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काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)

नीलगगन पर कुहरा छाया, दोपहरी में शाम हो गई।शीतलता के कारण सारी, दुनियादारी जाम हो गई।।गैस जलानेवाली ग़ायब, लकड़ी गायब बाज़ारों से,कैसे जलें अलाव? यही तो पूछ रहे हैं सरकारों से,जीवन को ढोनेवाली अब, काया भी नाकाम हो गई।खुदरा व्यापारी जायेंगे, परदेशी व्यापार...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
Tag :दुनियादारी जाम हो गई
  December 11, 2013, 7:55 pm
सुलगते प्यार में, महकी हवाएँ आने वाली हैं। दिल-ए-बीमार को, देने दवाएँ आने वाली हैं।। चटककर खिल गईं कलियाँ, महक से भर गईं गलियाँ, सुमन की सूनी घाटी में, सदाएँ आने वाली है। दिल-ए-बीमार को, देने दवाएँ आने वाली हैं।। चहकने लग गई कोयल, सुहाने हो गये हैं पल, नवेली कोपलों में, ...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
Tag :जवानी गीत है अनुपम
  December 2, 2013, 8:03 pm
कौन थे? क्या थे? कहाँ हम जा रहे?व्योम में घश्याम क्यों छाया हुआ?भूल कर तम में पुरातन डगर को,कण्टकों में फँस गये असहाय हो,वास करते थे कभी यहाँ पर करोड़ो देवता,देवताओं के नगर का नाम आर्यावर्त था,काल बदला, देव से मानव कहाये,ठीक था, कुछ भी नही अवसाद था,किन्तु अब मानव से दानव बन गय...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
Tag :खो गयी प्राचीनता
  November 24, 2013, 8:37 pm
मोक्ष के लक्ष को मापने के लिए,जाने कितने जनम और मरण चाहिए ।प्यार का राग आलापने के लिए,शुद्ध स्वर, ताल, लय, उपकरण चाहिए।।लैला-मजनूँ को गुजरे जमाना हुआ,किस्सा-ए हीर-रांझा पुराना हुआ,प्रीत की पोथियाँ बाँचने के लिए-ढाई आखर नही व्याकरण चाहिए ।प्यार का राग आलापने के लिए,शुद्ध ...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
Tag :ढाई आखर नही व्याकरण चाहिए
  November 20, 2013, 4:09 pm
अगवाड़ा भी मस्त है, पिछवाड़ा भी मस्त।नेता जी ने कर दिये, कीर्तिमान सब ध्वस्त।१।--जोड़-तोड़ के अंक से, चलती है सरकार।मक्कारी-निर्लज्जता, नेता का श्रृंगार।२।--तन-मन में तो काम है, जिह्वा पर हरिनाम।नैतिकता का शब्द तो, हुआ आज गुमनाम ।३।--सपनों की सुन्दर फसल, अरमानों का बीज। ...
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Tag :दोहे
  October 30, 2013, 11:41 am
विरह की अग्नि में दग्ध क्यों हो निशा, क्यों सँवारे हुए अपना श्रृंगार हो।क्यों सजाए हैं नयनों में सुन्दर सपन, किसको देने चली आज उपहार हो।क्यों अमावस में आशा लगाए हो तुम,चन्द्रमा बन्द है आज तो जेल में।तुम सितारों से अपना सजा लो चमन,आ न पायेगा वो आज तो खेल में।एक दिन तो ...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
Tag :मुक्त कविता
  October 10, 2013, 6:17 pm
हम बच्चों के जन्मदिवस को,धूम-धाम से आप मनातीं।रंग-बिरंगे गुब्बारों से,पूरे घर को आप सजातीं।।आज मिला हमको अवसर ये,हम भी तो कुछ कर दिखलाएँ।दादी जी के जन्मदिवस को,साथ हर्ष के आज मनाएँ।।अपने नन्हें हाथों से हम,तुमको देंगे कुछ उपहार।बदले में हम माँग रहे हैं,दादी से प्यार अ...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
Tag :श्रीमती अमर भारती
  September 29, 2013, 8:00 pm
जमाना है तिजारत का, तिज़ारत ही तिज़ारत हैतिज़ारत में सियासत है, सियासत में तिज़ारत हैज़माना अब नहीं, ईमानदारी का सचाई काखनक को देखते ही, हो गया ईमान ग़ारत हैहुनर बाज़ार में बिकता, इल्म की बोलियाँ लगतींवजीरों का वतन है ये, दलालों का ही भारत हैप्रजा के तन्त्र में कोई, नही...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
Tag :तिज़ारत ही तिज़ारत है
  July 25, 2013, 8:39 pm
मानव दानव बन बैठा है, जग के झंझावातों में।दिन में डूब गया है सूरज, चन्दा गुम है रातों में।।होड़ लगी आगे बढ़ने की, मची हुई आपा-धापी,मुख में राम बगल में चाकू, मनवा है कितना पापी,दिवस-रैन उलझा रहता है, घातों में प्रतिघातों में।दिन में डूब गया है सूरज, चन्दा गुम है रातों में।।ज...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
Tag :झंझावातों में
  July 15, 2013, 10:44 am
हो गया मौसम गरम,सूरज अनल बरसा रहा।गुलमोहर के पादपों का,“रूप” सबको भा रहा।।दर्द-औ-ग़म अपना छुपा,हँसते रहो हर हाल में,धैर्य मत खोना कभी,विपरीत काल-कराल में,चहकता कोमल सुमन,सन्देश देता जा रहा।गुलमोहर के पादपों का,“रूप” सबको भा रहा।।घूमता है चक्र, दुख के बाद, सुख भी आयेगा,क...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
Tag :गीत
  May 26, 2013, 7:15 pm
हो गया मौसम गरम,सूरज अनल बरसा रहा।गुलमोहर के पादपों का,“रूप” सबको भा रहा।।दर्द-औ-ग़म अपना छुपा,हँसते रहो हर हाल में,धैर्य मत खोना कभी,विपरीत काल-कराल में,चहकता कोमल सुमन,सन्देश देता जा रहा।गुलमोहर के पादपों का,“रूप” सबको भा रहा।।घूमता है चक्र, दुख के बाद, सुख भी आयेगा,...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
Tag :गुलमोहर
  May 26, 2013, 7:15 pm
हो गया मौसम गरम,सूरज अनल बरसा रहा।गुलमोहर के पादपों का,“रूप” सबको भा रहा।।दर्द-औ-ग़म अपना छुपा,हँसते रहो हर हाल में,धैर्य मत खोना कभी,विपरीत काल-कराल में,चहकता कोमल सुमन,सन्देश देता जा रहा।गुलमोहर के पादपों का,“रूप” सबको भा रहा।।घूमता है चक्र, दुख के बाद, सुख भी आयेगा,...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
Tag :गुलमोहर
  May 26, 2013, 7:15 pm
चिड़िया रानी फुदक-फुदक कर, मीठा राग सुनाती हो।आनन-फानन में उड़ करके,आसमान तक जाती हो।।मेरे अगर पंख होते तो,मैं भी नभ तक हो आता।पेड़ों के ऊपर जा करके,ताजे-मीठे फल खाता।।जब मन करता मैं उड़ कर के,नानी जी के घर जाता।आसमान में कलाबाजियाँ, कर के सबको दिखलाता।।सूरज उगने से प...
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Tag :बालकविता
  March 11, 2013, 5:36 pm
ईदमीलादुन्नबी का स्मरणोत्सव मनाने का हुक्म﴿ حكم الاحتفال بذكرى المولد النبوي ﴾बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीममैं अति मेहरबान और दयालु अल्लाह के नाम से आरम्भ करता हूँ।हर प्रकार की हम्द व सना (प्रशंसा और गुणगान) अल्लाह के लिए योग्य है, हम उसी की प्रशंसा करते हैं, उसी से मदद मांगते औ...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
Tag :बारावफात
  January 25, 2013, 8:57 am
ईदमीलादुन्नबी का स्मरणोत्सव मनाने का हुक्म﴿ حكم الاحتفال بذكرى المولد النبوي ﴾बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीममैं अति मेहरबान और दयालु अल्लाह के नाम से आरम्भ करता हूँ।हर प्रकार की हम्द व सना (प्रशंसा और गुणगान) अल्लाह के लिए योग्य है, हम उसी की प्रशंसा करते हैं, उसी से मदद मांगते औ...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
Tag :
  January 25, 2013, 8:57 am
ग़म की रखवाली करते-करते ही उम्र तमाम हुई।पहरेदारी करते-करते सुबह हुई और शाम हई।।सुख आये थे संग में रहने.डाँट-डपट कर भगा दिया,जाने अनजाने में हमने,घर में ताला लगा लिया,पवन-बसन्ती दरवाजों में, आने में नाकाम हुई।पहरेदारी करते-करते सुबह हुई और शाम हई।।मन के सुमन चहकने में ह...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
Tag :नयासाल
  December 31, 2012, 5:59 pm
ग़म की रखवाली करते-करते ही उम्र तमाम हुई।पहरेदारी करते-करते सुबह हुई और शाम हई।।सुख आये थे संग में रहने.डाँट-डपट कर भगा दिया,जाने अनजाने में हमने,घर में ताला लगा लिया,पवन-बसन्ती दरवाजों में, आने में नाकाम हुई।पहरेदारी करते-करते सुबह हुई और शाम हई।।मन के सुमन चहकने में ह...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
Tag :गीत
  December 31, 2012, 5:59 pm
      सन् 1979, बनबसा जिला-नैनीताल का वाकया है। उन दिनों मेरा निवास वहीं पर था । मेरे घर के सामने रिजर्व कैनाल फौरेस्ट का साल का जंगल था। उन पर काले मुँह के लंगूर बहुत रहते थे। मैंने काले रंग का भोटिया नस्ल का कुत्ता पाला हुआ था। उसका नाम टॉमी था। जो मेरे परिवार का एक वफादार सद...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
Tag :
  November 23, 2012, 3:36 pm
      सन् 1979, बनबसा जिला-नैनीताल का वाकया है। उन दिनों मेरा निवास वहीं पर था । मेरे घर के सामने रिजर्व कैनाल फौरेस्ट का साल का जंगल था। उन पर काले मुँह के लंगूर बहुत रहते थे। मैंने काले रंग का भोटिया नस्ल का कुत्ता पाला हुआ था। उसका नाम टॉमी था। जो मेरे परिवार का एक वफाद...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
Tag :
  November 23, 2012, 3:36 pm
!! शुभ-दीपावली !! तम अमावस का मिटाने को,दिवाली आ गयी है।दीपकों की रोशनी सबके,दिलों को भा गयी है।।जगमगाते खूबसूरत, लग रहे नन्हें दिये,लग रहा जैसे सितारे ही, धरा पर आ गये,झोंपड़ी महलों के जैसी,मुस्कराहट पा गयी है।दीपकों की रोशनी सबके,दिलों को भा गयी है।।भवन की दीवार को, बे...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
Tag :दिवाली आ गयी है
  November 12, 2012, 7:04 am
!! शुभ-दीपावली !! तम अमावस का मिटाने को,दिवाली आ गयी है।दीपकों की रोशनी सबके,दिलों को भा गयी है।।जगमगाते खूबसूरत, लग रहे नन्हें दिये,लग रहा जैसे सितारे ही, धरा पर आ गये,झोंपड़ी महलों के जैसी,मुस्कराहट पा गयी है।दीपकों की रोशनी सबके,दिलों को भा गयी है।।भवन की दीवा...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
Tag :
  November 12, 2012, 7:04 am
!! शुभ-दीपावली !!रोशनी का पर्व है, दीपक जलायें।नीड़ को नव-ज्योतियों से जगमगायें।।बातियाँ नन्हें दियों की कह रहीं,तन जलाकर वेदना को सह रहीं,तम मिटाकर, हम उजाले को दिखायें।नीड़ को नव-ज्योतियों से जगमगायें।।डूबते को एक तृण का है सहारा,ज़िन्दगी को अन्न के कण ने उबारा,धरा मे...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
Tag :गीत
  November 3, 2012, 3:56 pm
!! शुभ-दीपावली !!रोशनी का पर्व है, दीपक जलायें।नीड़ को नव-ज्योतियों से जगमगायें।।बातियाँ नन्हें दियों की कह रहीं,तन जलाकर वेदना को सह रहीं,तम मिटाकर, हम उजाले को दिखायें।नीड़ को नव-ज्योतियों से जगमगायें।।डूबते को एक तृण का है सहारा,ज़िन्दगी को अन्न के कण ने उबारा,धरा मे...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
Tag :दिवाली आ गयी है
  November 3, 2012, 3:56 pm
बुद्धि तीन प्रकार की होती है-१- रबड़ बुद्धि२- चमड़ा बुद्धि३- तेलिया बुद्धि--विचार कीजिए आप कौनसी बुद्धि के स्वामी हैं?      रबड़ बुद्धि रबड़ की तरह होती है। उदाहरण के लिए आप रबड़ में एक सूई से सूराख कर दीजिए। सूई निकालते ही रबड़ अपने रूप में आ जाती है। सूराख किसी को दिखाई नह...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
Tag :बुद्धि के प्रकार
  October 29, 2012, 5:41 pm
बुद्धि तीन प्रकार की होती है-१- रबड़ बुद्धि२- चमड़ा बुद्धि३- तेलिया बुद्धि--विचार कीजिए आप कौनसी बुद्धि के स्वामी हैं?      रबड़ बुद्धि रबड़ की तरह होती है। उदाहरण के लिए आप रबड़ में एक सूई से सूराख कर दीजिए। सूई निकालते ही रबड़ अपने रूप में आ जाती है। सूराख किसी को दिख...
काग़ज़ की नाव (मेरे गीत)...
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  October 29, 2012, 5:41 pm

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  हमारीवाणी.कॉम पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि बहुत सरल हैं। इसके लिए सबसे पहले प्रष्ट के सबसे ऊपर दाईं ओर लिखे ...
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