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नास्तिक The Atheist

व्यंग्यअपने यहां मर्दानगी का शौक़ काफ़ी पुराना लगता है। यह बिलकुल असाध्य रोग की तरह लगता है क्योंकि 2011 से 2016 तक में भी मर्दानगी से संबंधित तरह-तरह की कहानियां, विज्ञापन, कविताएं आदि देखने को मिलते रहते हैं। मैं अलग से किसी विज्ञापन या कविता (जहां तक तर्कहीनता की बात है कई...
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Tag :dishonesty
  November 20, 2016, 3:49 pm
लघुकथाजब भी कोई कहता है कि मैं मरकर ज़िंदा रहना चाहता हूं, मैं समझ जाता हूं कि जीतेजी ज़िंदा रहने में इसकी कोई दिलचस्पी नहीं है या फिर मरने से पहले जीने का साहस नहीं है।ऐसे में मरने के बाद ज़िंदा रहने के अलावा चारा भी क्या है ?-संजय ग्रोवर07-10-2016...
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Tag :death
  October 7, 2016, 1:43 pm
अभी एफ़ एम सुन रहा था, एक बात सुनकर कान खड़े हो गए-‘कई ‘बुद्धिमान’ लोग समझते हैं कि दुनिया में जो भी होता है भगवान करता है.....‘.....मुझे लगा बात सुननी चाहिए, थोड़ी उम्मीद बंध गई जैसी भारत में नास्तिकता पर बनी फ़िल्मों को देखते हुए शुरुआत में बंध जाती है। मैंने आगे सुना-......‘भगवान उन...
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Tag :superficial progressiveness
  September 23, 2016, 12:09 pm
(असलियत से भागने के सम्मानित उपाय-1)कल सुबह तीन-चार बजे के बीच नींद खुल गई। एफ़एम सुनने लगा। एक कार्यक्रम में कृष्ण और ‘कर्म करो, फल की इच्छा छोड़ दो’ का ज़िक्र आया तो दूसरे में गीता की तारीफ़ सुनने को मिल गई। जब भी सुनता हूं कि कई बड़े(!), मशहूर और बुद्विमान(!) लोग गीता के उपदेश को प...
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Tag :creeps
  August 20, 2016, 7:30 pm
कभी क़िताब या कॉपी ज़मीन पर गिर जाती तो बच्चे झट से उठाते और ‘हाय! विद्या गिर गई!’ कहकर माथे से लगाने लगते। नहीं समझ पाता था कि ऐसा करने से क्या होगा? मेरी अपनी क़िताब-कॉपी गिरती तो मैं तो बस यही देखता कि फ़ट तो नहीं गई या मिट्टी तो नहीं लगी। लगी हो तो साफ़ करके बस्ते (स्कूल बैग) मे...
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Tag :festivals
  August 3, 2016, 11:22 pm
कई महीनें पहले मित्र नीलांबुज ने एक पोस्ट लगाई थी जिसमें ‪‎निराला‬ की प्रगतिशीलता का ज़िक्र यूं आया था कि उन्होंने अपनी ‪‎बेटी‬ की ‎शादी‬ में पंडित को नहीं बुलाया था, ‪‎मंत्र‬ ख़ुद ही पढ़ लिए थे। मैंने तभी कहा था मुझे तो इसमें कहीं प्रगतिशीलता नहीं नज़र आती।क्या प्रगति...
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Tag :celebrities
  July 16, 2016, 4:14 pm
आजकल सांप्रदायिकता चर्चा में है। किसी न किसी को तो चर्चा में होना है, चलो सांप्रदायिकता ही सही।मेरी समझ में जिस दिन किसी बच्चे को सिखाया जाता है, ‘माई मम्मी इज़ द बैस्ट’, सांप्रदायिकता शुरु हो जाती है।जिस दिन कोई कवि अपने श्रोताओं से कहता है कि हरियाणा के जैसे श्रोता मै...
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Tag :discrimination
  June 3, 2016, 5:30 pm
जो है डरा हुआजो है कायरजो है परदा जो है अभिनेताजो है नाटकीयजो है कर्मकांडीजिसे चाहिए सारे फ़ायदेजिसने दूसरों के लिए रचे हैं सारे क़ायदेजो दूसरों के दिमाग़ हथियाकरउनपर लिख देता है अपना नामजो किसी नुक़सान की नहीं लेता ज़िम्मेदारीछुप जाता है अपनी ही बनाईमहानता की अपनी इम...
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Tag :crafty
  May 14, 2016, 5:04 pm
सरल मेरा दोस्त है। अपनी सरलता की ही वजह से मेरा दुश्मन भी है। मौलिक है, नास्तिक है, विद्रोही है। जाहिर है ऐसे आदमी के रिश्ते सहज ही किसी से नहीं बनते। बनते हैं तो तकरार, वाद-विवाद, तूतू मैंमैं भी लगातार बीच में बने रहते हैं। यानि कि रिश्ता टूटने का डर लगातार सिर पर लटकता रह...
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Tag :God
  April 27, 2016, 2:17 pm
लोगों को ग़ुलाम बनाने के लिए गंदी और भद्दी प्रथाएं और मान्यताएं बनानेवाले किसी व्यक्ति ने शायद ही कभी यह कहा हो कि मैं कोई असामाजिक आदमी हूं और यह काम समाज के खि़लाफ़ कर रहा हूं। वर्णव्यवस्था, सतीप्रथा, छुआछूत, विवाह, दहेज, ऊंचनीच, छोटा-बड़ा, अंधविश्वास, भगवान, साकार, निराका...
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Tag :courage
  April 22, 2016, 5:23 pm
|| नास्ति दतम् नास्ति हूतम् नास्ति परलोकम् || यह पंक्ति मैं पहली बार पढ़ रहा हूं।जब मैं नास्तिक हुआ तो मैंने चार्वाक या मार्क्स का नाम तक नहीं सुना था। ऐसी कोई भारतीय या अन्य परंपरा है, इसकी मुझे हवा तक नहीं थी। कोई वामपंथी पार्टी भी है, यह भी मुझे बहुत बाद में जाकर पता चला...
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Tag :congenital
  April 11, 2016, 7:54 pm
कई बार पढ़ने-सुनने को मिलता है कि फ़लां चीज़ खाने से ढिकाने को ज्ञान मिला या वैसे पेड़ के नीचे बैठे-बैठे ऐसे को ज्ञानप्राप्ति हो गई।सोचता हूं कि आखि़र यह ज्ञान किस टाइप की चीज़ होती थी !? अगर कुछ खाने से किसीको ज्ञान मिलता हो तो उस खाद्य को बनानेवाले या खिलानेवाले के पास तो बहु...
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Tag :education
  March 16, 2016, 12:25 pm
लड़कियों को लेकर भारतीय समाज में अकसर एक ऊहापोह सा बना रहता है। लड़कियां क्या खाती हैं, क्या पीती हैं, क्या सोचतीं हैं आदि-आदि से लेकर ‘लड़कियां किस तरह के पुरुषों को पसंद करतीं हैं’ जैसे विस्फ़ोटक मसलों में कई मर्दों की जान और ज़िंदगी अटकी रहती है। मज़े की बात यह है कि कट्टरप...
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Tag :confusion
  March 12, 2016, 5:53 pm
जब आप किसीको ग़ुलाम बनाते हैं तो आपकी अपनी आज़ादी भी ख़तरे में पड़ जाती है। क्योंकि दूसरे को ग़ुलाम बनाने के लिए कुछ न कुछ झूठ बोलना पड़ता है, कोई न कोई षड्यंत्र रचना पड़ना है। बेवजह कोई क्यों आपकी ग़ुलामी करेगा, क्यों ख़ुदको आपसे छोटा मानेगा, क्यों आपसे दबेगा !? सो आपको झूठ बोलन...
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Tag :freedom
  March 8, 2016, 4:45 pm
अकसर लोग कहते हैं कि झूठ को सौ बार बोला जाए तो सच लगने लगता है।लेकिन क्या यह सिर्फ़ बोलने वाले पर निर्भर है ?क़तई नहीं। यह सुननेवाले पर भी उतना ही निर्भर है। सुननेवाला या तो सही स्रोतों से जानने की कोशिश नहीं करता या वह बोलनेवाले पर अंधा विश्वास करता है या उसमें ख़ुदमें...
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Tag :cunning
  February 28, 2016, 7:12 pm
तुम कहते हो-एक ईश्वर वह है जिसने हमें बनाया।एक ईश्वर वह है जिसे हमने बनाया।इसका क्या मतलब हुआ ?हमें बनाया मतलब सिर्फ़ मुझे या आपको !?जिसने सारी दुनिया बनाई।जिसने सारी दुनिया बनाई, उसकी दुनिया में आगे जो भी बनेगा क्या उसकी सहमति के, उसके चाहे बिना बनेगा !?चारों तरफ़, तरह-तर...
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Tag :cheating
  February 27, 2016, 12:42 pm
(भारतीय ‘प्रगतिशीलों’ का पसंदीदा संगठन आर एस एस एस-1)अभी मैं इस लेख का अगला हिस्सा लिखने का मन बना ही रहा था कि ‘पाखंड वर्सेस पाखंड’ का नया उदाहरण सामने आ गया। किसीने आरोप लगाया कि जेएनयू में प्रतिदिन इतनी मात्रा में कंडोम, इतने ये, उतने वो आदि-आदि पाए जाते हैं। इसपर दूसर...
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Tag :hypocrisy versus hypocrisy
  February 24, 2016, 5:05 pm
4.17 मिनट का यह वीडियो है। फ़ेसबुक पर कुछ लोगों ने इस सलाह के साथ लगाया कि इसे देखकर आपकी आंखें खुल जाएंगी। मैंने, देखा तो मुझे इसमें कोई ख़ास या नई बात नज़र नहीं आई। मैंने पूरा वीडियो ढूंढने की कोशिश की, क़रीब आधा घंटा लगाया, नहीं मिला। एक अन्य वीडियो मिला जो तकरीबन दस मिनट का ...
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Tag :God
  February 12, 2016, 3:03 pm
प्रगतिशील होने का दावा करनेवाले किसी युवा से आप पूछें कि वह कैसे कह सकता है कि वह प्रगतिशील है ; जवाब में वह कहे कि क्योंकि मेरे सामनेवाला कट्टरपंथी है इसलिए मैं प्रगतिशील हूं ; तो इस जवाब पर शायद आप हंसेंगे, हैरान होंगे या सर पीटेंगे। मगर ग़ौर से देखें तो भारत में प्रगतिश...
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Tag :brotherhood
  February 7, 2016, 4:39 pm
लघुकथाबंदूक, तलवार, भाला, तोप, तमंचा, बम, पत्थर, थप्पड़, घूंसा, ग़ाली आदि-आदि सब एक-दूसरे को कोई नुकसान पहुंचाए बिना मिल-जुलकर रहते थे।क्योंकि सबके सब हथियारनिरपेक्ष थे।हां, जब कोई अकेला, शांतिप्रिय, एकांतप्रिय, स्वतंत्र और मौलिक इंसान उनके सामने पड़ जाता तो वे मिल-जुलकर उसक...
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Tag :chunking
  January 28, 2016, 1:01 pm
(रंगों और प्रतीकों का चालू खेल-2)रंगो और प्रतीकों का खेल एक चालाक़ खेल है। इसमें नफ़रत फैलानेवाले शख़्स के लिए प्रेम का कोई प्रतीक चुनकर लोगों को झांसा देने की मज़ेदार सुविधा है, इसमें वंचितों को वंचित बनाए रखकर उनका मसीहा बन जाने का पूरा जुगाड़ है, इसमें स्त्रीविरोधी होते ह...
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Tag :confusion
  January 15, 2016, 7:16 pm
(रंगो और प्रतीकों का चालू खेल-1)रंगों और प्रतीकों के खेल में आदमी किस तरह उलझ जाता है इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण याद आता है। एक प्रसिद्ध खिलाड़ी के रिटायरमेंट पर उसके एक फ़ैन को पूरे स्टेडियम में एक प्रतीक को हाथ में उठाकर चक्कर लगाने का मौक़ा दिया गया। पता नहीं ईमानदारी, अन...
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Tag :Color
  January 11, 2016, 4:24 pm
हम जब छोटे थे, किसी न किसी स्कूल में पढ़ने जाते थे। मुझे याद आता है वहां कहीं न कहीं दीवारों पर अच्छी-अच्छी बातें लिखी रहतीं थी, मसलन-‘झूठ बोलना पाप है’, ‘सदा सत्य बोलो’, ‘बड़ों का आदर करो’ आदि-आदि। लेकिन बहुत-से बच्चे तो पढ़ते ही नहीं थे। जो पढ़ते भी होंगे उन्हें उससे क्या प्र...
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Tag :rituals
  January 8, 2016, 2:57 pm
शाहरुख़ खान की फ़िल्म ‘दिलवाले’ का ‘रंग दे तू मोहे गेरुआ’देखकर मुझे आमिर खान की ‘रंग दे बसंती’ याद आ गई (आप कहेंगे निर्देशकों के नाम क्यों नहीं लिखे तो मैं कहूंगा कि फ़िल्म के प्रोमोज़ में हीरो-हीरोइन को जिस तरह आगे किया जाता है और बातचीत की जाती है कि लगता है फ़िल्म उन्हीं...
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Tag :deception
  December 31, 2015, 4:25 pm
शाहरुख़ खान की फ़िल्म ‘दिलवाले’ का ‘रंग दे तू मोहे गेरुआ’देखकर मुझे आमिर खान की ‘रंग दे बसंती’ याद आ गई (आप कहेंगे निर्देशकों के नाम क्यों नहीं लिखे तो मैं कहूंगा कि फ़िल्म के प्रोमोज़ में हीरो-हीरोइन को जिस तरह आगे किया जाता है और बातचीत की जाती है कि लगता है फ़िल्म उन्हीं...
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Tag :deception
  December 31, 2015, 4:25 pm

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  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
  हमारीवाणी पर ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन के लिए 'क्लिक कोड' ब्लॉग पर लगाना आवश्यक है। इसके लिए पहले लोगिन करें, लोगिन के उपरांत खुलने वाले प...
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