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Blog: बाल सजग

Blogger: Bal Sajag
"सागर बन जाऊँ "मन करता है सागर बन जाऊँ,सन्देश देने वाली लहरें बन जाऊँ | ऐसे उठूँ कि गिर न सकूँ,लोगों को जीना सिखाऊँ | पानी की तरह रहना सिखाऊँ, मैं उन सभी से यह बात कह पाऊँ | मन करता है सागर बन जाऊँ,सन्देश देने वाली लहरें बन जाऊँ | काश सभी को सन्देश पसंद आए, मेरी बातें लोगों के दि... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   12:21am 13 Aug 2019
Blogger: Bal Sajag
"मैं क्या बनूँ "मैं क्या बनूँ,इस सवाल ने सताया | मैं क्या करूँ,किसी ने नहीं बताया | फिर मैं परिवार वालों से पूछा,फिर  भी मुझको कुछ न सूझा | दिमाग में आने लगे विचार,क्या पढ़ना लिखना है बेकार | पर मुझे लगा कुछ होगा यार, जिससे हो जाएगी नौका पार | इस सवाल ने कितना सताया, मैं किस लाय... Read more
clicks 1 View   Vote 0 Like   12:34am 11 Aug 2019
Blogger: Bal Sajag
"छुट्टी हुई "छुट्टी हुई , छुट्टी हुई,स्कूल से आज छुट्टी हुई | चार को स्कूल खुलेगा,उसी दिन कॉपी , किताब मिलेगा | फिर मैं स्कूल जाऊंगा,स्कूल में पहले प्रार्थना करूँगा | फिर दूसरा पीरियड लगेगा,उसके आगे पता पता नहीं है | फिर समय हो जाऊँगा, तो मैं घर आ जाऊँगा | कवि : नवलेश कुमार , कक्ष... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   12:08am 8 Aug 2019
Blogger: Bal Sajag
"एक कण हूँ मैं "बचपन से धूप में तपता रहा हूँ मैं,धूल के कणों से खेलता रहा हूँ मैं |पर मुझे आज एक मौका मिला है,जो बहुत ही मुश्किल से मिला है | इतने बड़े संसार में,इस बड़े परिवार में | शायद एक कण हूँ मैं | | छोटे चीजों से खेलना पसंद करता हूँ,उन्हें हाथों में रखकर देखना पसंद करता हू... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   12:15am 7 Aug 2019
Blogger: Bal Sajag
"डर है मुझे "रंग के त्योहारों में,एक अनोखे नज़ारों में,खुद को मुझे खोने का डर है | डर है मुझे उन चीजों से,जो मुझे आकर्षित करती है | डर है मुझे उन शक्षों से, जो अपने बातों में दूसरों को गुमराह करते हैं  | नयी हसीन बाज़ार में, एक कहीं दुनिया के आढ़ में | खुद को मुझे खोने का डर है, डर है ... Read more
clicks 4 View   Vote 0 Like   12:24am 5 Aug 2019
Blogger: Bal Sajag
"प्यारी माँ है तू "धूप की तपती कहर है तू,दोनों हाथों में स्वर्ग का आनंद है तू | वह प्यारी माँ है तू,छाती से दूध पिलाने वाली माँ है तू | हर दर्द को समझने वाली,हर मुसीबत से निपटने वाली | एक प्यार का समुन्दर की लहरों का,भरा हुआ जलासय है तू | वह नाज़ुक से पैर को सराहने वाली, गिर जाने प... Read more
clicks 3 View   Vote 0 Like   1:54am 4 Aug 2019
Blogger: Bal Sajag
"हौशला "मुझमें भी वह हौशला है,मेरे भी कुछ ख्वाइश हैं | मैं अपने को साबित कर सकता पेन और कॉपी के सहारे | अपना उज्जवल भविष्य लिख सकता हूँ,उसको सबके सामने पढ़ सकता हूँ | सुनहरे अक्षरों का ज्ञान हममे भी है,गहराई में जाने की क्षमता हममे भी है | तैरते हुए समुन्दर को पार करना है,अब कि... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   12:04am 2 Aug 2019
Blogger: Bal Sajag
"सावन की पहली बारिश "सावन की पहली बारिश ऐसे आया,जैसे अँधेरे कोठरी में कोई मुशाफिर आया | सुनशान जगह में कोई नया जीवन लाया,हरे हुए लोगों का जोश बढ़ाया | पूरे तरफ हरियाली ही छाई है, लगता है कोई रौनक लाई है | प्रकति ने अपना जलवा बिखेरा है,जिसके कारण सबसे अच्छा सबेरा है | ये सावन कु... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   12:05am 1 Aug 2019
Blogger: Bal Sajag
"सावन का महीना"सावन का महीना आया,अपने संग बारिश लाया | हरियाली सी खुशियाली छाई ,चिड़ियों की चहचाहक लाई | ताल ,डबरा भर है आई,कीड़े - मकौड़े बारात लाई | सरपर चढ़कर बोल रहे शिवशंकर, सावन में झूले हैं भयंकर | गंगा ने अपना रंग दिखाया,अघोरियों ने नाच दिखाया | सावन का महीना आया,अपने संग बा... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   12:21am 31 Jul 2019
Blogger: Bal Sajag
"अपना हाल "क्या बताएँ हम अपना हाल,यह मौसम तो है बिल्कुल बेकार | न चैन हैं , न ही है राहत,पूरा दिन गर्मी में गरमाहट | थोड़ी सी बरसात राहत दिलाती,ज्यादा दिन वह भी टिक नहीं पाती | गर्मी में पसीना बहता रहता,जब कूलर का पंखा रुकता | कैसे बढ़ जाती है यह गरमी,न कोई दया है न कोई नरमी | कवि : प्... Read more
clicks 5 View   Vote 0 Like   12:48am 30 Jul 2019
Blogger: Bal Sajag
"किसानों की हुई ख्वाइश पूरी "इस महीने हुई है जमकर बारिश,किसानों की हुई ख्वाइश पूरी | धरती का वाटरलेबल बढ़ा,हमें इस मुसीबत से दूर किया | इस बारिश के महीने में, कहीं तो हरियाली छाई | कहीं तो बंजर जमीं पाई,कई लोगों को बाढ़ में डुबाई | इस महीने हुई है जमकर बारिश,किसानों की हुई ख्वाइ... Read more
clicks 37 View   Vote 0 Like   12:43am 29 Jul 2019
Blogger: Bal Sajag
"आओ चलें इस बारिश में "आओ चलें इस बारिश में,धूम मचाए आस - पास के पानी में | खूब खेलेंगें खूब नाचेंगे, कुछ कूदकर इस बारिश में ,दोनों हाथ खोलकर राह देखेंगें | एक बूँद ही जो खिला देगी हमारे पुरे मन को और तन को | दौड़कर भागेंगें इस पानी में ,टप - टप -टप गिरने की आवाजों में | कवि : विक्रम ... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   1:25am 28 Jul 2019
Blogger: Bal Sajag
"ज़रा इस  आदमी को जगाओ "भाई सूरज,ज़रा इस  आदमी को जगाओ | भाई पवन, ज़रा इस आदमी को हिलाओ | यह आदमी सोया पड़ा है,जो सच से बेखबर, सपनो में खोया पड़ा है | ये जिन्दा कम , मरे जैसे है,जो जैसा था वो वैसे ही हैं | जरा इस आदमी को जगाओ,जो बिस्तर पर सोया पड़ा है | कवि : राहुल कुमार , कक्षा : 6th , अपना घरकव... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   12:03am 26 Jul 2019
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"जिंदगी का सफर " ये जिंदगी का सफर कितना अजीब है न,कभी ग़मों का सामना करना पड़ता है , तो कभी खुद से ही लड़ना पड़ता है | ये दूर से सुकूनभरा दिखता है, न ये जिंदगी का सफर अनोखा और अनमोलइसको कोई न है भूलेगा | ये अहम और महत्वपूर्ण हर समय अनेक पल से रुबरुह और सम्पूर्ण ये जिंदगी का सफर | ... Read more
clicks 6 View   Vote 0 Like   1:16pm 25 Jul 2019
Blogger: Bal Sajag
"फूल जो कहना चाहती है "हवाओं में हिलती हुई,वह फूल जो कहना चाहती है | अपनी सजी हुई टहनियों पर,हवाओं संग खेलना चाहती है | खुशबू से महकाना चाहती हैं,आस - पास पेड़ - पौधों से कहकर | अपनी खुशबू से मन को,बहलाना चाहती है | यह फूल के पौधों,हवाओं चाहती हैं | कवि : विक्रम कुमार , कक्षा : 9th , अपन... Read more
clicks 18 View   Vote 0 Like   12:19am 23 Jul 2019
Blogger: Bal Sajag
"कभी कुछ खाश "मैं सोचता हूँ कभी कुछ खास,जिस पर मुझे खुद है विश्वास | मेरी बचपन से ये पढ़ने की प्यास,बना देती है मुझे उदास | मेरी ये जिंदगी और बड़नसबी,कहीं कर दे न सपने चूर | सपनों पर निखरना चाहता हूँ,लेकिन परिस्थितियाँ निखरने ने देती | कोशिश करता हूँ सपना हो खाश,जिस पर मुझे खुद ... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   12:11am 9 Jul 2019
Blogger: Bal Sajag
"बहती हवाएँ "चलती हवाएँ कुछ कह रहीं हैं,मानो वह मंद मंद बह रहीं हैं | फूल - पत्तों को छूकर,बंजर जमीं को फूँककर | वह सारी सौन्दर्य को बढ़ा रहीं हैं,चलती हवाएँ कुछ कह रहीं हैं | पसीने की बून्द को सुखाती है,पूरे बदन में ठंडक पहुंचाती है,कितना सफर करके आती है | रूकती नहीं वह बहतीही ज... Read more
clicks 39 View   Vote 0 Like   12:24am 8 Jul 2019
Blogger: Bal Sajag
"बारिस " रिमझिम - रिमझिम बारिस आई,अपने संग काले बादल लाई | लहराते हुए हवाओं में,पेड़ों की बौछारों में | ख़ुशी चहचाहट लाई,खेतों में हरियाली लाई | रिमझिम -रिमझिम सी बारिस आई,अपने संग काले बादल लाई | बूँदों के गिरने से हम,भूल गए हम अपने सारे गम | बूँदों ने खुशियां ही भर दी,सब जगह को... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   1:49am 7 Jul 2019
Blogger: Bal Sajag
"छोटा बन जाऊँ "मन करता है छोटा बन जाऊँ,माँ का प्यार दोबारा पाऊँ | उंगली पकड़कर चलना सिखाती,हर अनजान मोड़ पर राह दिखाती | `हर गलती को मेरी बक्श दे, जीवन में मुझे ढेरों प्यार दे | ममता की साया में रहूँ ,माँ से मैं दिल की बात कहूँ  | बचपन बहुत ही कीमती होता है, जिसको नसीब नहीं वह रोत... Read more
clicks 7 View   Vote 0 Like   4:09pm 28 Jun 2019
Blogger: Bal Sajag
"देश होता जा रहा है खोखला "फैशन का चल रहा है जलवा,देश होता जा रहा है खोखला | तरह -तरह की नई चीजें आती,ये सब बड़े बड़े को नाच नचाती | फैशन का चल रहा है जलवा,गन्दी चीजें कर रही है हमला | इमारतों से भरती जा रही है दुनिया,कब समझेंगे देश के बनिया | पेड़ सब कटते गए,ऑक्सीजन की मात्रा घटती ... Read more
clicks 45 View   Vote 0 Like   12:51am 9 Jun 2019
Blogger: Bal Sajag
"बचपन "जब मैं छोटा बच्चा था,बचपन में मैं गोरा था | बचपन में मैं शैतान था,मम्मी गलती पर डाटती थी | फिर भी वही काम करता था,पापा मेरे लिए रसगुल्ला लाता था | मिठाई मैं पेट भर के कहते था,जब मैं छोटा बच्चा था | बचपन में मैं मोटा था | जो काम नहीं करना होता,वह काम मैं करता था |  नाम :मंगल क... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   11:44pm 5 Jun 2019
Blogger: Bal Sajag
 "छोटी सी चिड़िया"छोटी सी चिड़िया है, वह कुछ कहना चाहती है | उसकी भाषा समझ में न आती है,इसीलिए उदास होकर वह उड़ जाती है | वह अपने दुःख को ले जाती है,छोटी सी चिड़िया कुछ कह जाती है | चिड़िया अपनी आवाज़ों से पुकारती है,वह लोंगो को खुश कर जाती है |छोटी चिड़िया कुछ कहना चाहती है,ऐसा लगता ... Read more
clicks 13 View   Vote 0 Like   12:47am 2 Jun 2019
Blogger: Bal Sajag
"छुट्टी "जब छुट्टी हुई स्कूल से,खूब खेल रहे थे धूल से | हो गई बड़ी भूल हम से,मम्मी ने मना किया था खेलना धूल से | जब छुट्टी हुई स्कूल से | | पढ़ाई का कोई नाम नहीं,करने को कोई काम नहीं | बस खेलते रहते दोपहर से शाम,यही था छुट्टी का इनाम |नाम : सनी कुमार , कक्षा : 5th , अपना घरकवि परिचय :यह कव... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   1:18am 31 May 2019
Blogger: Bal Sajag
"चन्दा मामा की बात "सो रहे थे जब छत पे हम,गिन रहे थे तारे को | तभी कुछ देर बाद आ गए,चन्दा मां सुलाने को | तारे बोले अभी तुम न सोना,अभी करना है कुछ काम | फैलो जग में इतना,ताकि हो तुम्हारा नाम | ये सब सुनकर गुस्से से बोला चन्दा मामा,सो जा बालक | नहीं तो भइया कराएंगे तुम से ड्रामा, यह स... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   11:32pm 28 May 2019
Blogger: Bal Sajag
"जाति -धर्म "जाति - धर्म मैं क्या जानूँ,सभी को मैं भाई - बहन मानूँ | अल्लाह - ईश्वर है एक, फिर भी बैर रखते हैं लोग अनेक | रगों में रंग है ताली का, फिर भी बैर है गोरी और काली का | अल्लाह ईश्वर एक सामान,वही खून वही भगवान | नाम : नवलेश कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर ... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   1:26am 26 May 2019


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