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Blog: वृद्धग्राम

Blogger: harminder singh
हमारी तैयारी पूरी थी। मैं, मेरा भाई और पिताजी ही दिल्ली घूमने जाने वाले थे। मां वैसे भी घूमने का शौक नहीं रखतीं। वे वे कहती भी थीं कि दिल्ली तो महज सौ किलोमीटर है, घूमना है तो राजस्थान चलो, पंजाब चलो। मैंने कहा कि देश की राजधानी में लाल किला, कुतुब मीनार, जामा मस्जिद, संसद ... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   8:34am 31 May 2016 #
Blogger: harminder singh
उतरे हैं, ढंग अजीब,मगर शातिर बड़े हैं,पैनापन लिये, औरउतावले भी,चलो आज कुछकमाल करते हैं,लड़ते हैं किसी से,या खुद से उलझते हैं,हां, शब्द हैं,शब्दों की आदत जो है,चुप नहीं हैं,इतरायेंगे,जलेंगे, बुझेंगे,बुझकर जलेंगे,जलते जायेंगे,रोशनी होगी,सवेरा भी,क्या करें शब्द हैं,हम भी बुन... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   4:13am 31 May 2016 #
Blogger: harminder singh
मैं उसे शुरुआत कह सकता हूं जिस वजह से मैंने नौकरीपेशा जीवन के अहम पहलुओं को करीब से देखा। ऐसे मौके प्रायः कम होते हैं जब आप नये दौर के लिए तैयार हो रहे होते हैं। मैं उस दिन दुविधा में भी था, और दूसरी तरफ खुश भी, क्योंकि मेरा एक मित्र मनीष भी उसी जगह अपने करियर का प्रारंभ कर ... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   9:42am 29 Apr 2016 #talks
Blogger: harminder singh
मोगली को दूरदर्शन पर देखने को मैं और मेरा भाई बेताब रहते थे। पड़ोस के कई दोस्त भी उस रोमांच में शरीक हो जाते थे। मनू और विनू तो पागल थे। टीवी देखते हुए अकसर सीढ़ियां चढ़ते हुए विनू फिसल जाता था। पता नहीं वह ऐन वक्त पर ही क्यों पहुंचता था। इसलिए उसे घर से तेज दौड़कर आना पड़ता था... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   3:57pm 2 Apr 2016 #talks
Blogger: harminder singh
प्रिय तनु,यादों को बहुत संजोने की कोशिश की है। समझ नहीं आता उन्हें कहां रखूं। ऐसी कोई संदूक नहीं जहां वे बंद की जा सकें। ऐसा मुझे क्यों कहना पड़ रहा है, मैं नहीं जानता। जानता हूं बस कि जो मन में है, कह रहा हूं। ओर या छोर की बात मैं नहीं करना चाहता क्योंकि जिंदगी बदल-बदल कर चल... Read more
clicks 187 View   Vote 0 Like   12:48pm 26 Feb 2016 #
Blogger: harminder singh
सुबह का मौसम सर्द भरा बिल्कुल नहीं था, जबकि नवंबर के महीने में मौसम बदलने लगता है। मेरी तैयारी कोई खास नहीं थी। मैं गजरौला के इंदिरा चौक तक पहुंचा। वहां से फाटक की तरफ पैदल चल पड़ा। ओवरब्रिज का काम पूरा साल के आखिरी तक होने की बात कही जा रही है। उसी कारण चौपला तक जाने वाला ... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   7:34am 18 Nov 2015 #safarnama
Blogger: harminder singh
किताबों को खरीदने की सोच रहा हूं. बहुत समय से कोई उपन्यास नहीं पढ़ा. किताबें पढ़ने के बाद आप खुलापन महसूस कर सकते हैं. मैं नहीं जानता कि हर किसी के साथ ऐसा होता होगा, लेकिन मेरे साथ ऐसा ही है. किताबों की एक नई शेल्फ बनवाने की मैंने सोच रखी है. उसका डिजाइन मेरे दिमाग में घूम रहा... Read more
clicks 210 View   Vote 0 Like   2:00pm 22 Oct 2015 #talks
Blogger: harminder singh
उथलपुथल भरा संगीत, चुभन और हंसी,मिश्रित भावनायें पेड़ से उल्टी टंगी,चीरती आवाजें कहीं किसी कोने में,भिन-भिन सी धुनें चकरायी हुईं,यह भ्रम है, हां यह भ्रम है,सोच-विचार और लहरों की बनावट,उफनती बातों का गोता,हार-जीत का संयोग,और ढेरों चिट्ठियों के बीच मैं,मेरी उम्र जो अब ढल रही... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   1:15pm 8 Oct 2015 #old age
Blogger: harminder singh
किनारे पर खड़ा होकर जिंदगी की परछाईयों को निहार रहा हूं. बुढ़ापे में तो परछाईयां भी काटने को दौड़ती हैं -ऐसा सभी कहते सुने हैं. मैं भी थोड़ा हंस देता हूं, थोड़ा मुस्कान बिखेर देता हूं. झुर्रियों वाले चेहरे में सिलवटों में जगह है; रोशनी वहां सिमटी हुई है. उधेड़बुन तो बनी रहती है, ... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   5:48am 10 Sep 2015 #life
Blogger: harminder singh
बोलते हुए शब्दों की परछाईं भी इतराती है,फड़कती है तंग गलियों में बहारें,मालूम है तेरी जादूगरी जो मुमकिन है,किस्मत पर यकीन है मुझे,बदल रही तस्वीर जिंदगी की,शब्दों में उलझी कहानी नयी नहीं,उम्र जो बढ़ रही,मौत के आगोश में जाने को बेताब कोई।-हरमिन्दर सिंह चाहल.... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   1:15pm 19 Aug 2015 #old age
Blogger: harminder singh
उम्रदराज दोस्त खूब ठहाका लगाते हैं। उनकी हंसी भी जवानों की तरह ही सुकून पहुंचाती है। वे भी उस समय खुद को भूल जाते हैं। बुढ़ापा हालांकि उतना हंसता नहीं, उतना मुस्कराता नहीं। वह सोचता अधिक है। वह खोया भी रहता हैं कहीं। उसे हम उतना गुमसुम नहीं कह सकते। वैसे भी जीवन के अध्या... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   11:08am 2 Aug 2015 #happiness
Blogger: harminder singh
हवायें रूखी हैं,गीलापन कहीं उतर गया,चादरों को ओढ़कर सोने वाले,शाखाओं पर हरियाली संभाल रहे.जिंदगी खो गयी कहीं,किसी कोने से मद्धिम आवाज आ रही,फैला हुआ झुगमुगा उतरता नहीं दिखता,हंसी उजड़ गयी.पत्तों की परतें मिट रहीं,गुमसुम बैठने की आदत है,भूलता जा रहा बहुत कुछ,सन्नाटा पसर र... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   4:13am 6 Jul 2015 #kavita
Blogger: harminder singh
‘नैनहु नीर बहै तन खीना, केस भये दुध बानी,रुंधा कंठ सबद नहीं उचरै, अब क्या करै परानी।’भक्त कवि भीखन ने इन दो पंक्तियों में वृद्धावस्था का बहुत ही सटीक चित्र खींचा है। वे स्पष्ट करते हैं कि नेत्रों से अश्रुधारा बह रही है, शरीर क्षीण हो चुका है, केश दूध की तरह सफेद हो चुके, बो... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   12:37pm 26 Jun 2015 #old age
Blogger: harminder singh
परिवार के सदस्य उम्रदराजों के लिए वक्त निकालें तो बुढ़ापा कम झंझट और तनाव के कट सकता है. हम जानते हैं कि वृद्धावस्था वह मौसम है जब पतछड़ होता है, समय अपना नहीं रहता, वक्त थका देता है और जिंदगी अपनी नहीं लगती. ऐसे समय में यदि अपनों का साथ न हो तो स्थिति अच्छी नहीं रह जाती.अपनो... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   1:05pm 13 Jun 2015 #love
Blogger: harminder singh
इंतजार करुंगा उसके आने का,खुद पर छाने का,दौड़ता है खून रगों में,थकान कहां आती है,इतराता हूं जमकर,चंचलता रंग लाती है,इंतजार करुंगा उसके आने का,खुद पर छाने का...सुना है वह आता है,फिर कभी न जायेगा,तब चुप्पी साध लूंगा,कौन मौन तोड़ पायेगा,इंतजार करुंगा उसके आने का,खुद पर छाने का...ओ... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   12:34pm 12 Jun 2015 #उम्रदराजी
Blogger: harminder singh
प्यारे बेटे,मैं उदास हूं. समझ नहीं पा रहा कि जिंदगी में ऐसे उतार-चढ़ाव क्यों आते हैं? मेरे प्रश्न ढेरों हैं. तुम्हारी मां कहा करती थी कि बेटे इकलौते हों तो कोई परवाह नहीं करनी चाहिए. वह गलत नहीं थी, लेकिन उसने शायद बुढ़ापा नहीं देखा. वह पहले ही हमसे विदा ले गयी. जानता हूं मैं क... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   1:33pm 11 Jun 2015 #बुढ़ापा
Blogger: harminder singh
बुड्ढ़ा सोचता है कि वो क्यों नहीं मरता ?इतने कष्टों  के बाद भी वो  ज़िंदा  क्यों है ?दिखाई नहीं देता, सुनाई  नहीं देता, हज़ारों कष्ट ..ईश्वर  भी भूल गया है, काश उठा ले  अब ..तीमारदार भी  सोचता है  कि ये बुड्ढ़ा क्यों नहीं मरता ?बस जीता  जा रहा है बेवजह, न काम का, न काज का, ... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   5:15am 11 Jun 2015 #kavita
Blogger: harminder singh
मौसम रुठा, देह थकान लिए,चीरती गर्मी का दानव,अट्टाहस जिंदगी का,मंद-मंद, मंथरता सेनींद सी पगडंडियों सेगुजरता बूढ़ा।चमड़ी झुलस गयी,हांफ रहा वह,रुका तो थमेगापैर नंगे ही सही,जलन सरसरी दौड़ा रहीतलबे से दिमाग तक।ठिकाना बना नहींपेड़ की ओट सहीहरियाली ठंडक ला रहीवहां सूखा हैकाया ... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   12:29pm 3 Jun 2015 #life
Blogger: harminder singh
सोच रहा जिंदगी कैसी है,क्या उड़ने वाले बादलों जैसी है,झोंका हवा का हो सकता है,आंधी-तूफान में कोई भी खो सकता है,अपनापन समेटे हुए लोग मिलेंगे,अनगिनत चेहरे कितना कुछ कहेंगे,अधूरा नहीं कोई ख्वाब यहां है,खुलकर जीने का जहां है,उम्र पड़ाव को पार करती दिख जायेगी,अंतिम सांस तक जिं... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   12:50pm 1 Jun 2015 #life
Blogger: harminder singh
बुढ़ापे की कहानी हैरान कर देती है। यहां दशा ऐसी हो जाती है चीजें लगभग अपने हाथ में नहीं रहतीं। छड़ी का सहारा लिए जब उस वृद्ध व्यक्ति को मैंने देखा तो मेरे भीतर कुछ उथलपुथल हुई। मैं लंबी सोच में पड़ गया। सोचने लगा कि बुढ़ापा आखिर इतना निर्दयी क्यों है? बचपन में हम कितने मासूम ... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   12:55pm 27 May 2015 #life
Blogger: harminder singh
बूढ़े अक्षरों की बनावट कहानी कह रही,दास्तान अजीब है,खुरदरापन लिए चेहरे,हाथों में नमीं नहीं,ढहने को विवश लोग,बर्तन दर्द से भरे,हंसी तो मानो गायब है।उम्र है ऐसी,बातें हैं ऐसी,तन्हाई का दौर है,सिमट रहा कोई,अकेलापन घेर रहा,वह मैं हूं,हां मैं ही।सजावट नहीं रही बाकि,रुलता भी ह... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   1:44pm 24 May 2015 #उम्र
Blogger: harminder singh
बूढ़े अक्षरों की बनावट कहानी कह रही,दास्तान अजीब है,खुरदरापन लिए चेहरे,हाथों में नमीं नहीं,ढहने को विवश लोग,बर्तन दर्द से भरे,हंसी तो मानो गायब है।उम्र है ऐसी,बातें हैं ऐसी,तन्हाई का दौर है,सिमट रहा कोई,अकेलापन घेर रहा,वह मैं हूं,हां मैं ही।सजावट नहीं रही बाकि,रुलता भी ह... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   1:44pm 24 May 2015 #उम्र
Blogger: harminder singh
बिजनौर रेलवे स्टेशन पर रेलगाड़ी रुकी। बारिश बहुत तेज थी। डिब्बे में बैठकर उसका एहसास नहीं किया जा सकता था, लेकिन खिड़की तक आते-आते बहुत कुछ समझ आ रहा था। मैं दौड़कर प्लेटफ़ॉर्म के टिन शैड के नीचे खड़ा हुआ। कुछ दूरी पर टैंपो, रिक्शे आदि सवारियों का इंतजार कर रहे थे। पैदल चलना ... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   5:06pm 23 May 2015 #gajraula
Blogger: harminder singh
‘उम्र से मैंने बहुत सीखा है। वक्त के साथ मैं सीखती गयी। अनगिनत पड़ावों को पार किया और अनुभव ढेरों उपजाये।’ बूढ़ी काकी बोली।मैंने काकी से पूछा,‘बुढ़ापे की कभी ख्वाहिश थी?’काकी मुस्करायी। मेरी ओर देखा। आंखों को पूरी तरह खोलना चाहा, लेकिन वह नामुमकिन था। उसने धुंधली होती आ... Read more
clicks 178 View   Vote 0 Like   4:02pm 21 May 2015 #life
Blogger: harminder singh
जिंदगी की खुली किताब है,अक्षरों का बिखराव है,सजीवता का साथ है,उम्र का हिसाब है,मन बोल रहा,तन डोल रहा,कांपते हाथ बिना थके,कदम लड़खड़ाये बिना रुके,हिसाब मांग रही जिंदगी,ये कैसी बंदगी,क्यों बुढ़ापा है हैरान,क्यों इतना परेशान,लेकिन हौंसला रखता हूं,उम्र का स्वाद चखता हूं,विदाई ... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   12:44pm 20 May 2015 #life

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