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Blog: सुबोध- चमकीले पल

Blogger: subodh
जहाँ बादल इन्द्रधनुष बोते थे वहां अब संगीनें बोई जाती है मासूम बच्चे गुड्डे-गुड़िया से खेलने वाले हथगोलों से खेलते है पहाड़ी नदियों से बहा है इतना लहू कि वहां के वाशिंदे पानी की जगह लहू से मुँह धोते है खेतों में खलिहानों में सूनापन छाया है मरे हुए ढोर-डांगर पड़े है मोहब्ब... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   10:43am 2 Oct 2014 #
Blogger: subodh
बेटियों को अच्छा बताने के लिए ,क्यों बुरा बताऊ बेटों को ?समाज ने बेटों को अहमियत दी , बेटी को नहीं दी तो उसका बदला इस तरह लिया जाए ?बेटी को प्यार दिया, किसने ?बहु को इज्जत दी , अधिकार दिए . किसने ?माँ को सम्मान दिया इतना कि चरणो में स्वर्ग मान लिया . किसने ?ये सब प्यार, इज्जत ,सम्... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   6:12am 28 Sep 2014 #
Blogger: subodh
ज़िन्दगी इतनी हसीं नहीं रही अब कि जीने की ख्वाइस बाकी हो !!जिए जा रहा हूँ बेमन से बुढ़ापे के अपने दर्द होते है और अपनी पीड़ा जिसे समेटे हुए खुद मेंजिए जा रहा हूँ मैं क्योंकि उसे यकीं है खुद की मोहब्बत पर कि जब तक वो जिन्दा है उसकी जिम्मेदारियां मैं उठाऊंगाऔर मैं उसका ... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   7:42am 26 Sep 2014 #
Blogger: subodh
अमीर यु हीं अमीर नहीं होता ( ३ ) आसान नहीं हैदायरे को तोडना जो आरामदायक  क्षेत्र (comfort zone) है तुम्हारा तब्दिल हो गया है आदत में .- चाहत तुम्हारी अमीर बनने कीकुछ नहीं भिखारी स्तर के अतिरिक्त .- चुनाव तुम्हारा अमीर बनने का शामिल किये है अपने में शर्तों का पुलिंदा ,बेहतर है चाह... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   1:37am 23 Sep 2014 #
Blogger: subodh
मेरी तोतली जुबान को समझना आसान न था लेकिन तुम समझती थी बिना कुछ कहे मेरे रोने की असली वजह तुम समझती थी मेरी खाली जेब और गुस्से की बातें तुम समझती थी आँखों में बसी इश्क़ की खुमारी को तुम समझती थी ज़माने की बदलती हवा को तुम समझती थी मेरे बदलते रिश्तों का बदलना तुम समझती थी और ... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   6:40am 16 Sep 2014 #
Blogger: subodh
शांति जिस कीमत पर भी मिले सस्ती होती है !!! हो सकता है हम आज इसे महसूस न करें , लेकिन जब जीवन में दौड़ते-दौड़ते थक जाएंगे , सत्ता हमारे हाथ से निकल कर नई पीढ़ी के हाथ में आ जाएगी और हमारे पास वक्त ही वक्त होगा - अपनी गुजरी यादों में जीने का ,की गई गलतियों को महसूसने का , पैसे के पीछ... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   3:51am 6 Sep 2014 #
Blogger: subodh
                     मेरी पोस्ट 103 .106 .107 .108 .109 .110   में मैंने पैसे की बचत को लेकर विस्तार से लिखा है , इन सारी पोस्ट्स के बाद  सवाल ये आता है कि इस 10 % पैसे को मैनेज कैसे किया जाए . . आपकी सारी कमाई जो टैक्स कटने के बाद आपके घर में आती है सबसे पहले उस क... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   3:30am 4 Sep 2014 #
Blogger: subodh
मेरी पोस्ट  105 पर कुछ सवाल आये थे ,उसका जवाब--मनीषजी , अंकुरजी 1) मेरी पोस्ट 86 , 88 और 105 देखें ,समझे . 2) कोई भी काम सोचने और शुरू करने से पहले अपनी टीम से राय करें ,उससे डिस्कस करें . 3) क्षेत्र के विशेषज्ञ से राय करें उसकी कंसल्टेंसी चार्ज उसे देवे , आपके पसंदीदा क्षेत्र पर वो ए... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   3:01am 1 Sep 2014 #
Blogger: subodh
ख्वाइशेंकाफी दिनों से ठहरी है मेरे साथ मेरे घर में .एक पुराने बिछड़े दोस्त की तरहवक्त-बेवक्त जगाती है मुझे और पूछने लगती है वही जाने- पहचाने सवाल जो कभी चिढ़ाते है मुझे और कभी लगते है खुद का वजूद जब भी तन्हा होता हूँ मेरे पास आकर बैठ जाती है उसके आने से मन में उजाला हो जाता ... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   1:05am 31 Aug 2014 #
Blogger: subodh
     पैसा हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है , यह कड़ी मेहनत अमीर मानसिकता  के लिए अस्थायी होती है और गरीब मानसिकता  के लिए स्थायी . इसकी वजह ये है कि कड़ी मेहनत से कमाए हुए पैसे को लेकर दोनों केदृष्टिकोणअलग-अलग होते है - एक इसलिए कमाता है कि पैसे जमा कर सके औ... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   1:45am 30 Aug 2014 #
Blogger: subodh
             पैसे के प्रबंधन के बारे में जब गरीबों से बात की जाती है तो उनका जो जवाब होता है वो ये होता है कि "जब मेरे पास बहुत सारा पैसा होगा तब मैंपैसे का प्रबंध करना शुरू  करूँगा ."                        अगर आप गहराई में जाए तो आप समझ पाएंगे कि उनक... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   2:44am 29 Aug 2014 #
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तुमने जब थामा मेरा हाथआंसुओं की हंसी फ़िज़ा में तैर गई मन के किनारों पर भावनाओं के हुजूम में एक-एक किस्सा एक-एक लम्हा सर पर हाथ रखने लगा आशीष की तरह डूबता सूरज नारंगी बिंदी बन चस्पा हो गया मेरे माथे पर मैं खिल गई महक गई पूनम की रात में रात रानी सी लिखने लगी जब प्यार का किस्सा... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   1:06am 28 Aug 2014 #
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इश्क़ का कुरता मैला हो गया और मेरी जीभ में जख्मइसकी पाकीज़गी बताते-बतातेमगर निगोड़ा ज़मानामोहब्बत कोज़िन्दगी की अमावस समझता हैरूह का नूर नहीं .शायद खुद गुजरे हैउस नाकाम मोहब्बत के मकाम सेआग के तूफ़ान सेकि ज़माने को बचाने लगे है मोहब्बत के नाम से .ऐ ! मौलातेरी छत के नीचेवादो... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   1:31am 27 Aug 2014 #
Blogger: subodh
             जब गरीबों से पैसे के प्रबंधन की बात की जाती है तो आम तौर पर उनका जवाब होता है कि मेरे पास इतने पैसे है ही नहीं कि उनका प्रबंधन करूँ ,मुश्किल से दो वक्त की रोटी जुटा पाता हूँ .                   उनको जो  सलाह हो सकती  है वो ये है कि ऐसी हालत में भी ... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   3:49am 26 Aug 2014 #
Blogger: subodh
                 मालिक वो होता है ,जो हासिल चीज़ों को सुव्यवस्थित तरीके से प्रबंधित करता है ,जो अपनी चीज़ों को बराबर प्रबंधित नहीं करते , वे जल्दी ही उन चीज़ों को या तो नष्ट हो जाने देते है या अपना मालिकाना हक़ खो देते है ,पैसा  इस साधारण से सिद्धांत&n... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   2:25am 25 Aug 2014 #
Blogger: subodh
एक तूफ़ान जो गुजरा मेरे जिस्म पर सेमेरी मासूमियत उड़ा ले गयामौत से भी खौफनाकज़िन्दगी छोड़ गयाजिनकी बाँहों में खेली-कूदीउनकी निगाहों में गलीज़ हो गईबाप के कंधे झुक गएमाँ की आँखों में पानी भर गया भाई कहीं कमजोर हो गया सखी सहेलियाँ ,सारी गलबहियाँअजनबी हो गई.फुसफुसाहट अपनी ह... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   2:36am 24 Aug 2014 #
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हकीकत में अमीर गरीबों से ज्यादा स्मार्ट नहीं होते है. बस उनकी पैसे से सम्बंधित आदतें गरीबों से अलग और पैसे को बढ़ाने में मददगार होती है  जो मूल रूप से उनकी अतीत की कंडीशनिंग से जुडी होती है .                                   ... Read more
clicks 162 View   Vote 0 Like   3:53am 23 Aug 2014 #
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एक सवाल Ratan ArjunAug 9th, 2:07pmDear sir, mane job chod kr do bar apna kam suru kiya lakin dono bar asaflta mili . m construction line m hu or m ab kuch nya krna chahta hu . pls mujhe koi rasta btao sir..मेरा जवाब रतनजी,दो बार की असफलता के बाद भी आप तीसरी बारकोशिश करना चाहते है ,आपके जज्बे और सोच को सलाम !कंस्ट्रक्सनलाइन में आप क्या करते है ,ये आपने स्पष्ट नहीं किया ,अगर आप स्पष्ट करते तो... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   3:19am 22 Aug 2014 #
Blogger: subodh
अमीर यु हीं अमीर नहीं होता ( २)दायराजो बनाते है आपनिर्भर है उसकीउपलब्धिआपके समर्पण पर ... -दायरामेंढक काहोता है तालाब,औरबाज़ काआकाश,सरहदों से आज़ाद आकाश . -मेंढकजब सोचता हैबाज़ बनने की,रोकती है उसेउसकी मानसिकता,जहाँ मौजूद हैफ़ेहरिश्तखतरों की . -त्याग हैआरामदेह दायरे का,ख़ौफ ... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   3:44am 21 Aug 2014 #
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103 . सही या गलत -निर्णय आपका !                   गरीब मानसिकता के लोग एक रुपये को सिर्फ एक रूपया मानते है जिसके बदले में वे लोग कोई चीज़ खरीदकर तत्काल संतुष्टि चाहते है उनकी निगाह में ये ऐसा गेहूँ है जिसकी  रोटी बननी है और उसे खाना है   जबकि अमीर म... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   3:46am 20 Aug 2014 #
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हम सभी में दो भावनाएँहोती हैं डर और लालच . पैसा न होने के डर से हमे कार्य करने की प्रेरणा मिलती है और पैसा हाथ में आने के बाद लालच की भावना जाग जाती है ,ये भी हमारे पास होना चाहिए और वो भी . लालच -इसे इच्छा भी कह सकते है, का कहीं कोई अंत नहीं होता , सो आदमी एक चक्र में फंस जाता ह... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   3:32am 19 Aug 2014 #
Blogger: subodh
तंग न करो कान्हा न बजाओ बांसुरी मैं बहुत दुखी हूँ अभी हरे है कई घाव दर्द से कराहती आत्मा के साथकैसे नाचूँकैसे झूमूँ तुम्हारी बांसुरी की तान पर ...कुछ करो कान्हा अब झूट-मूट कातुम्हारा जन्मदिन मनाने का नहींसच में तुम्हारा अवतार का वक्त आ गया है .आओ कान्हा ,आओ !!जन्मों नहीं अ... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   1:48am 18 Aug 2014 #
Blogger: subodh
ताकि कल जीत सकूँ ....हाँ, मैं स्वीकार करता हूँअपनी हार ...लेता हूँ पूरी जिम्मेदारी ...नहीं देता किसी को भी दोषतरफदारीनहीं करूँगा खुद कीकि मैं सही थावक़्त गलत हो गयानहीं करूँगा बेवजह की शिकायतऔर ये सब कर रहा हूँ सिर्फ इसलिएकि कल मेरी कोई हार न हो ... ...मैं करता हूँ स्वीकारमुझमे... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   2:21am 17 Aug 2014 #
Blogger: subodh
मेरे एक पाठक का सवाल था sar ji mene aap ke sabhi artical pare.meri yek samsya ko door kijiye mera medical ka thok ka weyapar he acha chal raha he par mene apne jiwan istar ko warane ke liye karj le liya ab use chukane ka rasta nahi mil raha he agar me apne weyapar se jeyada rupye nahi nikal sakta keya karna chahiye.मेरा जवाब---जो क़र्ज़ आपको दिए गए ब्याज से ज्यादा रिटर्न दिलाता है वो क़र्ज़ अच्छा क़र्ज़ होता है और जो क़र्ज़ आपको दिए जानेवाले ब्याज  से क... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   3:31am 16 Aug 2014 #
Blogger: subodh
कम प्रयासों से ज्यादा उपलब्धि कर पाना लीवरेजकहलाता है .  पोस्ट 75 देखे, यहाँ पर अमीर समय का लीवरेज कैसे पैदा करते है इस बारे में बताया गया है .पोस्ट 82  , 86  में हल्का सा इशारा है कि पैसे का लीवरेज कैसे पैदा किया जाता है ,.बहरहाल आपको अमीर बनने के लिएमहत्वपूर्ण चीज़ जो समझ... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   2:25am 15 Aug 2014 #


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