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Blog: saMVAdGhar संवादघर

Blogger: Sanjay Grover
ग़ज़लउनकी ख़ूबी मुझे जब ख़राबी लगीउनको मेरी भी हालत शराबी लगीउम्र-भर उनके ताले यूं उलझे रहेवक़्त पड़ने पे बस मेरी चाबी लगीउनके हालात जो भी थे, अच्छे न थेउनकी हर बात मुझको क़िताबी लगीउनके पोस्टर पे गांधीजी चस्पां थे परउनके गुंडों की नीयत नवाबी लगीमिलना-जुलना मुझे उनका अ... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   1:19pm 24 Jan 2018 #ghazal
Blogger: Sanjay Grover
गज़ल                                                                                                          सुबह देर तक सोने काआज का दिन था रोने का             09-05-2017मिला वक़्त जब सोने कावक़्त था सुबह होने कामाफ़िया कह ले पागल ... Read more
clicks 323 View   Vote 0 Like   9:24am 12 Jan 2018 #poem
Blogger: Sanjay Grover
ग़ज़लआसमानों से दूर रहता हूंबेईमानों से दूर रहता हूंवो जो मिल-जुलके बेईमानी करेंख़ानदानों से दूर रहता हूंअसलियत को जो छुपाना चाहेंउन फ़सानों से दूर रहता हूंहुक़्म उदूली करुं,नहीं चाहताहुक़्मरानों से दूर रहता हूंमुझमें सच्चाईयों के कांटें हैंबाग़वानों से दूर रहता ह... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   4:25pm 4 Jan 2018 #poetry
Blogger: Sanjay Grover
 ग़ज़लये शख़्स कितना पुराना है, बुहारो कोईअभी भी चांद पे बैठा है, उतारो कोईदिलो-दिमाग़ में उलझा है, उलझाता हैइसकी सच्चाई में सलवट है, सुधारो कोईपत्थरों से न करो बोर किसी पागल कोसर में सर भी है अगर थोड़ा तो मारो कोईये तेरी ज़ुल्फ़ है, ख़म है कि है मशीन कोईहो कोई रस्ता तो रस्ते मे... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   11:14am 23 Dec 2017 #moon
Blogger: Sanjay Grover
पहले वे यहूदियों के लिए आएमैं वहां नहीं मिलाक्योंकि मैं यहूदी नहीं थाफिर वे वामपंथियों के लिए आएमैं उन्हें नहीं मिलाक्योंकि मैं वामपंथी नहीं थावे अब संघियों के लिए आएमैं नहीं मिलाक्योंकि मैं संघी नहीं थावे आए मंदिरों में, मस्ज़िदों में, गुरुद्वारों मेंउन्होंने कोन... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   10:47am 22 Sep 2017 #इंसान
Blogger: Sanjay Grover
ग़ज़लें1.फिर ख़रीदी तुमने मेरी ई-क़िताबमुझको ख़ुदसे रश्क़ आया फिर जनाब06-09-2017वाह और अफ़वाह में ढूंढे है राहमुझको तो चेहरा तेरा लगता नक़ाबजिसने रट रक्खे बुज़ंुर्गोंवाले ख़्वाबउसकी समझो आसमानी हर क़िताबख़ाप ताज़ा शक़्ल में फिर आ गईजो है लाया उससे क्या पूछें हिसाबफिरसे ख़ास हाथों... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   8:02am 7 Sep 2017 #ebook
Blogger: Sanjay Grover
नया हास्य                                                                                                                                                                                          एक दिन पड़... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   7:35am 14 Jul 2017 #Facebook
Blogger: Sanjay Grover
ग़ज़लभीड़ जब ताली देती है हमारा दिल उछलता हैभीड़ जब ग़ाली देती है हमारा दम निकलता हैहमीं सब बांटते हैं भीड़ को फिर एक करते हैंकभी नफ़रत निकलती है कभी मतलब निकलता हैहमीं से भीड़ बनती है हमीं पड़ जाते हैं तन्हामगर इक भीड़ में रहकर बशर ये कब समझता हैवो इक दिन चांद की चमचम के आगे ईद-क... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   7:44am 27 Jun 2017 #contemplation
Blogger: Sanjay Grover
व्यंग्यमहापुरुषों को मैं बचपन से ही जानने लगा था। 26 जनवरी, 15 अगस्त और अन्य ऐसेे त्यौहारों पर स्कूलों में जो मुख्य या विशेष अतिथि आते थे, हमें उन्हींको महापुरुष वगैरह मानना होता था। मुश्क़िल यह थी कि स्कूल भी घर के आसपास होते थे और मुख्य अतिथि भी हमारे आसपास के लोग होते थे... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   11:17am 12 Mar 2017 #great
Blogger: Sanjay Grover
परसों जब मैं अपने ब्लॉग नास्तिक TheAtheistकी अपनी एक पोस्ट ‘मनुवाद, इलीटवाद और न्याय’ के पृष्ठ पर गया तो देखा कि उसमें पाठकों के सवालों व राजेंद्र यादव के जवाबों से संबंधित लिंक काम नहीं कर रहा। क्लिक किया तो पता लगा कि संबंधित साइट देशकाल डॉट कॉम से यह स्तंभ ही ग़ायब है, मे... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   12:09pm 17 Feb 2017 #dishonesty
Blogger: Sanjay Grover
ग़ज़ल                                                                                    इस मुसीबत का क्या किया जाएबात करने न कोई आ जाएबात करने जो कोई आ जाएकुछ नई बात तो बता पाएमौत से पहले मौत क्यूं आएअपनी मर्ज़ी का कुछ किया जाएजिसको सच बोलना ... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   7:08am 4 Feb 2017 #different
Blogger: Sanjay Grover
ग़ज़ल                                                                                                                                                              मैं से हम होते जाओमांगो, मिलजुलकर खाओसुबह को उठ-उठकर ... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   8:32am 11 Jan 2017 #formless
Blogger: Sanjay Grover
लघुकथामैंने सोचा किसीसे असलियत पता लगाऊं।मगर चारों तरफ़ सामाजिक, धार्मिक, सफ़ल, महान और प्रतिष्ठित लोग रहते थे।फिर मुझे ध्यान आया कि असलियत तो मैं कबसे जानता हूं।-संजय ग्रोवर05-10-2016... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   3:37pm 5 Oct 2016 #fan
Blogger: Sanjay Grover
ग़ज़लय़क़ीं होता नहीं थाकभी सोचा नहीं था19-08-2016सफ़र अच्छा ही ग़ुज़राकहीं जाना नहीं था25-08-2016लगी तन्हाई बेहतरकोई परदा नहीं था26-08-2016बड़ा या छोटा, कुछ भी-मुझे ‘बनना’ नहीं था27-08-2016न अब डर है न चिंता,क्यूं तब सूझा नहीं था07-09-2016-संजय ग्रोवर... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   8:55am 7 Sep 2016 #literature
Blogger: Sanjay Grover
कवितामैंने उन्हें दुनिया के बारे में बतायावे सोचने लगेदुनिया ने उन्हें मेरे बारे में बतायावे मान गए-संजय ग्रोवर17-07-2016... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   2:24pm 17 Jul 2016 #friends
Blogger: Sanjay Grover
मुर्दाघर की रौशन दुनिया कर देंगेतुम जागे तो मुर्दे हत्या कर देंगेलाशें, मोहरे, कठपुतली या भाषणबाज़बड़ा बनाकर तुमको क्या-क्या कर देंगेठगों के झगड़ों में क्या सच क्या झूठ भलाये तो बस हर रंग को मैला कर देंगेतुम सोचोगे तुम्हे प्रकाशित कर डालाचारों जांनिब घुप्प अंधेरा कर दे... Read more
clicks 242 View   Vote 0 Like   10:39am 28 Mar 2016 #hypocritical
Blogger: Sanjay Grover
व्यंग्यविश्वगुरु बनने का एक ही तरीक़ा है- दूसरे सभी देशों को अपने देश से भी बुरी स्थिति में ले आओ।इसके लिए आवश्यक है कि-दुनिया में ज़्यादातर देश खाने-पीने में मिलावट शुरु कर दें।किसी भी देश में बिना दहेज के लड़कियों की शादी न हो पाए।सभी देशों के लोग अच्छे काम करना बंद कर ... Read more
clicks 268 View   Vote 0 Like   9:23am 9 Mar 2016 #movements
Blogger: Sanjay Grover
मालिक़ के जैसा होने में उसको आराम है अब पता चला ग़ुलाम क्यों ग़ुलाम हैमुर्दों के जैसी ज़िंदगी चुनते हैं बार-बारफिर पूछते हैं क्यों यहां जीना हराम हैऊंचाईओं की चाह को मरना ही एक राहअब मर ही गए हो तो देखो कितना नाम है10-02-2016जब काम नहीं था तो मैं बारोज़गार थाफिर छोड़ दिया उसको मुझ... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   8:50am 16 Feb 2016 #ghazal
Blogger: Sanjay Grover
‘हम तुम्हे मंदिर में नहीं घुसने देंगे’ वे बोले मैं हंसाकुछ वक़्त ग़ुज़राकई लोग हंसने लगेवे फ़िर आए और बोले-‘हम तुम्हे मंदिर पर हंसनेवालों में शामिल नहीं करेंगे’मैं हंसाकुछ वक़्त और ग़ुज़राऔर कई लोग हंसेवे फिर चले आएअबके बोले ‘हमसे घृणा मत करो’मैं हंसाबोले-‘घृणा पर ह... Read more
clicks 227 View   Vote 0 Like   8:40am 23 Jan 2016 #funny
Blogger: Sanjay Grover
व्यंग्यकई लोग, बहुत सारे लोग कहते हैं कि हम तो भई दिल से जीते हैं।मेरा मन होता है कि इन्हें ले जाकर सड़क पर छोड़ दूं कि भैय्या, लेफ़्ट-राइट देखे बिना, दिमाग़ का इस्तेमाल किए बिना, ज़रा दिल से चलकर दिखाओ तो।क्या ये लोग महीने के आखि़री दिन अपनी तनख़्वाह बिना गिने ही ले आते होंगे !? क... Read more
clicks 252 View   Vote 0 Like   12:43pm 5 Jan 2016 #senseless
Blogger: Sanjay Grover
ग़ज़लवो महज़ इक आदमी है बसऔर उसमें क्या कमी है बसउम्रे-दरिया के तजुर्बों परअब तो काई-सी जमी है बसआंसुओं का बह चुका दरियाआंख में थोड़ी नमी है बसहर बरस आता है इक तूफ़ांजोश सारा मौसमी है बसइन डरे लोगों के हिस्से मेंइक मरी-सी ज़िंदगी है बस-संजय ग्रोवर... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   3:38am 23 Dec 2015 #music
Blogger: Sanjay Grover
ग़ज़ल ज़िंदगी की जुस्तजू में ज़िंदगी बन जाढूंढ मत अब रोशनी, ख़ुद रोशनी बन जारोशनी में रोशनी का क्या सबब, ऐ दोस्त!जब अंधेरी रात आए, चांदनी बन जागर तक़ल्लुफ़ झूठ हैं तो छोड़ दे इनकोमैंने ये थोड़ी कहा, बेहूदगी बन जाहर तरफ़ चौराहों पे भटका हुआ इंसान-उसको अपनी-सी लगे, तू वो ग... Read more
clicks 256 View   Vote 0 Like   1:54pm 17 Dec 2015 #ghazal
Blogger: Sanjay Grover
ग़ज़लख़ुदको फिर से खंगालते हैं चलो,आज क़ाग़ज़ संभालते हैं चलोगर लगे, हो गए पुराने-सेख़ुदको रद्दी में डालते हैं चलोक्यूं अंधेरों को अंधेरा न कहारौशनी इसपे डालते हैं चलोज़हन जाना तो मार डालोगेबात को कल पे टालते हैं चलोसुन न पाओगे, कह न पाएंगेएक फ़ोटो निकालते हैं चलोआदमी जैसी ... Read more
clicks 256 View   Vote 0 Like   4:05pm 2 Dec 2015 #paper
Blogger: Sanjay Grover
पुरस्कार क्यों लिए-दिए जाते हैं, इसपर किसीने भी सवाल नहीं उठाया, कोई उठाएगा इसकी उम्मीद भी न के बराबर ही है।इस देश में लेखकों की रचनाएं, संपादक और प्रकाशक, चाहे वे वामपंथीं हों या संघी, किस आधार पर छापते हैं, इसपर भी सवाल कम ही उठते हैं, कम ही उठेंगे।यह सवाल भी नहीं उठा कि ए... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   1:45pm 19 Oct 2015 #hypocrisy
Blogger: Sanjay Grover
ग़ज़लबिलकुल ही एक जैसी बातें बोल रहे थेवो राज़ एक-दूसरे के खोल रहे थेतहज़ीब की तराज़ू भी तुमने ही गढ़ी थीईमान जिसपे अपना तुम्ही तोल रहे थेअमृत तो फ़क़त नाम था, इक इश्तिहार थाअंदर तो सभी मिलके ज़हर घोल रहे थेवो तितलियां भी तेज़ थीं, भंवरे भी गुरु थेमिल-जुलके, ज़र्द फूल पे जो डोल रहे ... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   5:03pm 12 Oct 2015 #ghazal


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