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Blog: दिल का दर्पण

Blogger: mohinder
एक ढर्रा सी तो है बस यह जिन्दगी सुबह हुई नहीं कि फ़िर निकल पडी हजारों सवाल विखरे हैं हर तरफ़ और जबाब ढूंढती फ़िर रही जिन्दगी खुशी के पल मिले जो दो जरा ये होंठ अगर लिये जो मुस्करा कई गुनाह हिस्से में दर्ज हो गये गिरिफ़्तार हो गई फ़िर ये जिन्दगी अगर बोझ किसी का ले कोई उठा किसी के ... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   7:35am 3 Jul 2013 #
Blogger: mohinder
प्रेम को परिभाषित करना अत्यन्त कठिन कार्य है... मैंने एक प्रयास किया है कहां तक सफ़ल है... आप बतायेंगे. प्रेम है इक विरहन का आंसू झरता यादों की शाम ढले प्रेम है बनजारे की गाडी का पहिया उबड खाबड हर दिन राह चले... प्रेम है कल्पनाओं की क्यारी जिसमें निस दिन रंगबिरंगे फ़ूल खिलें ... Read more
clicks 71 View   Vote 0 Like   4:21pm 8 Jun 2013 #
Blogger: mohinder
गैर के हिस्से के आंसू भी बहाये हमनेउम्र भर रिश्तों में पैवन्द लगाये हमनेमेरे दर्द का अहसास न किसी को भी होइस तरह अपने सब जखम छुपाये हमने=================================अब कोई चेहरा कोई उम्मीद नहीं मेरी आंखों में...वक्त के तूफ़ां में उडते बस तिनके नजर आते हैंतुम कहते हो कि बसा लूं मैं इक घर फ़... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   1:29pm 2 Jun 2013 #
Blogger: mohinder
तुम तो "देव" हो और "देव" केवल कृपा अथवा करुणा करते हैं प्रेम नहीं तुम इतना नीचे नहीं आ सकते मैं इतना ऊपर नहीं उठ सकती यह दूरी यह अभिलाषा यूं ही रहेगी जब तक तुम "देव" से 'मानव" नहीं हो जाते ===== मोहिंदर कुमार... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   1:55pm 1 Jun 2013 #
Blogger: mohinder
तुम तो "देव" हो और "देव" केवल कृपा अथवा करुणा करते हैं प्रेम नहीं तुम इतना नीचे नहीं आ सकते मैं इतना ऊपर नहीं उठ सकती यह दूरी यह अभिलाषा यूं ही रहेगी जब तक तुम "देव" से 'मानव" नहीं हो जाते ===== मोहिंदर कुमार ... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   1:55pm 1 Jun 2013 #
Blogger: mohinder
तुम तो "देव"हो और "देव"केवल कृपा अथवा करुणा करते हैं प्रेम नहीं तुम इतना नीचे नहीं आ सकते मैं इतना ऊपर नहीं उठ सकती यह दूरी यह अभिलाषा यूं ही रहेगी जब तक तुम "देव"से 'मानव"नहीं हो जाते ===== मोहिंदर कुमार ... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   1:55pm 1 Jun 2013 #
Blogger: mohinder
पेट की आग धकेलती है गांव की अमराई से बाहर खेतों की हरियाली से परे कंकरीट के जंगलों में हर उस दोपाये को जिसके मन में आस होती है झोंपडी को घर बनाने की जमीन से उठ चारपाई तक आने कीबच्चों को मजदूरी से पढाई तक लाने की और इसी दिन का नया सूरज देखने की चाह भटकाती है उसको तारकोल और क... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   5:08pm 9 Feb 2013 #
Blogger: mohinder
क्या है वह जो एक पल मेंमानव को दानव बना देता हैआंखों पर पट्टी बांध करअक्ल पर पर्दा गिरा देता हैपल भर के उन्माद मे लिप्त होजीवन भर का किया धरा खो तय की गई हदें पार करता हैनिज स्वप्नों का संहार करता हैमानवता के सभी मुल्यों को भुलानोचता है निरीह चिडिया के पंख सालता रहता है ... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   9:59am 27 Dec 2012 #
Blogger: mohinder
हादसा हम भी भूले होते गर न याद दिलाते लोगहोश न खोते हम अपने गर न जाम पिलाते लोगजीत है क्या और हार है क्या हमें खबर न होतीकदम कदम पर गर यूं न बिसात विछाते लोगेहम तो जाने सब हैं बराबर छोटा बडा कोई नहींअच्छा होता गर न नाम से पहले जात बताते लोगमाटी से उपजे हैं हम तो माटी में मि... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   6:19am 14 Dec 2012 #
Blogger: mohinder
मित्रो, मेरा पहला कविता संग्रह "दिल का दर्पण" प्रकाशित हो चुका है.  यह नीचे दिये लिन्क पर ओन लाईन उपलब्ध है.   http://www.infibeam.com/Books/dil-ka-darpan-mohinder-kumar/9789381394212.html   इस पुस्तक पर आपकी प्रतिक्रिया से मेरे लेखन को एक नई दिशा मिलेगी. आपका मोहिन्दर कुमार ... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   4:44pm 10 Oct 2012 #
Blogger: mohinder
मित्रो,मेरा पहला कविता संग्रह "दिल का दर्पण" प्रकाशित हो चुका है.  यह नीचे दिये लिन्क पर ओन लाईन उपलब्ध है.   http://www.infibeam.com/Books/dil-ka-darpan-mohinder-kumar/9789381394212.html इस पुस्तक पर आपकी प्रतिक्रिया से मेरे लेखन को एक नई दिशा मिलेगी.आपकामोहिन्दर कुमार... Read more
clicks 81 View   Vote 0 Like   4:44pm 10 Oct 2012 #
Blogger: mohinder
 मेरा पहला कविता संग्रह "दिल का दर्पण" प्रकाशन के अन्तिम चरण में है और शीघ्र ही आप सब के समक्ष होगा. सूचनार्थ.... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   4:33pm 19 Sep 2012 #
Blogger: mohinder
हंसी मिली है इस धरा सेखुशी मिली है इस धरा सेचांद पर कहो क्या धरा हैआदमी कहो तो सरफ़िरा हैनजर गडाये हर दिशा मेंजमीं तलाशता है हवा मेंचढा जीतने का बस नशा हैआदमी कहो तो सरफ़िरा हैतराशते हैं जो हर नगर कोसंवारते हैं जो हर शहर कोगंदी बस्तियां उनका जहां हैआदमी कहो तो सरफ़िरा हैव... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   5:16pm 10 Apr 2012 #कविता
Blogger: mohinder
फ़लक पे तन्हा चांद थाऔर जमीं पर हम रहेन उसने कुछ कह सकाऔर हम भी चुप रहेलग रहा था वो मुझेकुछ उदास उदास सागर्दिशों की चपेट मेंथका थका सा मुझेसोचा उससे पूछ लूउसके दिल की दास्तांकि कौन दर्द पाल करफ़िर रहा वो यहां वहांसवाल सुन वो मेराहंस दिया फ़िकी हंसीरात भी सिहर गईइक सर्द सी... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   4:29pm 30 Mar 2012 #कविता
Blogger: mohinder
कैसे पिया संग पहली रात कटीहम से सच सच कह बात सखीहाये आती मुझ को लाज बडीकहूं कैसे उस पल की बात सखीन ले लाज शर्म की आड अभीहम से सच सच कह बात सखीथी फ़ूलों की सेज सजाये रखीहम बैठे उस पर सकुचाये सखीथी थकन और आंखों में नींद भरीथा मन कई स्वप्न सजाये सखीआहट पर धडकन बढ जाये रहीसोच पि... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   11:29am 24 Mar 2012 #कविता
clicks 81 View   Vote 0 Like   6:20pm 25 Feb 2012 #
Blogger: mohinder
बीते युग में लक्ष्मण द्वारा खिंची रेखा के भीतर से अस्वीकार किया था रावण ने भिक्षा का लेना और रेखा से बाहर आकर सीता ने बंदिनी बन विरह भोगा आज के युग में गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन हेतु आवश्यक रोटी, कपडा और छत के लिये तरसती भीड बदल देती है मायने "बंधी हुई भिक्षा" के जो इ... Read more
clicks 61 View   Vote 0 Like   4:18pm 4 Feb 2012 #
Blogger: mohinder
बीते युग मेंलक्ष्मण द्वारा खिंची रेखा के भीतर सेअस्वीकार किया था रावण नेभिक्षा का लेनाऔर रेखा से बाहर आकरसीता ने बंदिनी बन विरह भोगाआज के युग मेंगरीबी की रेखा के नीचेजीवन यापन हेतु आवश्यकरोटी, कपडा और छतके लिये तरसती भीडबदल देती है मायने"बंधी हुई भिक्षा" केजो इस... Read more
clicks 110 View   Vote 0 Like   4:18pm 4 Feb 2012 #कविता
Blogger: mohinder
बंद पलकेंऔर जागते सपने मेरा संसार ============= छुआ उसनेजाने क्या सोच करपुलकित मैं ============= घडी के कांटेटिक टिक टिक टिकबीता जीवन ============== निगला कौनअंतिम पहर उससोते चांद को ============== धूप जलातीया है शीतल करतीवहा पसीना =============== नम नयनव होठों पर कंपनकथित मौन =============== आ भी जा अबताक पर रख सबवक्त ... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   3:30pm 10 Jan 2012 #हाईकू
clicks 56 View   Vote 0 Like   1:31pm 26 Nov 2011 #
Blogger: mohinder
जीवन की ढलान परअन्तिम पडाव के समीपअकेले चलते चलतेमुझे तुम आज भी याद होचाहे व शुन्य सी शान्ति थीचाहे ट्रेफ़िक और भीड का शोरगुलअनचाहे प्रश्नों की बौछार थीया स्वय़ उच्चारित उत्तरमुझे तुम आज भी याद होशायद नजर धुंधला गई हैया फ़िर राह पर कोई नही हैये किसकी परछाईं है जोसोते ज... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   3:13pm 9 Nov 2011 #कविता
Blogger: mohinder
दीप जलेगा हर घर जिस दिन हर चौके में होगा जब दलहन हर सर पर होगा जब छत का साया और पैबंद न होगा पहरावे में सच में, दिवाली तो तभी मनेगी साक्षरता तक होगी जब पहुंच सभी की बाल मजदूरी जब होगी भूत का किस्सा मिलेगा जब सबको अपना हिस्सा चौराहों पर जब न भूख देखेगी सच में, दिवाली तो तभी मन... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   4:22pm 22 Oct 2011 #कविता
Blogger: mohinder
मेरे इस प्रयास पर आपकी टिप्पणी की प्रतिक्षा रहेगी... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   8:41am 28 Aug 2011 #गजल
Blogger: mohinder
ऐ बादलक्या किसी विरहन के ह्र्दय का ताप है तूया किसी प्रेमी के असुअन की भाप है तूऐ बादलक्या नीर से प्रीत है तेरीया बूंदों से बैर है तेराकिस चातक की प्यास है तूऐ बादलमरू हैं तेरी बाट जोहतेतू बरसता किसी ताल परकब जानेगा किस किस की आस है तूऐ बादलउमढ घुमड कर नभ पर छा जाता हैफ़ि... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   9:54am 4 Aug 2011 #कविता

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