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Blog: मेरी स्याही के रंग

Blogger: मधुलिका पटेल
ये कहकर गया था जब अबकी बार आउंगामाँ गोद में तेरी सर रख कर जी भरकर सोउँगा ।लाल मेरा तू तो है भारत माता का प्रहरीइसीलिये नींद तेरी रहती थीं आँखों से ओझलकभी न वो तेरी पलकों में ठहरी ।पर माँ का दिल आज अचानक से दरक गयाक्यों आज पूजा का थाल हाथ से सरक गया ।जहां कहीं मेरे जिगर का ट... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   9:06pm 12 Feb 2016 #जंग
Blogger: मधुलिका पटेल
वो माँ का झूठ मूठ में पतीला खनकाना सब भरपेट खाओ बहुत है खाना फटी हुइ साड़ी को शाल से ढक लिया मेरी फीस का सारा जिम्मा अपने सिर कर लिया रात में ठंड से काँपती रहेऔर मुझे दो-दो दुशालें से ढांपती रहे मैं बरस दर बरस बढ़ता गया मेरी भावनाओं, ख़यालातों का दायरा घटता गया&... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   5:38pm 28 Jan 2016 #इंतज़ार
Blogger: मधुलिका पटेल
तुम इतना तेज मत चलो इतने आगे निकल तो गए हो पर कम से कम पल दो पल तो रुको रुख कर चलने के बीच इतना वक्त तो हो मेरे मीतइंतज़ार जो तुमने किया हो मेरे लिए उसका मुझे अहसास तो हो मेरे प्यार में इतना हो दम मेरे इंतज़ार में थम जाए तुम्हारे कदम तुम्हारी आगे बढ़ने की चाह&... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   8:47pm 31 Dec 2015 #कदम
Blogger: मधुलिका पटेल
माँ मुझे आज भी तेरा इंतज़ार है पता नही क्यों ?तू आती है मिल्ती है और प्यार भी बहुत करती है तुझे मेरी फिक्र भी है पर मुझे तेरा इतंज़ार है कल कोइ मुझसे पूछ रहा था अरे पागल कैसा तेरा ये इतंज़ार हैमैं तुम्हें नहीं बता सकतीबात बरसों पुरानी है वो मेरा नन्हा सा मन ... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   2:03pm 17 Dec 2015 #आँसू
Blogger: मधुलिका पटेल
तुमने बड़ी खामोशी से लौटाए कदमपर मेरे दिल पर दस्तक हो ही गई मेरे हमदम आते हुए कदमों में एक जोश थालौटता हुआ हर कदम ख़ामोश था वो शिकायतों की गिरह ख़ोल तो देता जो तूने अपने मन में बांधी थीदो लफ़जों में बोल तो देतानासूर जो तूने बिना वजह पालेउसकी दवा मुझसे पूछ तो लेता, ओ ... Read more
clicks 154 View   Vote 0 Like   9:02pm 3 Dec 2015 #कदम
Blogger: मधुलिका पटेल
सारी जिंदगी ढूँढती रहीन मंजिल मिली न किनारा न शब्दों का अर्थ  अनवरत चलते कदम कभी थकते हैं कभी रुकते हैं बस झुकना,वो कमबख़्त वक़्त भीनहीं सिखा पाया ये उम्मीद शब्द मैने सुना जरूर है मेरी कलम उसेबहुत अच्छे से लिख लेती हैपर मेरा मस्तिष्क उसका अर्थढूँढ पाने मे... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   7:32pm 23 Nov 2015 #उम्मीद
Blogger: मधुलिका पटेल
जब तुम गए मैने देख़ा ही नहीं क्या -क्या अपने साथ ले गएअब मेरा बहुत सा सामान नहीं मिला रहा ज़्यादा कुछ नहीं बस दो चार चीज़े हैं मैने तुम्हें हर उस जगह पर तलाशा जहाँ तुम हो सकते थेएक मेरा विश्वास; एक मेरी परछाईमेरी अंतर आत्मा; मेरे शब्द पर तुम कहीं नहीं मिले मेरा स... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   6:59am 5 Oct 2015 #इतंज़ार
Blogger: मधुलिका पटेल
परिंदे नहीं होते स्वार्थीख़ुल कर जीते हैंआख़िरि सांस तक निस्वार्थ भाव से सिख़ाते हैंअपने बच्चो को उड़नाख़ुल जाते हैं जब बच्चो के पंख़ नहीं उम्मीद करते कीये मुड़कर लौटेगा भी की नहीं आने वाला कल घोंसला ख़ाली होगा की भरा कैसे रह पाते होंगें उनके अपने जब दूर ... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   7:05pm 30 Sep 2015 #इतंज़ार
Blogger: मधुलिका पटेल
धीरे -धीरे जिंदगी से शिकायतों की गठरी भर ली उस गठरी से बहुत कुछ अच्छापीछे छूटकार बिख़रता गयाजिसे न बटोर पाए न वक्त से देख़ा गया अब जिंदगी बेतरतीबि से रख़े सामान की तरह हो गई हैमन करता है की काश?जिंदगी रेशम पर पड़ी सिल्वटों सी होती मुट्ठी भर पानी के छीटें मारते प्... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   7:24pm 24 Sep 2015 #कोशिश
Blogger: मधुलिका पटेल
तेरी यादों को मैं झूठे बहाने बना कर कहीं छोड़ आइ थी पर वो दबे पाँव वापस लौट आइं थी उसने मुझे बहाना ये बतायाकी मेरे ज़हन से अच्छा आशियाना न पायाकलाइ पर जो लिखा था तेरा नामउस पर जब पड़ती है किसी की प्रश्न भरीं नज़र लोगो को बातें बनाने के लिए मिलती होगी नई ख़बर पत्थ... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   7:05am 10 Sep 2015 #ज़िंदगी
Blogger: मधुलिका पटेल
दर्द रिस्ता है मोम की चट्टानों से सुन कर लोग फ़ेर लेते हैं चेहरे इन अफ़सानों से जो निरंतर चले जा रहे हैंकिस्मत की अंधेरी बंद गलियों  में उन्हें देख़ते हैं शरीफ़ लोग ख़िडकियाँ बंद कर मकानों से दर्द की दवाएँ लिख़ी हैं कुर्सी के विज्ञापन में ख़ूबसूरत वादे... Read more
clicks 168 View   Vote 0 Like   5:12am 31 Aug 2015 #आशियाना
Blogger: मधुलिका पटेल
मैं बचपन से वृक्ष बनना चाहती थी एक विशाल वृक्ष जिसकी जड़ें बहुत गहरी हों जिसकी शाखाएँ बहुत लम्बी हों जिससे मुझे एक ठहराव मिले पर ईश्वर ने मुझे बनाया हैएक सुंदर और कोमल पौधा जिसे हर कोइ अपनी मर्जी से रोपता है वो जैसे-जैसे बड़ा होता है वैसे -वैसे उसका स्थानां... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   5:52pm 20 Aug 2015 #कोमल
Blogger: मधुलिका पटेल
सोच रहा हूँ आज अपने गाँव लौट लेगांवों में अब भी कागा मुंडेर पर नज़र आते हैंउनके कांव - कांव से पहुने घर आते हैं पाँए लागू के शब्दों से होता है अभिनंदनआते ही मिल जाता है कुएँ का ठंडा पानी और गुड़ धानीनहीं कोइ सवाल क्यों आए कब जाना है नदी किनारे गले मे बाहें डाले कच्च... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   8:53pm 14 Aug 2015 #किनारे
Blogger: मधुलिका पटेल
आज मेरी कलम ने किया है मना किसी की याद में अश्क बहाना है मनाआज कोइ नज्म नई बनाउस गली और मोड़ के शब्दों को ले जहॉं तू कभी खड़ा था अकेलेतब भी तो तू सुकून से जीता था आज फ़िर उन पुरानी राहों को नाप आजिनकी वीरानगी पर तू चलकर होता था ख़फ़ागम दे कर भूल जाना जिसकी फ़ितरत थीतू... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   7:20pm 10 Aug 2015 #कलम
Blogger: मधुलिका पटेल
तुम आइ थी जब मेरी गोद में मुझे लगा एक परी छुपी हुइ थीजैसे बादलों की ओट में तुम्हारी शरारतें वो चंचलतातुम्हारा बचपन अभी बीता भी न था और भाग्य दे गया बहुत सी चुभनतुम में है अदभुत प्रतिभा तुम हो सुंदरता की प्रतिमा तुम्हारी ये सुइयों से दोस्तीतुम हँस कर छिपा लेती ... Read more
clicks 181 View   Vote 0 Like   8:36pm 4 Aug 2015 #डायबिटीज़
Blogger: मधुलिका पटेल
बड़े ही ख़ूबसूरत रंगों से भरा हुआ थाज़िंदगी का कैनवास अचानक से सारे रंग छलक गएवो मेरे सूर्तेहाल और मुसतकबिल को पूरा का पूरा भिगो गए अब नया कैनवास है उसके लिए नहीं बचा कोइ रंग नया कैनवास मेरे वजूद की पहचान बन गया है डर लगता है रंगो को छूने में, क्योंकि?छलके... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   8:09am 31 Jul 2015 #ज़िंदगी
Blogger: मधुलिका पटेल
तुम आती हो नए घर संसार में सपने हजारों हैं अपनों के प्यार में सुबह मंदिर की प्रार्थना में औरों का दुख दर्दमांगती अपने हिस्से में सबको खिलाने के बाद आधे पेट खाने से ही हो जाती तृप्ततुम्हारा पसीना है टपकता सारा आशियाना है चमकतारसोइ का धुअाँ बहुत गहरातुम्हार... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   9:19pm 24 Jul 2015 #आशियाना
Blogger: मधुलिका पटेल
तूने कभी मुझे चाहा ही नहींपर तूने मुझे प्यार के भ्रमजाल में भरमाया तो सहीतेरी बातें कच्चे रंग सी धुल के निकलीतेरे वादे बिन पानी वाले बादलों से हल्के निकले सच्चे प्यार में तूने वफ़ा की आजमाइश की और तूने बेवफ़ाइ की हद पार की मैने तो अख़िरि सांस तक किया तेरा इतंजा... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   8:03am 18 Jul 2015 #कबर
Blogger: मधुलिका पटेल
आज मैने आँसू की एक बूंद में बहुत सारे अक्श हैं देखेवो तेरी मेरी उसकी आँख का पानीसबकी अलग है कहानीबचपन के मासूम मोती जब आँखों में भर आएँमाँ कुछ देर भी गरआँखों से ओझल हो जाएकिशोरों की आँखेंअचानक से कब भर आएँव्याकुल मन का पंछीपिंजरा तोड़ने को झटपटाएयुवा मन और ख़ामोश ... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   5:49pm 14 Jul 2015 #आँखें
Blogger: मधुलिका पटेल
मै कौन हूँ और क्या हूँक्या तुम मुझे हो जानतेबस चंद है मेरी ज़रूरतें किताब की दुकान देख रुक जाती हूँ अच्छे और सुंदर सफे लिए बिना रह नहीं पाती हूँसुंदर कलम तलाशती आँखेंसांसारिक रंग ढ़ंग कुछ नहीं आता बस कुछ लिख़ने के लिए एकांत मुझे है भाता सुकून मिलते ही मृगमरिच... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   9:22pm 11 Jul 2015 #इंसान
Blogger: मधुलिका पटेल
कंकड़ सा मैं मोती सी तुम आकार भले ही समान हो प्रकार है लेकिन भिन्न कंकड़ मैं बदसूरत न चमक न कोई रंग ढंग का मोती तुम सफ़ेद झक्क है चमक और है ख्याती तुम्हारे अंग काकंकड़ मैं नाकारा सा कही भी मिल जाऊं मुंह उठाकरमोती तुम उत्कृष्ठ सी रख ले हर कोई अंगुल या कंठ में म... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   1:22pm 8 Jul 2015 #अस्तित्व
Blogger: मधुलिका पटेल
तेरे जाने के बाद से न आया वैसा सावनजब गिरता था सूखी धरती पर वो बारिश का पहला पानीसारे अरमानों को जगा देती थीमिट्टी की सौंधी खुशबू दिल की किताब के जब पलटते हैं पन्ने उस बारिश की एक बूंदअब भी आँखों में कहीं अटकी हुई है वो बारिश में भीगनें की उम्र छप -छप करते तेरे ... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   8:04pm 3 Jul 2015 #झलक
Blogger: मधुलिका पटेल
पिता शब्द का अहसास याद दिलाता है हमेंकी कोइ बरगद है हमारे आस -पासजिसकी शीतल छाया मेंहम बेफ़िक्र हो कर सो सकेंजीवन में गर आए कोइ दुख तो उन विशाल कंधों परसर रख करजी भर कर रो सकेंवो ऐसा मार्गदर्शक है जो पहले खुद उन रास्तों परचल कर अंदाज़ा लगाता हैकी अगर जिंदगी में हम ... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   8:04pm 26 Jun 2015 #ज़िम्मेदारी
Blogger: मधुलिका पटेल
उस दिन बहुत कोशिश की हमने तुम्हें पहचानने कीपर दृष्टि धुँधलाती रही याददाश्त के पृष्टों कोपर हम पहचान गए थे तुम्हें तुम हमसे किसी मोड़ पर टकराए थे सोचा होगा तुमने कि अगली मंज़िल तक शायद ?हम तुम्हारे कदमों के साथ कदम मिला लेगेंपर रास्ते वीरान नहीं थे रास्त... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   8:27am 24 Jun 2015 #कश्मकश
Blogger: मधुलिका पटेल
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clicks 110 View   Vote 0 Like   7:59am 16 Jun 2015 #पल

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