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Blog: hindu0007

Blogger: Kumar Gaurav Ajeetendu
भाव सभी पाने लगें, शब्दों का यदि संग।जाने इस संसार का, क्या होगा तब रंग।तम के कारागार में, अरसे से हैं आप,हँस लेते कैसे सदा, देख हृदय है दंग।नयी समस्या आ रही, मुँह बाये क्यों नित्य,बदल जरा देखो प्रिये, अब जीने के ढंग।कितने हैं जो पा रहे, प्रेम-नगर में शांति,अपनी मित्रों बन ग... Read more
clicks 79 View   Vote 0 Like   3:11pm 20 Mar 2014 #मुक्तिका
Blogger: Kumar Gaurav Ajeetendu
(1)होली की मस्ती चढ़ी, मची धूम चहुँओर।सभी खुमारी में मगन, रहा न खुदपर जोर॥रहा न खुदपर जोर, भंग पी ली ही हमने,उसका तगड़ा असर, कदम न देता थमने।नाच रहे ले ढोल, संग मित्रों की टोली,मन में नयी उमंग, जगा देती है होली॥(2)अंबर भी दिखता खिला, हँसती दिखे जमीन।कैसे फिर न हो भला, मन अपना रंग... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   5:42am 16 Mar 2014 #
Blogger: Kumar Gaurav Ajeetendu
रक्षा की ब्रह्मांड की, किया गरल का पान।शरण हमें भी दिजिए, हे शंकर भगवान।आदिदेव हैं आप ही, नाथों के हैं नाथ,त्राण दिलाता कष्ट से, नित्य आपका ध्यान॥... Read more
clicks 88 View   Vote 0 Like   2:30pm 25 Feb 2014 #मुक्तक
Blogger: Kumar Gaurav Ajeetendu
जीभ रक्त माँगती है भारती के शत्रुओं का, नैनों में भरा प्रचंड तेज और ज्वाल है।वज्र के समान देह, थाम लेते आँधियों को, साँस-साँस चक्रवात सी ही विकराल है।शूर हैं महान, विश्व धाक मानता सदैव, शोभता गले में नित्य जीत का जो माल है।ओजवान, शक्तिवान, वीर्यवान, धैर्यवान, हैं इन्हीं क... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   4:35am 25 Feb 2014 #देशभक्ति
Blogger: Kumar Gaurav Ajeetendu
साँसों की ये गर्म हवाएंसारा दिन बतियाती हैंखंडहरों से नोंच-नोंचकरकभी पुराने किस्से लातींकभी समंदर तल में मचतीउथल-पुथल का हाल सुनातींनहीं सुनी जिसदिन भी इनकीरात स्वप्न में आती हैंराहों से अनजान स्वयं हैंमददगार लेकिन बन जातींमहक अनुभवों की लाकर येकाफी कुछ आसान बना... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   3:48am 6 Feb 2014 #
Blogger: Kumar Gaurav Ajeetendu
जब-जब रोया हूँ जीवन मेंगले लगाया, दिया सहारातन्हाई से बढ़के कोईऔर नहीं है मीत हमारासाथ निभाती है ये हरदमनित पलकों तले बिठाती हैवफा इसी की सोने जैसीना झूठी कसमें खाती हैविह्वल हो जाती मेरे बिनकर ना पाती तनिक गुजाराशब्दों में जादू है इसकेजख्मों का मरहम बन जातीप्रिया, ... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   8:49am 3 Feb 2014 #
Blogger: Kumar Gaurav Ajeetendu
अब कैसा शिकवा-गिला, अब तो सभी स्वतंत्र।जैसे "गण"इस देश के, वैसा ही "गणतंत्र"॥कैसे इस गणतंत्र पर, करें बताओ गर्व।खानापूरी रह गये, सभी राष्ट्रीय पर्व॥ना "गण"हैं, ना "तंत्र"है, है तो केवल स्वार्थ।सड़कोंपर कुचला पड़ा, पुरखों का परमार्थ॥"गण"खुद "तंत्र"बिगाड़ते, खुद होते हलकान।अ... Read more
clicks 72 View   Vote 0 Like   3:45am 21 Jan 2014 #
Blogger: Kumar Gaurav Ajeetendu
देश ये सुभाषचंद्र बोस जैसे वीर का है, सोच-सोच यही हमें नाज बड़ा होता है।उनका विचारमात्र ही दिलों की परतों में, राष्ट्रवाद के नवीन बीज कई बोता है।बोस के चरणचिन्ह राह दिखलाते हमें, मन उनसा होने के सपन सँजोता है।आज के सुभाष आप-हम चलो बन जाएं, आज फिर भारत गुलाम बना रोता है॥शे... Read more
clicks 91 View   Vote 0 Like   3:43am 21 Jan 2014 #देशभक्ति
Blogger: Kumar Gaurav Ajeetendu
देखूँ आज बहार, हुई इच्छा ये जब-जब।कैसा ये संयोग, नजर आयी तुम तब-तब।बनके छटा हसीन, फिजां में छा जाती हो।ख्वाबों को भी चूम, हकीकत बनवाती हो॥पाकर तेरी प्रीत, जिंदगी का रस पाया।लहरा तूने केश, साँस लेना सिखलाया।बड़ा सुखद संयोग, मिलन ये तेरा-मेरा।ज्यों फूलों के बाग, तितलियों क... Read more
clicks 67 View   Vote 0 Like   3:35am 21 Jan 2014 #
Blogger: Kumar Gaurav Ajeetendu
सुलगे जीवन आँच, बनी ईंधन ये काया।तोड़-तोड़ के हाड़, कलेजा मुँह को आया।हलक मचाता शोर, पिला दूँ उसको पानी।बाकी पूरी जंग, खून की रहे रवानी॥पत्थर हैं निष्प्राण, मगर मुझमें जीवन है।शीतलता का घूँट, माँगता मेरा तन है।दूर अभी है साँझ, मुझे फिर जुट जाना है।बुला रहे हैं कर्म, उन्ह... Read more
clicks 74 View   Vote 0 Like   3:34am 21 Jan 2014 #
Blogger: Kumar Gaurav Ajeetendu
(१)साँसों के संगभरता हूँ सीने मेंतुमको ही मैं----------सीने में जा केचूमी हैं धड़कनेंमैंने तुम्हारी(२)तेरी आहटेंदिल को लगती हैंप्रणय-धुन-----------मेरी आहटेंढूँढती हैं हमेशासाथ तुम्हारा... Read more
clicks 65 View   Vote 0 Like   6:24am 5 Jan 2014 #
Blogger: Kumar Gaurav Ajeetendu
भींगते तकियों से आँसू पी रही हैं दूरियाँमस्त हो नजदीकियों में जी रही हैं दूरियाँअनदिखी कितनी लकीरें खींच आँगन में खड़ींअनसुनेपन को बना बिस्तर दलानों में पड़ींबैठ फटती तल्खियों को सी रही हैं दूरियाँतोड़ देतीं फूल गर खिलता कभी एहसास काकर रहीं रिश्तों के घर को महल जै... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   12:26pm 16 Dec 2013 #
Blogger: Kumar Gaurav Ajeetendu
फूल खड़े रहते मुस्कातेदे रस मीठा मधु बनवातेफ्रेंड इन्हीं की तितलीरानीरोज सुनाती नयी कहानीखुशबू-खुशबू हरदिन खेलेंइक-दूजे को पकड़ें-ठेलेंआँधी आती तो डर जातेपत्तों में जाकर छिप जाते... Read more
clicks 101 View   Vote 0 Like   2:33pm 25 Nov 2013 #बाल रचना
Blogger: Kumar Gaurav Ajeetendu
अकुलाहट की फांस चुभी हैमन में टीस उठाती हैऊँचाई को तरस रहा दिलपंछी रोज बुलाते हैंपंखहीनता के पिंजरे मेंअरमां गुम हो जाते हैंलाचारी डायन सी बैठीमंद-मंद मुस्काती हैघायल भावों की गठरी काबोझ बढ़ा ही जाता हैउठा-उठा के शब्द थके हैंछलक पसीना आता हैलंबा रस्ता अजगर दिखतामं... Read more
clicks 75 View   Vote 0 Like   5:51am 25 Nov 2013 #
Blogger: Kumar Gaurav Ajeetendu
रात है बाकी / अभी जागो सनम / जरा प्यार दो।ख्वाब में देखा / हकीकत में वही / उपहार दो।बातें हैं काफी / बहुत जो बाँटना / तुमसे यहाँ,आज है मौका / हया को भूलकर / दिल वार दो॥... Read more
clicks 80 View   Vote 0 Like   4:25pm 22 Nov 2013 #हाइकु मुक्तक
Blogger: Kumar Gaurav Ajeetendu
(१)दुर्गम पथअनजान पथिकमन शंकित(२)प्रकृति मातास्नेहमयी आँचलकरे पालन(३)साँस व्यथितधड़कनें क्रंदितहताश मन(४)पंख हैं छोटेविराट आसमानपंछी बेबस(५)मुक्त उड़ानबादलों का नगरदिल का ख्वाब(६)स्वतंत्र छायाशक्तिशाली मुखौटागंदा मजाक(७)भागमभागअंधी प्रतिस्पर्धाएँटूटते ख्वाब(... Read more
clicks 87 View   Vote 0 Like   4:29am 18 Nov 2013 #
Blogger: Kumar Gaurav Ajeetendu
(चित्र गूगल से साभार)... Read more
clicks 68 View   Vote 0 Like   2:19pm 10 Nov 2013 #हाइगा
Blogger: Kumar Gaurav Ajeetendu
चाँदनी छिटकी हुई पर मन मेरा खामोश है।बेखबर इस रात में सारा जहाँ मदहोश है।वक्त आगे भागता, जम से गये मेरे कदम,हाँ, सहारा दे रहा तन्हाई का आगोश है।हँस रहा चेहरा मेरा तुम तो बस इतना जानते,क्योंकि गम दिल संग सीने में ही परदापोश है।माँगता मैं रह गया, दे दो बहारों कुछ मुझे,अनसुन... Read more
clicks 69 View   Vote 0 Like   12:03pm 10 Nov 2013 #
clicks 74 View   Vote 0 Like   1:11pm 9 Nov 2013 #
Blogger: Kumar Gaurav Ajeetendu
ख्वाब के मोती हकीकत में पिरोने के लिए।लोग हैं तैयार खुद की लाश ढोने के लिए।झोंपड़े में सो रहा मजदूर कितने चैन से,है नहीं कुछ पास उसके क्योंकि खोने के लिए।आसमां की वो खुली, लंबी उड़ानें छोड़कर,क्यों तरसते हैं परिंदे कैद होने के लिए।जिंदगी भर खून औरों का बहाते जो रहे,जा र... Read more
clicks 102 View   Vote 0 Like   12:58pm 6 Nov 2013 #

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