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Blog: काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपुल'का कविता संसार

Blogger: Ram lakhara
परहित रात गगन में तारे  अगणित, जड़वत  हो  अनजान  खड़े है, छोटे  छोटे   दिखे   भले    पर मन ही मन अभिमान बड़े है। ऐसे  में   इन  सबका  अब  तो सबक  सीखना     निश्चित  है परहित   पाठ    पढा़ने        को  सूरज   निकलना   निश्चित है। - राम लखारा 'विपुल'... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   10:34am 13 Jan 2016 #कविता
Blogger: Ram lakhara
जीवन के दोराहे पर हम खुद ही संभलेंगे बदले हर मौसम भले पर हम ना बदलेंगे कोयल चाहे गीत सुनाए, तितली चाहे नाच दिखाए, सिवा तुम्हारे किसी और पर कभी न मचलेंगे बदले हर मौसम भले पर हम ना बदलेंगे सावन झूमें रस बरसाए, मास बसंती फूल खिलाए, प्यार तेरा ही पाकर बस हम हरदम महकेंगे बद... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   6:16am 7 Jan 2016 #Lyrics
Blogger: Ram lakhara
दोस्तों साल जाने को है। आज 31 दिसबंर हो गई है। 2015 हमारे पास से आहिस्ता आहिस्ता गुजर जाएगा, और हमें 2016 की गोद में सौंप जाएगा। 2016 की अंगुली पकड़कर हमें फिर से 365 पग भरने है। साल बीता, हाल बीता। जो कुछ पाया, उससे कहीं अधिक पाने की ख्वाहिश के साथ नए साल का स्वागत किया जाए। जो साथी पग प... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   5:17am 31 Dec 2015 #ब्लॉग चर्चा
Blogger: Ram lakhara
पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर में संपादक श्री अनिल अनवर के संपादन में प्रकाशित हो रही साहित्यिक पत्रिका मरू गुलशन में प्रकाशित एक कविता - Ram Lakhara Vipul Published Poem ... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   5:52am 29 Dec 2015 #Lyrics
Blogger: Ram lakhara
रिश्वत (Short Story in Hindi) रामदीन और कालूराम दोनो दोस्त एक दूसरे से आज लगभग पच्चीस वर्षों बाद एक बगीचे में मिले। दोनों एक दूसरे को देखकर यहीं सोच रहें थे कि वक्त की धार कैसे उन दोनों की जवानी को बुढापे की ओर ले जा रही थी। कालूराम जल विभाग में अधिकारी के पद पर हुआ करतें थे और रामदीन ... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   5:17am 18 Dec 2015 #Short stories in hindi
Blogger: Ram lakhara
Ram Lakhara Vipul Poetry अस्ताचल के सूर्य से, सब लेते मुंह फेर। अपनों की या गैर की, परख करे अंधेर।। - राम लखारा वाणी का सब खेल है, अमरित औ विष दोय। एक गैर अपना करै, दूजे दूरी होय।। - राम लखारा ... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   5:30am 16 Dec 2015 #दोहे (Dohe)
Blogger: Ram lakhara
Poetry of Ram Lakhara सागर से परित्यक्त   होकर  भी  जीवन  का   नव    नाद  फूंकता कोलाहल   के   दुरूह    दौर   में अनहद   एक   आवाज   घोलता। बिछड़न  का  हूं  प्रथम  स्वर मैं प्रथम  शब्द  हूं  बिरह  गीत  का प्रथम  प्रमाण  हूं  पल  भर में ही मिटने  वाली  क्षणिक  प्रीत  का। अधिक  नहीं  है   मेरा  ... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   5:50am 12 Dec 2015 #कविता
Blogger: Ram lakhara
 मैं बाती बन जलूं रात भर-  Ram Lakhara Vipul Poem and Lyrics ... Read more
clicks 242 View   Vote 0 Like   5:08am 7 Dec 2015 #गीत
Blogger: Ram lakhara
मेरे इस ब्लाग पर पाठकों ने ताली पर शायरी को भी खूब सराहा है इसलिए मैं इस बार अपने पाठकों और प्रशंसकों के लिए कुछ और शायरी ताली पर लिखकर लाया हूं।- कार्यक्रम में खुशियों का महोत्सव हो जाएगा, समंदर में लहरों का महोत्सव हो जाएगा, शोभा आपकी और हमारी दो दूनी चार होगी जब आपक... Read more
clicks 230 View   Vote 0 Like   5:52am 4 Dec 2015 #
clicks 153 View   Vote 0 Like   7:10pm 16 Jul 2015 #गज़ल
clicks 101 View   Vote 0 Like   3:13pm 13 May 2015 #मुक्तक
Blogger: Ram lakhara
Ram Lakhara poetry  जो तुझसे प्यार है मेरा वो बहुतो को चुभता है ,जैसे सुर्ख गुलाबी फूल संग काँटों के उगता है ,जातां कितने भी कर ले वो मगर मालूम नहीं उनको मैं तो वो मुसाफिर हु जो बस मंजिल पर रुकता है। -राम लखारा ... Read more
clicks 222 View   Vote 0 Like   8:11am 3 Jan 2015 #मुक्तक
Blogger: Ram lakhara
                      तुझे चाहना तुझे पाना, यह मेरी ज़ुस्तज़ु अब है ,                        मेरे दीवानेपन की भी थोड़ी सी गुफ्तगू अब है ,                          बड़ा ही शोख चेहरा है तेरा ऐ हुस्न की रानी ,                     जिधर फेरु नज़र अपनी वही बस तू ही तू अब है।                                            -र... Read more
clicks 321 View   Vote 0 Like   8:19am 27 Dec 2014 #कविता
clicks 234 View   Vote 0 Like   9:01am 22 Sep 2014 #शायरी
Blogger: Ram lakhara
Pic courtesy telugumirchi.com बलात् कर्म हुआ, एक धीर चरित्र नारी से, जतन सहस्त्र किये उसने , पर बच ना सकी अत्याचारी से, जिस दिन यह काला काम हुआ , पुरूष कुल पूरा बदनाम हुआ जिस पौरूष की महिमा, इतिहास ने गायी थी सदा अमर उसी पौरूष ने आज समझो, खोदी थी अपनी ही कबर अब कोई तुम्हारें बाजुओं की, यश गाथा... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   7:43am 12 Sep 2014 #कविता
Blogger: Ram lakhara
शिक्षक दिवस है आज।  सोचता हुँ कि जब पढ़ता था तो इस दिन की इतनी याद ना आती थी जितनी अब आती है। अब जबकि निकर की जगह पेंट ने ले ली है और पेंसिल से शायद ही कभी लिखना होता है। तब याद आती है उन सुनहरे दिनों की काश उन पलों को कुछ ज्यादा ही शिद्दत से जिया होता। आज जब पुराने शिक्षक मि... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   6:25am 5 Sep 2014 #ब्लॉग चर्चा
Blogger: Ram lakhara
Writer- Ram Chandra lakhara कमलेश अपने आॅफिस में एक आॅडिटर के रूप में काम करता था। आॅडिटर के रूप में वह एक ईमानदार व्यक्ति भी था। इसी कारण उसके ज्यादातर अधीनस्थ कर्मचारी जिनकी वह आॅडिट किया करता था, उससे चिढ़ते भी थें। बड़े कार्यालय में एकमात्र आॅडिटर होने के कारण हाजिरी रजिस्टर में... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   11:23am 21 Aug 2014 #लघुकथा
Blogger: Ram lakhara
Pic courtesy Google आपके रचे चाचा चौधरी ने हमारा बचपन संवारा है।  हमारे जीवन की खुशनुमा यादो में शुमार रहे है आपके किरदार। धन्यवाद प्राण साहब। आपने मेरा बचपन बनाया है और आज जो कुछ भी हू उसमे कुछ योगदान आपकी रचनाओ का भी है। आपको मेरा सलाम! लफ्ज़ो के जादूगर कभी मरा नहीं करते आँखों क... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   10:47am 7 Aug 2014 #
Blogger: Ram lakhara
 प्यार बाँटते चलों  नफरतों के कांटे प्रेम से काटते चलो, छोटी है जिंदगी दिल खोल कर प्यार बाँटते चलों। आसमान में छाए रहेंगे सदा बादल श्वेत और श्याम, दुःख के शूलों में से खुशियों के फूल छाँटते चलो। अपनों से बैर ना रहे कभी जिंदगी में, दूरियों की खाई को स्नेह से पाटते ... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   9:33am 7 Aug 2014 #गज़ल
Blogger: Ram lakhara
 pic courtesy www.wordcoiner.com  तुमने दिए कांटे उन्हें मैं फूलों का उन्हें ताज पहनाउंगा उलाहने जो मिले हमे उसी से जीवन साज बनाउंगा कहते थे लोग कि तुम कल तक भी यह न कर पाओगे तुम खुद देखों जरा इसी रोज इसे मैं आज कर जाउंगा जिन जरूरतों कोे दबा कर तुम मालिक बन बैठे हो उन्हीं जरूरतो को वि... Read more
clicks 174 View   Vote 0 Like   9:09am 15 Jul 2014 #
clicks 123 View   Vote 0 Like   6:07am 20 Jun 2014 #
Blogger: Ram lakhara
विश्व कविता दिवस पर जिला पुस्तकालय में काव्य गोष्ठी में शामिल हुआ, कविता जीवन को कैसे प्रभावित करती और कैसे राजा महाराजा कवियो को संरक्षण देते थे इस पर चर्चा हुई . साथ ही कवियो ने अपनी कविताये भी सुनाई. Click here for relating Bhaskar news.... ... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   6:07am 24 Mar 2014 #
Blogger: Ram lakhara
मेरी शायरिया ………     १. विरह की इस शाम का एक खुबसूरत सवेरा हु प्रेम की इस खान का एक सिरफिरा पहेरा हु कलम के इस दीवाने के मुरीद होंगे लाखो मगर मै कल भी सिर्फ तेरा था मैं आज भी सिर्फ तेरा हु। २. दर्द न दर्द रहे गर हाथ में तेरा हाथ रहे    हर दिन सुहाना हो गर वक्त से ऊपर तेरा ... Read more
clicks 204 View   Vote 0 Like   8:14am 8 Feb 2014 #
Blogger: Ram lakhara
मेरा भ्रष्ट नेता आया है जनता तुम जूते बरसाओ, मेरा भ्रष्ट नेता आया है........ भ्रष्टो तुम शर्म से मर जाओ, नाक तुमने कटाया है.......  ओ काले कोयले की कालिख लगा इस झूठे चेहरे पर, लाओ एक जूते की माला सजाओ इनके कांधो पर, सैर इन्हे गधे पर करवाओ, मेरा भ्रष्ट नेता आया है ..... बंधुओ बांध ... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   4:21am 21 Jan 2014 #
Blogger: Ram lakhara
 सुकून अब तो है हमें दिलदार की उन बाहों में  सुकून अब तो है हमें दिलदार की उन बाहों में सब चैन अब लुटा चुके उस प्यार की पनाहो में मिज़ाज़ हमरे दिल का यह कैसा हुआ हाय *राम* कदम जो लड़खड़ा गए प्यार की इन राहो में। सुख चैन सब लुटा चुके या कहो इन्हे गंवा चुके चाहतो का सिलसिला अ... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   9:34am 9 Jan 2014 #श्रृंगार रस

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