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Blog: अंतर्कथन/Heartsaid

Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
 ~ संविधानसभा द्वारा हिन्दी सर्वसम्मति से राजभाषा चुनी गई थी (आलेख) ~         हिन्दी को लेकर एक प्रकार की भ्रांति  फैली हुई है कि संविधानसभा में हिन्दी मात्र 1 वोट के बहुमत से राजभाषा चुनी गई जबकि तथ्य यह है कि हिन्दी सर्वसम्मति से राजभाषा चुनी गई थी। हिन्दी के रा... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   9:12am 14 Mar 2016 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
~ वामपंथी मित्रों के साथ राष्ट्रवाद पर बहस ~रघुवंशमणि : "जिभकट्टू राष्ट्रवाद" - इस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम मैंने किया है।देश की वर्तमान स्थिति को देखते हुए लगता है इस शब्द का प्रयोग भविष्य में बहुत अधिक होना है । इसलिए मैं इस शब्द को पेटेंट करा लेना चाहता हूँ।भाषाशास्त... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   5:59pm 8 Mar 2016 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
~ Speech of Kanhaiya Kumar after his bail - Revisited ~                             A"Is it wrong to ask for azadi from the problems that are existing in the country? Brothers, it's not from India, but it's in India that we are seeking Azadi . And there is difference between 'from ' and 'in'. The Azadi we are asking for is from starvation and poverty, from exploitation and torment; for the rights of Dalits, tribals,minorities and women. And the azadi we will ensure through this very constitution, Parliament and judiciary.This was Baba Saheb's dream,and this is Comrade Rohith's (Vemula) dream."- Kanhaiya Kumar as quot... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   9:06am 6 Mar 2016 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
~लोकतांत्रिक पूँजीवाद बनाम साम्यवादी अधिनायकवाद~         लोकतांत्रिक पूँजीवाद में कम से कम वस्तुओं की शेल्फ लाइफ कम होने के कारण नए-नए नायक लांच होते रहते हैं । इस प्रकार इसमें नए प्रयोगों के लिए स्थान है।         पर साम्यवादी व्यवस्था में तो एक बार नायक जम ... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   3:19pm 5 Mar 2016 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
छूटा हुआ सामान आपको पकडाती है'सर, टेक केयर प्लीज'कह वो मुस्कुराती है।पापी पेट के लिए वो अपना आराम छोड़ दिन तो कभी रात यह ड्यूटी बजाती है।किसी की माँ,बहन- बेटी या पत्नी है पर उन्हें सोता छोड़ भी चली आती है।लड़की जो विशेष वेशभूषा में सजी हुई हैआपको देख भोर चार बजे मुस्क... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   12:17pm 29 Feb 2016 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
          मैं हिन्दुस्तान हूँ। हाँ वही जिसे विदेशी और खुद को ज्यादा पढ़ा- लिखा समझने वाले इंडिया कहते हैं और जिसे पंडितों द्वारा उच्चारित 'जम्बूद्वीपे भरतखण्डे....'से निकालकर सन 1947 में भारत नाम दे दिया गया क्योंकि कभी हस्तिनापुर नरेश के रूप में किसी भरत नामक प्रतापी ... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   7:02pm 28 Feb 2016 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
              ~ मेघदूत से मुलाकात ~        वायुयान अपनी संपूर्ण गति से अग्रसर था। दूर कहीं क्षितिज का अहसास भर हो रहा था गोया कि वह वायुमंडल के अथाह सागर में नीचे कहीं था जहाँ से उसका दिखना दुर्लभ था । क्षितिज के ऊपर बादलों ने जैसे एक दीवार बना रखी थी जो वायुयान की... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   3:19am 26 Feb 2016 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
        Indian politics suddenly seems to have become a prisoner of Right- Left conflict. The divide is clear so it leaves no space for moderates. You have either to be a tolerant or intolerant, Pro Dalit or Anti Dalit, Pro Hindu or Anti Hindu, Secular or Communal, Pro Modi or Anti Modi. There are no chances for issue based support. Either you come to this side of fence or go to that side. No body cares that there has to be a balancing point between two extremes and only then there can be a proper balance which holds the democracy.       For long left has been a regional force only in Indian politics and for sometime it seemed that sooner or later it... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   1:40am 21 Feb 2016 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
                        -गजल-वो नदी वो शजर की छाँव छोड आए हैं हमजब से शहर के इस जंगल में रहने आए हैं हमवो दुवाओं सी आबोहवा वहाँ छोड़ आए हैं हमहवा में जहर और शोर बरपा यहाँ पाए हैं हममुस्कुराए पर किसी से नाता न जोड़ पाए हैं हमभागते वक्त की चाल के साथ न दौड़ पाए हैं हमम... Read more
clicks 100 View   Vote 0 Like   12:46am 17 Feb 2016 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
        मेरे आवास के दरवाजे पर लगा हुआ सेमल का वृक्ष वसंत के आगमन के साथ- साथ पुष्पित हो मुझे हर्ष से भर देता है। ग्रीष्म के आरंभ के साथ-साथ यह वृक्ष सेमल के श्वेत-उजले सितारे बिखेरना आरंभ कर देता है। लगभग एक मास तक वृक्ष नित्यप्रति दिन-रात इस दान प्रक्रिया को संपन्न क... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   6:15pm 12 Feb 2016 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
          आज का गणतंत्र दिवस हमारे लोकतंत्र के पुनरावलोकन का भी दिन है। लोकतंत्र की यह विशेषता है कि यह आम राय के आधार पर कार्य करता है। जहाँ आम राय नहीं बन पाती वहाँ बहुसंख्या के आधार पर निर्णय होता है। निर्णय हो जाने के बाद बहुसंख्या के निर्णय को अल्पसंख्या को भी स... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   6:21pm 26 Jan 2016 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
          I'm writing this to emphasize on similarities between Hindi and Urdu. There is a misconception  that Urdu is language of Muslims only or it is a foreign language like 'Arabic' or 'Persian '.               Prior to independence it was fairly common in North India to learn Urdu by Hindus and even by Brahmins. My maternal as well as paternal grandfathers could read and write Urdu, although they belonged to Brahmin Hindu  families of. U P.          Urdu and Hindi are basically similar languages. They follow same syntax and grammar.They differ only by script and origin of their stock of w... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   5:01pm 22 Jan 2016 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
    ~हिन्द के फौजी~टूट चुका है हिन्दोस्तां एक बारअब फिर न इसको टूटने देनामजहबपरस्त एक बार कामयाब हुएअबके न किसी को कामयाब होने देना।।गद्दार बशर लाख करें कोशिशनिगहबानों दुश्मन को धूल चटा देनाकिस मजहब ने सिखाया खूंरेजीफरेबियों को रास्ता दोजख का दिखा देना।।जो दुश्... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   12:08pm 15 Jan 2016 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
                                                                                                  मेरे दादाजी की पसंद का फिल्मी गीत           &nbs... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   2:41pm 3 Jan 2016 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
   नववर्ष पर शुभकामनाओं के साथ      ~ नववर्ष - कामना ~जीवन स्वयं में एक संघर्ष परउसका अध्याय एक समाप्त हुआनैराश्य पर आशा जीत गईवर्षों बाद अभीप्सित प्राप्त हुआसंत सदृश पैरवीकार जो रहे मेरेविधिविद असित के प्रति नतमस्तक हूँन्यायालय के मंदिरों से न्याय मिलान्याया... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   1:04pm 1 Jan 2016 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
        मैं दिनांक 28 दिसंबर 2015 को एक बैठक में भाग लेने कोलकाता से दिल्ली गया था। मैंने एक ब्रीफकेस में एक जोड़ी कपड़े, एक ऊनी शाल, स्लीपर, शेविंग किट एवं सोप इत्यादि रोजमर्रा की जरूरत का सामान,आते समय का एयर टिकट और बोर्डिंग पास, आई सी आई सी आई बैंक का डेबिट कार्ड और कुछ स... Read more
clicks 78 View   Vote 0 Like   5:26pm 29 Dec 2015 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
~-  बिछुडना पिता से -~(एक वर्ष पूर्व लिखी गई कविता )एक खोया हुआ सामान ढूँढते-ढूँढतेतमाम वस्तुओं को उलटते-पुलटतेमिल गया मुझे वर्षों पुराना एक राशनकार्डकुछ फोटोग्राफ, पेंशन के कुछ कागजातमन दुःख और विषाद से भर गयाफोटोग्राफ से झाँक रहे थे दिवंगत पितापेंशन के कागजातों में... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   3:50pm 27 Dec 2015 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
          जब से मोदी जी अचानक पाकिस्तान हो आए हैं मुझे यह गीत फिल्मी गीत याद आ रहा है -"उन्हीं से मुहब्बत उन्हीं से लडाई, अजी मार डाला दुहाई-दुहाई।"ऐसा लगने लगा है जैसे कि भारत और पाकिस्तान के रिश्ते उन प्रेमियों की तरह हैं जो आपस में खूब झगडते भी हैं और फिर एक दूसरे को ... Read more
clicks 73 View   Vote 0 Like   4:20pm 26 Dec 2015 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
          ~-सामीप्य-~(लगभग बीस वर्ष पूर्व मेरे द्वारा लिखी गई कविता)अब तक जो रहा विरह -विदग्ध थाउसे मिला मलय समीर ललित थाज्योति पे मर मिटने को शलभ थाप्रिये प्रीति के आतप से यहअंतस क्यों इतना रहा झुलस था।।प्रसूनों से शोभित उपवन थातुमसे सुरभित मेरा मन थापुष्प का रस पान... Read more
clicks 77 View   Vote 0 Like   2:59pm 24 Dec 2015 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
                 ~-गजल-~तेरे अफसाने से दिल में ये पिघलता सा क्या हैकौन सा गुबार ये हलक में अटकता सा क्या हैघूँघट में छिपे चेहरे पर दफन कितनी शिकनें हैंपरदे से बाहर आने को ये मचलता सा क्या है जुगनू है, गुहर है या फिर दर्द ए आब कह लो नम आँखों से ये रह-रह ढलकता सा क्या ... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   1:04pm 26 Nov 2015 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
                 सहिष्णुता पर छेड़ी गई ( मैं जान-बूझ कर छिड़ी नहीं छेड़ी शब्द का प्रयोग कर रहा हूँ) बहस एक बडा सवाल यह खड़ा करती है कि क्या भारत पिछले एक साल में बदल गया है। क्या एक-डेढ़ साल पहले या जैसाकि आमिर खान कहते हैं छ: - सात माह पहले हमारे देश में सहिष्णुता थी औ... Read more
clicks 92 View   Vote 0 Like   2:01pm 25 Nov 2015 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
Aamir you can afford to leave India not others!        Aamir Khan your wife has been suggesting to leave India due to increasing intolerance along with the family for safety of your child ! You say that is a big and disastrous statement for Kiran to make. I agree with you that it is a big and disastrous statement but the problem is that you seem to be in agreement with her. You didn't try to reassure her.          For you and your wife your child is important, but for million others their children are important and the problem is they have not made millions like you. So they can not look towards greener pastures like you. A majority of them can no... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   11:20am 24 Nov 2015 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
Aamir you can afford to leave India not others!        Aamir Khan your wife has been suggesting to leave India due to increasing intolerance along with the family for safety of your child ! You say that is a big and disastrous statement for Kiran to make. I agree with you that it is a big and disastrous statement but the problem is that you seem to be in agreement with her. You didn't try to reassure her.          For you and your wife your child is important, but for million others their children are important and the problem is they have not made millions like you. So they can not look towards greener pastures like you. A majority of them can no... Read more
clicks 90 View   Vote 0 Like   11:20am 24 Nov 2015 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
                            गजलमार देते हैं चश्म ए सियाह से पर जैसे उन्हें कुछ अहसास नहीं।यूँ किए जाते हैं रोज हम पर सितम पर जैसे उन्हें कुछ अहसास नहीं।।उन आँखों की मौज ए कौसर में डूबे जाते हैं हमबचाने भी नहीं आते हैं जैसे उन्हें कुछ अहसास नहीं।।शमशीर ए आबदार... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   1:58pm 23 Nov 2015 #
Blogger: संजय त्रिपाठी कृष्णगीत
          वोटिंग पैटर्न का विश्लेषण तर्कसंगत रूप में करना दुष्कर कार्य है। पर कई बार चुनाव की एक थीम बन जाती है जिसे चुनाव विश्लेषक प्रायः लहर का नाम दे देते हैं और जब इसका प्रभाव होता है तो जाति,धर्म जैसे मुद्दे गौण हो जाते हैं। अनेक चुनाव इसके साक्षी हैं। पर थीम या... Read more
clicks 63 View   Vote 0 Like   1:42pm 21 Nov 2015 #

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