jun 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-वीर विनोद छाबड़ामंत्री मंडल में वो सबसे अधिक शिक्षित, बुद्धिमान और योग्य मंत्री था। इसी कारण से वो राजा का प्रिय और विश्वासपात्र भी था। राज्य हित में जो भी निर्णय लिए जाते थे, उसमे मंत्री की सलाह अवश्य ली जाती थी। इससे राजा के साथ-साथ मंत्री की भी जय-जयकार होती थी। यह बात... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   6:13am 31 May 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-वीर विनोद छाबड़ाआज जेठ महीने का तीसरा बड़ा मंगल है। अपने शहर लखनऊ में जेठ का हर मंगल बड़े मंगल के रूप में मनाया जाता है। शहर में करीब चार हज़ार भंडारे सजते हैं। प्रसाद के रूप में आलू-पूड़ी आदि लोग ग्रहण करते हैं। इस दिन शहर में कोई भूखा नहीं रहता। बाहर से आये मेहमान भी इसी प्र... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   5:57am 30 May 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-वीर विनोद छाबड़ा आजकल ७५वां जन्मदिन मनाने की धूम है। हम भी कोई साल भर पहले एक ७५वीं सालगिरह में शरीक हुए थे। वो पेशे से कपडे के थोक व्यापारी हैं। अथाह धन दौलत और साधनों के मालिक हैं। भरा-पूरा संयुक्त परिवार है। आये दिन किसी का जन्म दिन, किसी का मुंडन और किसी की छठी। ज़बरद... Read more
clicks 66 View   Vote 0 Like   12:52am 29 May 2017 #
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- वीर विनोद छाबड़ामैंने पूछा - भाई साहेब, सुना है आपका मकान फिर खाली है। वो बोले - हां। कोई अच्छा किरायेदार हो तो बताइयेगा। मैंने कहा - है तो। उनकी आंखें चमकी - क्या है वो? मेरा मतलब, उसकी जाति और धर्म क्या है? मुझे मालूम था कि वो कैसा किरायेदार चाहते हैं। मुसलमान नहीं हो। हिन्... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   6:39am 28 May 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-वीर विनोद छाबड़ाजब भी भूचाल आता है या दुनिया के किसी भी हिस्से में इसके आने की खबर पढता हूं तो मुझे 'भूचाल आंटी'याद आती है। यह मेरी चाची थीं। उन्हें आंटी कहलवाना पसंद था। इसलिए उन्हें हम आंटी कहते थे। पचास के दशक का अंत और साठ के दशक की शुरुआत का दिल्ली। चाची एक सरकारी स्क... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   7:01am 27 May 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ापति-पत्नी का वो जोड़ा एक दूजे के लिए बना था। दोनों को कभी झगड़ते हुए नहीं देखा गया था। बल्कि मिसाल थे, दूसरों के लिए। पत्नी के पास एक मजबूत लोहे का संदूक था। शादी के अवसर पर उसकी मां ने इसे गिफ़्ट किया था। वो रोज़ इसे खोलती थी, कुछ रखती और फिर बंद कर देती। एक मोट... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   7:43am 26 May 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-वीर विनोद छाबड़ामैं सुबह सुबह मुंह अंधेरे टहलने नहीं निकलता। इसके दो कारण हैं।  एक - उस समय पेड़-पत्ती कॉर्बनडाइओक्ससाईड छोड़ रहे होते हैं और हमें हाई ब्लड प्रेशर, हाइपरटेंशन और अस्थमा की शिकायत है। डॉक्टर की अड्वाइज़ है कि आसमान में हल्की लालिमा के दर्शन होते ही निकल ल... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   7:50am 25 May 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
-वीर विनोद छाबड़ाहमारे एक मित्र बता रहे थे - आजकल मैं बड़े आराम में है। सर्वगुण संपन्न पत्नी जो मिलने वाली है। उन्होंने बताया कि उनकी होने वाली पत्नी ट्रिपल एम.ए. है - हिंदी, इंग्लिश और इकोनॉमिक्स में। चौथी बार भी करेगी। अभी हिस्ट्री में एडमिशन लिया है। इसे वो शादी के बाद प... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   5:34am 24 May 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ाज्ञानी-ध्यानी कह गए हैं पाप से घृणा करो पापी से नहीं।लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग कभी दुरुस्त नहीं होते। क्यूंकि उनका स्वाभाव ही डंक मारना होता है। कोई नौ दस साल पहले की बात है। तब हम इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड की सेवा में हुआ करते थे। चेयरमैन साब का फरमान हुआ कि... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   5:18am 23 May 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ापत्र लेखन से संबंधित मुझे एक किस्सा याद आ रहा है । बात १९८८ की है। क्रिकेट के 'डॉन'सर डॉन ब्रैडमैन २७ अगस्त को ८८ साल के होने जा रहे थे। मैं डॉन का ज़बरदस्त फैन था। उन पर कई लेख लिख चुका था। लेकिन इस बार इस कुछ अलग हट लिखना चाहता था। मैंने विषय चुना उनकी आख़िरी... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   7:10am 22 May 2017 #
Blogger: वीर विनोद छाबड़ा
- वीर विनोद छाबड़ाRajesh Khanna with Sharmila in Amar Premराजेश खन्ना अपने दौर में वाकई सुपरस्टार थे। वो उस दौर को परदे बाहर भी पूरी शान-ओ-शौकत के साथ जी रहे थे। दो राय नहीं कि वो बेहतरीन कलाकार थे। तब तक आखिरी खत, राज़, आराधना, कटी पतंग, अमर प्रेम, आनंद, डोली, सच्चा-झूठा, अंदाज़ आदि दर्जन भर से ज्यादा फ़... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   7:07am 21 May 2017 #

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