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Blog: Hindi Poem (हिंदी कविता )

Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
एक शख्स बैठ सड़क परपूछता है सवाल सरकार सेजिनके दम पर है ये मुल्क साराक्यों त्रस्त है वो महंगाई की मार सेक्यों देती है तुम्हारी नीतियाँसंरक्षण भ्रष्टाचारियों, अत्याचारियों कोक्यों करती है तुम्हारा प्रशासननज़रंदाज़ इनकी कारगुजारियों कोकिसानों की मौत, मजदूरों के श... Read more
clicks 214 View   Vote 0 Like   6:36am 18 Nov 2012 #वीर रस
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
किसने कतरें पर उन परिंदों केउड़ते थे जो दूर आसमान ?लहूलुहान दिखती है धरतीकिसने दिया ये क़त्ल का फरमान ?है कौन यहाँ इतना बेरहमजिसको है खून की प्यास ?क्यों मिट गया उसके अंदरदूसरों के दर्द का अहसास ?तड़पती जानों को देखकौन यहाँ मज़ा ले रहा है ?बेगुनाहों को सज़ा ए मौतकौन यहा... Read more
clicks 331 View   Vote 0 Like   10:30am 9 Nov 2012 #दर्द भरा
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
मनमोहन तेरे राज मेंऔर कितने मंत्री होंगे बदनाम ?बड़े-बड़े घोटालों के अलावाकुछ भी ना हुआ कामअपाहिजों की बैशाखी कर चोरीकानून मंत्री करते है मुंहजोरीसंचार मंत्री ने बेचे सरेआमअरबों के स्पेक्ट्रम कौडियों के दामघाना को हुआ जब चाँवल निर्यातविदेश मंत्री के रंग गए हाथको... Read more
clicks 155 View   Vote 0 Like   10:30am 6 Nov 2012 #भ्रष्टाचार
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
देखो घोर कलयुग है आयाबड़ी गजब है इसकी मायादौलत को भगवान बनायाबिन दौलत अपने भी परायादौलत से चलती सरकारजनता की होती तिरस्कारमंत्री करता जितना बड़ा भ्रष्टाचारमिलता उसको उतना बड़ा पुरस्कारचोर संग पुलिस खाए मलाईरिपोर्ट दर्ज कराने वाले की होती पिटाईजेल के अंदर वो है ज... Read more
clicks 216 View   Vote 0 Like   10:00am 4 Nov 2012 #भ्रष्टाचार
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
छाया है घना कोहराया सुलग रही है कहीं पर आगये भीड़ है तमाशा देखने वालों कीया जनता गई है जागये हाथों में तिरंगा लहरानेवालेवंदे मातरम का नारा लगानेवालेपन्द्रह अगस्त, छब्बीस जनवरी आया हैया है ये आज़ादी के परवानेये बादलों की गड़गड़ाहट हैया जनता रही दहाड़निकली है भीड़ सै... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   8:30am 2 Nov 2012 #देशभक्ति
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
दीपों का त्यौहार आयापूरा देश जगमगायाढेरों खुशियाँ संग लायामन में उमंग छायाराम की वापसी हुई थी इस दिनपूरा हुआ था वनवास कठिनरावण हरा घर पहुंचे थे रामलंका जीत किये थे बड़ा कामघर की होती रंगाई पुताईचारो ओर दिखती सफाईएक दूसरे को देते सब बधाईबंटती रसगुल्ले और मिठाईसज गए ... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   8:30am 31 Oct 2012 #सामान्य
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
गुलामी का दर्द बयां करना है मुश्किलगुलामी में चैन सुकून सब जाता है छीनदर्द गुलामी का, पूछो उस परिंदे सेकैद है जो, आज एक छोटे से पिंजरे मेंझील और झरने का पानी पीता था जो हरदमकटोरी में पानी देख घुटता है उसका दमस्वभाव था उसका डालियों में फुदकने काआज करता है नाकाम कोशिश सला... Read more
clicks 223 View   Vote 0 Like   8:30am 29 Oct 2012 #देशभक्ति
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
जिसने किया था सीता का हरणराम ने मारा था वो रावणहर साल मर के लेता नया जनमअब का है ये कैसा रावणकागज़ के पुतले तो प्रतीक हैहम सब में छिपा बैठा है एक रावणकागज के पुतले को दहन करक्या मार लिया अपने अंदर का रावण ?बुराई पर अच्छाई की जीत कात्यौहार है यह दशहरापर बुराई मिटने के बजाय... Read more
clicks 195 View   Vote 0 Like   6:22am 28 Oct 2012 #सामान्य
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
सिहर उठता है तन मनजब चलती है मंद पवनभाती मन को सूर्यकिरणकि आया सर्दी का मौसमहरित तृणों पर ओंस की बुँदेलगती है मनभावनसूर्यकिरण पड़ती जब इनपरजैसे हो तारे करते टिमटिमजहाँ भी देखो वहाँ दिखेऊनी कपड़ों में लिपटा बदनआग का घेरा डाले हैआज यहाँ पर जन-जनठंडे पानी से नहानालगता ... Read more
clicks 298 View   Vote 0 Like   9:00am 23 Oct 2012 #सामान्य
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
याद आता है वो मंजरजब कहर ढाया था समंदरलहरों में थी उफानआ गया था एक तूफ़ानऊँची लहरों ने किया प्रवेशजैसे हो तबाही का श्री गणेशगाँव हो या शहरसब पर बरसा कहरगाँव शहर सब डूबा लियामिट्टी में सबको मिला दियाचली गई हजारों जानगाँव शहर कर गया शमशानसुनामी है इस कहर का नामबड़ी डरा... Read more
clicks 175 View   Vote 0 Like   8:00am 21 Oct 2012 #दर्द भरा
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
गहरी जमी है जड़े भ्रष्टाचार कीसाफ़ नहीं दिखती नियत सरकार कीआरोप लगते है जब भ्रष्टाचार कीकहते है ये बात है बिना आधार कीएक चपरासी से लेकर अधिकारी तकनिजी से लेकर सरकारी तकवकील से लेकर धर्माधिकारी तकहो गए है सब भ्रष्ट, आम जनता है त्रस्तराशन कार्ड की बात हो या वीजा कार्ड क... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   9:32am 20 Oct 2012 #भ्रष्टाचार
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
अभी तो केवल आगाज है हुआ, राज़ से पर्दा गिराने काजाने कितने राज़ का बेपर्दा होना अभी बाकी हैजुल्म और सितम का दौर अभी ठहरा नहीं हैदहकते अंगारों पर चलना अभी बाकी हैरहनुमा का नकाब लिए फिरते थे जो ज़ालिमउनके चेहरों से नकाब का हटना अभी बाकी हैसिंहासन पर बैठे थे जो मुल्क को अप... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   7:00am 16 Oct 2012 #वीर रस
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
ऐ घर पे बैठे तमाशबीन लोगलुट रहा है मुल्क, कब तलक रहोगे खामोशशिकवा नहीं है उनसे, जो है बेखबरपर तु तो सब जानता है, मैदान में क्यों नहीं रहा उतरक्या ये मुल्क तेरा नहीं,या तु यहाँ रहता नहींदिखा दे आज दुनिया को, जिंदा है तु मुर्दा नहींघर के अंदर चीखने से, कुछ भी ना बदल पायेगाआवा... Read more
clicks 147 View   Vote 0 Like   4:23am 15 Oct 2012 #देशभक्ति
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
एक शख्स ने हिला दी है जड़ेसिंहासन पर बैठने वालों कीरोशन हुई है उम्मीदेंनाउम्मीदगी में जीने वालों कीलुटते थे जो बेख़ौफ़ वतन कोकाँपने लगे है उनके भी हाथहर सड़क, हर गली मुहल्ले मेंहोती है बस उसकी बातचर्चा ये आम है, हर कोई हैरान हैक्या वो आम इंसान है ? जिसने किया ये काम हैस... Read more
clicks 156 View   Vote 0 Like   1:38am 14 Oct 2012 #वीर रस
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
क्यों लगाया है उम्मीद मुसाफिर उनसेजो खुद नाउम्मीदगी का दामन थाम बैठे हैनिकला है उन्हें तु जगानेजो सोने का बहाना कर लेटे हैकितने आये और चले गएपर इनके कानों में जूँ तक ना रेंगते हैकोई भले ही फ़ना हो जाए इन्हें जगाने के लिएमगर ये करवट तक ना बदलते हैहाँ पता है तुझे नतीजों ... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   3:50am 13 Oct 2012 #सामान्य
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
ये मुर्दों का शहर है या बेफिक्रों का,लोग मिलते है लाशों की तरह,जबां पे लगा लिए है ताले ,और पूछते है इतना सन्नाटा क्यों है ?मेहनत करती है लाशें दिलोजान से,मेहनताना छीन ले जाता है क़ातिल,मुफ़लिसी में दिन कटते है लाशों के,क़ातिल का दिन अय्याशी में गुजरता क्यों है ?इनको लगता ... Read more
clicks 196 View   Vote 0 Like   4:41am 12 Oct 2012 #देशभक्ति
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
हम यकीन करे भी तो, किसपर करे यहाँ लोग दौलत के लिए, अपनों से दगा कर जाते है शराफत का चोला पहन, घूमते लोग बस्तियां उजाड़ते, नज़र आते है लोग कहते है जिसे, सच्चाई की मूरत वही लोगो से, ठगी करते हुए पाए जाते है रक्षक का तमगा ओढ़, फिरते है जो शान से भक्षक की तरह काम करते, नज़र आते है... Read more
clicks 153 View   Vote 0 Like   7:03am 11 Oct 2012 #दर्द भरा
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
छाया था घना कोहरा, काली अंधियारी रातसुबह का था इंतज़ार, कि हो सूरज से मुलाक़ातपल पल बीत रहे थे सदियों सी, सिंह रहा था दहाड़पतले वस्त्र थे तन पे और वो ठण्ड की मारकुंडली मारे सर्प, फन फैलाए रहा था फुफकारडर के भागे हम इधर उधर, चुभ गए कांटे कई हज़ारबिच्छू ने मारा डंक, पूरा विष ... Read more
clicks 150 View   Vote 0 Like   7:00am 10 Oct 2012 #दर्द भरा
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
कदम बढ़ा तो साथी संग हमारेनदियों की धार पलट जायेंगेक्यों डरता है इन तानाशाहों सेइनके तो तख़्त और ताज उलट जायेंगेकब तक सहेगा ये जुल्म और सितमउठा संग हाथ हमारे सितमगर दूर छिटक जायेंगेलुट रहे है ये सदियों से हमेंइनकी तिजौरियो में हमारे ताले लटक जायेंगेअगर हम यूँही चुप... Read more
clicks 171 View   Vote 0 Like   8:45am 9 Oct 2012 #वीर रस
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
बैठा है दुर्योधन, हर गली मोहल्ले मेंकरता है रोज एक द्रोपती का चीरहरणभरी महफ़िल में द्रोपती की लाज बचानेवालावो श्याम कहाँ है ? वो श्याम कहाँ है ?है कंसो का राज यहाँकरते है जनता पे अत्याचारजनता का दुःख हरनेवालावो गोपाल कहाँ है ? वो गोपाल कहाँ है ?है रावणों की भरमार यहाँजो ... Read more
clicks 148 View   Vote 0 Like   8:10am 8 Oct 2012 #दर्द भरा
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
छलक आते होंगे आंसू शहीदों केअपने वतन की हालत देखकरसोचते होंगे क्यों मर गए हमइन खुदगर्जो के लिएसपना जो देखा था शहीदों नेएक खुशहाल वतन बनाने काआज बिक रहे है वतनवाले हीचंद कागज के टुकडों के लिएदर्द से भर जाता होगा उनका भी दिलजब जब जमीं पर देखते होंगेलहू से सींचा था जिस ज... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   7:20am 7 Oct 2012 #देशभक्ति
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
कटे-फटे जीर्ण वस्त्रों मेंअधढका तन वाला वो इंसानहररोज लड़ता है जंगजिंदा रहने के लिएनिकलता है कड़ी धूप मेंभूखे पेट, नंगे पांवहाथो में पड़े होते है फफोलेऔर पैरों में छालेलिये औजार कंधो परदो वक्त की रोटी के लिएझलकती है तन से हड्डियाँहो जाता है पसीने से तरबतरजब चलाता है... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   4:55pm 4 Oct 2012 #दर्द भरा
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
आओ सुनाऊ एक दास्तानजिसका नायक है एक आम इंसानमहंगाई करती इसको परेशानसिर्फ चुनाव के समय ही कहलाता ये भगवानकभी खुले आसमान के नीचेभूखे पेट है सोताकभी चिलचिलाती धूप मेंनंगे पाँव है चलतामुश्किलों में पढ़ता बढ़ताजीने के लिए संघर्ष करतानौकरी के लिए भटकता फिरतामिले जो छो... Read more
clicks 164 View   Vote 0 Like   5:41pm 26 Sep 2012 #दर्द भरा
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
Hindi Poem (हिंदी कविता ): यहाँ कागज के टुकडो पर बिकते है लोग... Read more
clicks 94 View   Vote 0 Like   7:04pm 24 Sep 2012 #
Blogger: भूपेन्द्र कुमार जायसवाल
ये कैसा जमाना आ गया, मै रहा हू सोचयहाँ कागज के टुकडों पर बिकते है लोगजनता का सेवक ही, जनता को रहा लुटधर्म कि बात कौन कहे, यहाँ भाई-भाई में है फुटडकैती का एक हिस्सा जाता है पहरेदारो कोयहाँ इनाम से नवाज़ा जाता है गद्दारों कोकानून के रखवालों के सामने लुटती है अबलाओ कि अस्मत ... Read more
clicks 105 View   Vote 0 Like   7:50am 17 Sep 2012 #भ्रष्टाचार

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