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Blog: LOKRANG

Blogger: pritima vats
मूल प्रकृति के छठे अंश से प्रकट होने के कारण ये षष्ठी देवी कहलाती हैं। बालकों की ये अधिष्ठात्री देवी हैं। इन्हें विष्णु माया और बालंदा भी कहा जाता है। मातृकाओं में देवसेना के नाम से ये प्रसिद्ध हैं। उत्तम व्रत का पालन करनेवाली इन साध्वी देवी को स्वामी कार्तिकेय की पत... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   10:58am 8 Jun 2016 #
Blogger: pritima vats
शाम का वक्त था। रोज की तरह मिहिर अपने बाबा के साथ घूमने निकला था। मिहिर को अपने बाबा के साथ घूमना बहुत अच्छा लगता था। क्योंकि उसे सवाल पूछने की आदत थी और घर भर में बाबा ही ऐसे थे जो उसके हर सवाल का जवाब देते थे। आज अचानक चलते-चलते मिहिर ने पूछ लिया-बाबा कोई आदमी पहाड़ से भी ... Read more
clicks 121 View   Vote 0 Like   8:27am 2 Sep 2015 #
Blogger: pritima vats
फिल्म की अपनी सीमा होती है, इसलिए केतन मेहता ने फिल्म में दिखा दिया कि पहाड़ से गिरकर दशरथ मांझी की पत्नी की मौत हो गयी थी, जबकि सच यह है कि सिर्फ उनका घड़ा फूटा था. फिल्म सड़क बनने के आगे विस्तार नहीं ले पायी. फिल्म में हम दशरथ मांझी के कबीरपंथी रूप को नहीं देख पाये.बाद के ... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   10:08am 30 Aug 2015 #
Blogger: pritima vats
Manjusha painting is the form that mirrors the myth and feelings of eastern Bihar(India). The Manjusha art is also associated with a religious festival of Ang Janpath- the Bihla Bishari worship and the folk tale related with it. That painting is fairly popular form of art, is an accepted fact. One only has to remind oneself of M.F. Husain and his recent paintings to understand what heights it can achieve. But the rural people of Bihar do not know Husain. The folk painting is the only language of colours and lines that they know.Manjusha painting is the form that mirrors the myth and feelings of eastern Bihar. It has a touch of tribal culture too. Manjusha art forms an integral part of the ri... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   8:18am 23 Aug 2014 #
Blogger: pritima vats
कालेकागज पर बना सोनेसा चमकता हुआ पुआल का वॉल हेंगिंग देखकर आज भलेही ज्योति गर्व सेभर उठती है, लेकिन बिहार केमुंगेर की रहनेवाली ज्योति नेकभी सोचा भी नहींहोगा कि उसकेद्वारा बनायेगए पुआल केटुकड़ों सेबना वह वॉल हेंगिंग कभी इस कदर पसंद की जाएगी। खाली समय में कुछ नया कर... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   8:04am 22 Aug 2014 #
Blogger: pritima vats
 पण्डवानी लोक की एक ऐसी गायकी है जिसमें महाभारत के पात्र पाण्डवों की गाथा है। महाभारत का यह लोकस्वरुप इतना अदभुत है कि इसे प्रस्तुत करने वाले कलाकार इसे निरंतर परिमार्जित करते रहे हैं। अपने समय को इस लोककाव्य का हिस्सा बनाकर प्रस्तुत करने के कारण ही पण्डवानी बहुत क... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   12:57pm 16 Jul 2014 #
Blogger: pritima vats
भारत में राजस्थान की कठपुतली कला दुनिया भर में लोक कला के उत्कृष्ट नमूने माने जाते हैं। यहां की कठपुतली का इतिहास काफी पुराना है और यहांकी लोक कलाओं और कथाओं से जुड़ा हुआ है परन्तु पिछले कुछ सालों से राज्य में परंपरागत रीति-रिवाजों पर आधारित कठपुतली के खेल में काफी पर... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   10:19am 12 Jul 2014 #
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पवित्र द्वारिका नदी के किनारे स्थित मलूटी के मंदिर मध्यकालीन स्थापताय-कला के अनूठे नमूने हैं जिनकी दीवारों पर टेराकोटा की कलाकृतियाँ मानो सजीव हो उठी हैं।झारखंड और बंगाल के बार्डर पर, दुमका जिले से 55 किलोमीटर दूर एक गांव है, मलूटी। इस गांव में एक सिरे से दूसरे सिरे तक ... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   8:20am 10 May 2014 #
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नदिया किनारे निमिया रोपल उजे अशह-बिशह निमिया पसरलताहि तर खाड़ भेल बेटी सुनयना बेटी हे।काहे बेटी तोरा मुखहूं मलिन भेल हे।(अंगिका लोकगीत)लोकगीतों में नीम, शादी के उबटन में शामिल नीम, ससुराल जाती लड़की की यादों में बसा नीम, विरहा के यादो का साथी नीम, आयुर्वेद में महत्वपू... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   11:44am 21 Apr 2014 #
Blogger: pritima vats
लोक संस्कृति या आदिवासी जीवन में हर व्यक्ति एक विशेष किस्म का कलाकार होता है और इन कलाकारों का जीवन आम लोगों से भिन्न नहीं देखा जा सकता। कला इनके दैनिक जीवन का एक हिस्सा है। ये कलाकार जो कुछ बनाते हैं उसमें उपयोगिता और सौंदर्याभिरुचि दोनों तत्व मौजूद रहते हैं।जनजाति ... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   6:51am 13 Aug 2013 #
Blogger: pritima vats
पिठौरा चित्रकला में दोनों ही लोकों का चित्रण इस खूबी से किया जाता है कि मिथक कब वास्तविक बन जाता है और वास्तविक संसार कब मिथक, पकड़ पाना कठिन है। यही कारण है कि इन भीलों की ये चित्रांकन शैली सम्पूर्ण यथार्थ को अपने में समाये हुए भी फंतासी से परिपूर्ण होते हैं।गोंड जनजा... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   9:21am 6 Jul 2013 #
clicks 96 View   Vote 0 Like   7:20am 20 Jun 2013 #
clicks 95 View   Vote 0 Like   10:41am 4 Mar 2013 #
Blogger: pritima vats
सभ्यता की पहली सीढ़ी के रूप में जंगल का महत्व सभ्य समाज में मनुष्य के लिए जहां अब सिर्फ सामान्य ज्ञान का एक प्रश्न बनकर रह गया है, वहीं झारखंड के आदिवासी समाज के लिए वन पर निर्भरता निम्न अनुपात में अब भी चली आ रही है। ये जंगल, ये परंपरागत भूमि उनके लिए पूर्वजों की समाधि, व... Read more
clicks 95 View   Vote 0 Like   7:35am 7 Jan 2012 #
Blogger: pritima vats
यह एक अंगिका लोक गीत है। जो नवरात्र के अवसर पर अक्सर ही बिहार तथा झारखंड इलाके में गाया जाता है।पांच बहिनी मैया पांचो कुमारी हे कमल कर वीणा।पांचो ही आदि भवानी, हे कमल कर वीणा।महिषा चढ़ल असुरा गरजल आवै हे कमल कर वीणा।आजु करबै देवी स् विवाह है कमल कर वीणा।पांच बहिनी मैया... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   10:02am 30 Sep 2011 #
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