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Blog: Journey

Blogger: PAWAN KUMAR
लेखन-संस्मरण --------------------लेखन भी एक विचित्र विधा, बस बलात सा प्रारम्भ करना पड़ता कलम-कागद लेकर बैठ जाओ, क्या निकलेगा किसी को न पता। यह भी मंदता का शिकार होता, स्वतः तो न सक्रिय, करना पड़ता मस्तिष्क को क्रियाशीलता में जोड़ना, एकांत में ही कुछ बन पड़ता। बस हिम्मत करके ... Read more
clicks 82 View   Vote 0 Like   5:08pm 22 Mar 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद - ८ (भाग -१)"सीधेसूर्यअस्तहोनाप्रारम्भहोगयाथा, जैसेवहमहाश्वेताकीकथासुननेपरकष्टसेदिवस-कर्त्तव्यत्यागरहाहो।तबदिवसधूमिलहोगया; ज्योतिर्मयलोहितलम्बितदिनकरजैसेपूर्ण-पुष्पणमेंप्रियंगु-कुञ्जकापराग; नभ-दिशाऐंसूर्यास्त-ज्योतिबिखेररहीथी, मृदुजैसेअन... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   4:37pm 9 Mar 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
श्रम-विचार--------------- हम किनके लिए काम कर रहें अपने या अन्यों के, या यूँ ही शरीरों को रहें थका  गधा-बैल-ऊँट-घोड़ा सारी वय मालिक हेतु भार ढ़ोते, बदले में पुण्य लब्ध कितना?क्या श्रम का जग में कुछ आदर है, भवन बनते ही मजदूर-मिस्त्री दिए जाते हटा फैक्ट्री में मजदूर दिन-र... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   6:51pm 2 Mar 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद -७ (भाग -२)-------------------------------"इसप्रकारकेवचनमैंनेकपिंजलद्वाराबोलतेसुने; औरजैसेहीमैंनेउनकोसुनामैंनेएकघोर-क्रंदनउच्चारणकिया, यद्यपिअभीबहुतदूरथा, जैसेकिमेराप्राण-पातहोगयाथा; औरमेराफटाकौशेयअंशुकजैसेकियहसरोवर  तीरद्वारालताओंसेउलझाहो, औरमेरेचरणबिनाकिसी... Read more
clicks 44 View   Vote 0 Like   11:17am 24 Feb 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद– ७ (भाग -१)"यहतुम्हारीउपस्थितिमेंथाकिमैंनेपांडुरिककीकठोरभर्त्सनाकी, औरउससंबोधनपश्चातमैंनेउसेक्रोधमेंत्यागदियाऔरअपनेपुष्प-एकत्रणकेकार्यकोछोड़करअन्यस्थलचलागया।तुम्हारीविदाईपश्चात, मैंएकअल्प-कालहेतुविलगरहा, औरतबउत्सुकबनकरकिवहक्याकररहाथ... Read more
clicks 41 View   Vote 0 Like   3:01pm 9 Feb 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
कबाड़ीवाला -----------------आ गया, कबाड़ीवाला आ गया, आपकी गली-द्वार, रूपए -पैसे लो,पुराना सामान लोहा-प्लास्टिक-बोतलें दो, बदले में रुपए पैसे लो। कुछ समय पूर्व गली में यह शोर लग रहा था, मैंने इसका वाहन भी देखा है एक पुराने छोटे चौपहिए पर ड्राइवर के सीट साथ लाऊड स्पीकर लगा है। पी... Read more
clicks 40 View   Vote 0 Like   7:05pm 2 Feb 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद - ६ (भाग -२)"इनविचारोंसेप्रेरितमैंआगेबढ़ी, औरउसकेद्वितीय-तापसीसखाकेसमक्षनमनकरतेहुए, मैंनेपूछा : "उसकावंदनीयकाक्यानामहै ? वहकौनमुनि-पुत्रहै ? किसवृक्षसेयह (यष्टि) मालाबुनीगईहै ? क्योंकिअभीतकअज्ञात, इसकीसुवासवदुर्लभमाधुर्यमुझमेंमहदउत्सुकताउदितकर... Read more
clicks 42 View   Vote 0 Like   4:23pm 26 Jan 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद - ६ (भाग -१)कैलाश-समीरद्वाराअभिनंदित, वहउसस्थलीकीओरगयाजोचारोंओरद्रुमोंद्वाराआच्छादितथी, औरकैलाश-तीरकेचरणपरचंद्रप्रभानामकसरोवरकेवामतीरपर, जिसनेसमस्तक्षेत्रकोचंद्रिका-दीप्तिसेशुभ्रकररखाथा, उसकोशिवकारिक्तदेवालयदिखाईदिया।"जैसेहीउसनेमंदिरमें... Read more
clicks 53 View   Vote 0 Like   5:22pm 19 Jan 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद -५ (भाग -२)--------------------------"कुछदिवसपश्चातएकसुमंगलदिवस, एकसहस्र-मुखियोंसेघिरेमहाराजनेशुकनासकीसहायतासेअभिषेक-कलशकोऊपरउठाया, औरस्वयंअपनेपुत्रकोअभिषिक्तकिया, जबकिअन्यसंस्कारकुल-गुरु (पुरोहित) द्वारानियोजितकिएगए।अभिषेक-जलप्रत्येकपावनसर, सरितावसमुद्रसेल... Read more
clicks 36 View   Vote 0 Like   4:59pm 13 Jan 2019
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद - ५  (भाग-१)  "जैसेअतएवदिवसगमनहुए, चंद्रापीड़कोयुवराजकेरूपमेंअभिषेककोउत्सुकमहाराजनेअंतःपुर-रक्षकोंकोइसकेहेतुसभीवस्तुऐंएकत्रणहेतुनियुक्तकिया; औरजबयहनिकटथा, कुमारकीमहिमा-वर्धनकेअभिलाषी, उतनीमहानजितनीपूर्ववतहीहै, शुकनासनेअपनीयात्राओंमेंसे... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   5:59pm 30 Dec 2018
Blogger: PAWAN KUMAR
यक्ष-प्रश्न उत्तर ------------------मानव की क्या बुद्धिमता है, क्या समर्पित हो प्रदत्त कार्यों में रहे व्यस्तबस स्वामी-आदेश, कर्म ही अधिकार, अधिक अग्रिम-चेष्टा मत कर। जो काम दिए जाते निर्वाहार्थ, क्या वे ही हमारी व्यक्तित्व-पराकाष्टा  क्या प्रदत्त भृत्ति से न अग्र चर... Read more
clicks 50 View   Vote 0 Like   6:34pm 22 Dec 2018
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद – ४ (भाग -२)---------------------------औरजैसेकिचंद्रापीड़कालांतरमेंसभीसंस्कार-वृतोंसेगुजरा, उसकीशिखाबाँधनेकेलेकर, उसकाबाल्यकालबीतगया; औरअपकर्षण (अनन्यमनस्क) रोधहेतु, तारापीड़नेनगरकेबाहरएकज्ञान-प्रासादनिर्माणकराया, शिप्रानदीकेसाथअर्ध-क्रोशमेंफैला, एकहिमाद्रशिखर... Read more
clicks 48 View   Vote 0 Like   5:57pm 15 Dec 2018
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद -  ४त्रिलोक-जन्मक (स्रष्टा, विधाता), पोषकऔरसंहारकमहाकालएवंप्रमथ-स्वामीद्वाराअपनानिवासबनाईजैसेकियहएकद्वितीयवसुंधराहीहो, सुवर्ण-युगकाएकआवास, पृथ्वीकामहानतमगौरवउज्जैयिनीनामकनगरहै।वहाँभास्करप्रतिदिनमहाकालकोश्रद्धा-सुमनचढ़ाताहैक्योंकिइसकेअश... Read more
clicks 47 View   Vote 0 Like   2:01pm 1 Dec 2018
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद – ३ (भाग -२)---------------------------तबशबरनीचेआयाऔरभूमिपरछितरितनन्हेंतोतोंकोएकत्रितकिया, उसनेउन्हेंशीघ्रतासेएकपर्ण-कंडील (टोकरी) मेंएकलता-रज्जुसेबाँधा, औरअपनेनेताद्वारागमितपथद्वाराशीघ्रकदमभरतेहुएउसनेउसक्षेत्रप्रस्थानकिया।मैंनेइसीमध्यजीवन-आशाप्रारंभकरदी,... Read more
clicks 109 View   Vote 0 Like   5:40pm 21 Nov 2018
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद– ३ (भाग -१)विन्ध्यनामकएकवनहैजोपूर्वीएवंपश्चिमीमहासागरोंकाआलिंगनकरताहै, औरमध्य-क्षेत्रकोऐसेसुशोभितकरताहैजैसेयहपृथ्वी-अंचलहो।यहवन्यगजोंकेमद-सिंचितद्रुमोंसेरमणीयहैजोअपनेशीर्षोंपरश्वेतपुष्प-भारधारणकरतेहैं; इसमेंश्यामवल्ली (कालीमिर्च) केवृक्... Read more
clicks 60 View   Vote 0 Like   5:25pm 17 Nov 2018
Blogger: PAWAN KUMAR
परिच्छेद -२    एकबारएकसमयशूद्रकनामकएकराजाथा।द्वितीयइंद्रभाँतिउसकाप्रभुत्वसभीनृपोंकेनमितशीर्षोंद्वारासम्मानितथा; चारमहासमुद्रोंद्वारापरिसीमितवसुंधराकावहस्वामीथा, उसकेपासउसकेतेजकेसमक्षसिरझुकाएपड़ौसीमुखियोंकीएकसेनाथी, उसमेंएकसार्वभौमनृपके... Read more
clicks 85 View   Vote 0 Like   8:33am 4 Nov 2018
Blogger: PAWAN KUMAR
श्री बाणभट्ट-कृत कादम्बरी : पूर्व – भाग(हिंदी- भाषांतर)परिच्छेद -१ स्तुतिहैउसअजन्मे, स्रष्टा, पालनहारएवंसंहारककीजोत्रिरूपवत्रिगुणहै, जोवस्तुओंकेजन्ममेंक्रिया, उनकीनिरन्तरतामेंकल्याणऔरउनकेसंहारमेंतिमिरदर्शाताहै।महिमात्र्यंबकमकेचरण-रजकी, जोबा... Read more
clicks 64 View   Vote 0 Like   12:20pm 28 Oct 2018
Blogger: PAWAN KUMAR
आत्म-परिष्कार-------------------कौन उत्कृष्ट रूप स्व से संभव, मार्ग निज-उज्ज्वल करें दर्शित कैसे देह-मानस कायांतरित ही, क्या वृद्धि की सीमा किञ्चित? कैसे 'सुंदरतम मन'प्राप्ति, धरा भाँति सम-असम धारण सक्षम कैसे प्रमाद त्याग सुवृति हेतु, जीव चेष्टा पराकाष्टा करें ग्रहण। क... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   5:03pm 1 Oct 2018
Blogger: PAWAN KUMAR
सुमति - दान--------------- दीन्हों सुमति, विवेक अग्रसर, सयंमित साहसी अदमितनीर-क्षीर विवेचन कौशल, वक -हंस पहचान विदित। अंतरतम दृश्य सक्षम, मम गुप्त रिपुओं को करो समक्ष सामना हो स्व-दुर्बलताओं से, विजित हों सर्व-विधर्म। सत्य-आत्मसात, निर्मल बुद्धि का परम-स्तर अनुभव पैम... Read more
clicks 51 View   Vote 0 Like   6:05pm 18 Aug 2018
Blogger: PAWAN KUMAR
वय-वृद्धि क्रम --------------------कालक्रम में जीवन भोला न रहता, बचपन के शौख-अंदाज उम्र संग नदारद मुस्काता, खिलता-हँसता चेहरा, जीवन की वीभत्स-युद्ध छाया में जाता छुप। 'भूल गए तानमान भूल गए जकड़ी, तीन चीजें याद रह गई नून-तेल-लकड़ी' प्रातः-जाग बाद दिवस संघर्ष में धकाया जाता, सा... Read more
clicks 62 View   Vote 0 Like   4:37pm 14 Jul 2018
Blogger: PAWAN KUMAR
 कठिन मूल-भेदन-------------------सृष्टि-चलन एक महातंत्र, बहु कारक, सतत घटित है, अनेक रहस्य विस्मयी कौन जग को पूर्ण मनन में सक्षम, प्राणी क्षीण-चिंतक, विचार मात्र सतही। विशाल सृष्टि, बहुल-विस्तृत अवयव, चिर-दूरी मध्य, स्पष्ट संदर्भ भी न दर्शित सब अपनी जगह नन्हें जग में... Read more
clicks 59 View   Vote 0 Like   12:49pm 1 Jul 2018
Blogger: PAWAN KUMAR
सम्मिलित चेतना--------------------इस प्रकृति के बहु-आयाम, अति सघन-विस्तृत, प्रतिकण  है विचित्र रूप उसका सबसे गहन-संबंध, मनीषियों का सर्व-ब्रह्मांड एकत्रण हेतु मनन। मानव भी बहु-संख्यक, अन्य जीव सम प्रकृति-हिस्सा, तदानुक्रम उत्पन्नलाखों वर्षों  संग रह रहा, एक समन्वय सा बना... Read more
clicks 57 View   Vote 0 Like   7:17pm 27 May 2018
Blogger: PAWAN KUMAR
निकटस्थ - हित -------------------सभी निज संगठनों से जुड़े रहते, शांत रह समाज हेतु करते काम घर-कार्यालय माना प्रधान, पर यहीं नागरिक-दायित्व रूकता न। जिस परिवेश में हम जन्म लेते, उसके प्रति लगाव एक प्रवृत्ति सहज माना संपूर्ण ब्रह्मण्ड एक कुटुंब ही, निकटस्थों को समझते ... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   6:38pm 19 May 2018
Blogger: PAWAN KUMAR
मस्तिष्क-ग्रंथि प्रहेलिका---------------------------अन्वेषण प्रक्रिया से एक शब्द की यात्रा, प्राप्ति तो कुछ अग्र चरण  सकल जीवन यूँ चिंतन में बीतता, ठहरकर क्यूँ न उठाता अनुपम। चारों ओर ध्वनि-नाद गुंजायमान, मैं कर्ण होते भी न श्रव्य-सक्षम  अंदर से कुछ भी निकल न रहा, यूँ मूढ़... Read more
clicks 58 View   Vote 0 Like   1:44pm 6 May 2018
Blogger: PAWAN KUMAR
निज-निर्णय ---------------लोगों से सीखना ही होगा, निर्भीकता से निज बात कह-कर देते  लोग चाहे उनको पसंद करें या नहीं, जो जँचता प्रस्तुत कर देते। एक उक्ति पढ़ी थी 'Always Take Sides', जो मनानुरूप लगे हम भी सदा उचित न सोच पाते, पूर्वाग्रह-आवरण ओढ़े रहते। बहुदा एक मन बना लेते, परिस्थिति-प... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   5:53pm 28 Apr 2018


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