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Blog: भूत-प्रेत की कहानियाँ

Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
अभी-अभी हाल ही में तो खमेसर आया था इस कस्बे में। ऐसा कस्बा जो धीरे-धीरे शहर का रूप ले रहा था। इधर-उधर, दूर-दूर तक निर्माणाधीन बिल्डिंगें बिखरी पड़ी थीं। कहीं-कहीं, आस-पास में कई सारी बिल्डिंगें बन रही थीं तो कहीं-कहीं एकदम से सन्नाटा पसरा था। दूर-दूर तक एक भी घर नहीं तो किस... Read more
clicks 1099 View   Vote 0 Like   8:14am 24 Aug 2014 #
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
फोटो का कहानी से कुछ भी लेना-देना नहींबार-बार सुनने को मिलता है कि 100 अपराधी छूट जाएँ पर किसी निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए। पर क्या वास्तव में ऐसा होना चाहिए? क्या अपराधी का बच निकलना समाज हित में है?शायद नहीं। क्योंकि कमजोर कानून का फायदा उठाकर कितने अपराधी बच निकलते ... Read more
clicks 1720 View   Vote 0 Like   9:46am 23 Jul 2014 #
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
।।जय बजरंग बली।।भोजपुरी में एक कहावत है कि भाग्यशाली का हल भूत हाँकता है (भगीमाने के हर भूत हाँकेला)। खैर यह तो एक कहावत है पर अगर कभी ऐसा हो जाए कि कोई प्रेत 24सों घंटा आपकी सेवा में हाजिर हो जाए तो आपको कैसा लगेगा?अगर आप किसी ऐसे बिगड़ैल, भयानक प्रेत को डाँटकर अपना काम कर... Read more
clicks 1191 View   Vote 0 Like   6:38am 22 Jun 2014 #
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
बँसखटिया के आनंदरमेसर काका के पास एक लेहड़ा गायें थीं। वे प्रतिदिन सुबह ही इन गायों को दुह-दाहकर चराने के लिए निकल पड़ते थे। सुबह से लेकर शाम तक रमेसर काका गायों को लेकर इस गाँव से उस गाँव, तो कभी नदी किनारे, तो कभी-कभी इस जंगल से उस जंगल घूमा करते थे और दिन ढलते ही गाँव की ... Read more
clicks 1462 View   Vote 0 Like   8:14pm 17 May 2014 #चुड़ैल
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
फोटो, साभार- www.telegraph.co.ukरमेसर काका जब यह भूतही कहानी सुनाना शुरू किए तो हम मित्रों को पहले तो थोड़ा डर लगा पर बाद में भूतों से हमदर्दी होने लगी। हमने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि एक भूतनी भगवान बनकर सामने आ जाएगी और अपनी जान पर खेलकर किसी की जान बचा जाएगी। जी हाँ। यह कहानी ... Read more
clicks 819 View   Vote 0 Like   2:17pm 15 Apr 2014 #चुड़ैल
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
इस चित्र का इस भूतही काल्पनिक कहानी से कुछ भी लेना-देना नहीं।रात के अंधेरे में मैकू अपनी कार को दौड़ाए जा रहा था। मैकू को खुद कार चलाना और दूर-दूर की यात्राएँ करना बहुत ही पसंद था। मैकू की बगल वाली सीट पर उसका दोस्त रमेश बैठा था। वे दोनों मुंबई से मैहर भगवती के दर्शन के ल... Read more
clicks 613 View   Vote 0 Like   5:57am 25 Mar 2014 #चुड़ैल
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
महुआनीगर्मी का महीना। खड़-खड़ दुपहरिया। रमेसर भाई किसी गाँव से गाय खरीद कर लौटे थे। गाय हाल की ही ब्याई थी और तेज धूप के कारण उसका तथा उसके बछड़े का बुरा हाल था। बेचारी गाय करे भी तो क्या, रह-रह कर अपने बछड़े को चाटकर अपना प्यार दर्शा देती थी। रमेसर भाई को भी लगता था कि गाय... Read more
clicks 678 View   Vote 0 Like   11:09am 25 Feb 2014 #
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
मैदानी भागों में भी अगर किसी कल-कल बहती नदी के किनारे कोई छोटा सा गाँव हो, आस-पास में हरियाली ही हरियाली हो, शाम के समय गाय-बकरियों का झुंड इस नदी के किनारे के खाली भागों में छोटी-बड़ी झाड़ियों के बीच उग आई घासों को चर रहा हो, गायें रह-रहकर रंभा रही हों, बछड़े कुलाछें भर रहे ... Read more
clicks 745 View   Vote 0 Like   6:03am 21 Dec 2013 #
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
बेटी है तो कल है (चित्र साभार-movies.ndtv.com )(पेश है, एक सुनी घटना पर आधारित भूतही कहानी!!!!!)कभी-कभी क्या,हमेशा ही ऐसा होता है मेरे साथ। जब भी इंसान के बारे में सोचता हूँ तो गुस्से से तिलमिला उठता हूँ। कभी हँसना तो कभी रोना आता है इस इंसान पर। बड़ी-बड़ी बातें करने वाला इंसान, नैतिकत... Read more
clicks 769 View   Vote 0 Like   8:13am 24 Nov 2013 #
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
"जो करे बनारस गंगा स्नाना, उसके पास भूत-प्रेत कभी नहीं आना"भूत की कहानी भी सत्य हो सकती है क्या? कुछ लोग इसपर सत्यता की मुहर लगाते हैं तो कुछ लोग गढ़ी हुई मान कर रोब जमाते हैं। खैर मैं तो यह मानता हूँ कि अगर भगवान का अस्तित्व है तो भूत-प्रेतों का क्यों नहीं?पर यह भी सही है कि ... Read more
clicks 627 View   Vote 0 Like   8:17am 22 Oct 2013 #
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
रमेसर बाबू अपने कार्यालय में अपनी सीट पर बैठकर फाइलों को उलट-पलट रहे थे। उनका कार्यालय ग्रामीण क्षेत्र में था जहाँ जाने के लिए कच्ची सड़कों से होकर जाना पड़ता था। अरे इतना ही नहीं, कार्यालय के आस-पास में जंगली पौधों की अधिकता थी, कहीं कहीं तो ये जंगली पौधे इतने सघन थे कि ... Read more
clicks 938 View   Vote 0 Like   12:43pm 22 Sep 2013 #
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
 कभी-कभी पाठक वर्ग की यह माँग होती है कि अधूरी कहानी क्यों??? धारावाहिक क्यों??? क्योंकि कुछ लोगों को लगता है कि कड़ी में मनोरंजनपूर्ण या भूतही कहानी सुनाने पर उतना आनंद नहीं आता। इसी को ध्यान में रखकर अब जो भी कहानी प्रस्तुत की जाएगी, वह पूरी की पूरी।।डिहबाबा (डिहुआर बा... Read more
clicks 550 View   Vote 0 Like   3:11pm 21 Aug 2013 #
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
ग्राम-मंदिर, गोपालपुर, पथरदेवा, देवरियाआइए, आपलोगों को एक बार फिर भूतों के साम्राज्य में ले चलता हूँ। भूतों से मिलवाता हूँ और एक सुनी हुई काल्पनिक घटना सुनाता हूँ। यह घटना हमारे गाँव के एक बुजुर्ग पंडीजी बताते थे और पंडीजी जब यह आपबीती सुनाते थे तो सुनने वालों के रोंगट... Read more
clicks 544 View   Vote 0 Like   6:03am 14 Jul 2013 #
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
पिछली कहानी में आपने जाना था रमकलिया को। एक षोडशी, एक ऐसी किशोरी जो बिंदास स्वभाव की थी, निडरता की महारानी थी।यहाँ पिछली कहानी के अंतिम पैराग्राफ को देना उचित प्रतीत हो रहा है- {एक दिन सूर्य डूबने को थे। चरवाहे अपने गाय-भैंस, बकरियों को हांकते हुए गाँव की ओर चल दिए थे। अं... Read more
clicks 720 View   Vote 0 Like   8:32am 23 Jun 2013 #
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
रमकलिया, जी हाँ, यही तो नाम था उस लड़की का। सोलह वर्ष की रमकलिया अपने माँ-पाप की एकलौती संतान थी। उसके माँ-बाप उसका बहुत ही ख्याल रखते थे और उसकी हर माँग पूरी करते थे। अरे यहाँ तक कि, हमारे गाँव-जवार के बड़े-बुजुर्ग बताते हैं कि गाँव क्या पूरे जवार में सबसे पहले साइकिल रमकल... Read more
clicks 548 View   Vote 0 Like   7:32am 18 Apr 2013 #
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
रमकलिया, जी हाँ, यही तो नाम था उस लड़की का। सोलह वर्ष की रमकलिया अपने माँ-बाप की इकलौती संतान थी। उसके माँ-बाप उसका बहुत ही ख्याल रखते थे और उसकी हर माँग पूरी करते थे। अरे यहाँ तक कि, हमारे गाँव-जवार के बड़े-बुजुर्ग बताते हैं कि गाँव क्या पूरे जवार में सबसे पहले साइकिल रमकल... Read more
clicks 337 View   Vote 0 Like   7:32am 18 Apr 2013 #टोना
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
पाठक गण,सादर नमस्कार।।आज एक ऐसी घटना का वर्णन सुनाने जा रहा हूँ जो भूत-प्रेत से संबंधित तो नहीं है पर है चमत्कारिक। यह घटना सुनाने के लिए मैंने कई बार लेखनी उठाई पर पता नहीं क्यों कुछ लिख नहीं पाता था..पर आज पता नहीं क्या चमत्कार हुआ कि अचानक मूड बना और मैंने इस घटना को ले... Read more
clicks 749 View   Vote 0 Like   3:06pm 29 Aug 2012 #
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
आधुनिक समय में भूत-प्रेत अंधविश्वास के प्रतीक के रूप में देखे जाते हैं पर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो भूत-प्रेतों के अस्तित्व को नकार नहीं सकते। कुछ लोग (पढ़े-लिखे) जिन्हें भूत-प्रेत पर पूरा विश्वास होता है वे भी इन आत्माओं के अस्तित्व को नकार जाते हैं क्योंकि उनको पता है कि अग... Read more
clicks 602 View   Vote 0 Like   4:58am 15 Dec 2011 #डायन
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
पाठकगण,सादर नमस्कारआज मैं भूत-प्रेत से अलग एक सच्ची घटना सुनाने जा रहा हूँ...आशा है यह भी आप लोगों को पसंद आएगी....कृपया इस घटना पर अपनी बेबाक टिप्पणी अवश्य दें। सादर धन्यवाद।ज्योतिष वेदांग है और यह कभी गलत हो ही नहीं सकता। हाँ अगर ज्योतिष के आधार पर कोई गणना की जाए और गणना... Read more
clicks 587 View   Vote 0 Like   5:40am 13 Dec 2011 #डायन
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
जी हाँ, यह बात मुझे भी पूरी तरह से बनावटी लग रही है पर बतानेवालों की सुने तो यह एकदम सत्य घटना है। खैर जो भी हो पर यह घटना जिस व्यक्ति के साथ घटी उससे तो मैं नहीं मिला हूँ और मिलता भी कैसे क्योंकि इस घटना को घटे 55-60 साल हो गए हैं। और इस घटना के घटने के 5-6 साल बाद वह व्यक्ति भी प्र... Read more
clicks 605 View   Vote 0 Like   12:47pm 11 Dec 2011 #डायन
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
कहते हैं कि 'देनेवाला जब भी देता, देता छप्पर फाड़ के' पर ये जो देनेवाला है वह ईश्वर की ओर इशारा कर रहा है पर आपको पता है क्या कि अगर कोई भूत भी अति प्रसन्न हो जाए तो वह भी मालदार बना देता है। जी हाँ, हम आज बात कर रहे हैं एक ऐसे भूत की जिसने एक घूम-घूमकर मूँगफली और गुड़धनिया (गुड... Read more
clicks 600 View   Vote 0 Like   3:59am 9 Dec 2011 #डायन
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
पता नहीं क्यों, आज  कौन थी वह??? का शेष भाग लिखते हुए मेरे शरीर में एक अजीब सी सिहरन हो रही है। पता नहीं क्यों आज मुझे थोड़ा डर भी लग रहा है। क्या बलेसरा की कहानी इतनी डरावनी है या मैं ऐसे ही डर रहा हूँ। खैर जो भी, सिहरते हुए ही सही पर हमें तो इस कहानी को आगे बढ़ाना है और बलेसरा ... Read more
clicks 252 View   Vote 0 Like   12:22pm 5 Dec 2011 #डायन
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
भादों का महीना. काली अँधियारी रात. कभी-कभी रह-रहकर हवा का तेज झोंका आता था और आकाश में रह-रहकर बिजली भी कौंध जाती थी. रमेसर काका अपने घर से दूर घोठे पर मड़ई में लेटे हुए थे. रमेसर काका का घोठा गाँव से थोड़ा दूर एक गढ़ही (तालाब)के किनारे था. गढ़ही बहुत बड़ी नहीं थी पर बरसात में ... Read more
clicks 253 View   Vote 0 Like   2:01pm 18 Sep 2011 #डायन
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
पिछली कहानी में आपने पढ़ा ‘एक दिवानी चुड़ैल के बारे में’और आपने यह भी पढ़ा कि किस प्रकार छूटा था उस दिवानी चुड़ैल से पीछा।अब जो कहानी मैं आप लोगों को सुनाने जा रहा हूँ वह है एक ऐसे आदमी की जिसको पता नहीं क्या सूझा कि वह शादी करने के लिए एक चुड़ैल के पीछे ही पड़ गया। वह उस च... Read more
clicks 370 View   Vote 0 Like   4:35pm 10 Feb 2010 #डायन
Blogger: प्रभाकर पाण्डेय "गोपालपुरिया"
यह कहानी है एक चुड़ैल की जो एक व्यक्ति के पीछे ही पड़ गई थी। और हाँ ये चुड़ैल उस व्यक्ति से बहुत कुछ दिल की बातें करती थी। इस चुड़ैल का तो यहाँ तक कहना था कि उसको उस व्यक्ति से प्यार हो गया है और वह सदा के लिए उसका बनकर रहना चाहती है। पर क्या वह चुड़ैल उस व्यक्ति को अपना बना ... Read more
clicks 346 View   Vote 0 Like   4:17am 13 Sep 2009 #डायन

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