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Blog: उलूक टाइम्स

Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
खुले दरवाजे पर लात मारते ललकारते गुस्से से भरे बच्चों को पता है उनको जाना कहाँ हैंफुँफकारते हुऐ गाली देने के बाद पुलिस वाले से मुस्कुराते हुऐ कुछ साँस लेने का सा इशारा उनका अपना सा है समय के साथ दिशायें पकड़ते हुऐ भविष्य के सिपाही जानते हैं अपना भविष्य ये नहीं करेंगे ... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   2:04pm 17 Nov 2019 #दिशायें
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
गुलाब लाल हो शेरवानी हो जरूरी नहीं बच्चो समय देखो चाचा पुरानी सोच का रिश्ता है नये रिश्ते खोजो नये चाचा में नया जोश होगा पुराने की कब्र में बरबाद ना करो फूल फूल मालायें बनाओ नये रिश्तों पर ले जाकर चढ़ाओ चौदहनवम्बर एक अंक है वोट के हिसाब से रंक है मत फैलाओ देखो सामने कोई ह... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   4:06pm 14 Nov 2019 #गुलाब
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
स्याही से भरी दिख रही है पर कुछ नहीं लिख रही है उँगलियों से खेल रही है मगर कुछ भारी होकर कलम आज बस रिस रही है चलती रही है हमेशा किसी के इशारों से आज भी दिख रही है ना जाने क्यों लग रहा है कुछ झिझक रही है कुछ रुक रही है कागज कागज न्योछावर होती रही है अपनी आज भी कुछ नहीं कह रही है... Read more
clicks 9 View   Vote 0 Like   3:29pm 12 Nov 2019 #दिख
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
एक सी नहीं मानी जाती हैं आधुनिक चित्रकारी कुछ खड़ी कुछ पड़ी रेखायें खुद कूदी हुयी मैदान पर या जबरदस्ती की मारीऔर कुछ भी लिख देने की बीमारी होली पर जैसे आसमान की तरफ रंगीन पानी मारती खिलखिलाते बच्चे के हाथ की पिचकारी उड़ते फिर फैल जाते हुऐ रंग ब... Read more
clicks 19 View   Vote 0 Like   4:52pm 31 Oct 2019 #दिन
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
शब्दों के जोड़ जन्तर जुगाड़ हैं कुछ के कुछ भी कह लेने के तरीके बुलन्द हैं सच के झूठ के फटे में किसने देखना होता है लगे हुऐ कई रंगीन पैबन्द हैं लिखना लिखाना पढ़ना पढ़ाना पढ़े लिखों का कहते हैं परम आनन्द हैअनपढ़ हाँकता चल रहा है पढ़े लिखों की एक भीड़ का आदि है ना अन्त है लिखा ज... Read more
clicks 11 View   Vote 0 Like   1:10pm 29 Oct 2019 #आदि
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
कुछ रोशनी की करनी हैं बातें और कुछ भी नहींदीवाली अलग है इस बार की पहले जैसे अब नहींअंधेरा अब कहीं होता ही नहीं जिक्र करना भी नहींउजाले लिख दिये जायें बस दीयों की जरूरत ही नहींबोल रोशनी हुऐ लब दिये तेल की कुछ कमी नहींसूरज उतर आया जमीं पर मत कह देना नहीं नहींचाँद तारे सभी ... Read more
clicks 9 View   Vote 0 Like   1:09pm 27 Oct 2019 #नहीं नहीं
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
गजब है सारे उसके हिसाब से हिसाब समझा रहे हैं गणित की लिखी पुरानी एक किताब को किसी बेवकूफ के द्वारा लिखा गयाइतिहास बता रहे हैं वो पता नहीं क्यों बना हुआ है अभी तक कागज के नोट पर जिसकी एक सौ पचासवी तेरहवी मनाने के लिये उसकी धोती के हम सब मिल कर उसके परखच्चे उड़ा रहे हैं वहम ह... Read more
clicks 38 View   Vote 0 Like   3:06pm 30 Sep 2019 #गणित
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
साफ कहना है कहने से कोई परहेज होना भी नहीं है बात अपनी खुद की जरा सा भी कहीं करनी भी नहीं है थोड़े से मतभेद से केवल अब कहीं कुछ होता भी नहीं है पूरा  कर लें मनभेद इस से अच्छा माहौल आगे होना भी नहीं है झूठ सारे लिपटे हुऐ हैं परतों में पर्दे में नहाने की जरूरत भी नहीं है ब... Read more
clicks 26 View   Vote 0 Like   4:56pm 29 Sep 2019 #जिन्दा
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
कौन सोया हुआ हैकौन जागा हुआ हैअब तोये भी पता नहीं चलतावो कहते हैंतुम सो रहे होहमें वो सोयेहुऐ सेनजर आते हैंचलो इस तरहही सहीउनकी रात होरही होती हैहम उठ करघूमने चलेजाते हैंभूख और रोटीएक पुरानी सी बात लगती हैकुछ नया करते हैंचलोचाँद परघूम करचल... Read more
clicks 27 View   Vote 0 Like   3:43pm 23 Sep 2019 #घूमने
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
किसलिये डरता है उसके आईना दिखाने से चेहरा छुपा के रखता है वो अपना जमाने से कुछ पूछते ही पूछ लेना उस से उसी समय तहजीब कहाँ गयी तेरी पूछने चला है हुकमरानो से ना देखना घर में लगी आग को बुझाना भी नहीं दिखाना आशियाँ उसका जलता हुआ चूकना नहीं तालियाँ भी बजाने से हि... Read more
clicks 21 View   Vote 0 Like   5:15pm 17 Sep 2019 #घड़ी
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
कुछ हंसते हंसते कुछ रो धो कर अपना घर अपनी दीवार रहने दे सर मत मार अपनी गाय अपनी गाय का अपना गोबरगोबर के कंडे खुद ही बनाये गये अपने ही हाथों से हाथ साफ धोकरअपना ही घर अपने ही घर की दीवारकंडे ही कंडेअपना सूरज अपनी ही धूप अपने कंडेकुरकुरेखुद रहे... Read more
clicks 13 View   Vote 0 Like   2:34pm 16 Sep 2019 #कंडे
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
कितने पन्ने और कब तलक आखिर कोई रद्दी में बेचने के लिये जायेगालिखते लिखते कुछ भी कहीं भी कभी किसी दिन कुछ तो सिखायेगाशायद किसी दिन यूँ ही कभी कुछ ऐसा भी लिख लिया जायेगायाद भी रहेगा क्या लिखा है और पूछने पर फिर से कह भी दिय... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   5:03pm 15 Sep 2019 #घबराये
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
ना तो तू शेर है ना ही हाथी है फिर किस लिये इच्छा करता हैदहाड़ने की और चिंघाड़ने की तेरी मर्जी कैसे चल सकती हैहिम्मत है तुझे फर्जी होने की जंगल में होना और शिकार करना नंगे होना साथ में तीर तलवार होनाकोई पाषाण युग थोड़े ना चल रहा है दर्जी है खुद ही खुदगर्जी सिल रहा है... Read more
clicks 24 View   Vote 0 Like   1:33pm 13 Sep 2019 #कायदा
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
कहने में क्या है कहता है कि लिखता है बस आग और आग लिखता है दिखने में दिखता है थोड़ा कुछ धुआँ लिखता है थोड़ी कुछ राख लिखता हैआग लिखने से उठता है धुआँ बच जाती है कुछ राख फिर भी नहीं कहते हैं लोग कि खाक लिखता है सोच नापाक होत... Read more
clicks 13 View   Vote 0 Like   4:18pm 10 Sep 2019 #खाक
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
लिखी लिखायी बकवास को लिखने के बाद ही सही थोड़ा सा नीरमा लेकर क्या धो नहीं सकता है लिखे को धोने में परेशानी है अगर सोच को ही धो लेने का कोई इन्तजाम क्या लिखने से पहले हो नहीं सकता है दिखता है देखने वाले के देखने से थोड़ा सा कुछ लिखने की कोशिश में असली बात इस तरह से हमेशा ही को... Read more
clicks 31 View   Vote 0 Like   5:47pm 9 Sep 2019 #खो
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
भारत एक खोज एक बेवकूफ था पता नहीं क्या खोज पाया क्या खोया क्या पाया चन्द्रयान से भेजा गया एक पार्सल जरूर वही होगा उसी ने होगा गिराया परिपक्व हो चुके हैं हम समझते हैं समझ होनी जरूरी है आस पास बहुत कुछ होता है बताना किसलिये जरूरी है मदारी ने ध्यान भटकाया है उसी भारत एक खोज ... Read more
clicks 14 View   Vote 0 Like   2:34pm 8 Sep 2019 #चन्द्रयान
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
भाटे के  इन्तजार में कई पहर शांत बैठ जाता है पानी उतरता है तुरन्त रेत पर सब कुछ बहुत साफ लिख ले जाता है फिर ज्वार को उकसाने के लिये चाँद को पूरी चाँदनी के साथ आने के लिये गुहार लगाता है बोझ सारा मन का रेत में फैला हुआ पानी चढ़ते ही जैसे उसमें घुल कर अनन्त में फैल जाता है ना ... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   2:39pm 7 Sep 2019 #किताब
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
रात की एक बात और सुबह के दो जज्बात पता नहीं कौन कहाँ से कौन सी कौड़ीढूँढ कर कब ले आये बस पन्ने पर चिपका हुआ कुछ नजर आये नजर छ: बटा छ: हो जरूरी नहीं कौड़ी कौआ या कबूतर हो जाये असम्भव भी नहीं उड़ ही जाये जो भी है कुछ देर ठहर लें गीले जज्बातों को  सुखाने के लियेऔर स... Read more
clicks 20 View   Vote 0 Like   5:33pm 6 Sep 2019 #गलती
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
ना खुश है ना उदास है थोड़ी सी बची हुयी है है कुछ आस है बहुत कुछ लिखना है कागज है कलम की है इफरात है ना नींद है ना सपने हैं शाम से जरा सा पहले की है बात है बन्द हैबोतल है खाली हैगिलास है अंधेरा है अमावस की है रात है ना पढ़ना ... Read more
clicks 10 View   Vote 0 Like   5:34pm 5 Sep 2019 #इफरात
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
एक भीड़ लिख रही है लिख रही है चेहरे खुद के संजीदा कुछ पढ़ लेने वालेअलग कर लेते हैं सहेजने के लिये खूबसूरती किसी भी कोण से बना लेते हैं त्रिभुज या वर्ग या फिर कोई भी आकृतिसीखने में समय लगता है सीखने वाले को पढ़ने वाले के पढ़ने के क्रमजहाँ क्रम होना उतना जरूरी न... Read more
clicks 16 View   Vote 0 Like   4:28pm 2 Sep 2019 #कबाड़
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
कुछ शब्दों को इधर कुछ शब्दों को उधर ही तो लगाना होता है बकवास करने में कौन सा किसी को व्याकरण साथ में समझाना होता है कौमा हलन्त चार विराम अशुद्धि चंद्र बिंदू सीख लेना बोनस बनाना होता है उनके लिये जिन्हें एक ही बात से दो का मतलब निकलवाना होता है रोज का रोज उगल दिया जाना जम... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   5:05pm 1 Sep 2019 #आना
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
आभार पाठक 'उलूक टाइम्स'पर जुलाई 2016 के अब तक के अधिकतम 217629 हिट्स को अगस्त 2019 के 220621 हिट्स ने पीछे छोड़ा पुन: आभार पाठकसुना गया है अब हर कोई एक खुली हुयी किताब है हर पन्ना जिसका झक्क है सफेद है और साफ है सभी लिखते हैं आज कुछ ना कुछ बहुत बड़ी बात है कलम और कागज ही नहीं रह... Read more
clicks 25 View   Vote 0 Like   4:35pm 31 Aug 2019 #किताब
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
कुछ चुटकुले अगर समझ में ना भी आयेंखुल के खिलखिला के अगर हँस ना भी पायेंकोशिश कर लें थोड़ा सा बिना बात भी कभी यूँ ही मुस्कुरा जायें किस लिये समझनी हर बात अपने आस पास की कुछ हट के माहौल भी जरा जरा मरा मरा छोड़ कर बनाने को कहीं चले जायेंकविता कहानी गजल शेर के मज़मूनभरे पड़े है... Read more
clicks 9 View   Vote 0 Like   5:37pm 30 Aug 2019 #जी डी पी
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
कहीं ‘फॉग’ चल रहा है कहीं ‘डबल क्रॉस’ चल रहा है मौसम बारिश का है मौज में बस भ्रम फैलाने को बदल रहा है सफल है सफलता है सीखने सिखाने को मिल रहा है खाली तरकश है खून खराबे से ही बस उसे बड़ी नफरत है बस तीर को ही छल रहा है बन्दूकें हैं बन्द सन्दूकों में हैं अ... Read more
clicks 13 View   Vote 0 Like   4:13pm 29 Aug 2019 #गहने
Blogger: डा. सुशील कुमार जोशी
जो लिखना होता है उसी को छोड़ कर कुछ कुछ लिख रहा होता है नहीं लिखा सारा लिखे लिखाये के पीछे खड़ा छुपा दिख रहा होता है ना सामान होता है ना दुकान होती है मगर थोड़ा रोज बिक रहा होता है आदत से मजबूर बिकने की बाजार में बिना टाँगें भी टिक रहा होता है नसीब होता है उस पढ़ाने वाले ... Read more
clicks 15 View   Vote 0 Like   5:13pm 28 Aug 2019 #उपद्रव मूल्य

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