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Blog: सारथी

Blogger: vinayak vandan pathak
मैं दिल की धड़कन सुनता हूँ अखिल विश्व के प्रेम रूप को जीवन के हर छाव धूप को निशा रवि के आलिंगन को, कविता में बुनता हूँ मैं दिल की धड़कन सुनता हूँ मौन स्वरों के गूढ़ मर्म के ह्रदय में सिमटे लाज शर्म कोशब्दों की गंगा से धोकर नया अर्थ गढ़ता हूँ मैं दिल की धड़कन सुनता ह... Read more
clicks 125 View   Vote 0 Like   6:07am 18 May 2015
Blogger: vinayak vandan pathak
उम्र के उस दौर में जहाँ आपका युवापन अपने चरम पर हो और आप कुछ भी कर सकने वाली स्थिति में हो ऐसे में  अक्सर निरंकुशता का भाव आत्मघाती होता है !कोई कितना भी ऊर्जावान हो कभी न कभी उस क्षण वो भी ऊर्जाहीन हो जाता है, जिस क्षण निरंकुशता का भाव छाने लगता है ! कुछ दिनों से कुछ भी न क... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   9:50am 8 Apr 2015
Blogger: vinayak vandan pathak
बेचैन नजरे जिधर भी गयी हैतुम्हारी ही नजरो से फिर मिल गयी है ये क्या आरजू है क्यों बहकी निगाहेमुझे कोई रोके कुछ तो बताये म... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   1:23pm 3 Apr 2015
Blogger: vinayak vandan pathak
घर के झगड़ा होला तगड़ा , आपन आन हो जाला हो खेत दुवारी गैया घारी सब के सब बटी जाला हो घर के भौजी आन भुझाली, भैया के बदलल तेवर बाबा &#... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   2:20am 3 Apr 2015
Blogger: vinayak vandan pathak
पुरब के जब पवन बहे तब, गाव के माटी महके ला सरसों के पीयर का  फुलवा रही रही अँखियाँ देखे ला भिन्सहरे से अम्मा उठी के घर कोना सब झारे ली जैसे कौनो देवी माई दुःख के मार भगावेलीखेतवा के मटिया में बाबाआपन देहिया जोते लेतब जा के गेहुवा, धनवा  में  भरी भरी बलिया ... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   10:43am 1 Apr 2015
Blogger: vinayak vandan pathak
कंटक वियोग का चुभता जब जब आती याद तुम्हारी हैरैन गयी बैरन भइ निदिया नयन नीर से भारी है                  शीतल पवन तन छु ले तí... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   3:48pm 23 Mar 2015
Blogger: vinayak vandan pathak
एक अरसे से खोज रहा था मै जिसको मैखाने में आज मुझे वो उसने पिला दी आँखों के पैमाने से ... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   3:14am 18 Mar 2015
Blogger: vinayak vandan pathak
आसमा के पार उसकी मंजिले हैजल रहा पर  बेखबर वो धुप से है आसमा के पार उसकी मंजिले है एक नन्हा बीज जब भी लड़ पड़ा है तब वहां चट्टान में भी गुल खिले है रेत की खामोशियों को तोडती है चिलचिलाती धुप में जो काफिले हैराह उन कदमो को जी भर चूमती है कंटको के  जाल पे जो भी चले है जब तलक उम... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   12:57pm 3 Mar 2015
Blogger: vinayak vandan pathak
एक चेहरे पे कई चेहरे लगा ले आइना सूरत मगर पहचानता हैइश्क़ में धोखा बहुत खाता है लेकिनआदमी का दिल भला क्या मानता हैमुफलिसी के वक़्त सबको ढूंढता हैपर अमीरी में किसे पहचानता हैगिरगिटों ने आज हैरत से कहा की आदमी भी रंग बदलना जानता है                            &... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   5:06am 2 Mar 2015
Blogger: vinayak vandan pathak
तुगलकी फरमान जैसा हो गया है इश्क अब एहसान जैसा हो गया है ये नहीं तो वो सही उससे बदल लो दिल भी अब सामान जैसा हो गया हैअब तमंचे पे ही यारों होगा डिस्कोआदमी शैतान जैसा हो गया है लुट गयी बस्ती, अमन, इंसानियत कीअब वहां शमशान जैसा हो गया है  ... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   11:21am 26 Jan 2015
Blogger: vinayak vandan pathak
 गंगा के तट  पर बैठे हुए जीवन को बहते हुए देख रहा हु ,  पानी में कोलाहल है पर एक शांति एक चिर शांति जो जैसे हर एक बून्द में समायी हुई हो ! इस तट  पर विवाह के कार्यक्रम और दूसरे तट पर दाह संस्कार ! अजब विरोधाभास है और शायद चिर सत्य भी ,   पर मुर्ख आदमी तो झूठी दुनिया में ही ... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   5:57am 30 Dec 2014
Blogger: vinayak vandan pathak
ऐ अमीरो और गरीबों के ख़ुदा !एक तू है या अलग है ये बता एक गर जो है तो इतने फासले क्यों बेबसी और गम के इतने सिलसिले क्यों बादशाहे समुन्दर गर जो तू है डूबती मजधार में फिर नाव क्यों बेसहारो का सहारा गर जो तू है भुखमरी से मर रहा इंसान फिर क्यों या तू मुझको रूबरू अपने ... Read more
clicks 98 View   Vote 0 Like   9:39am 29 Dec 2014
Blogger: vinayak vandan pathak
पथरो ने दूध पिया , चादर चढ़ी मजार पे एक भूखा, ठण्ड से  मरता रहा बाजार में आदमी की भीड़ ने हैवानियत है   ओढ़ ली इंसानियत को  टांग दी टूटी पड़ी   दिवार में सोम मंगल बुध के जाल में उलझा रहा है आदमी डूबा  शनिचर राहु के मझधार  में कोई गीता  बाच ले या... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   8:37am 29 Dec 2014
Blogger: vinayak vandan pathak
तम घिरे मन रे मत सो जाग रे हार की है कपकपी राह भी रुकी रुकी कर मशाल तन को अब रक्त को उबाल रे भूत तो अतीत है बीत गयी प्रीत है वर्तमान ध्यान है आज का सम्मान है   व्यर्थ न हो एक भी पलकाल को तू  साध रेतेरे मन की ये निराशापी गयी है सारी आशापग को तेरे बांधती हैब... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   8:29am 27 Dec 2014
Blogger: vinayak vandan pathak
कंधे पे कुदाल रखे भूवर अपने खरीदार की प्रतीक्षा करता हुआ बेचैनी से बुदबुदा रहा था “ आज बस मजूरी मिल जाये पहले भर पेट जलेबी , नहीं समोसे अरे मसाले में लिपटी आलू ........अरे , दवा का क्या वो भी तो जरुरी है बाबूजी की खांसी सुख के पक्की हो चली है ऊपर से गुल्लू के दूध का बयाना भी देना ... Read more
clicks 97 View   Vote 0 Like   10:01pm 10 Dec 2014
Blogger: vinayak vandan pathak
कोहराशरद ऋतु में आँखे मानो खुलने में एक दो कैलोरी उर्जा की खपत हो जाती है , सूर्य देव मानो सुदूर फ्रिज में बंद हो गये हो और धरती कोहरे की रजाई लपेटे सो रही है ! ब्रश लिए शीशे के सामने गया जो कोहरे से अभी तक लिप्त उसी में डूबा हुआ था , मन अभी तक सो रहा था, तन बिस्तर में लिपटा पड़ा ... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   12:53pm 10 Dec 2014
Blogger: vinayak vandan pathak
आदर्शो के घने घोसले, अन्दर बाहर से खोखलेशब्द बनेगे मेरे कातिल, गर आज ये राज खोलेलिपटे बेईमानी के रंग में, सच का पूरा पाठ सुनायेबेबस जीभ मौन स्वरों से मन के भीतर कोसे जायेहाय रे रक्षक बनते भक्षक, भ्रष्ट हुए जाते क्यों शिक्षकशिक्षा के पावन मंदिर में अजब गजब है रास रचाएसम्... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   2:28pm 4 Dec 2014
Blogger: vinayak vandan pathak
अजब अनूठे अनुपम रंग में रंगते दो तन बने एक मन प्रेम नदी में डुबकी ले जो धन्य हुआ है उसका जीवन वसुधा प्रेम करे अम्बर को युग बीते पर मिल न पाये नीरस नैन से व्याकुल होकर मेघ बरस के आस जगाये दूर से आती हर आहट में सुनने प्रिय की मधुर बातबन के जोगी प्रेम का रोगीग... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   1:45pm 30 Oct 2014
Blogger: vinayak vandan pathak
बैरागी मन रह रह भागे  अंधी दुनिया कच्चे धागे राग मोह भ्रमजाल में उलझे उठ मन जोगी चल अब जागे  नश्वर तन जग एक  छलावा अंदर बाहर घोर दिखावा क्रोध,लोभ,मद मोह जो त्यागे उसने  अंदर ईश्वर पाया अजर अमर अंतस  में रहता दीप ज्ञान का रह रह जलता सुख दुःख में  ... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   3:36am 26 Oct 2014
Blogger: vinayak vandan pathak
उसका बसंत मानो ख़ुशी से झूम रहा था , और  हवाये  जैसे उसको छूने को आतुर हो , एक स्वप्नभ्रम की तरह  उसे देखते हुए  मै जैसे अपना अस्तित्व भूल चूका था ! ऐसा लगा मानो सदियों की ताजगी  एक पल में मिल  गयी हो ! तभी वो मुड़ी और मुझे वास्तविकता की दुनिया में धकेलते हुए क्लासरूम म... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   9:16am 24 Sep 2014
Blogger: vinayak vandan pathak
नयन नीर मोती सा झलके प्रेम सीप में जब जब ढलके पतझड़ में बैरागी पत्ते ब्याह करे सावन से मिल के पर्वत के सुने आँगन मेंनदिया जैसे बसंत लाये पथरीली चट्टानों में कोई कोमल कमल खिलाये प्रेमपाश में बँधकर ईश्वर ग्वालिन के संग रास रचाये सर्वेश्वर सबका निर्माता&n... Read more
clicks 114 View   Vote 0 Like   2:14pm 23 Sep 2014
Blogger: vinayak vandan pathak
मेरे अरमान जैसे शाम बन के ढल रहे हो और  तुम चाँद बनके आसमा पे छा रहे हो  मै जब चला मुड़ गया तेरी गली में मुझसे खफा तुम किस गली को जा रहे हो दोनों की चुप्पी ने तोड़ी इस वफ़ा को और तुम मुझको गलत ठहरा रहे हो अल्फाज मेरे मुझको तनहा कर गए है अब साये भी मेरे सिमटते  जा... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   4:51am 15 Sep 2014
Blogger: vinayak vandan pathak
जब भी दरवाजे पे आहट की हवा ने यु लगा की बस तुम्हारे ही कदम है फूल को  नाजुक तने ने  थामा ऐसे यु लगे  आगोश में बस तू सनम है एक महक फैली हवाओं में यहाँ है या तेरे होने का मुझको ये भरम है याद से भींगी है अरमानो की चादर और आँखे बूँद से अब भी नरम है एक आशा  ... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   10:26am 14 Sep 2014
Blogger: vinayak vandan pathak
नीर धरा पे अमृत बन के तन में छलके जीवन बन के किन्तु व्यथित , पीड़ित शोषित है वसुंधरा पर  नदियां बन के अनुपम, अद्भुत उपमा प्रकृति की नीर से उपजी मानव संस्कृति मानव ही से  हुई तिरस्कृत नीर धरा पर गंगा बन के   परिवर्तन के नाम पे  मिटतीबांधो के बंधन से है ... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   9:24am 12 Sep 2014
Blogger: vinayak vandan pathak
नयी भोर की आहट है, तम का कोहरा हट जायेगा तरुण किरण का स्पंदन लो मन नवचेतन से भर जायेगा खोलो अलसायी से आँखे सच कर लो सपनो की बाते नूतन दिन अवसर नवीन है कल से पीछा छुट जायेगामन नवचेतन से भर जायेगा नई कोपले तरु पर फूटी कलियाँ नव यौवन में महकी पतझड़ पीर , उदासी... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   1:30am 9 Sep 2014


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