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Blog: Journey

Blogger: PAWAN KUMAR
वहम-भग्न---------अद्भुतमन-प्रणाली, उत्तंगचेष्टा, चित्तिवृहत्कायाकास्वरूपज्ञानसक्षमसंभाव्य, सर्वब्रह्मांड-कणसमाहित, तबक्यूँअल्प-विकास।मन-विचारक्याक्षणोंमें, नरकासुंदररूपहोस्वयंमेंप्रादुर्भावनिम्नसेउच्चसभीइसीचेष्टामें, कैसेनिखरेरूप, होगर्वासक्त।सभीतोभरपू... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   5:45pm 29 Jun 2019 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद– १३ यहकथासुनानेकेबाद, मुनिजाबालिनेएकतिरस्कार-पूर्णस्मितसंगअपनेपुत्र हरितवअन्यतपस्वियोंसेकहा : 'तुमसबदेखचुकेहोंकिकैसेइसकथामेंहमसबकोऔरहमारेउरोंको इतनादीर्घबाँधनेकीशक्तिहै।औरयहकाम-पीड़ितजीवहैजोअपनेदोषकारणस्वर्ग-पतितहुआ, औरपृथ्वीपरश... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   5:37pm 16 Jun 2019 #गद्य
Blogger: PAWAN KUMAR
स्वतंत्र-विचरण-----------------स्वतंत्र मन-विचरण की, साइबेरिया हंस से दीर्घ डयन सी  सर्व-दिशा आत्मसात की, विद्युत्तरंगें सर्वत्र विकिरण की। मन-जिजीविषा उत्तंग करने की, सागर सम उछाल भरने की नदी सम लहरने-मटकने की, हिरणी सम कुलाँचे भरने की। कोयल सम नाद करने की, गायक सम राग ... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   11:29am 2 Jun 2019 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद– १०इसपरिशेषकथाकेअति-कठिनश्रमहेतुमैंसृष्टि-गुरु (अभिभावक) गिरिसुतापार्वतीवपरमेश्वरदोनोंकीवन्दनाकरताहूँ, जिनकीदोअर्ध-देहोंकीएकवपु रचना बनतेहुएनतोसन्धिनभेदकोलक्षितहोतीहै। मैंविश्वस्रजानारायणकोनमनकरताहूँ, जिनकेद्वारानर्सिंह-रूपहर्षसेआ... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   9:10am 26 May 2019 #गद्य
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद - ९ (भाग -२)-----------------------------"उसकेकुछदिवसबीतजानेपर, मेघनादपत्रलेखासहितआयाऔरउसकोअंतः-कक्षअंदरलाया; औरजगहदूरसेहीनमस्कारकरचुकी, चंद्रापीड़नेस्मितसेप्रीतिप्रकाशितकी, औरउठकरअतिशयदर्शितआदरसहितपत्रलेखाकोआलिंगन-बद्धकरलिया; क्योंकियद्यपिस्वभावसेप्रिय... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   11:38am 11 May 2019 #गद्य
Blogger: PAWAN KUMAR
 बाप ------दिखता रूखा-सूखा, सख़्त-डाँटता, कदाचित सुस्त-अनावश्यक भीकभी भोला, विश्व-व्यवहारिकता से परे, अबल-असहाय सा कभी। कभी अन्य उसपर हँसते भी दिखते, उड़ाते लोग सादगी का व्यंग कभी किसी दबंग की खुशामद करता, कभी शेखी भी कमतर पर। कभी अर्धांगिनी से झगड़ता, कभी सं... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   5:52pm 4 May 2019 #चाहत
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद - ९ (भाग -१)----------------------------"गंधर्व-पार्थिवोंकोविदाकहकर, पूर्णहर्ष, उत्सुकतावविस्मय-पूरितउसनेअपनीसेना-मध्यअपनेकक्षमेंप्रवेशकिया; औरशेषराजसदोंकोप्रणामकरके, उसनेवैशम्पायनवपत्रलेखाकेसंगअधिकतरदिवसबिताया, कहतेहुए, 'महाश्वेतानेऐसाकहा, ऐसाकादम्बरीने, ऐसाम... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   12:00pm 20 Apr 2019 #गद्य
Blogger: PAWAN KUMAR
दौर्बल्य-निवारण -------------------कैसे सिखाऐं-बढ़ाऐं, अधिकार अहसास, सीधा खड़ा होना सीखभाई लोग निपट मूढ़-दमित, कैसे हों दीप्त ओर चरण प्रसारित। प्राणी-स्वरूप किस साँचे में ढ़ला, परिवेश-मिट्टी में पल-बढ़ घड़ा जीने के तरीके, कहना-सुनना, व्यवहार करना वहीं से सीखा। परिष्कृतों क... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   2:32pm 14 Apr 2019 #आत्म-अभिव्यक्ति
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दौबल्य-निवारण -------------------कैसे सिखाऐं-बढ़ाऐं, अधिकार अहसास, सीधा खड़ा होना सीखभाई लोग निपट मूढ़-दमित, कैसे हों दीप्त ओर चरण प्रसारित। प्राणी-स्वरूप किस साँचे में ढ़ला, परिवेश-मिट्टी में पल-बढ़ घड़ा जीने के तरीके, कहना-सुनना, व्यवहार करना वहीं से सीखा। परिष्कृतों को न... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   2:32pm 14 Apr 2019 #आत्म-अभिव्यक्ति
Blogger: PAWAN KUMAR
चिरंतन विवेचन-------------------एक स्वाभाविक सा प्रश्न आज मेरे मन में आया  शनै-२ आयु बढ़ रही, जीवन यूँ बीता जा रहा।   क्या जीवन मात्र है प्रातः-अपराह्न-निशा ही मध्यहम जीते इन क्षणों में ,जैसे यही है शाश्वत सत्य। कार्यालय में काम, सहकर्मियों से संवाद-विवाद  कुछ कहना, स... Read more
clicks 138 View   Vote 0 Like   6:35pm 6 Apr 2019 #आत्म-चिंतन
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद - ८ (भाग -२)----------------------------"उसकीविदाईपरचन्द्रापीड़किशोरियोंद्वाराअनुसरितहुआचलागया, जोउसकेविनोदहेतुकादम्बरीकेआदेशपरप्रतिहारीद्वाराभेजीगईथी, वीणावबाँसुरी, गायन-निपुण, पाँसेवचित्रकारीकीक्रीड़क, अनुभवीचित्रकारवश्लाघ्यकाव्यकेगवैयी; उसेपूर्व-परिचितकेयूर... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   11:39am 30 Mar 2019 #गद्य
Blogger: PAWAN KUMAR
Journey: लेखन-संस्मरण: लेखन-संस्मरण  -------------------- लेखन भी एक विचित्र विधा, बस बलात सा प्रारम्भ करना पड़ता  कलम-कागद लेकर बैठ जाओ, क्या निकलेगा किसी ...... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   5:09pm 22 Mar 2019 #
Blogger: PAWAN KUMAR
Journey: लेखन-संस्मरण: लेखन-संस्मरण  -------------------- लेखन भी एक विचित्र विधा, बस बलात सा प्रारम्भ करना पड़ता  कलम-कागद लेकर बैठ जाओ, क्या निकलेगा किसी ...... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   5:09pm 22 Mar 2019 #
Blogger: PAWAN KUMAR
Journey: लेखन-संस्मरण: लेखन-संस्मरण  -------------------- लेखन भी एक विचित्र विधा, बस बलात सा प्रारम्भ करना पड़ता  कलम-कागद लेकर बैठ जाओ, क्या निकलेगा किसी ...... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   5:09pm 22 Mar 2019 #
Blogger: PAWAN KUMAR
लेखन-संस्मरण --------------------लेखन भी एक विचित्र विधा, बस बलात सा प्रारम्भ करना पड़ता कलम-कागद लेकर बैठ जाओ, क्या निकलेगा किसी को न पता। यह भी मंदता का शिकार होता, स्वतः तो न सक्रिय, करना पड़ता मस्तिष्क को क्रियाशीलता में जोड़ना, एकांत में ही कुछ बन पड़ता। बस हिम्मत करके ... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   5:08pm 22 Mar 2019 #काव्य
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लेखन-संस्मरण --------------------लेखन भी एक विचित्र विधा, बस बलात सा प्रारम्भ करना पड़ता कलम-कागद लेकर बैठ जाओ, क्या निकलेगा किसी को न पता। यह भी मंदता का शिकार होता, स्वतः तो न सक्रिय, करना पड़ता मस्तिष्क को क्रियाशीलता में जोड़ना, एकांत में ही कुछ बन पड़ता। बस हिम्मत करके ... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   5:08pm 22 Mar 2019 #काव्य
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लेखन-संस्मरण --------------------लेखन भी एक विचित्र विधा, बस बलात सा प्रारम्भ करना पड़ता कलम-कागद लेकर बैठ जाओ, क्या निकलेगा किसी को न पता। यह भी मंदता का शिकार होता, स्वतः तो न सक्रिय, करना पड़ता मस्तिष्क को क्रियाशीलता में जोड़ना, एकांत में ही कुछ बन पड़ता। बस हिम्मत करके ... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   5:08pm 22 Mar 2019 #काव्य
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परिच्छेद - ८ (भाग -१)"सीधेसूर्यअस्तहोनाप्रारम्भहोगयाथा, जैसेवहमहाश्वेताकीकथासुननेपरकष्टसेदिवस-कर्त्तव्यत्यागरहाहो।तबदिवसधूमिलहोगया; ज्योतिर्मयलोहितलम्बितदिनकरजैसेपूर्ण-पुष्पणमेंप्रियंगु-कुञ्जकापराग; नभ-दिशाऐंसूर्यास्त-ज्योतिबिखेररहीथी, मृदुजैसेअन... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   4:37pm 9 Mar 2019 #पुरा-साहित्य
Blogger: PAWAN KUMAR
श्रम-विचार--------------- हम किनके लिए काम कर रहें अपने या अन्यों के, या यूँ ही शरीरों को रहें थका  गधा-बैल-ऊँट-घोड़ा सारी वय मालिक हेतु भार ढ़ोते, बदले में पुण्य लब्ध कितना?क्या श्रम का जग में कुछ आदर है, भवन बनते ही मजदूर-मिस्त्री दिए जाते हटा फैक्ट्री में मजदूर दिन-र... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   6:51pm 2 Mar 2019 #काव्य
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद -७ (भाग -२)-------------------------------"इसप्रकारकेवचनमैंनेकपिंजलद्वाराबोलतेसुने; औरजैसेहीमैंनेउनकोसुनामैंनेएकघोर-क्रंदनउच्चारणकिया, यद्यपिअभीबहुतदूरथा, जैसेकिमेराप्राण-पातहोगयाथा; औरमेराफटाकौशेयअंशुकजैसेकियहसरोवर  तीरद्वारालताओंसेउलझाहो, औरमेरेचरणबिनाकिसी... Read more
clicks 55 View   Vote 0 Like   11:17am 24 Feb 2019 #पुरा-साहित्य
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद– ७ (भाग -१)"यहतुम्हारीउपस्थितिमेंथाकिमैंनेपांडुरिककीकठोरभर्त्सनाकी, औरउससंबोधनपश्चातमैंनेउसेक्रोधमेंत्यागदियाऔरअपनेपुष्प-एकत्रणकेकार्यकोछोड़करअन्यस्थलचलागया।तुम्हारीविदाईपश्चात, मैंएकअल्प-कालहेतुविलगरहा, औरतबउत्सुकबनकरकिवहक्याकररहाथ... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   3:01pm 9 Feb 2019 #पुरा-साहित्य
Blogger: PAWAN KUMAR
कबाड़ीवाला -----------------आ गया, कबाड़ीवाला आ गया, आपकी गली-द्वार, रूपए -पैसे लो,पुराना सामान लोहा-प्लास्टिक-बोतलें दो, बदले में रुपए पैसे लो। कुछ समय पूर्व गली में यह शोर लग रहा था, मैंने इसका वाहन भी देखा है एक पुराने छोटे चौपहिए पर ड्राइवर के सीट साथ लाऊड स्पीकर लगा है। पी... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   7:05pm 2 Feb 2019 #लोक-व्यवहार
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद - ६ (भाग -२)"इनविचारोंसेप्रेरितमैंआगेबढ़ी, औरउसकेद्वितीय-तापसीसखाकेसमक्षनमनकरतेहुए, मैंनेपूछा : "उसकावंदनीयकाक्यानामहै ? वहकौनमुनि-पुत्रहै ? किसवृक्षसेयह (यष्टि) मालाबुनीगईहै ? क्योंकिअभीतकअज्ञात, इसकीसुवासवदुर्लभमाधुर्यमुझमेंमहदउत्सुकताउदितकर... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   4:23pm 26 Jan 2019 #पुरा - साहित्य
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद - ६ (भाग -१)कैलाश-समीरद्वाराअभिनंदित, वहउसस्थलीकीओरगयाजोचारोंओरद्रुमोंद्वाराआच्छादितथी, औरकैलाश-तीरकेचरणपरचंद्रप्रभानामकसरोवरकेवामतीरपर, जिसनेसमस्तक्षेत्रकोचंद्रिका-दीप्तिसेशुभ्रकररखाथा, उसकोशिवकारिक्तदेवालयदिखाईदिया।"जैसेहीउसनेमंदिरमें... Read more
clicks 70 View   Vote 0 Like   5:22pm 19 Jan 2019 #पुरा - साहित्य
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद -५ (भाग -२)--------------------------"कुछदिवसपश्चातएकसुमंगलदिवस, एकसहस्र-मुखियोंसेघिरेमहाराजनेशुकनासकीसहायतासेअभिषेक-कलशकोऊपरउठाया, औरस्वयंअपनेपुत्रकोअभिषिक्तकिया, जबकिअन्यसंस्कारकुल-गुरु (पुरोहित) द्वारानियोजितकिएगए।अभिषेक-जलप्रत्येकपावनसर, सरितावसमुद्रसेल... Read more
clicks 43 View   Vote 0 Like   4:59pm 13 Jan 2019 #पुरा - साहित्य


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