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Blog: साझा आसमान

Blogger: suresh sawpnil
कम  अज़  कम  क़त्ल  तो  कीजे  ख़ुशी  सेन  होगा          काम  ये          मुर्दादिली  सेबवंडर  ही       उठा  देगा        किसी  दिनलगाना  आपका      दिल      हर  किसी  सेनिभाना  हो          ज़रूरी         तो... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   11:20pm 2 Nov 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
हवा  में  घुटन  है  मगर  क्या  करेंकि  तूफ़ान  में  और  घर  क्या  करेंफ़क़त  एक  ही लफ़्ज़   है  दर्द  काये:  क़िस्सा-ए-ग़म  मुख़्तसर  क्या  करेंजहां  रिज़्क़  एहसां  जता  कर  मिलेदवाएं  वहां  पर  असर  क्या  करेंक़फ़न  लूट  कर  भी  तसल्ल... Read more
clicks 254 View   Vote 0 Like   11:46pm 19 Oct 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
मोम  के  हैं  पर  हमारे  और  जलता  आस्मांकोशिशे-परवाज़  पर  आतिश  उगलता  आस्मांहम  अगर  मज़्लूम  हैं  तो  भी  सज़ा  के  मुस्तहक़ख़ुद   हज़ारों  जुर्म  करके  बच  निकलता  आस्मांसौ  बरस  की  राह  में  नव्वे  बरस  के  इम्तिहांहर  सफ़र&... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   2:02pm 18 Sep 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
साफ़  मौसम  के  लिए  कुछ  कीजिएज़ुल्फ़  के  ख़म  के  लिए  कुछ  कीजिएदुश्मनों  पर  सर्फ़  करते  हो  वफ़ाकाश ! हमदम  के  लिए  कुछ  कीजिएताक़यामत  तोड़ना  मुमकिन  न  होउन  मरासिम  के  लिए  कुछ  कीजिएदर्द  हो  थोड़ा-बहुत  तो  झेल  लेंशिद... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   1:29pm 11 Sep 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
ज़रा-से  करम  को  ज़माने  लगेख़ुदा  रोज़   एहसां   जताने  लगेनज़र  में   न  थे  तो   परेशां  रहेनज़र  में  लिया  तो  सताने  लगेसंवरना  हमीं  ने  सिखाया  उन्हेंहमीं  को   अदाएं   सिखाने  लगेइसे  रहज़नी  के  सिवा  क्या  कहेंकि&... Read more
clicks 203 View   Vote 0 Like   1:25pm 19 Aug 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
क़त्ल  करके  हसीं  बहारों  कातन  गया  सर  रसूख़दारों  कालाशे-अत्फ़ाल  रौंद  कर  ख़ुश  हैंतुफ़ ! ये:  किरदार  ताजदारों  कामुंह  छुपा  लें  कि  सर  कटा  डालेंहै  पसोपेश  शर्मसारों  काहै  हमारी  कमी  कि  क़ायम  हैदबदबा  ज़ुल्म  के  इदार... Read more
clicks 219 View   Vote 0 Like   1:46am 17 Aug 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
मेरे  अल्फ़ाज़  मुझसे  रूठ  कर  कुछ  दूर  बैठे  हैंकि  जैसे  वक़्त  के  हाथों  सनम  मजबूर  बैठे  हैंकरें  किससे  शिकायत  दोस्तों  की  बेनियाज़ी  कीवफ़ा  के  दफ़्तरों  में  भी  तन-ए-रंजूर  बैठे  हैंकिसी  दिन  फिर  नमी  होगी  निगाह... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   1:27am 11 Jul 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
चंद  अश्'आर  जो  सीने  में  दबा  रक्खे  हैंकुछ  समझ-सोच  के  यारों  से  छुपा  रक्खे  हैंएक  उम्मीदे-शिफ़ा  ये  है  कि  वो  आ  जाएंइसलिए  मर्ज़  तबीबों  से  बचा  रक्खे  हैंहो  अगर  दिल  में  शरारत  तो  बता  दें  हमकोवर्न:  हमने... Read more
clicks 182 View   Vote 0 Like   12:12pm 8 Jul 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
आज  ख़ामोश  रहें  भी  तो  क्याऔर  दिल  खोल  कर  कहें  भी  तो  क्या ?आपको  तो  रहम  नहीं  आताहम  अगर  दर्द  सहें  तो  भी  क्याक़त्ल  करके  हुज़ूर  हंसते  हैंभीड़  में  अश्क  बहें  भी  तो  क्याज़ुल्म  तारीख़  में  जगह  लेंगेशाह  क... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   4:11pm 7 Jul 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
न  दिल  चाहते  हैं  न  जां  चाहते  हैंफ़क़त  आशिक़ों  की  अमां   चाहते  हैंउड़ानों  पे  बंदिश  न  पहरा  सुरों  परपरिंदे    खुला  आस्मां   चाहते  हैंमुरीदे-शहंशाह  हद  से  गुज़र  कररिआया  के  दोनों  जहां  चाहते  हैंक़फ़न  खेंच  कर&... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   9:23am 6 Jul 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
किधर  ढूंढिएगा  कहां  खो  गयामियां  मान  लीजे  कि  दिल  तो  गयाउसे  तिश्नगी  ने  न  बख़्शा  कभीअकेला  ख़राबात  में  जो  गयागुलों  को  न  अब  कोई  इल्ज़ाम  देकि  मौसम  रग़ों  में  ज़हर  बो  गयामदारी  बना  शाह  जिस  रोज़  सेहक़ीक़त&... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   1:17pm 29 Jun 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
जब  जहालत  गुनाह  करती  हैसल्तनत  वाह  वाह  करती  हैआइन-ए-मुल्क  में  बहुत  कुछ  हैक्या  सियासत  निबाह  करती  हैसल्तनत  चार  दिन  नहीं  चलतीजो  सितम  बेपनाह  करती  हैअस्लहे  वो:  असर  नहीं  करतेजो  वफ़ा  की  निगाह  करती  हैआश... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   10:46am 27 Jun 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
ईद  में  मुंह  छुपाए  फिरते  हैंग़म  गले  से  लगाए  फिरते  हैंदुश्मनों  के  हिजाब  के  सदक़ेरोज़  नज़रें  चुराए   फिरते  हैंदिलजले  हैं  बहार  के  आशिक़तितलियों  को  उड़ाए  फिरते  हैंकोई  उनको  पनाह  में  ले  लेजो  वफ़ा  के  सता... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   9:39am 26 Jun 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
शौक़  तो  उन्हें  भी  है  पास  में  बिठाने  काजो  हुनर  नहीं  रखते  दूरियां   मिटाने  कारोज़  रोज़  क्यूं  हम  भी  आपसे  पशेमां  होंएक  दिन  मुक़र्रर  हो  रूठने-मनाने  काआपकी  सफ़ाई  से  मुत्मईं  नहीं  हैं  हमराज़  कोई  तो  होगा&nb... Read more
clicks 142 View   Vote 0 Like   4:12am 22 Jun 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
सितम  कीजिए  या   दग़ा  कीजिएख़ुदा  के  लिए  ख़ुश  रहा  कीजिएदुआ  है  फ़रिश्ते  मिलें   आपकोन  हो  तो  हमीं  से  वफ़ा  कीजिएबुरे  वक़्त  में   बेहतरी  के  लिएलबों  पर  तबस्सुम  रखा  कीजिएसितारे  पहुंच  से  अगर  दूर  हैंतो  किरदार&nb... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   5:44pm 17 Jun 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
आज  मौसम  हमारा  नहीं  क्या  करेंदोस्तों  से  गुज़ारा  नहीं  क्या  करेंज़ीस्त  ने  तो  हमें  ग़म  दिए  ही  दिएमौत  से  भी  सहारा  नहीं  क्या  करेंतीरगी  को  मिटाना  हंसी-खेल  हैपर  शम्'.अ  का  इशारा  नहीं  क्या  करेंहर  क़दम  प... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   5:36pm 10 Jun 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
इबादत  न  कीजे  किसी  शाह  कीदग़ाबाज़     मक्कार    गुमराह  कीन  जाने    कहां   ले  गिरे    रहनुमाहक़ीक़त    समझिए   नई  राह  कीकिसे  दोस्त  समझें  किसे  मुस्तफ़ाहमारी   किसी  ने   न   परवाह  कीजहां    पीर  ही  पीर ... Read more
clicks 197 View   Vote 0 Like   10:31am 7 Jun 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
वैसे  तो  दुनिया  फ़ानी  हैसच  के  साथ  परेशानी  हैख़ुद्दारों  पर  दाग़  लगानामग़रूरों  की  नादानी  हैशाहों  से  डर  जाने  वालोयह  रुत  भी  आनी-जानी  हैसंगीनों  पर  चल  कर  जीनाज़िद  अपनी  जानी-मानी  हैअब  जम्हूर  कहां  रक्खा  ह... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   11:43am 6 Jun 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
तलाशे-मकां  में  जहां  लुट  गयाज़मीं  के  लिए  आस्मां  लुट  गयाअदा  सादगी  शोख़ियां  पैरहनन  जाने  दिवाना  कहां  लुट  गयापसोपेश  में  रह  गईं  आंधियांसफ़ीना  इसी  दरमियां  लुट  गयामिला  शाह  हमको  ख़ुदादाद  ख़ांकि  सदक़े  में  हर&... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   2:07pm 2 Jun 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
फंस  गए  शैख़  पहली  मुलाक़ात  मेंसर-ब-सज्दा    पड़े  हैं   ख़राबात  मेंठीक  है  मैकदा  घर  ख़ुदा  का  नहींक्या  बुरा  है   यहां  भी  मुनाजात   मेंशाह  मदहोश  है  तख़्त  के  ज़ो'म  मेंऔर  लश्कर    लगे  हैं   ख़ुराफ़ात  मेंख़ूब &... Read more
clicks 123 View   Vote 0 Like   10:44am 27 May 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
सोग़  में  है  ख़ुदा,  क्या  हुआमर  गए  हम  बुरा  क्या  हुआबुझ  गया  चांद  का  क़ुमक़ुमाचांदनी  का  नशा  क्या  हुआरास्ते        मुंतज़िर     ही  रहेमंज़िलों  का  पता  क्या  हुआइश्क़  में  घर  जला  आपकादुश्मनों  का  भला  क... Read more
clicks 161 View   Vote 0 Like   2:16pm 22 May 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
बता  कौन  तेरी  ख़ुशी  ले  गयाकि  कासा  थमा  कर  ख़ुदी  ले  गयासमझते  रहे  सब  जिसे  बाग़बांगुलों  के  लबों  से  हंसी  ले  गयासितारा  रहा  जो  कभी  बज़्म  कावही  नज़्म  की  ज़िंदगी  ले  गया चमन  छोड़  कर  अंदलीबे-सुख़नबहारों  की&nbs... Read more
clicks 117 View   Vote 0 Like   11:43am 19 May 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
करते  हैं  अश्क  ज़ाया  दामन  की  आड़  कर  केयानी   वो  ख़ुश  नहीं  हैं    हमसे   बिगाड़  कर  केथी  जान  जिस्म  में  जब  देखा  न  सर  उठा  करअब  दिल  तलाशते  हैं   वो    चीर-फाड़  कर  केपर्दे  में  भी    किसी  का    द... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   1:58pm 16 May 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
क़फ़स  में  भी  नमाज़ें  गिन  रहे  हैंअक़ीदत  की  सलाख़ें  गिन  रहे  हैंहुकूमत  कर    रहे  हैं   या  तमाशाख़िज़ां  में  भी   बहारें   गिन  रहे  हैंजहालत  के  ज़हर  का  ही  असर  हैबुज़ुर्गों  की     ख़ताएं    गिन  रहे  हैंहमार... Read more
clicks 124 View   Vote 0 Like   1:47pm 14 May 2017 #
Blogger: suresh sawpnil
यौमे-मज़दूर पर लाल सलाम !सारी  सरकारें  झुकती  हैं  सरमाएदारों  के  आगे हम  मेहनतकश  दीवार  बने  हैं  इन  मुर्दारों  के  आगे तुम  नाहक़  नाक  रगड़ते  हो  हर  दिन  अख़बारों  के  आगे झुकने  को  हम  भी  झुकते  हैं  लेकिन  ख़ुद्दार... Read more
clicks 149 View   Vote 0 Like   4:47pm 1 May 2017 #

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