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Blog: सरल की डायरी Saral ki Diary

Blogger: Sanjay Grover
‘आपका मेल मिला, मैं आपकी हर मुहिम में आपके साथ हूं।’‘चलिए, किसीने तो जवाब दिया।’$                            $                       $‘यह तसवीर कैसी लगा रखी है आपने?’‘क्यों ठीक नहीं है क्या?’‘नहीं, नहीं, बहुत गोरे हो रहे हैं आप तो।$                   &... Read more
clicks 305 View   Vote 0 Like   12:57pm 19 Sep 2013 #कहानी
Blogger: Sanjay Grover
वह बिस्तर में पड़ा है, आंखें बंद हैं।आंखें बंद कर लेने से क्या नींद आ जाती है ? रात किस वक्त आंख लगती है, कितना वक्त नींद आती है, कुछ समझ में नहीं आता। बस सुबह मन होता है कि सोया रहे, अभी तो नींद आनी शुरु ही हुई थी और......। यूं भी कोई चुस्ती-फुर्ती उसे अपने बदन में महसूस नहीं होती... Read more
clicks 309 View   Vote 0 Like   12:26pm 14 Sep 2013 #diary
Blogger: Sanjay Grover
पापाजी कभी-कभी हंसते हैं। अकसर गंभीर दिखाई देते हैं। दिखाई भी कितना देते हैं ! हमेशा तो बिज़ी रहते हैं।पहले तो सभी कमरों में बल्ब लगे थे जो पीली-पीली रोशनी देते थे। एक-एक करके पापाजी ने सभी कमरों में ट्यूबलाइट लगवा दीं हैं। ट्यूबलाइट, स्विच ऑन करते ही बल्ब की तरह तुरंत न... Read more
clicks 317 View   Vote 0 Like   12:20pm 5 Sep 2013 #diary
Blogger: Sanjay Grover
सौ में से निन्यानवें बार ऐसा होता है। वे सब उसके खि़लाफ़ एक हो जाते हैं। जब कभी वह घर से निकलता है, गांडू-गांडू कहकर चिल्लाते हैं, पीछे आते हैं।कस्बा जिसमें उसका जन्म हुआ, अखाड़ेबाज़ी और लौंडेबाज़ी के लिए मशहूर है। अखाड़ेबाज़ी के शौक़ीन लोगों में से कईयों को लौंडेबाज़... Read more
clicks 275 View   Vote 0 Like   8:46am 2 Sep 2013 #डायरी
Blogger: Sanjay Grover
चौखट के बिलकुल ऊपरी कोने में, दीवार के सहारे एक झिरी है जिससे अपनी बायीं आंख किसी तरह सटाकर वह दुनिया को देखता है। बना-बनाया मकान ख़रीदा है पिताजी ने, नया ही है मगर चौखटों में दीमक लग गई है। सरल धीमे से एक कुर्सी घसीटकर झिरी के नीचे लाता है, सावधानी से उसपर चढ़ता है और सांस... Read more
clicks 314 View   Vote 0 Like   9:44am 26 Aug 2013 #डायरी
Blogger: Sanjay Grover
‘गोली मत मारना, मुझे कुछ बात......’ ‘आहा, डरते हो, कुछ नहीं कर पाओगे जिंदग़ी में, डरपोक आदमी, हा हा हा .............’‘हां डरता हूं, मुझे गोलियों में खेलने की आदत नहीं है भाई, पर उससे भी ज़्यादा मैं इसलिए डरता हूं कि तुम मुझसे भी ज़्यादा डरपोक हो। तुम डरके मारे, मुझे गोली मार दोगे और जो ब... Read more
clicks 330 View   Vote 0 Like   6:10am 22 Aug 2013 #ईश्वर
Blogger: Sanjay Grover
‘‘राखी बंधवा ले बेटा, बात माना करते हैं, देख बहिनों का कितना मन है, कितनी उदास हो रहीं हैं ; बंधवा ले बेटा।’’ मां कहती है।सरल कसमसा रहा है भीतर ही भीतर मगर बोल कुछ भी नहीं पा रहा। वह समझ नहीं पा रहा कि जो कुलबुलाहट उसके भीतर है, वह सही है या ग़लत, कहे कि न कहे, जैसा वह महसूस करत... Read more
clicks 280 View   Vote 0 Like   1:04pm 15 Aug 2013 #चिंतन
Blogger: Sanjay Grover
10/11-07-2013राजधानी आए सरल को शायद साल-भर हुआ होगा, कॉलोनी की एक शांत सड़क पर दोस्त के साथ टहल रहा था कि-‘ओए, ए’एक कड़क और बुलंद आवाज़। पुलिस जैसी कद-काठी वाली एक स्त्री ने एक स्कूटर-सवार को रोका। लड़का-सा ही था। स्त्री तड़ातड़ शुरु हो गई, वह लड़के को तमाचे पर तमाचे मार रही थी, ग़ाल... Read more
clicks 275 View   Vote 0 Like   11:44am 11 Jul 2013 #डायरी
Blogger: Sanjay Grover
‘मेरे ख़्वाबों में जो आए.....’फ़िल्म समझ में नहीं आई सरल को। करवा-चौथ देखकर तो मन बिलकुल ही उचाट हो गया था। लेकिन गाना जब भी देखता, अच्छा लगता। यह कोई-पूछने बताने की बात नहीं लगती सरल को कि गाना किस भाव से/किस मक़सद से फ़िल्माया गया होगा।उसी भाव से देखता भी रहा सरल। मगर तौलि... Read more
clicks 269 View   Vote 0 Like   4:04pm 17 Feb 2013 #चिंतन
Blogger: Sanjay Grover
‘हलो! आगे कहां निकले जा रहे हो?’‘कमाल है! जहां मुझे जाना था वहीं जा रहा हूं।’‘हाथ क्यों हिलाया था मुझे देखकर ?’‘किसने हिलाया? चलते वक्त मेरा सारा ध्यान तो अपने शरीर का संतुलन बनाने में ही लगा रहता है! आपको ग़लतफ़हमी हुई है ; मच्छर-वच्छर उड़ाया होगा या अपने बाल ठीक कर रहा हो... Read more
clicks 270 View   Vote 0 Like   3:10pm 3 Feb 2013 #डायरी
Blogger: Sanjay Grover
जिस दिन पहली बार लगा कि शेव करने के बाद ज़्यादा आकर्षक लगता हूं उसी दिन से घिस-घिसकर दाढ़ी-मूंछ साफ़ करना शुरु कर दिया। दिल्ली आकर भी नयी मित्र-मंडली और दूसरे लोगों से जो परिचय बना, एक क्लीन-शेवन व्यक्ति का बना। कुछ साल व्यवसाय किया। अच्छे दिन थे। एक दुकानदार के रुप में इ... Read more
clicks 278 View   Vote 0 Like   10:11am 15 Sep 2012 #डायरी बेतरतीब
Blogger: Sanjay Grover
सरल को ठीक-ठीक नहीं मालूम कितना बड़ा बच्चा था, नार्वे की संस्कृति क्या है, वहां की सरकार सिर्फ़ दूसरे देशों के बच्चों को उठाती है या अपने देश के बच्चों को भी, बच्चों की परवरिश के लिए किस तरह के इंतज़ाम वह करती है ? मगर सरल के लिए यह जानना मीठी-सी हैरानी की तरह है कि दुनिया की... Read more
clicks 251 View   Vote 0 Like   1:05pm 14 Mar 2012 #ताज़ा
Blogger: Sanjay Grover
पड़े रहते हैं कई शेर कि कभी सुधारेंगे, कि कभी करेंगे ग़ज़ल पूरी। कभी हो जातीं हैं तो कभी रह जातीं हैं, होने को। फिर कभी लगता है कि एक-एक अकेला ही दमदार है तो उतार क्यों नहीं देते मैदान में! संकोच भी होता है इस तरह सोचते मगर क्या करें कि जो सोचा उसे कैसे झुठला दें, क्यों सेंसर... Read more
clicks 257 View   Vote 0 Like   8:47am 26 Dec 2011 #ग़ज़ल
Blogger: Sanjay Grover
आखिरी बार तो मैं उनसे तब मिला था जब उनकी छोटी बेटी की शादी में उनके घर पहली बार गया। तब भी उनकी मानसिक स्थिति अच्छी नहीं थी। लेकिन उससे पहले एक बार जब वे हाथरस आए तो काफ़ी ठीक-ठाक थे। मैं भी बड़ा हो चुका था और चीज़ों को समझने का अपना एक नज़रिया मुझमें विकसित हो रहा था। वे कुछ दि... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   12:00pm 27 May 2011 #बाल मामाजी
Blogger: Sanjay Grover
आज सोचता हूं तो शर्म आती है कि मैं बाल मामाजी को घूरता था।इस हद तक घूरता था कि वे डर जाएं। और वे डर भी जाते थे। डरते न तो क्या करते ? हर कोई उन्हें पागल, डरपोक, मूर्ख और निठल्ला साबित करनें में जो लगा रहता था।और मैं भी वही कर रहा था जो बाद में मैंने बड़े-बड़े ‘बहादुरों’ को करत... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   5:21pm 3 May 2011 #बाल मामाजी
Blogger: Sanjay Grover
रुढ़ अर्थों में जिसे चमत्कार कहते हैं, उसे मैं बिलकुल नहीं मानता। लेकिन पहले इंटरनेट फिर ब्लॉग और अब फ़ेसबुक, चमत्कार की नयी परिभाषा हैं। विज्ञान ने मानव स्वभाव को समझने और बदलने का इतना बड़ा ज़रिया इससे पहले शायद ही दिया हो। ख़ासकर  मौलिक और ईमानदार लोगों के लिए तो यह छो... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   8:17am 13 Apr 2011 #डायरी
Blogger: Sanjay Grover
जली पिता की चिता तो समझोकोई मेरे साथ नहीं थाभीड़ बहुत थीधक्के भी थे गलबहिंया भीहाथ में कोई हाथ नहीं थादोस्त बहुत थेलेकिन उनसे बहुत ही ज़्यादासामाजिकता विद्यमान थीदोस्त यकीनन मेरी समझ के आर-पार थेलेकिन उनकेअपने-अपनेसंस्कार थेसंस्कार और दुनियादारीमौलिकता को खा जाते... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   8:56am 13 Feb 2011 #कविता
Blogger: Sanjay Grover
(पिछला पन्ना पढ़ने के लिए यहांक्लिक करें)‘‘ ांडू है।’’ ं‘‘ ांडू है।’’कौन हैं ये बच्चे ! क्यों सरल के पीछे लगे हैं !? क्या कह रहे हैं सरल को !?‘‘ ांडू आ गया।’’‘‘ओए ! ांडू आ गया।’’पसीना-पसीना सरल अपने घर में घुसेगा और घर वालों की नज़रों से ख़ुदको बचाता हुआ बिस्तर पर औंधे मुंह पड़ ... Read more
clicks 158 View   Vote 0 Like   11:43am 21 Jan 2011 #डायरी
Blogger: Sanjay Grover
(पिछला पन्नापढ़ने के लिए यहांक्लिक करें)भला किसी को ग़ज़लें भी फ़ुल वॉल्यूम पर सुनते देखा है कभी !सरल सुनता है कि पूरे मोहल्ले को सुनाता है !?‘‘ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो,भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी,मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन,वे काग़ज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी।’’ जगज... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   9:33am 13 Jan 2011 #
Blogger: Sanjay Grover
सरल बताता है कि उसे उस ऐपिसोड का काफ़ी बड़ा हिस्सा मिल गया है देखने को। राखी वहां ग़लत भी नहीं है। लेकिन वे जिस तरह ‘मर्द’, नामर्द’ और ‘नपुंसक’ जैसे शब्दों का प्रयोग करतीं हैं वह दिखाता है कि आधुनिक होती दिखती स्त्री अभी मर्द-मानसिकता बल्कि वर्चस्ववादी मानसिक अनुकूलन से ... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   12:51pm 28 Dec 2010 #बहस
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