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काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपुल'का कविता संसार

परहित रात गगन में तारे  अगणित, जड़वत  हो  अनजान  खड़े है, छोटे  छोटे   दिखे   भले    पर मन ही मन अभिमान बड़े है। ऐसे  में   इन  सबका  अब  तो सबक  सीखना     निश्चित  है परहित   पाठ    पढा़ने        को  सूरज   निकलना   निश्चित है। - राम लखारा 'विपुल'...
काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :कविता
  January 13, 2016, 4:04 pm
जीवन के दोराहे पर हम खुद ही संभलेंगे बदले हर मौसम भले पर हम ना बदलेंगे कोयल चाहे गीत सुनाए, तितली चाहे नाच दिखाए, सिवा तुम्हारे किसी और पर कभी न मचलेंगे बदले हर मौसम भले पर हम ना बदलेंगे सावन झूमें रस बरसाए, मास बसंती फूल खिलाए, प्यार तेरा ही पाकर बस हम हरदम महकेंगे बद...
काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :Lyrics
  January 7, 2016, 11:46 am
दोस्तों साल जाने को है। आज 31 दिसबंर हो गई है। 2015 हमारे पास से आहिस्ता आहिस्ता गुजर जाएगा, और हमें 2016 की गोद में सौंप जाएगा। 2016 की अंगुली पकड़कर हमें फिर से 365 पग भरने है। साल बीता, हाल बीता। जो कुछ पाया, उससे कहीं अधिक पाने की ख्वाहिश के साथ नए साल का स्वागत किया जाए। जो साथी पग प...
काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :ब्लॉग चर्चा
  December 31, 2015, 10:47 am
पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर में संपादक श्री अनिल अनवर के संपादन में प्रकाशित हो रही साहित्यिक पत्रिका मरू गुलशन में प्रकाशित एक कविता - Ram Lakhara Vipul Published Poem ...
काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :Lyrics
  December 29, 2015, 11:22 am
रिश्वत (Short Story in Hindi) रामदीन और कालूराम दोनो दोस्त एक दूसरे से आज लगभग पच्चीस वर्षों बाद एक बगीचे में मिले। दोनों एक दूसरे को देखकर यहीं सोच रहें थे कि वक्त की धार कैसे उन दोनों की जवानी को बुढापे की ओर ले जा रही थी। कालूराम जल विभाग में अधिकारी के पद पर हुआ करतें थे और रामदीन ...
काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :Short stories in hindi
  December 18, 2015, 10:47 am
Ram Lakhara Vipul Poetry अस्ताचल के सूर्य से, सब लेते मुंह फेर। अपनों की या गैर की, परख करे अंधेर।। - राम लखारा वाणी का सब खेल है, अमरित औ विष दोय। एक गैर अपना करै, दूजे दूरी होय।। - राम लखारा ...
काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :दोहे (Dohe)
  December 16, 2015, 11:00 am
Poetry of Ram Lakhara सागर से परित्यक्त   होकर  भी  जीवन  का   नव    नाद  फूंकता कोलाहल   के   दुरूह    दौर   में अनहद   एक   आवाज   घोलता। बिछड़न  का  हूं  प्रथम  स्वर मैं प्रथम  शब्द  हूं  बिरह  गीत  का प्रथम  प्रमाण  हूं  पल  भर में ही मिटने  वाली  क्षणिक  प्रीत  का। अधिक  नहीं  है   मेरा  ...
काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :कविता
  December 12, 2015, 11:20 am
 मैं बाती बन जलूं रात भर-  Ram Lakhara Vipul Poem and Lyrics ...
काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :गीत
  December 7, 2015, 10:38 am
मेरे इस ब्लाग पर पाठकों ने ताली पर शायरी को भी खूब सराहा है इसलिए मैं इस बार अपने पाठकों और प्रशंसकों के लिए कुछ और शायरी ताली पर लिखकर लाया हूं।- कार्यक्रम में खुशियों का महोत्सव हो जाएगा, समंदर में लहरों का महोत्सव हो जाएगा, शोभा आपकी और हमारी दो दूनी चार होगी जब आपक...
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Tag :
  December 4, 2015, 11:22 am
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काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :गज़ल
  July 17, 2015, 12:40 am
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काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :मुक्तक
  May 13, 2015, 8:43 pm
Ram Lakhara poetry  जो तुझसे प्यार है मेरा वो बहुतो को चुभता है ,जैसे सुर्ख गुलाबी फूल संग काँटों के उगता है ,जातां कितने भी कर ले वो मगर मालूम नहीं उनको मैं तो वो मुसाफिर हु जो बस मंजिल पर रुकता है। -राम लखारा ...
काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :मुक्तक
  January 3, 2015, 1:41 pm
                      तुझे चाहना तुझे पाना, यह मेरी ज़ुस्तज़ु अब है ,                        मेरे दीवानेपन की भी थोड़ी सी गुफ्तगू अब है ,                          बड़ा ही शोख चेहरा है तेरा ऐ हुस्न की रानी ,                     जिधर फेरु नज़र अपनी वही बस तू ही तू अब है।                                            -र...
काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :कविता
  December 27, 2014, 1:49 pm
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काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :शायरी
  September 22, 2014, 2:31 pm
Pic courtesy telugumirchi.com बलात् कर्म हुआ, एक धीर चरित्र नारी से, जतन सहस्त्र किये उसने , पर बच ना सकी अत्याचारी से, जिस दिन यह काला काम हुआ , पुरूष कुल पूरा बदनाम हुआ जिस पौरूष की महिमा, इतिहास ने गायी थी सदा अमर उसी पौरूष ने आज समझो, खोदी थी अपनी ही कबर अब कोई तुम्हारें बाजुओं की, यश गाथा...
काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :कविता
  September 12, 2014, 1:13 pm
शिक्षक दिवस है आज।  सोचता हुँ कि जब पढ़ता था तो इस दिन की इतनी याद ना आती थी जितनी अब आती है। अब जबकि निकर की जगह पेंट ने ले ली है और पेंसिल से शायद ही कभी लिखना होता है। तब याद आती है उन सुनहरे दिनों की काश उन पलों को कुछ ज्यादा ही शिद्दत से जिया होता। आज जब पुराने शिक्षक मि...
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Tag :ब्लॉग चर्चा
  September 5, 2014, 11:55 am
Writer- Ram Chandra lakhara कमलेश अपने आॅफिस में एक आॅडिटर के रूप में काम करता था। आॅडिटर के रूप में वह एक ईमानदार व्यक्ति भी था। इसी कारण उसके ज्यादातर अधीनस्थ कर्मचारी जिनकी वह आॅडिट किया करता था, उससे चिढ़ते भी थें। बड़े कार्यालय में एकमात्र आॅडिटर होने के कारण हाजिरी रजिस्टर में...
काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :लघुकथा
  August 21, 2014, 4:53 pm
Pic courtesy Google आपके रचे चाचा चौधरी ने हमारा बचपन संवारा है।  हमारे जीवन की खुशनुमा यादो में शुमार रहे है आपके किरदार। धन्यवाद प्राण साहब। आपने मेरा बचपन बनाया है और आज जो कुछ भी हू उसमे कुछ योगदान आपकी रचनाओ का भी है। आपको मेरा सलाम! लफ्ज़ो के जादूगर कभी मरा नहीं करते आँखों क...
काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :
  August 7, 2014, 4:17 pm
 प्यार बाँटते चलों  नफरतों के कांटे प्रेम से काटते चलो, छोटी है जिंदगी दिल खोल कर प्यार बाँटते चलों। आसमान में छाए रहेंगे सदा बादल श्वेत और श्याम, दुःख के शूलों में से खुशियों के फूल छाँटते चलो। अपनों से बैर ना रहे कभी जिंदगी में, दूरियों की खाई को स्नेह से पाटते ...
काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :गज़ल
  August 7, 2014, 3:03 pm
 pic courtesy www.wordcoiner.com  तुमने दिए कांटे उन्हें मैं फूलों का उन्हें ताज पहनाउंगा उलाहने जो मिले हमे उसी से जीवन साज बनाउंगा कहते थे लोग कि तुम कल तक भी यह न कर पाओगे तुम खुद देखों जरा इसी रोज इसे मैं आज कर जाउंगा जिन जरूरतों कोे दबा कर तुम मालिक बन बैठे हो उन्हीं जरूरतो को वि...
काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :
  July 15, 2014, 2:39 pm
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काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :
  June 20, 2014, 11:37 am
विश्व कविता दिवस पर जिला पुस्तकालय में काव्य गोष्ठी में शामिल हुआ, कविता जीवन को कैसे प्रभावित करती और कैसे राजा महाराजा कवियो को संरक्षण देते थे इस पर चर्चा हुई . साथ ही कवियो ने अपनी कविताये भी सुनाई. Click here for relating Bhaskar news.... ...
काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :
  March 24, 2014, 11:37 am
मेरी शायरिया ………     १. विरह की इस शाम का एक खुबसूरत सवेरा हु प्रेम की इस खान का एक सिरफिरा पहेरा हु कलम के इस दीवाने के मुरीद होंगे लाखो मगर मै कल भी सिर्फ तेरा था मैं आज भी सिर्फ तेरा हु। २. दर्द न दर्द रहे गर हाथ में तेरा हाथ रहे    हर दिन सुहाना हो गर वक्त से ऊपर तेरा ...
काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :
  February 8, 2014, 1:44 pm
मेरा भ्रष्ट नेता आया है जनता तुम जूते बरसाओ, मेरा भ्रष्ट नेता आया है........ भ्रष्टो तुम शर्म से मर जाओ, नाक तुमने कटाया है.......  ओ काले कोयले की कालिख लगा इस झूठे चेहरे पर, लाओ एक जूते की माला सजाओ इनके कांधो पर, सैर इन्हे गधे पर करवाओ, मेरा भ्रष्ट नेता आया है ..... बंधुओ बांध ...
काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :
  January 21, 2014, 9:51 am
 सुकून अब तो है हमें दिलदार की उन बाहों में  सुकून अब तो है हमें दिलदार की उन बाहों में सब चैन अब लुटा चुके उस प्यार की पनाहो में मिज़ाज़ हमरे दिल का यह कैसा हुआ हाय *राम* कदम जो लड़खड़ा गए प्यार की इन राहो में। सुख चैन सब लुटा चुके या कहो इन्हे गंवा चुके चाहतो का सिलसिला अ...
काव्य प्रेरणा - राम लखारा 'विपु...
Tag :श्रृंगार रस
  January 9, 2014, 3:04 pm


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