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शाम का वक्त था। रोज की तरह मिहिर अपने बाबा के साथ घूमने निकला था। मिहिर को अपने बाबा के साथ घूमना बहुत अच्छा लगता था। क्योंकि उसे सवाल पूछने की आदत थी और घर भर में बाबा ही ऐसे थे जो उसके हर सवाल का जवाब देते थे। आज अचानक चलते-चलते मिहिर ने पूछ लिया-बाबा कोई आदमी पहाड़ से भी ...
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  September 2, 2015, 1:57 pm
फिल्म की अपनी सीमा होती है, इसलिए केतन मेहता ने फिल्म में दिखा दिया कि पहाड़ से गिरकर दशरथ मांझी की पत्नी की मौत हो गयी थी, जबकि सच यह है कि सिर्फ उनका घड़ा फूटा था. फिल्म सड़क बनने के आगे विस्तार नहीं ले पायी. फिल्म में हम दशरथ मांझी के कबीरपंथी रूप को नहीं देख पाये.बाद के ...
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  August 30, 2015, 3:38 pm
Manjusha painting is the form that mirrors the myth and feelings of eastern Bihar(India). The Manjusha art is also associated with a religious festival of Ang Janpath- the Bihla Bishari worship and the folk tale related with it. That painting is fairly popular form of art, is an accepted fact. One only has to remind oneself of M.F. Husain and his recent paintings to understand what heights it can achieve. But the rural people of Bihar do not know Husain. The folk painting is the only language of colours and lines that they know.Manjusha painting is the form that mirrors the myth and feelings of eastern Bihar. It has a touch of tribal culture too. Manjusha art forms an integral part of the ri...
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  August 23, 2014, 1:48 pm
कालेकागज पर बना सोनेसा चमकता हुआ पुआल का वॉल हेंगिंग देखकर आज भलेही ज्योति गर्व सेभर उठती है, लेकिन बिहार केमुंगेर की रहनेवाली ज्योति नेकभी सोचा भी नहींहोगा कि उसकेद्वारा बनायेगए पुआल केटुकड़ों सेबना वह वॉल हेंगिंग कभी इस कदर पसंद की जाएगी। खाली समय में कुछ नया कर...
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  August 22, 2014, 1:34 pm
 पण्डवानी लोक की एक ऐसी गायकी है जिसमें महाभारत के पात्र पाण्डवों की गाथा है। महाभारत का यह लोकस्वरुप इतना अदभुत है कि इसे प्रस्तुत करने वाले कलाकार इसे निरंतर परिमार्जित करते रहे हैं। अपने समय को इस लोककाव्य का हिस्सा बनाकर प्रस्तुत करने के कारण ही पण्डवानी बहुत क...
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  July 16, 2014, 6:27 pm
भारत में राजस्थान की कठपुतली कला दुनिया भर में लोक कला के उत्कृष्ट नमूने माने जाते हैं। यहां की कठपुतली का इतिहास काफी पुराना है और यहांकी लोक कलाओं और कथाओं से जुड़ा हुआ है परन्तु पिछले कुछ सालों से राज्य में परंपरागत रीति-रिवाजों पर आधारित कठपुतली के खेल में काफी पर...
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  July 12, 2014, 3:49 pm
पवित्र द्वारिका नदी के किनारे स्थित मलूटी के मंदिर मध्यकालीन स्थापताय-कला के अनूठे नमूने हैं जिनकी दीवारों पर टेराकोटा की कलाकृतियाँ मानो सजीव हो उठी हैं।झारखंड और बंगाल के बार्डर पर, दुमका जिले से 55 किलोमीटर दूर एक गांव है, मलूटी। इस गांव में एक सिरे से दूसरे सिरे तक ...
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  May 10, 2014, 1:50 pm
नदिया किनारे निमिया रोपल उजे अशह-बिशह निमिया पसरलताहि तर खाड़ भेल बेटी सुनयना बेटी हे।काहे बेटी तोरा मुखहूं मलिन भेल हे।(अंगिका लोकगीत)लोकगीतों में नीम, शादी के उबटन में शामिल नीम, ससुराल जाती लड़की की यादों में बसा नीम, विरहा के यादो का साथी नीम, आयुर्वेद में महत्वपू...
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  April 21, 2014, 5:14 pm
लोक संस्कृति या आदिवासी जीवन में हर व्यक्ति एक विशेष किस्म का कलाकार होता है और इन कलाकारों का जीवन आम लोगों से भिन्न नहीं देखा जा सकता। कला इनके दैनिक जीवन का एक हिस्सा है। ये कलाकार जो कुछ बनाते हैं उसमें उपयोगिता और सौंदर्याभिरुचि दोनों तत्व मौजूद रहते हैं।जनजाति ...
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  August 13, 2013, 12:21 pm
पिठौरा चित्रकला में दोनों ही लोकों का चित्रण इस खूबी से किया जाता है कि मिथक कब वास्तविक बन जाता है और वास्तविक संसार कब मिथक, पकड़ पाना कठिन है। यही कारण है कि इन भीलों की ये चित्रांकन शैली सम्पूर्ण यथार्थ को अपने में समाये हुए भी फंतासी से परिपूर्ण होते हैं।गोंड जनजा...
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  July 6, 2013, 2:51 pm
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  June 20, 2013, 12:50 pm
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  March 4, 2013, 4:11 pm
सभ्यता की पहली सीढ़ी के रूप में जंगल का महत्व सभ्य समाज में मनुष्य के लिए जहां अब सिर्फ सामान्य ज्ञान का एक प्रश्न बनकर रह गया है, वहीं झारखंड के आदिवासी समाज के लिए वन पर निर्भरता निम्न अनुपात में अब भी चली आ रही है। ये जंगल, ये परंपरागत भूमि उनके लिए पूर्वजों की समाधि, व...
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  January 7, 2012, 1:05 pm
यह एक अंगिका लोक गीत है। जो नवरात्र के अवसर पर अक्सर ही बिहार तथा झारखंड इलाके में गाया जाता है।पांच बहिनी मैया पांचो कुमारी हे कमल कर वीणा।पांचो ही आदि भवानी, हे कमल कर वीणा।महिषा चढ़ल असुरा गरजल आवै हे कमल कर वीणा।आजु करबै देवी स् विवाह है कमल कर वीणा।पांच बहिनी मैया...
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  September 30, 2011, 3:32 pm
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