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Blog: नमस्ते namaste

Blogger: noopuram
किताबें ..झकझोरती हैं,नींद से जगाने के लिए ।कचोटती हैं,ग़लतियों के लिए ।झगड़ती हैं,हमारे पूर्वाग्रहों से ।चुनौती देती हैं,अपना मुस्तकबिलखुद गढ़ने के लिए ।कुरेदती हैं, दिल की दीवारों पर जमी काई को ।किताबों से कुछ नहीं छुपा ।किताबों को ही चलता है पता  । चुपके से टपका आ... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   6:46am 26 Apr 2019
Blogger: noopuram
अनायास ही,हाथ से छूट गई !छन्न से टूट गई,मेरी प्रिय चूड़ी !हा कर ताकती रह गई ..कुछ ना कर सकी !क्या फिर से जुड़ सकेगी चूड़ी जो टूट गई ?क्या दिल भी टूटते हैं यूँ ही ?क्या स्वप्न भी   चूर-चूर होते हैं ऐसे ही ?टूट कर जुड़ते भी हैं कभी ?पता नहीं.बाबा रहीम तो कहते हैं यही ..टूटे से फिर ना... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   7:21am 17 Apr 2019
clicks 110 View   Vote 0 Like   2:07am 14 Apr 2019
clicks 30 View   Vote 0 Like   2:07am 14 Apr 2019
Blogger: noopuram
"जीवन से लम्बे हैं बंधु , इस जीवन के रस्ते  .. "सुरम्या ने अपना चहेता गीत इतने दिनों बाद सुना तो वॉल्यूम बढ़ा दिया। मन्ना दा का गाया यह गीत जब से सुना था, तब से ही ना जाने क्यों बहुत अपना लगता था। अपना शहद-नीबू पानी का गिलास लेकर सुरम्या खिड़की के पास बैठ गई। खिड़की के पास लगे का... Read more
clicks 76 View   Vote 0 Like   7:40am 9 Apr 2019
Blogger: noopuram
बारिश रुक गयी थी । पर बादल थे । और ठंडी बयार बह रही थी । चाची ने बेसन की गरम-गरम पकौड़ियाँ बनायीं थीं । सारे के सारे चचेरे भाई-बहन गुट बना कर  बाहर बरामदे में बैठे हुए थे । अनुभा जो इन सब में  बड़ी थी, अभी-अभी अदरक वाली चाय बना कर ले आई थी । चाय ही नहीं, बातों और गप्पों की भी... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   10:05am 3 Apr 2019
Blogger: noopuram
Workers cleaning the guttersWithout the safety gearsDied of poisonous gases.Cried the bold headlines.We the moral custodiansWe the conscientiousWe the sympathetic righteousShed thought-provoking tears.Blamed the insensitive partiesAnd debated the dubious ethics.While we hurled accusationsAnd became moral champions.Three young students set to workTo figure out practical solutions.They have finally devised an option.To replace human scavengersWith affordable robotic scavengers.We just found fault with the system.They simply solved the problem.Now it's our turn again to seek justice.Insist on getting the idea implemented.If opportunities come disguised as problems..Then here is a mighty challen... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   5:19am 2 Apr 2019
Blogger: noopuram
Workers cleaning the guttersWithout the safety gearsDied of poisonous gases.Cried the bold headlines.We the moral custodiansWe the conscientiousWe the sympathetic righteousShed thought-provoking tears.Blamed the insensitive partiesAnd debated the dubious ethics.While we hurled accusationsAnd became moral champions.Three young students set to workTo figure out practical solutions.They have finally devised an option.To replace human scavengersWith affordable robotic scavengers.We just found fault with the system.They simply solved the problem.Now it's our turn again to seek justice.Insist on getting the idea implemented.If opportunities come disguised as problems..Then here is a mighty challen... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   5:19am 2 Apr 2019
Blogger: noopuram
तुम सरल जल की बूंद,ओस की बिंदी,अश्रु का मोती,निश्छल पारदर्शी ।क्षणभंगुर ..पर अमिट पावन स्मृतिक्षीर सम ।सूर्य रश्मि का परस पाकर बन जाती पारसमणि ।तुम कहींजाती नहीं ।विलय होती ।बन जाती अंतर्चेतना।सहसासमा जातीसहृदयपुष्प कीपंखुरियों में ।तुम निरीइक बूंद !बूंद में हीख... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   9:32am 27 Mar 2019
Blogger: noopuram
कड़वे अनुभवों की खर-पतवार कोसोच की उपजाऊ ज़मीन परजड़ें मत फैलाने देना ।इनकी कड़वाहट  जंगली बेल की तरहतेज़ी से चारों तरफ़फैल कर जकड़ लेती हैं ।अच्छे ख़यालात कोपनपने नहीं देती ।इसलिए हो सके तोनियम से इन्हेंउखाड़ फेंको ।अगर कुछ करना है ।अगर कुछ पाना है ।तो बहुत देर तककटुता को... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   12:52pm 24 Mar 2019
Blogger: noopuram
#विश्वकवितादिवस #WorldPoetryDay... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   5:41am 21 Mar 2019
Blogger: noopuram
#विश्वकवितादिवस #WorldPoetryDay... Read more
clicks 34 View   Vote 0 Like   5:41am 21 Mar 2019
Blogger: noopuram
नन्ही गौरैया आओ तुम ।अपना घर बसाओ तुम ।मेरे छोटे-से घर की छत का कोना, खिड़की,बालकनी, दुछत्ती, अहाता,सब बाट जोहते हैं तुम्हारी ।यहाँ घोंसला बनाओ ।दिन भर दाना चुगो ।प्यास लगे तो पानी पियो ।ये सब यहाँ मिलेगा ।और प्यार मिलेगा ।ज़्यादा कुछ नहीं,देने कोहमारे पास भी ।तुम्हें भी ... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   6:17pm 20 Mar 2019
Blogger: noopuram
नन्ही गौरैया आओ तुम ।अपना घर बसाओ तुम ।मेरे छोटे-से घर की छत का कोना, खिड़की,बालकनी, दुछत्ती, अहाता,सब बाट जोहते हैं तुम्हारी ।यहाँ घोंसला बनाओ ।दिन भर दाना चुगो ।प्यास लगे तो पानी पियो ।ये सब यहाँ मिलेगा ।और प्यार मिलेगा ।ज़्यादा कुछ नहीं,देने कोहमारे पास भी ।तुम्हें भी ... Read more
clicks 32 View   Vote 0 Like   6:17pm 20 Mar 2019
Blogger: noopuram
सही में यार !बहुत मुश्किल है !सही क्या ?ग़लत क्या ?इस सब की विवेचना ।कोई कितना करे ?और कब तक करे ?किंतु परंतु का कोईअंतिम छोर है क्या ?निष्कर्ष कैसे निकलेगा ?रेगिस्तान में जल दिखनातो छलना है ।मृगतृष्णा है ।क्षितिज जब तकदूर है,सबको मंज़ूर है ।नज़र का नूर है ।मगर पास गए अगरतो कु... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   2:48pm 17 Mar 2019
Blogger: noopuram
कोई दुख होता है ऐसाजो कभी भीकहते नहीं बनता। कविता में नहीं,कथा में नहीं,बंदिश में नहीं,रंगों में नहीं,बस चुपचाप बहता रहता हैभीतर कहीं,चौड़े पाट कीनदी की तरह ।तट कभी भी मिलते नहीं ।पर उम्मीद भीकभी टूटी नहीं ।अब भी लहरों में ढूंढती नाव केवट की,जो पार उतारतीप्रभु राम को... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   10:24am 12 Mar 2019
Blogger: noopuram
अभिमन्यु की वीरगति कभी भी व्यर्थ नहीं जाती। बलिदान की परिणति न्याय की स्थापना ही होती। यही इस देश की नीति .. समस्त विश्व से प्रीति पर युद्ध में चाणक्य नीति। विजय सदैव मानवता की क्यूंकि लक्ष्य केवल शांति ही। जवानों ने खूब निभाई ज़िम्मेदारी अब आई हर भार... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   5:03pm 8 Mar 2019
Blogger: noopuram
सीमा पर फ़ौजी तोहमेशा ही तैनात रहा।क्या हमें भी अपनेकर्तव्य का भान रहा ?युद्धहर जगह चल रहा है। युद्धहर कोई लड़ रहा है। कोई सीमा का प्रहरी है। कोई घर में युद्ध बंदी है। युद्ध की कोईसीमा है क्या ?युद्ध की कोईगरिमा है क्या ?भीतर हम सबके एक लक्ष्मण रेखा है। अपने सिव... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   10:00am 7 Mar 2019
Blogger: noopuram
आज बड़े दिनों बाद दिलों में जोश आया है। अर्जुन ने आज फिर गांडीव उठाया है। आज हवाओं ने झूम कर फ़ख्र का परचम लहराया है। आज नभ में शौर्य का प्रखर सूर्य जगमगाया है। बारह रणवीरों ने आज अभय का कर शंखनाद आतंक को ललकारा है !शठता को पछाड़ा है। जननी जन्मभूमि का, ... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   1:56pm 3 Mar 2019
Blogger: noopuram
जब तक होश है। रग-रग में जोश है। जिगर में जोश के बुलबुले नहीं ,जोश के जुगनू भी नहीं जो पलक झपकने तक ही मौजूद रहें। ये जो कौंधता है मेरे वजूद में ,बिजली की तरह  . . ये बरसों की तपस्या है। ठोकर खा-खा कर जो संभला है,आग में तप कर जो निखरा है,वो फ़ौलादी हौसला है। य... Read more
clicks 33 View   Vote 0 Like   6:24pm 27 Feb 2019
Blogger: noopuram
वक़्त पर मत चूकना इतना तैयार रहना ।करना निरंतर अभ्यासदिन-रात लक्ष्य साधना ।समय पर देती है साथकेवल अपनी साधना ।कर्म पर करना विश्वाससत्कर्म से स्वधर्म साधना ।वक़्त पर मत चूकना ।इतना तैयार रहना ।... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   5:58pm 18 Feb 2019
Blogger: noopuram
आई वसंत ऋतु की बहारपहन पीली सरसों के फूललय में बह रही शीतल बयारधीरे धीरे बहे नदिया की धारकोयलिया करे मीठी मनुहारक्यारी में झूमे फूलों की कतारउल्लास ही सबसे सुंदर श्रृंगारमौसम में मानो घुल गया प्यार... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   9:41am 11 Feb 2019
Blogger: noopuram
सरस्वती माँ ।वरद हस्त शीश पर रख दो माँ ।सहस्त्र सजल नमन स्वीकार करो माँ ।वीणा के तार झंकृत किएजिस वेला आपने ।वसंत फूला जगत मेंऔर अंतर्मन में । ऐसा वर दो माँ विद्या को वरूँकिंतु अपने तक ना रखूंजितना मिले उतना बांटूं ।ऐसा वर दो माँ कला की साधना करूंपर प्रदर्शन की परिधि म... Read more
clicks 106 View   Vote 0 Like   5:36pm 10 Feb 2019
Blogger: noopuram
पथिक, चलते रहना तुम्हारी नियति है.पर यदा-कदा विश्राम करना.चना-चबैना जो अपनों ने साथ बांधा था,उस पाथेय से भीन्याय करना. छाँव घनी हो जिस वृक्ष की उसकी छाया में कुछ देर बैठना.अपने पाँव के छाले देखना और सहलाना.शीतल बयार की थपकी पाकर चैन की नींद सो जान... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   11:07am 7 Feb 2019
Blogger: noopuram
चलो फिर से शुरु करते हैं जीना ।इस बार शायद आ जाएठीक से जीना ।शत-प्रतिशतमुनाफ़े का सौदानहीं है जीना ।बहुत जानोअगर सीख पाओथोड़े में बसर करना ।बहुत समझोअगर आ जाएहार कर जीतना ।बूंद-बूंदजीवन की सरसताका आनंद लेना ।पल-पलभाग्य रेखाओं मेंमेहंदी की तरह रचना ।चलो फिर से शुरु कर... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   5:50pm 5 Feb 2019


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