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Blog: साहित्य प्रसून

Blogger: devduttaprasoon
(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)भटक रहा बेघर हुआ, अरे ‘सलोना प्यार’ |हृदय ‘तिज़ोरी’ हो गये, औ चाह’त ‘व्यापार’ ||घेरचुके हैं ‘प्रीति’ को , लोभी ‘अन्तर्द्वन्द’ |जैसे ‘मैना’ स्वर्ण के, ‘पिंजरे’ में हो बन्द ||‘व्यवसायों’ के ‘जाल’ में फँसे ‘नेह-सम्बन्ध’ |‘रिश्तों’ की ‘गर्दन’ फँसी... Read more
clicks 99 View   Vote 0 Like   10:43am 26 Sep 2014 #
Blogger: devduttaprasoon
(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)पैनी‘लोभ-दुधार’ की, पड़ी इस तरह ‘मार’ |‘भावुकता’ घायल हुई, ‘प्रेम’ में पड़ी ‘दरार’ ||‘वित्त्वाद’ की ‘मकड़ियाँ’, मन में ली हैं पाल |चुपके चुपके बुन रही, हैं ‘लालच के जाल’ ||‘जज्वों’ से सूने हुये, ‘दिल’बन गये ‘मशीन’ |रूखे-नीरस हो गये, सभी भाव रंगीन ||... Read more
clicks 112 View   Vote 0 Like   9:21am 24 Sep 2014 #
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(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)जगे ‘कंस-रावण’ यहाँ, सोये ‘राम व श्याम’ !‘वित्तवाद’ की ‘प्रगति’ का,कैसा मिला ‘इनाम’ !!‘बड़े-बड़े अपराध’अब, बने हुये ‘व्यवसाय’ !‘न्याय’ छुपाकर ‘मुहँ’ चला, पनप रहा ‘अन्याय’ !!‘दहेज़’ के दुष्पाप’ ने, ‘प्रेमी’लिये लपेट !भोली भाली लडकियाँ,चढ़ींइसी ... Read more
clicks 159 View   Vote 0 Like   9:53am 21 Sep 2014 #
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(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)जुगनू पकड़े हाथ में, ‘मलिन’ हुआ ‘स्पर्श’ !लालच-‘मैली चमक’ से, ‘उन्हें’ हुआ है ‘हर्ष’ !!‘’सोने’ के ‘पिंजड़े’ फँसी, ‘मैना’ हुई  ‘गुलाम’ !‘बन्दी’ बन कर भोग ‘सुख’, समझा ‘दण्ड’ ‘‘इनाम’ !!‘तृष्णा’ चमकीली बसा, मन व्याकुल  बेचैन !जगते,सोते, ‘लाभ’ की, ‘... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   11:59am 20 Sep 2014 #
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(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)जुगनू पकड़े हाथ में, ‘मलिन’ हुआ ‘स्पर्श’ !लालच-‘मैली चमक’ से, ‘उन्हें’ हुआ है ‘हर्ष’ !!‘’सोने’ के ‘पिंजड़े’ फँसी, ‘मैना’ हुई  ‘गुलाम’ !‘बन्दी’ बन कर भोग ‘सुख’, समझा ‘दण्ड’ ‘‘इनाम’ !!‘तृष्णा’ चमकीली बसा, मन व्याकुल  बेचैन !जगते,सोते, ‘लाभ’ की, ‘... Read more
clicks 116 View   Vote 0 Like   11:59am 20 Sep 2014 #
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(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)जानें कितनी बार है, बदल चुकी सरकार !ज्यों के त्यों ‘ज़िन्दा’ अभी, ‘चुभते भ्रष्टाचार !!‘राजनीति’ के ‘खेल’ में, पनपा है ‘छल’ आज |जनता ‘चिड़िया’ बन गयी, नेता हैं कुछ ‘बाज’ ||‘भ्रष्ट तन्त्र’ को दे दिया, ‘प्रजातन्त्र’ का ‘नाम’ |इस ‘काँटों’ की ‘बाड़’ न... Read more
clicks 128 View   Vote 0 Like   1:39pm 18 Sep 2014 #
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 ‘लोभ की लपटें’ उठ रहीं, ‘स्वार्थ के अंगार’ !‘भट्टी’ भ्रष्टाचार’ की, ‘ईंधन’  मलिन विचार!! ‘मल-करकट के ढेर’ में, लगी हुई ज्यों ‘आग’ !दिशा-दिशा ‘दुर्गन्ध’है, किधर चलें हम भाग !!नफ़रत की ‘चिनगारियाँ’, छिटकीं चारों ओर !झुलसी  सारी ‘प्रीति’की, बँधी ‘हृदय’से ‘डोर’ ||‘धुआँ’ ... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   11:27am 17 Sep 2014 #
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(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)देखो‘भारत की धरा’,रोई हो लाचार !‘नाश’ रोक लो, बन्द कर, ‘शोषण’ का ‘बाज़ार’ !!मोटे ‘अजगर’ की तरह, बैठे ‘माँ के लाल’ |‘मेहनत’ के ‘धन’ से अधिक, छकें ‘मुफ़्त का माल’ ||‘छोटे  नेता’ बड़ों  से,  सीखें  ‘चाल-फरेब’ |‘भोली जनता’ ठग रहे, भरते  ‘अपनी  जेब... Read more
clicks 167 View   Vote 0 Like   8:22am 15 Sep 2014 #
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(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)‘शोषण’ के बढ़ने लगे, भारी ‘अत्याचार’|भारत की ‘धरती’दबी, सह कर इतने ‘भार’ !!‘ताक़’ में हमने रख दिया, है ‘राष्ट्र का स्वत्व’ |‘सम्विधान’ से अधिक हैं, रखते ‘निजी प्रभुत्व’ ||लम्पट, लोभी लालची, ‘अगुआ’हुये अनेक |जला-जला ‘सिद्धान्त’ये, ‘रोटी’ लेतेसे... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   11:13am 12 Sep 2014 #
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(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)शोषण के हाथों थमा, पैना अत्याचार ! ‘मानवता’ के ‘बदन’पर, कितने हुये ‘प्रहार’ !!चुरा चुरा कर बेचते, ‘कुदरत’ के परिधान’ |‘चीर’ धरा काहरण कर, बने निठुर ‘इंसान’ ||‘घूस-कमीशन’-‘दानवों’,  की  आयी  है ‘बाढ़’ |‘प्रगति-हिरनियों’ को चबा, रही इन्हीं की ... Read more
clicks 134 View   Vote 0 Like   7:58am 9 Sep 2014 #
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(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)जग में क्यों फैला हुआ, है ‘दुर्दम आतंक’ |‘मानवता की गोद’ में, है आतंक ‘कलंक’ ||कुछ देशों इस विश्व में,नहीं‘प्रेम’काज्ञान |कैसे रहें पड़ोस में, हैं इस से अनजान||‘शासन की ‘चाहत’ बुरी, या ‘धरती का लोभ’ |भोली जनता के हृदय, में भर देता क्षोभ ||‘ह्रदय-गगन... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   10:50am 6 Sep 2014 #
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(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)मृग-छौने के अंक में, चुभता बिच्छू-डंक |देखो ऐसे डस गया, ‘संस्कृति’ को आतंक!!‘आतंकों’ से काँपते, हैं ‘जनता’ के ‘पैर’ |जैसे कोई ‘मेमना’, ‘वधिक’ से मांगे खैर ||जनता ‘भय के ताल’ में, रही इस तरह तैर |जैसे ‘मछली’को हुआ, ‘मगरमच्छ’ से वैर ||‘स्वतंत्रता’ के... Read more
clicks 108 View   Vote 0 Like   9:51am 5 Sep 2014 #
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 (सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)जैसे ‘पंछी’ को  कहीं, पकड़ेकोई‘बाज’ |यों मज़लूमों’ पर पकड़, है ‘ज़ुल्मों'की आज ||‘स्यार’, ‘भेड़िया’लोमड़ी’,का लख कर ‘आक्रोश’ |डरे-डरे से छुप गये, हैं ‘भोले खरगोश’ ||अपराधों केगिद्ध’ हैं, उड़ते चारों ओर |‘समाज-वन’ में किस तरह, रहें‘प्रेम के मोर’ ?... Read more
clicks 96 View   Vote 0 Like   2:58pm 4 Sep 2014 #
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 (सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार) ‘स्वार्थपरता’की ‘निठुर’, पड़ी ‘चोट’ भरपूर | धीरे धीरे ‘एकता’,  हुई जा रही ‘चूर’ ||‘ईर्ष्या’ से सुलगा सदा, ‘अन्तर’ का अनुराग |ज्यों ‘बादल’की आग’ में, झुलसे ‘सुन्दर बाग’ ||‘दिल’ हो गये ‘तिज़ोरियाँ, ‘प्यार’ बना ‘व्यापार |‘स्वर्ण-रजत’ की चा... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   8:12am 3 Sep 2014 #
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‘पवन’ चली ‘डाली’ हिली, डर गये ‘पीले पात’ |सिहर उठे ‘आतंक’ से, सुभग छबीले ‘पात’ ||पुरखों ने बोये जहाँ, ‘मीठे मीठे आम’ |उन्हें काट कर बो रहे, हम ‘बबूल उद्दाम’ ||पोर पोर में चुभ रहे, ‘अन्तर्मन’ को साल |‘पीडाओं’ के उग रहे, जहाँ तहाँ ‘कंटाल’ ||किस से जा कर हम कहें, ‘अपने मन की बात’ |सि... Read more
clicks 115 View   Vote 0 Like   9:49am 2 Sep 2014 #
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‘भौतिक सुख’ छूने लगे, हैं ‘ऊँचा आकाश |थोड़ा ‘मन’ का भी करो, मेरे मित्र ‘विकास’ !!‘मधुवन’ में ऐसा हुआ, ‘मौसम का उत्पात’ |‘पीले’ होकर झर गये, ‘सुन्दर सुन्दर पात’ ||‘स्वप्न-सरोवर’ पर हुआ, ‘निर्मम उल्का पात’ |जले ‘कामना’ के सभी, ‘जलजातों’ के ‘... Read more
clicks 146 View   Vote 0 Like   8:09am 1 Sep 2014 #
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                                                                                           (सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)                        ‘परिवार्रों की ‘एकता’, टूट रही हर ओर |‘दुःख के बादल’ इसी से, बरस रहे ‘घनघोर’ ||‘व्य... Read more
clicks 126 View   Vote 0 Like   8:53am 31 Aug 2014 #
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तनिक बैठ सोचिये, ‘ध्यान’ लगा कर आज !‘व्यक्ति’ ‘भावना’ से जुड़े, बनता तभी ‘समाज’ !! ‘मानवता; का ‘धर्म’ औ, आपस की ‘अनुरक्ति’ |‘प्रेम’ परस्पर हो अगर, बढ़े ‘समाजी शक्ति’ ||‘शिथिल हुई क्यों  ‘एकता’, की ‘संयोजक डोर’ ? ‘जहाँ-तहाँ’ क्यों पनपते, हैं ‘कर्मों के चोर’ ??बिना ‘कर्म’ ‘सु... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   7:51am 30 Aug 2014 #
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(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)फ़िसल-फ़िसल कर गिर रहा, जिनमें ‘अखिल समाज’ |कितनी गहरी ‘खाइयाँ’ हैं ‘नफ़रत’ की आज !!‘फ़िसलन’ भरे ‘विकास’ में, ‘उजली कीचड़’ देख |हुए ‘विचारक’ ‘अनमने’, देखो आज अनेक !!ऊपर ऊपर मिट गये, लगते सारे ‘भेद’ |भीतर भीतर बो रहे, मन को चुभते ‘खेद’ ||‘प्रेम-परिन्दे’ ... Read more
clicks 129 View   Vote 0 Like   6:52am 29 Aug 2014 #
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(सरे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)जहाँ सदा ही रहा है, ‘आदर्शों’का ‘राज’ |‘प्रबुद्ध भारत’ का हुआ, कैसा आज ‘समाज’ !!इस भारत में कभी थे, सीधे-सच्चे’ लोग |बदले –बदले आज कल, है अजीब ‘संयोग’ ||‘छोटी मछली’ को यहाँ, खाता ‘भारी मच्छ’ |‘अभिमानी’ ‘सामान्य-जन’, को कहते हैं ‘तुच्छ’ ||हमें द... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   2:43pm 23 Jul 2014 #
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                      (सारे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)                  समाज ‘माता’ की तरह, होता ‘पिता’ सामान |इस समाज के सभी पर, हैं भारी ‘अहसान’ ||जीना सिखलाता हमें, यह बन कर ‘आचार्य’ |इसकी सेवा करें सब, यह नितान्त अनिवार्य ||समाज ‘भोला’ शम्भु सा, है ... Read more
clicks 93 View   Vote 0 Like   2:52pm 22 Jul 2014 #
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मेरे नित्रो ! इस काव्य-ग्रन्थ का वन्दना-सर्ग समाप्त होने के बाद आज से पुस्तक के मूल विषय पर आप का स्वागत है ! यथासम्भव'सत्य'के मर्यादित स्वरूप का अनावरण का प्रयास है |श्रावणीय अन्ध विश्वासों पर थोड़ी सी चोटें करने के लिए क्षमायाची हूं | (सारे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार) जब ... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   11:52am 19 Jul 2014 #
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सच कहता हूँ, नहीं है, मिथ्या  इस में ‘लेश’ !तुम ‘माता’,तुम ही ‘पिता’, हे मेरे ‘प्रिय देश’ !!खा कर पुष्ट ‘शरीर’ है, तुम से पाकर ‘अन्न’ |‘गोद’ तुम्हारी मिली जो, खेले, रहे ‘प्रसन्न’ ||‘प्यास’ बुझाई, जब लगी, पीकर ‘शीतल नीर’ |तुमने हमको दिया जो, अर्पित तुम्हें ‘शरीर’ ||जो चाहा, तुमस... Read more
clicks 152 View   Vote 0 Like   1:02am 18 Jul 2014 #
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(सारे चित्र 'गूगल-खोज'से साभार)‘राष्ट्र’ ! ‘समष्टि-ब्रह्म’ तू, ‘पूज्य’ जैसे ‘ईश’ |तुझको ‘कोटि प्रणाम’ हैं, ‘विनत’ झुका कर ‘शीश’ ||भौगोलिक परि‘वेश’ है, तेरा ‘सौम्य शरीर’ |नदियाँ ‘रक्त-प्रवाहिनी’, ‘रुधिर’ सु-पावन ‘नीर’||‘वायु’ तेरे ‘प्राण’ हैं, और ‘पवन’ है ‘साँस’ |‘संस्कृत... Read more
clicks 165 View   Vote 0 Like   3:19am 16 Jul 2014 #
Blogger: devduttaprasoon
गुरु ‘भावना-लोक’ का, होता है ‘भगवान’ |सब कुछ मिलता ‘जगत’ में, ‘गुरु’ बिन मिले न ‘ज्ञान’ ||गुरुवर नरहरिदास जी, गुरु बल्लभाचार्य |‘सन्त-प्रवर’ रविदास औ, ज्ञानेश्वर ‘आचार्य’ ||मलिक मुहम्मद “जायसी”, नानक और कबीर |तुलसी, मीरा, सूर ये, सारे ‘भक्ति-प्रवीर’ ||सब ने सींचा ‘नीर’ बन, ‘अ... Read more
clicks 172 View   Vote 0 Like   2:19pm 14 Jul 2014 #

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