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Blog: रविकर की कुण्डलियाँ

Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
(1)विनती सम मानव हँसी, प्रभु करते स्वीकार।हँसा सके यदि अन्य को, करते बेड़ापार।करते बेड़ापार, कहें प्रभु हँसो हँसाओ।रहे बुढ़ापा दूर, निरोगी काया पाओ।हँसी बढ़ाये उम्र, बढ़े स्वासों की गिनती।रविकर निर्मल हास्य, प्रार्थना पूजा विनती।।(2)बानी सुनना देखना, खुश्बू स्वाद समेत।पाँ... Read more
clicks 113 View   Vote 0 Like   5:14am 26 Dec 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
पानी भर कर चोंच में, चिड़ी बुझाये आग ।फिर भी जंगल जल रहा, हंसी उड़ाये काग।हंसी उड़ाये काग, नहीं तू बुझा सकेगी।कहे चिड़ी सुन मूर्ख, आग तो नहीं बुझेगी।किंतु लगाया कौन, लिखे इतिहास कहानी।मैं तो रही बुझाय, आग पर डालूं पानी ।।... Read more
clicks 166 View   Vote 0 Like   9:28am 19 Dec 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
क्षरण छंद में हो रहा, साहित्यिक छलछंद।किन्तु अभी भी कवि कई, नीति नियम पाबंद।नीति नियम पाबंद, बंद में भाव कथ्य भर।शिल्प सुगढ़ लय शुद्ध, मिलाये तुक भी बेह'तर।लो कुंडलियां मान, निवेदन करता रविकर।मिला आदि शब्दांश, अंत के दो दो अक्षर।।... Read more
clicks 141 View   Vote 0 Like   4:59am 13 Dec 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
लादें औलादें सतत, मातायें नौ माह।लात मारती पेट में, फिर भी हर्ष अथाह।फिर भी हर्ष अथाह, पुत्र अब पढ़ने जाये।पेट काट के बाप, उसे नौकरी दिलाये।पुन: वही हालात, बची हैं केवल यादें।किन्तु मार के लात, रुलाती अब औलादें।।... Read more
clicks 157 View   Vote 0 Like   8:03am 24 Oct 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
पोता जब पैदा हुआ, बजा नफीरी ढोल ।नतिनी से नफरत दिखे, दिखी सोच में झोल।दिखी सोच में झोल, परीक्षण पूर्ण कराया |नहीं कांपता हाथ, पेट पापी गिरवाया ।कह रविकर कविराय, बैठ के बाबा रोता |बहू खोजता रोज, कुंवारा बैठा पोता ।।... Read more
clicks 127 View   Vote 0 Like   8:39am 7 Oct 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
पंडित का सिक्का गिरा, देने लगा अजान।गहरा नाला क्यूं खुदा, खुदा करो अहसान ।खुदा करो अहसान, सन्न हो दर्शक साराहनुमत रविकर ईष्ट, उन्हें क्यों नही पुकारा ।इक सिक्के के लिए, करूं क्यों भक्ति विखंडित।क्यूं कूदें हनुमान, प्रत्युत्तर देता पंडित।।... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   4:09am 26 Sep 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
1)कृष्णा तेरी कृपा की, सदा रही दरकार।दर दर मैं भटकूँ नहीं, बस गोकुल से प्यार।बस गोकुल से प्यार, हृदय में श्याम विराजा।बरसाने रसधार,जरा बरसाने आजा।राधे राधे बोल, जगत से हुई वितृष्णा।प्रेम तनिक ले तोल, बैठ पलड़े पे कृष्णा।।2)बाधाएँ हरते रहे, भक्तों की नित श्याम।कुपित इंद्र... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   7:36am 6 Sep 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
पहले तो करते रहे, अब होती तकलीफ।बेगम बोली क्यों नहीं, मियां करे तारीफ।मियां करे तारीफ, संगमरमर सी काया।पत्थर एक तराश, प्रभू! क्या खूब बनाया।चला फूँकने प्राण, किन्तु कर बाल सुनहले।था पत्थर जो शेष, अक्ल पर रख दे पहले।... Read more
clicks 122 View   Vote 0 Like   12:45pm 28 Jul 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
उदासीनता की तरफ, बढ़ते जाते पैर ।रोको रविकर रोक लो, जीवन से क्या बैर । जीवन से क्या बैर, व्यर्थ ही जीवन त्यागा ।कर अपनों को गैर, अभागा जग से भागा |दर्द हार गम जीत, व्यथा छल आंसू हाँसी ।जीवन के सब तत्व, जियो जग छोड़ उदासी ।।... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   5:22am 26 Jul 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
जल के जल रक्षा करे, जले नहीं तब दुग्ध।गिरे अग्नि पर उबलकर, दुग्ध कर रहा मुग्ध।दुग्ध कर रहा मुग्ध, मूल्य जल का बढ़ जाता।रखे परस्पर ख्याल, नजर फिर कौन लगाता।आई बीच खटास, दूध फट जाय उबल के।जल भी मिटता जाय, आग पर रविकर जल के।।... Read more
clicks 120 View   Vote 0 Like   12:15pm 25 Jul 2016 #दोस्त
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
प्रश्नों के उत्तर कठिन, नहीं आ रहे याद |स्वार्थ-सिद्ध मद-मोह-सुख, भोगवाद-उन्माद |भोगवाद-उन्माद , नशे में बहके बहके |लेते रहते स्वाद, अनैतिक चीजें गहके |नीति-नियम-आदर्श, हवा के ताजे झोंके |चौथेपन में आज, लिखूँ उत्तर प्रश्नों के ||... Read more
clicks 118 View   Vote 0 Like   5:09am 19 Jul 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
कैसे थप्पड़ मारता, झूठे को रोबोट।पेट दर्द के झूठ पे, बच्चा खाये चोट।बच्चा खाये चोट, कभी मैं भी था बच्चा।कहा कभी ना झूठ, बाप को पड़ा तमाचा।मम्मी कहती आय, बाप बेटे इक जैसे।थप्पड़ वह भी खाय, बताओ रविकर कैसे।।... Read more
clicks 103 View   Vote 0 Like   9:47am 13 Jul 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
चिमटा अब लाता नहीं, माँ के लिए हमीद।ऑटोमैटिक गन चला, रहा मनाता ईद।रहा मनाता ईद, खरीदे थे हथगोले।रहा आयते पूछ, सुना पाये ना भोले।देता गर्दन काट, उन्हें झट देता निपटा।ईदगाह में जाय, ख़रीदे काहे चिमटा।।... Read more
clicks 136 View   Vote 0 Like   8:59am 8 Jul 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
रचना कर इन्सान की, दुखी दिखा भगवान |रचना कर भगवान की, खुश होता इन्सान |खुश होता इन्सान, शुरू हैं गोरख-धंधे |अरबों करते दान, अक्ल के पैदल अंधे |फिर हो भोग-विलास, किन्तु रविकर तू बचना |लेकर उसका नाम, लूटते उसकी रचना ||... Read more
clicks 111 View   Vote 0 Like   12:14pm 5 Jul 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
काव्य में किन परिस्थितयों में अश्लील दोष भी गुण हो जाता है.और वह शृंगार 'रस'के घर में न जाकर 'रसाभास'की दीवारें लांघता हुआ दिखायी देता है.(1)स्वर्ण-शिखा सी सज-संवर, मानहुँ बढ़ती आग ।छद्म-रूप मोहित करे, कन्या-नाग सुभाग ।कन्या-नाग सुभाग, हिस्स रति का रमझोला ।झूले रमण दिमाग, भूल ... Read more
clicks 293 View   Vote 0 Like   12:19pm 30 Jun 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
खानापूरी हो चुकी, बेशर्मी भी झेंप । खेप गए नेता सकल, भेज  रसद की खेप। भेज रसद की खेप, अफसरों की बन आई । देखी भूख फरेब, डूब कर जान बचाई। पानी पी पी मौत, उठा दुनिया से दाना ।बादल-दल को न्यौत, चले जाते मयखाना ॥... Read more
clicks 137 View   Vote 0 Like   5:13am 29 Jun 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
नारी अब अबला नहीं, कहने लगा समाज । है घातक हथियार से, नारि सुशोभित आज ।नारि सुशोभित आज, सुरक्षा करना जाने । रविकर पुरुष समाज, नहीं जाए उकसाने ।किन्तु नारि पे नारि, स्वयं ही पड़ती भारी | पहली ढाती जुल्म, तड़पती दूजी नारी ।|... Read more
clicks 133 View   Vote 0 Like   5:16am 2 Jun 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
करें कदर कद देख के, कदरदान नादान |करता ऊँची एड़ियां, इसीलिए इन्सान |इसीलिए इन्सान, एड़ियां घिसती जाएँ |पीढ़ा तो वरदान, किसी का लेकर आएँ |जिसपे रखकर पैर, खड़ा हो जाऊं तनकर |प्राप्त करूँ फिर लक्ष्य, यही अभिलाषा रविकर ||... Read more
clicks 151 View   Vote 0 Like   6:11am 31 May 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
(1)भैया यदि अनभिज्ञ हो, पुरखों से लो पूछ |गर्दन पर धर छूरिका, कटवाई थी मूँछ |कटवाई थी मूँछ, मात्र दाढ़ी उगवाया |शान दिखा मत छूछ, धर्म दूजा अपनाया |पुरखे तो हैं एक, एक ही धरती मैया |निर्भय हो जय बोल, सदा भारत की भैया ||(2)गर्दन पर चाक़ू रखो, चाहे रखो कटार |भारत माता की नहीं, करनी जयजयकार ... Read more
clicks 220 View   Vote 0 Like   11:06am 15 Mar 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
रमिया खटती रात-दिन, किन्तु मियां अभिशाप।तन-मन देती वह जला, रहा निकम्मा ताप ।  रहा निकम्मा ताप, बाप बनता ही रहता ।तीन ढाक के पात, खुदा की नेमत कहता |पीता दारू रोज, निकाले हर दिन कमियां |सहती जाए बोझ, रहे चुप लेकिन रमिया ||... Read more
clicks 170 View   Vote 0 Like   6:50am 23 Feb 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
रविकर गिरगिट एक से, रहे बदलते रंग |खिले गुलाबी ख़ुशी मन, हो सफ़ेद जब दंग |हो सफ़ेद जब दंग, रचे रचना गड़बड़ सी |झड़े हरेरी सकल, होय गर बहसा-बहसी |बदन क्रोध से लाल, हुआ पीला तन डरकर |है बदरंगी हाल, कृष्ण-काला मन रविकर ||... Read more
clicks 202 View   Vote 0 Like   4:06am 22 Feb 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
रोटी सा बेला बदन, अलबेला उत्साह |दो बेला हर दिन सिके, किन्तु नहीं परवाह |किन्तु नहीं परवाह, सभी की भूख मिटाती |पर बच्चे बेलाग, अकेले मर-खप जाती |कर रविकर को माफ़, हुई यह संतति खोटी |गूँथ स्वयं को मातु, बनाओ तुम तो रोटी ||... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   7:21am 19 Feb 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
अविनाश वाचस्‍पतिhttps://hi.wikipedia.org/s/15mrअरसा से बीमार तन, पर मन के मजबूत।रहे पुरोधा व्यंग्य के, सरस्वती के पूत। सरस्वती के पूत, पुरानी मुलाकात थी । तब भी थे बीमार, किन्तु दिल खोल बात की।रविकर करे प्रणाम, पुष्प श्रद्धांजलि बरसा।नहीं सके जग भूल, लगेगा लंबा अरसा।।(2) ब्लॉग जगत मे... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   10:19am 15 Feb 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
विवेचना विस्तृत करे, हिन्दु सनातन धर्म |अणिमा महिमा सहित हैं, अष्ट सिद्धियां कर्म |अष्ट सिद्धियां कर्म, प्राप्तिका भारी गरिमा | है प्रकाम्य वैशित्व, बहुत ही हलकी लघिमा |फिर अंतर्मितित्व,  सिद्धि रविकर आलेखन |अंतिम है ईशित्व,  यही सम्पूर्ण विवेचन ||(१)हनुमत ... Read more
clicks 189 View   Vote 0 Like   5:46am 3 Feb 2016 #
Blogger: dinesh chandra gupta ravikar
यादें मत विस्मृत करो, चाहे जैसा स्वाद |खट्टी-मीठी मस्त पर, दे कड़ुवी को दाद |दे कड़ुवी को दाद, इल्तिजा वो ठुकराये  |जाया की फरियाद, किन्तु कविता तो आये |कर, कविता कर याद, याद कर रविकर वादे |रहे सदा आबाद, बोल कर भाव नया दे  ||... Read more
clicks 179 View   Vote 0 Like   6:21am 1 Feb 2016 #

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