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Yaadein : View Blog Posts
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-वीर विनोद छाबड़ाकहने को ब्राह्मण हैं। पंडित जी कहलाते हैं। उन्हें भीतर से जानने वाले फ़र्ज़ी पंडा बोलते हैं। बगल में गैंडा खड़ा कर दो तो पहचानना मुश्किल है कि इसमें आदमी कौन है। सुबह उठते नहीं, उठाये जाते हैं। बिना कुल्ला किये चाय सुड़की। अखबार पर नज़र दौड़ाई। सरकार और प्रश...
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  July 11, 2017, 3:41 pm
- वीर विनोद छाबड़ाआज पति बहुत खुश है। ऑफिस से लौटते हुए पत्नी के लिये गजरा ले कर आया। पत्नी खुश। बोली - अपने हाथों से लगा दो।  मां ने मुंह बिचका कर कहा - जोरू का गुलाम कहीं का। मां को नाराज़ देख बेटा अगली सुबह मां की मनपसंद जलेबी ले आया। पत्नी ने मुंह बिचकाया - चम्मच।पत्नी का ...
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  July 10, 2017, 12:03 pm
- वीर विनोद छाबड़ाहमारे वो मित्र इंटेलीजेंट के अलावा मददगार भी बहुत थे। तन-मन-धन से सदैव आगे रहे। ज़िंदगी से भरपूर। हर पल को एन्जॉय किया। कल रहें या न रहें। लेटेस्ट डिज़ाइन के क्वालिटी वस्त्रों  के शौक़ीन। हर महीने दो-तीन नए जोड़े। लोग आश्चर्य करते थे। कहां से आता है इतना प...
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  July 9, 2017, 4:16 pm
-वीर विनोद छाबड़ाएक ज़माना था जब हम भी तीन-पत्ती खेल के छोटे-मोटे शौक़ीन हुआ करते थे। दिवाली के आस-पास इधर से उधर बौराया करते थे। कभी कभी बिना दीवाली भी दौरा पड़ जाता था खासतौर पर जब हम दोस्तों में किसी की पत्नी मायके गयी होती थी। लेकिन हमारे दायरे और चाल की रेंज लिमिटेड होती ...
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  July 8, 2017, 4:32 pm
-वीर विनोद छाबरा कुछ लोग बिलकुल नहीं बदलते। ऑफिस की एक कलीग के भाई की शादी का रिसेप्शन था। ऑफिस से सिर्फ मैं और हरीश निमंत्रित थे। मैं टाइम पर पहुंच गया। मगर हरीश का कोई अता-पता नहीं। पार्टी में जानने वाला कोई नहीं था। घड़ी की सुइयां निरंतर आगे बढ़ रही थीं और उसी तरह  बो...
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  July 7, 2017, 12:10 pm
-वीर विनोद छाबड़ाआज १३ अक्टूबर है। आज ही के दिन १९११ में कुमुदलाल गांगुली का जन्म हुआ था। सन १९३६ में वो बांबे टाकीज़ में लैब असिस्टेंट थे। ‘जीवन नैया’की शूटिंग चल रही थी। पता चला हीरो भाग गया। बांबे टाकीज़ की मालकिन और नायिका देविका रानी बौखला गयीं। देविका के पति डायरेक...
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  July 6, 2017, 3:40 pm
- वीर विनोद छाबड़ाकई साल पहले एक पत्रिका में किस्सा पढ़ रहा था। इससे एक पुरानी सीख याद आई। जब हमने बिजली बोर्ड में नौकरी शुरू की थी तो हमारे एक सीनियर ने इसे बताया था। प्रथम विश्व युद्ध (1914-1919) शुरू हुआ तो इंग्लैंड के प्रधानमंत्री हर्बर्ट हेनरी एस्क्विथ थे। लेकिन इंग्लैंड क...
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  July 5, 2017, 3:41 pm
-वीर विनोद छाबड़ासरकारी नौकरी में कई विभागों की कुछ सीटें ऐसी होती हैं जिस पर पोस्टिंग के जुगाड़ में बाज़ लोग भर्ती होते ही जुट जाते हैं। ये वो सीटें हैं जिनमें बदनीयती प्रोग्राम्ड होती है। यानी आप चाहें न चाहें, कमीनापन तो दिखाना ही पड़ेगा। अपनी कथनी और करनी दोनों में। हम ...
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  July 4, 2017, 3:03 pm
- वीर विनोद छाबड़ाहम रोज़ चैनल न्यूज़ में देखते हैं। अख़बार में पढ़ते हैं । रेडियो पर सुनते हैं। इधर-उधर से सुनते हैं। कोई आकर बता भी जाता है।  एक मां अपने दूध पीते बच्चे को कूड़ेदान में फ़ेंक कर चली जाती है। सुबह पौ फटने पर उस पर एक राहगीर की नज़र पड़ती है। उस मासूम को कुत्ते नोच ...
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  July 3, 2017, 1:21 pm
- वीरविनोदछाबड़ासत्तरकेदशककाशुरुआतीदौर.… मस्तज़िंदगी।कोईदुःखनहीं, गमभीनहीं।हरशोकऔरफिक्रकोधुंएमेंउडातेचलेजानेवालेमोडकायुग।एकबारपरेशांमित्रबड़ीआसलिएमिले।दिलखोलदिया।अरे, येतोप्रेमरोगीहै।मामलाएकतरफ़ाप्यारकाहै।दिलपसीजउठा।प्रेमरोगीकोआश्वासनदिया।इसम...
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  July 2, 2017, 3:02 pm
- वीर विनोद छाबड़ाहमारे दिवंगत प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के विदेशी दौरे से लौटने पर एक बड़े पत्रकार ने टिप्पणी की थी कि उन्होंने जब भी मुंह खोला, दोस्त कम बनाये और दुश्मन ज्यादा। वज़ह थी उनकी जीभ। भाषा में न तो मिठास थी और न शालीनता। कबीरदास को लोग भूल गए हैं। भले किसी के ...
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  July 1, 2017, 3:14 pm
-वीरविनोदछाबड़ाललितापवारनेहिंदीसिनेमामें५०सेलेकर८०तककेदशकमेंअनगिनितविभिन्नचरित्रभूमिकाएंनिभाईहैं।लेकिनयादउनकोसिर्फनेगेटिवचरित्र  केलिएकियागया।वो३०व४०केदशककीमराठी/हिंदीफिल्मोंकीमशहूरनायिकारहीं।लेकिनअतिसफलतासेदौड़तेललिताकेरथकोनज़रलगगई।एकत्...
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  June 30, 2017, 3:36 pm
-वीर विनोद छाबड़ाअगर आप सरकारी नौकरी में पूरी लगन और ईमानदारी से काम में जुटे हैं तो यकीन मानिए कि मुसीबतों से भी सबसे ज्यादा साबका आपही को पड़ेगा। कामचोर और निकम्मे मौज उड़ाते हैं। न काम करो और न मुसीबत झेलो। ये १९९७ की बात है। यों तो बिजली बोर्ड ज्वाइन किये मुझे चौब्बीस ...
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  June 29, 2017, 1:35 pm
- वीर विनोद छाबड़ाविवाह आदि संस्कार संपन्न कराने के लिए पंडित की ज़रूरत पड़ती है। यह पंडित अपने को ब्राह्मण कहते हैं। ब्राह्मण न भी हो तो भी चलता है। हम तस्दीक तो कर नहीं सकते। सदियों से चलता खानदानी व्यापार हैं इनका। तमाम संस्कार संस्कृत के श्लोकों के उच्चारण के साथ संप...
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  June 28, 2017, 3:49 pm
- वीर विनोद छाबड़ाकल दोपहर खाना खाने के बाद जो नींद आयी तो शाम को ही टूटी। टूटी नहीं बल्कि तोड़ी गयी। मेमसाब 'चाय चाय'करती हुईं आयीं और एक झटके में नींद तहस-नहस कर गयीं। मैं उस समय कोई हसीन ख्वाब देख रहा था। यूं तो पचहत्तर फ़ीसदी ख्वाब मेमोरी से गायब हो जाते हैं और बचे हुए दो घ...
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  June 27, 2017, 1:46 pm
- वीर विनोद छाबड़ामित्रों लखनऊ के गोमती नगर इलाके के जिस फ्लाईओवर पर मैं खड़ा हूं इसके नीचे सिंगल रेलवे लाइन है जो लखनऊ से वाया बाराबंकी गोंडा और गोरखपुर जाती है। मुझे 1984के वो दिन याद आ रहे हैं जब यहाँ सिर्फ़ रेलवे लाइन थी। क्रासिंग भी नहीं थी। दो लेन की सड़क थी। मैं अपनी मोप...
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  June 26, 2017, 12:00 pm
- वीर विनोद छाबड़ाअपने मुल्क में पढ़े-लिखे लोगों की कमी नहीं है। लेकिन हर आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर, जज, शिक्षक, मास्टर या डिग्रीधारी विद्वान नहीं होता। अगर ऐसा होता तो हम आज जहां हैं, वहां बहुत पहले पहुंच गए होते। और आज की तारीख़ में अमेरिका, जापान, रूस और और चीन जैसे वि...
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  June 25, 2017, 12:20 pm
- वीर विनोद छाबड़ाभगवान बड़े दयालु एवं कृपालु हैं। वो किसी को निराश नहीं करते। एक बंदे ने दो बरस तक खड़े होकर तप किया। लेकिन भगवान प्रकट नहीं हुए। लेकिन बंदे ने हिम्मत नहीं हारी। दोबारा तप किया, लेकिन इस बार एक टांग पर खड़े एक बरस तक कठोर तप किया। भगवान प्रसन्न हुए। परंतु उनक...
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  June 24, 2017, 3:33 pm
- वीर विनोद छाबड़ापति-पत्नी के मध्य सुबह-सुबह की बहस। एक पत्रिका में पढ़ी। पसंद आई। रोचक बनाने के लिए थोड़ा तड़का लगा कर पेश कर रहा हूं।पति तैयार हो कर मॉर्निंग वॉक पर निकलने को था।   पत्नी ने आदतन पूछा - जनाब, सुबह- सुबह कहां चल दिए?पति सहज भाव से बोला - वही डेली का रूटीन, मॉर...
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  June 23, 2017, 12:55 pm
- वीर विनोद छाबड़ा कुछ महीने पहले की बात है। हमारे एक पुराने सहकर्मी दिवंगत हो गए। कारण अत्यधिक दारू से पूर्णतया ख़राब हो गया लीवर। वो खुद तो चले गए लेकिन पीछे छोड़ गए कई यक्ष प्रश्न। उनमें प्रमुख था कि अनुकंपा के आधार पर नौकरी किसे दी जाये? दरअसल, उनकी दो पत्नियां थीं। पह...
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  June 22, 2017, 10:26 am
- वीर विनोद छाबड़ाआमतौर पर जिसकी नई-नई शादी हुई होती है वो बंदा दो-तीन हफ्ते तक दफ़्तर देर से पहुंचता है। और जल्दी चला भी जाता है। दफ्तर के आस पास रहने वाले तो लंच पर घर भी चले जाते हैं और कम से कम दो घंटे बाद लौटते हैं। भी लंबा लेते हैं। बॉस लोग कुछ नहीं बोलते। सब चलता है। आख़ि...
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  June 21, 2017, 1:13 pm
- वीर विनोद छाबड़ाछोटा कद व गठीला बदन। बड़ी-बड़ी आंखें, आमंत्रित करते होंट और चेहरे पर टपकता चुलबुलापन। नलिनी जयवंत बरबस ही किसी का भी ध्यान आकर्षित कर लेती थी। वो एक जगह टिक कर बैठ नहीं सकती थी। सेट पर भी इधर से उधर डोला करती थी। मगर अंदर ही अंदर उसे अकेलेपन का गम खाता रहा। उ...
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  June 20, 2017, 1:22 pm
- वीर विनोद छाबड़ापत्नी गंभीर रूप से बीमार है। ब्लड कैंसर है। बेइंतहा प्यार करने का दम भरने वाले पति ने सारे जतन कर डाले । दिल्ली, मुंबई, चेन्नई आदि तमाम बड़े शहरों के स्पेशलिस्ट से चेक-अप कराया। लंदन, जर्मनी और न्यूयार्क भी हो आये। होमियोपैथी, आयुर्वैदिक, यूनानी और हक़ीम स...
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  June 19, 2017, 1:34 pm
-वीर विनोद छाबड़ाआज सब अपने पिता को अलग अलग तरीकों से याद कर रहे है। जिनके पिता हैं, उनको बच्चे गिफ़्ट दे रहे हैं। जिनके नहीं हैं वो वक़्त की मोटी धूल को हटा रहे हैं। किसी-किसी की आंख से दो बूंद भी टपकते दिख जाती है। हमे तो पिताजी का ज़न्नाटेदार थप्पड़ भी याद आ रहा है। सच तो यह है...
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  June 18, 2017, 11:09 am
- वीर विनोद छाबड़ावो लड़का अनाथ और बहुत ग़रीब था। उस दिन वो बहुत उदास था। वो पढ़ना चाहता था। उसने कई जगह मदद की गुहार लगाई। लेकिन सफलता नहीं मिली। उसने फ़ैसला किया कि वो अपने कपड़े और जितना भी उसके पास सामान है, सब बेच देगा। उसे विश्वास है कि इससे इतने पैसे निकल आएंगे कि महीने भर...
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  June 17, 2017, 11:34 am

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  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
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