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एहसास की लहरों पर ....

उसके पास भी सांसें थी मगर वो अपने आपको रोज़ कोसता था तारों से शिफ़ा मांगता था आँखें थी मगर सपनें देखने से डरता था रोज़ पहुँच जाता था वो पागल सड़क के बीचो-बीच बागवानी करने ज़िन्दगी के हर दिन की कीमत अदा करने एक दिन फूल लगाने वाले उसके हाथों को कोई अन्धा मुसाफ़िर ल...
एहसास की लहरों पर .......
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  May 14, 2015, 2:36 pm
एक वो रात थी जब हम दोनों की आँखों में एक जैसे ख्वाब हुआ करते थे हमें एक-दूसरे से ज़रा भी फ़ुरसत न होती थी इसकदर एक-दूजे में हम गुम हुआ करते थे तुम मेरी साँसों की ख़ुश्बू थे जाना हम तुम्हारी धड़कनों की सरगम हुआ करते थेऔर …एक ये रात है जो शिकवों के झुरमुट से बाहर नह...
एहसास की लहरों पर .......
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  April 28, 2015, 12:19 pm
आप सभी पाठक मित्रों को बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आप सभी के स्नेह एवं आशीर्वाद से 'अहसास एक पल'साँझा संकलन में मेरी रचनाएं भी शामिल हो पायी हैं। रचनायें जब पुस्तक का रूप लेती हैं तो मन को मीठा-मीठा सा आभास होना स्वाभाविक है। क्योंकि यह मेरी पहली पुस्तक है अन्य रचनाकार मि...
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  April 23, 2015, 11:31 am
हर मंज़र का मिज़ाज़ कड़वा हैकुछ धुंधलाई सी है ज़िन्दगीआज न तू नज़र आया मुझे और न तेरे आँखो में कहीं मैं दिखी ख़्वाबों के चेहरे का रंग उड़ गया  हकीकत ने घूर कर कुछ यूँ देखा  ये आसमान भी आज नीला नहीं रात सितारों की गुफ़तगू भी नहीं आज जाने क्यों इतना सन्नाटा हैमानिंद मातम मना रहा ह...
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  April 1, 2015, 5:02 pm
हाँ ! माना की तुम्हारा चेहरा उस शायर से मिलता है जिसने मुझे मोहब्बत में उम्र-क़ैद दी है मगर तुम्हारी आँखों में वफ़ा के वो रंग नहीं होंटो पे हज़ारों नाम है एक मेरे सिवाउंगलियों में मुझे छूने की तड़प नहीं बाहों में मुझे भरने की ख्वाइश भी नहीं ज़ेहन में कई ख़्याल है हम नहींशब न तो ...
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  March 25, 2015, 1:08 pm
कुछ ब्लॉग पढ़ने वाले का पाठक मित्रों का सन्देश मिला। उन्होंने कई दिन से ब्लॉग पर मुझे न पाकर पूछ ही लिया परी जी आपने लिखना बंद कर दिया है क्या ? मन गदगद हो गया की मेरे पाठक मेरी रचनाओं की प्रतीक्षा करते हैं। माफ़ी चाहती हूँ मित्रों अबके ऐसा नहीं होगा फेसबुक पर पोस्ट करते-कर...
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  March 24, 2015, 10:19 am
शाम का चेहरा उतरा हुआ सा हैआँखों की रोशन लवें बुझी हैं रात के कब्ज़े में संतरी लम्हें चले आएं उदास हवाएं दरख्तों से नीचे नहीं उतरी नींद के जुगनू बागो में टहलने नहीं आये खामोश हैं सदायें सारी सुन्न है आलम सारा कोई आहट नहीं ..सरसराहट नहीं...  मैंने उम्मीद के तिनके जलाएं हैं...
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  February 24, 2015, 5:09 pm
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  February 19, 2015, 2:52 pm
 बजी न घंटियाँ सेलफोन की ज़वाल तकरात भी न कोई राब्ता रहा तुमसे कल इतवार भी सन्नाटें दायें-बायें चिपके रहे आँखों के परदे से दिल की झील टपकती रही पैदल सवाल ज़ेहन के गुर्फे में मचलते रहे  तुमपर फ़ना होने की आरजुओं ने जबसे करवट लीअज़ब सी अज़ाब की हिरासत में आ गए हैं सुकून के ...
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  February 10, 2015, 4:01 pm
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  February 6, 2015, 11:12 am
  ख़्वाबों के देवताओं की बलि चढ़ाते हैं अरमानों की चिताओं को तेज़ाब से जलाते हैंरूह की नब्ज़ पर आरियां चलाते हैं साँसों में कतरा-कतरा ज़हर घोल जाते हैं कुचलते हैं हाथी पैर तले नाज़ुक से ज़ज़्बात ऐतबार के तबस्सुम का खून पी जाते हैं मनमर्ज़ी की मीनार जबरन अक्स पर बनाते हैं बना ...
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  January 31, 2015, 11:05 am
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  January 27, 2015, 4:25 pm
बिलख रही है दुबक के किसी कोने में रिश्तों के नाम पर खिलौना बनी जा रही हैज़ज्बातों की सूली पर सुबह-ओ-शाम चढ़ी जा रही है ताकतवर वज़ूद बनाया जिसे खुदा ने रहम की रह-रह कर भीख जुटा रही हैजो खुद चिंगारी है तिनकों से डरी जा रही है बस एक बार खोलो खुद को और झांको अंदर अपनेकी आखिर अबला-अ...
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  January 22, 2015, 12:13 pm
बर्तनों पर उलचते हैं पानीमेजों की आबरू का ख्याल करते हैंशीशे की दीवारों पर एक निशान नहीं चमकता फर्श पर जड़े पत्थर आईना से नज़र आतें हैं कालिख में नहाये हुए कारों को साफ़ करते पुर्जे-पुर्जे खोलते बांधते..कहीं हाथ फैलायेबाज़ारों में खुलेआम भिनभिनाते हुए उम्र और कद से कई फ...
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  January 20, 2015, 2:10 pm
अंधी सड़को पर जिंदगी गुमनाम हुईसुबह निकले तलाश में तो बस शाम हुईअपनी आरज़ूओं को मारकर कई हिस्सों में दफ़न किया इस बेवफाई की साज़िश भी सरेआम हुई इसकदर झुलसे सपने पलकों के देखकर आँखें भी हैरान हुई कहूँ क्या ? छिपाऊ क्या ? 'श्लोक'अपनी कुछ ऐसे भी पहचान हुईभूख से रूह तक शैतान हुई ...
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  January 16, 2015, 1:16 pm
धूप है न झड़ी ओस कीदिन के जिस्म से उठता हुआधुँआ भी नहींबर्फ की बौछार हैन रूखापन फ़ज़ाओं मेंनिगाहों के आस-पास हरा-भरा है मंज़रकाले दुपट्टे से कुछ बूँदें टपक रही है गुलाबी जमीनऔर भी गुलाबी हो गयी हैहवाओ का तन भीगा-भीगा सा है आज मेरे शहर का मौसम गीला सा है  ________________© परी ऍम. 'श्...
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  January 14, 2015, 2:19 pm
खेल रहे होजब से आँख-मिचौलीदिन भी दिन जैसा कहाँ? रात सा हर पहर नज़र आता हैदुबका हुआ सिमटा हुआ पूरा शहर नज़र आता है   आदत तुम्हारी आज की नहीं बड़ी पुरानी है ...पेड़ो की छाँव में छिप-छिप कर   बचके तुमसे निकलती हूँ जब तो सरेआम छेड़ते हो मुझेचले आते हो जलाने को मन  भिगाने को तन ...
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  January 10, 2015, 3:44 pm
मत चढ़ाओ नकाबों का बोझ चहरे परइत्र डालो जिस्म पे कि महके तू और तेरी खुशबु से आलम सारातसल्लियों की गोली खाकर बिस्तर को नींद की हसीना न दो सोने का वक़्त नहीं जल्दी उठो हमारी खुदगर्जी को खबर होने से पहले आओ अंधेरो में उजाला ढूँढना हैतेरे अंदर तुझे उतरना है मेरे अंदर मुझे झां...
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  January 5, 2015, 10:53 am
 अजनबी राहों में चल दिए हैं उम्मीदों का चराग़ लिए दिल में  जो खोया उसके निशान मिटाते हुएबस एक सोच है की आगे होना क्या है ? ये पहला कदम है पहला पहर है अभी साया साथ है मेरे अभी तो जोश भी है नयी सुबह की... चलना है दूर तक... अभी कई मोड़ बाकी है अभी तो रूबरू होना है कई अनजानी हलचलों...
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  January 1, 2015, 2:44 pm
कुछ परिंदे शाख से उड़ने को हैंकुछ नए रंग उतरने वाले हैं वक़्त की तस्वीर में ... अब देखना है चेहरा क्या होगाआने वाले दौर का आइना क्या होगा रंगत कैसी होगी..निखार कितना होगा कल जो भी हुआ एक तजुर्बा बना ... अब जो भी होगा एक इम्तिहान होगा !! ________________©परी एम.'श्लोक'...
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  December 31, 2014, 6:30 pm
जला कर प्यार की माचिसझोंक देते हैं अहम का तिनका-तिनका इसकी लौ में सर्द मौसम में अलाव जला लेते हैं चलो रिश्ते की ठण्ड मिटा देते हैंकुछ जो तुझे मुझसे है कुछ मुझे तुझसे है चलो मन के आसमान से शिकायत की सारी धुंध हटा देते हैं आ पहन लेते हैं लिबास यकीन का जेहन से शक की कंपकंपी उ...
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  December 29, 2014, 2:19 pm
कोहरे के शामियाने में रहते हैंओस का अलाव जलाते हैंठण्ड में ठिठुरते नहीं तसल्ली की घूँट पी जाते हैं गर्मियों की चिलचिलाती धूप ओढ़ते हैंलू की सर्द हवा में लहराते हैंसावन की बारिश में नहाते हैं पतझड़ के तोलिये से जिस्म सुखाते हैं जिंदगी क्या है ज़रा हमसे पूछोजो हर शय में ...
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  December 22, 2014, 1:13 pm
मुट्ठी भर लोग हमपर इसलिए हावी हैं क्योंकि हमारा हुजूम बेहद खोखला हैअंदर ही अंदर ईर्ष्या का दीमक इसे चाटता जा रहा है  वरना उनमेंकूट-कूट कर जिहाद के नाम पर जितनी नफरत भरी गयी है यदि हममें एकता के लिए आधी भी मोहोब्बत होतीगर उनकी दहशत की..क्रूरता की आधी भी हममें नेकी और ई...
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  December 18, 2014, 10:47 am
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  December 17, 2014, 5:00 pm
कैसे व्यक्त करूँवो पीड़ा जो कल तमाम माओं ने महसूस कीऔर जो कभी न मिटने वाला हमेशा चुभने वाला जख्म है... नहीं शब्द नहीं दर्द है बेहद दर्द मासूम बच्चो की चीखेंमुझे सुनाई देती हैं मैं विवश उन्हें बचा नहीं पाती फट जाती है छातीअपनों को खोकर बिलखते हुए लोगो को देख खून की होली खे...
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  December 17, 2014, 11:56 am


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