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Blog: डायरी

Blogger: पुंज प्रकाश
एक विचित्र बात देखने को मिल रही है आजकल। नौजवान तबका जो कि कठोर श्रम और अपने बिंदासपने के लिए जगत प्रसिद्ध है बहुत जल्द ही निराश हो जा रहा है और कभी यह तो कभी वह के चक्कर में पड़कर अपना कीमती और बहुमूल्य समय बर्बाद कर दे रहा है। सफलता और असफलता को लेकर या तो जल्दबाज़ी का शिक... Read more
clicks 83 View   Vote 0 Like   11:22am 10 May 2017
Blogger: पुंज प्रकाश
5 मई को रांची के आर्यभट्ट सभागार में पद्मश्री डॉ राम दयाल मुंडा के कार्यों एवं जीवन पर आधारित फिल्म "नाची से बाँची"नामक डाक्यूमेंट्री फ़िल्म का प्रीमियर देखने का अवसर प्राप्त हुआ। जिस प्रकार पूरा सभागार खचाखच भरा हुआ था वह अद्भुत था। भीड़ इतनी ज्यादा हो गई कि सभागार के ब... Read more
clicks 84 View   Vote 0 Like   1:46am 7 May 2017
Blogger: पुंज प्रकाश
नीदरलैंड के निर्देशक Bert Haanstra निर्देशित एक विश्वप्रसिद्ध शॉट फिल्म है Glass. इस फिल्म का निर्माण सन 1958 में हुआ था, फिल्म कि अवधी मात्र 10 मिनट है। फिल्म दो भागों में है। पहले भाग में बड़ी ही सुंदरतापूर्वक कारीगर की कारीगरी से एक से एक रंगीन ग्लास को अलग-अलग शेप लेते हुए दिखाया गय... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   6:24am 23 Feb 2017
Blogger: पुंज प्रकाश
हम सबकी ज़िन्दगी में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो लगते साधारण हैं लेकिन वो बड़ी ही शालीनता और निःस्वार्थ भाव से आपकी ज़िंदगी को एक सार्थक दिशा देते हैं। किसी ने सही ही कहा है कि हर व्यक्ति गुरु होता है, हम हर किसी से सीख सकते हैं। कोई हमें यह सिखाता है कि क्या करना चाहिए तो कोई हमे... Read more
clicks 104 View   Vote 0 Like   3:53am 4 Feb 2017
Blogger: पुंज प्रकाश
नाट्य दल दस्तक की स्थापना 15 साल पहले हुई थी. तब से लेकर अब तक इस नाट्यदल ने कई नाटकों का मंचन कुशलतापूर्वक किया है. अब दस्तक के अध्याय में एक नया आयाम अब जुड़ने जा रहा है. इस तीन दिवसीय नाट्योत्सव का नाम “रंग-दस्तक -2017” है. इस उत्सव में दस्तक के तीन नाटकों – पटकथा (धूमिल की लंब... Read more
clicks 130 View   Vote 0 Like   4:48pm 23 Jan 2017
Blogger: पुंज प्रकाश
नया वर्ष में केवल कलेंडर ही बदलता है बाकि सब जस का तस रहता है - प्यार, स्नेह, दुश्मनी, दोस्ती, साजिश, दो-मुंहापन, धोखा सब। एक कलाकार ह्रदय संवेदनशील व्यक्ति के लिए प्यार, स्नेह, सम्मान, दोस्ती का साथ हर क़ीमत पर निभाना उसकी फ़ितरत है और दुश्मनी, साजिश, दो-मुंहापन, धोखा, धंधेबाज... Read more
clicks 183 View   Vote 0 Like   1:38pm 1 Jan 2017
Blogger: पुंज प्रकाश
देशभक्ति, बदलाव और विकास यह तीनों आजकल जादू की छड़ी का काम कर रहे हैं। आप कुछ भी कीजिए बस उसके ऊपर यह छड़ी घूमा दीजिए, आपके सारे कृत पाक-साफ। वर्तमान में नोटबंदी को भी इसी जादू से जोड़ दिया गया है। नोटबंदी से भ्रष्टाचार, गरीबी, कालाधन आदि ब्रह्मराक्षसों के शिकार करने की बात ... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   4:02pm 23 Nov 2016
Blogger: पुंज प्रकाश
जैसे ही पटकथा की प्रस्तुति गांव गोंदर बिगहा, हिसुआ, नवादा (बिहार) में करने की बात हुई एक सवाल यह उठ खड़ा हुआ कि क्या धूमिल की कविता की यह विम्बत्मक प्रस्तुति गांव के दर्शकों की जिज्ञासा को शांत कर पाएगी? क्या वो इस प्रस्तुति को सहजतापूर्वक ग्राह्य कर समझ पाएगें? इस सोच के ... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   8:15pm 14 Nov 2016
Blogger: पुंज प्रकाश
किसे साहित्य कहा जाय किसे नहीं, यह बहस एकबार फिर शिखर पर है। कारण है गायक, गीतकार और संगीतकार व दुनियां भर में प्रतिष्ठा प्राप्त कर चुके बॉब डिलन को साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिलना। अमूमन उपन्यास, कविता, कहानी को ही साहित्य माना जाता है; इन सब में भी बहुत सारे भेद-विभेद ह... Read more
clicks 119 View   Vote 0 Like   7:10am 21 Oct 2016
Blogger: पुंज प्रकाश
अपनेआप को लड़का क्यों कह रहा हूँ? तर्क तगड़ा है कि यदि पचास साल के कवि, कथाकार, रंगकर्मी आदि युवा कहलाते हैं तो उस हिसाब से तो मैं अभी लड़का ही हुआ न! तो जन्मदिन था। रंगकर्मी का जन्मदिन नाटकीय न हो तो लानत है। तो हुआ यह कि छः तारीख को रांची से पटना जाने का प्रोग्राम था लेकिन 3G, 4G ... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   1:39pm 9 Aug 2016
Blogger: पुंज प्रकाश
“बाबुसाहेब! फुलसुंघी के जनीले नू? उ पिंजड़ा में ना पोसा सके । ऊ एगो फूल के रस खींचके चल देले दोसरा फूल का ओर । हम त तवायफ के जात हईं । हमरी काम फुलसुंघी के लेखा एगो जेब से पैसा खींचके दोसर जेब के ओर चल दिहल ह । (बाबुसाहेब, फुलसुंघी को जानते हैं न? वो पिंजड़ा में नहीं पाली जा सकती... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   6:07pm 9 Jul 2016
Blogger: पुंज प्रकाश
दुनियां में रहो ग़मज़दा या शाद रहोऐसा कुछ करके चलो जाके बहुत याद रहो। - मीर तकी मीरएक ऐसे देश में जहाँ कोस-कोस पर पानी और वाणी बदल जाती है, जहां भिन्न - भिन्न प्रकार के धर्म, समुदाय, वर्ग, जाति, प्रजाति सदियों से विद्दमान है, वहां कोई भी सत्य सर्वमान्य हो ही नहीं सकता। कला - सं... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   5:44pm 6 Jun 2016
Blogger: पुंज प्रकाश
पंजाबी साहित्य के जाने माने नाम और सामाजिक कार्यकर्त्ता सतनाम ने आत्महत्या (?) कर ली। सतनाम जो माओवादी आंदोलन को ठीक से जानने समझने के लिए बस्तर के जंगलों में जाते हैं। वहां उनके बीच रहकर जो अनुभव प्राप्त करते हैं उसे वो अपनी प्रसिद्द किताब जंगलनामा में दर्ज़ करते हैं। ... Read more
clicks 144 View   Vote 0 Like   1:14pm 10 May 2016
Blogger: पुंज प्रकाश
प्रचलित मान्यता यह है कि रंगमंच के केंद्र में अभिनेता- अभिनेत्री हैं। यह बात आज सुनने में भले ही बहुत सुकूनदायक लगे किन्तु इस कथन में जितनी सच्चाई है, उससे कहीं ज़्यादा मात्रा झूठ का है। रंगमंच के मंच के आगे (दर्शकदीर्घा) से यह बात पूर्ण सत्य का आभास देता है क्योंकि दर्श... Read more
clicks 140 View   Vote 0 Like   12:54pm 10 May 2016
Blogger: पुंज प्रकाश
श्रीलाल शुक्ल लिखित उपन्यास - राग दरबारी । एक ऐसी “कल्ट” किताब कि जिसे मैं कभी भी, कहीं भी, कहीं से भी पन्ने पलटकर पढ़ सकता हूँ । इस पुस्तक के एक एक शब्द और शैली से मुझे जानलेवा मुहब्बत है । नकली आदर्शवाद और वाहियात क्रांतिकारिता के पेचीस से पूरी तरह मुक्त “राग दरबारी” भार... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   7:05am 17 Apr 2016
Blogger: पुंज प्रकाश
अंतराष्ट्रीय हिंदी रंगमंच दिवस, होलीपुर। अंतराष्ट्रीय हिंदी रंगमंच दिवस के अवसर पर जम्बो देश के होलीपुर नामक कुख्यात स्थान पर महिला वस्त्र धारी बाबा कामदेव की अध्यक्षता में विश्वभर के हिंदी रंगकर्मी, नाट्यलोचक, दर्शक आदि-इत्यादि बिना दारु, भांग, खैनी, गुटखा, गांजा आ... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   2:37pm 23 Mar 2016
Blogger: पुंज प्रकाश
एच कन्हाईलाल का पूरा नाम हैसनाम कन्हाईलाल है। इनका जन्म 17 जनवरी 1941 में कैसंथोंग थान्ग्जाम लाइरक इम्फाल में हुआ। सन 1969 में उन्होंने मणिपुर में कलाक्षेत्र की स्थापना की। उन्हें अब तक निर्देशन के लिए संगीत नाटक अकादमी सम्मान 1985, संगीत नाटक अकादमी रत्न पुरस्कार 2011 सहित पता... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   3:32am 10 Feb 2016
Blogger: पुंज प्रकाश
भीष्म साहनी की कहानी 'लीला नंदलाल की'का मंचन जब पटना के कालिदास रंगालय में हुआ तो दूसरे दिन एक प्रमुख अखबार में कमाल की पूर्वाग्रह भरी समीक्षा प्रकाशित हुई। प्रस्तुति के समाचार के बीच में अलग से एक कॉलम का शीर्षक था – ऐसी रही निर्देशक की लीला। आगे जो कुछ भी एफआईआर जैसा ... Read more
clicks 208 View   Vote 0 Like   7:37am 31 Jan 2016
Blogger: पुंज प्रकाश
हाय, हाय ! मैंने उन्हें देख लिया नंगा, इसकी मुझे और सजा मिलेगी  । – अंधेरे में, मुक्तिबोधहिंदी रंगमंच के सन्दर्भ में एक बात जो साफ़-साफ़ दिखाई पड़ती है वो यह कि वह ज़्यादातर समकालीन सवालों और चुनौतियों से आंख चुराने में ही अपनी भलाई देखता है । नाटक यदि समकालीन सवालों को उठता... Read more
clicks 194 View   Vote 0 Like   8:08am 29 Jan 2016
Blogger: पुंज प्रकाश
दस्तक की प्रस्तुति सुदामा पांडेय “धूमिल”लिखितपटकथाआशुतोष अभिज्ञ का एकल अभिनयप्रस्तुति नियंत्रक – अशोक कुमार सिन्हा एवं अजय कुमारध्वनि संचालन – आकाश कुमारपोस्टर/ब्रोशर – प्रदीप्त मिश्रापूर्वाभ्यास प्रभारी – रानू बाबूप्रकाश परिकल्पना – पुंज प्रकाशसहयोग –  ह... Read more
clicks 217 View   Vote 0 Like   1:19pm 15 Jan 2016
Blogger: पुंज प्रकाश
सत्ता, संघर्ष और मानव संस्कृति का इतिहास भी लगभग विश्व इतिहास के जितना ही पुराना है। आज का मानव समाज जहाँ खड़ा है वह विभिन्न एतिहासिक कालों और संघर्षों से श्रम के सहारे ही गुज़रकर इस मुकाम पर पहुंचा है। इतिहास की पुस्तकों में इसे अलग – अलग नामों से पढ़ाया भी जाता है। अलग - अ... Read more
clicks 185 View   Vote 0 Like   6:12pm 26 Dec 2015
Blogger: पुंज प्रकाश
एक पुरानी भारतीय कहावत है कि पैसा अपने साथ बहुत सारी बुराइयों को भी लाता है। एक समय ऐसा भी था जब बिहार के कम्युनिस्ट पार्टियों के पास पैसा था ही नहीं। लेवी और विभिन्न प्रकार के टेक्स लेने का पेशा अभी शुरू नहीं हुआ था। कैडरों की ईमानदार, प्रतिबद्धता और जूनून और मेहनतकश ज... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   3:20am 6 Dec 2015
Blogger: पुंज प्रकाश
संगीत और कला को जब-जब बाँधने की कोशिश की जाती है वह बाँध तोड़कर आगे बढ़ जाती है । - कोठागोई अपने अंदर बृहद कालखंड समेटे वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित प्रभात रंजन की किताब कोठगोई (चतुर्भुज स्थान के किस्से) एक ही बैठकी में पढ़ी जानेवाली एक ज़रुरी रचना है । समाज और समाजिकता के ... Read more
clicks 145 View   Vote 0 Like   3:02am 4 Dec 2015
Blogger: पुंज प्रकाश
बात उस ज़माने की है जब कम्युनिस्ट पार्टी के पास जूनून था, हौसला था। उसके कार्यकर्ताओं की आँखों में नई दुनियां बसने और बनाने का सपना था। हां कुछ नहीं था तो - पैसा। यह बिहार के पृष्ठभूमि में 1974 के छात्र आंदोलन के बाद वाले काल की बात है। जब कम्युनिस्ट होलटाइमर अपना घर परिवार ... Read more
clicks 131 View   Vote 0 Like   1:10pm 15 Nov 2015
Blogger: पुंज प्रकाश
मेरा गांव बाढ़ शहर से लगभग आठ किलोमीटर अंदर है लेकिन चुनाव का क्षेत्र मोकामा पड़ता है। बाढ़ शहर से गांव की तरफ़ जानेवाली सड़क का अतिम पड़ाव है मेरे गांव। उसके आगे आज भी पगडंडियों का ज़माना है। गांव के लोग लगभग रोज़ ही बाढ़ जाते हैं, मोकामा नहीं। स्टेशन भी बाढ़ ही पड़ता है लेकिन चुना... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   2:33am 8 Nov 2015


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