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Blog: KAVITA RAWAT

Blogger: Kavita Rawat
सोने की बेड़ियां हों तो भी उसे कौन चाहता है? स्वतंत्रता स्वर्ण से अधिक मूल्यवान होता है बंदी  राजा  बनने से आजाद पंछी बनना भला जेल के मेवे-मिठाई से रूखा-सूखा भोजन भला स्वतंत्रता का अर्थ खुली छूट नहीं होती है अत्यधिक स्वतंत्रता सबकुछ चौपट करती है लोहा हो या रेशम दोनों बं... Read more
clicks 241 View   Vote 0 Like   2:30am 14 Aug 2018
Blogger: Kavita Rawat
स्वामिनारायण अक्षरधाम! भारतीय संस्कृति और अध्यात्म के ज्योतिर्धर के रूप में अवतरित भगवान स्वामिनारायण का शाश्वत निवास-धाम है। दिल्ली के पावन यमुना-तट पर जहाँ ऊबड़-खाबड़ झाडि़यों से युक्त विशाल बंजर भूमि थी, वहां मात्र पांच वर्ष में पलक झपकते सम्पन्न हुआ कल्पनातीत ... Read more
clicks 267 View   Vote 0 Like   2:30am 16 Jul 2018
Blogger: Kavita Rawat
जरा इन मासूम बच्चों को अपनी संवेदनशील नजरों से देखिए, जिसमें 14 वर्ष की सपना और उसकी 11 वर्ष की बहिन साक्षी और 11 वर्ष के भैया जिन्हें अभी कुछ दिन पहले तक माँ-बाप का सहारा था, वे 1 जुलाई 2018 रविवार को भयानक सड़क दुर्घटना भौन-धुमाकोट मोटर मार्ग पर होने से बेसहारा हो चुके हैं। इस दर... Read more
clicks 219 View   Vote 0 Like   6:58am 5 Jul 2018
Blogger: Kavita Rawat
   माउंटेन मैन ‘दशरथ मांझी’ की तरह अपनी दयनीय स्थिति के बावजूद दृढ़ इच्छा शक्ति रखने वाला एक और मांझी जो कि मध्यप्रदेश के जिला होशंगाबाद का निवासी है, जो एक पिछड़े इलाके सोहागपुर जैसे एक छोटे से स्कूल का हिंदी माध्यम का औसत दर्जे के छात्र रहा है, बावजूद इसके जिसने भोपाल आ... Read more
clicks 223 View   Vote 0 Like   10:57am 7 Jun 2018
Blogger: Kavita Rawat
माउंटेन मैन के नाम से विख्यात दशरथ मांझी को आज दुनिया भर के लोग जानते हैं। वे बिहार जिले के गहलौर गांव के एक गरीब मजदूर थे, जिन्होंने अकेले अपनी दृ़ढ़ इच्छा शक्ति के बूते  अत्री व वजीरगंज की 55 किलोमीटर की लम्बी दूरी को 22 वर्ष के कठोर परिश्रम के बाद गहलौर पहाड़ काटकर 15 किलोम... Read more
clicks 190 View   Vote 0 Like   2:30am 24 May 2018
Blogger: Kavita Rawat
जब तक चूजे अंडे से बाहर न आ  जाएं तब तक उनकी गिनती नहीं करनी चाहिए जब तक ताजा पानी न मिल जाए तब तक गंदे पानी को नहीं फेंकना चाहिए भालू को मारने से पहले उसके खाल की कीमत नहीं लगानी चाहिए मछली पकड़ने से पहले ही उसके तलने की बात नहीं करनी चाहिए हाथ आई चिड़िया आसमान उड़ते गिद्द स... Read more
clicks 163 View   Vote 0 Like   3:00am 19 May 2018
Blogger: Kavita Rawat
जब भी जबलपुर जाना होता है, तो माँ नर्मदा के दर्शन के साथ भेड़ाघाट देखने को मन उत्सुक हो उठता है। भेड़ाघाट पहुँचकर शांत वातावरण के बीच नर्मदा नदी के खूबसूरत संगमरमरी चट्टानों के अनोखे सौंदर्य में नौका विहार करने पर मन आनंदित हो उठता है। ऐसे ही नौका विहार करते हुए खूबसू... Read more
clicks 244 View   Vote 0 Like   10:40am 27 Apr 2018
Blogger: Kavita Rawat
गर्म पानी से झुलसा कुत्ता ठण्डे पानी से भी डरता है चूने से मुँह जले वाले को दही देखकर डर लगता है रीछ से डरा आदमी कंबल वाले को देख डर जाता है दूध का जला छाछ को फूँक-फूँक कर पीता है ईश्वर से न डरने वाले से सभी को डर लगता है आग में झुलसा हुआ बच्चा आग से डरता है जिससे बचना मुश्क... Read more
clicks 177 View   Vote 0 Like   2:30am 13 Apr 2018
Blogger: Kavita Rawat
गलत ढंग से कमाया धन गलत ढंग से खर्च हो जाता है बड़ी आसानी से मिलने वाला आसानी से खो भी जाता है दूध की कमाई दूध और पानी की पानी में जाती है चोरी की ऊन ज्यादा दिन गर्माइश नहीं देती है एक नुकसान होने पर नुकसान होते चले जाते हैं लाभ की चाहत में बुद्धिमान भी मूर्ख बन जाते हैं हर ... Read more
clicks 169 View   Vote 0 Like   2:30am 7 Apr 2018
Blogger: Kavita Rawat
खोलो किवाड़ चलो मठ भीतर, दरसन दीज्यो माई आंबे, झुलसी रहो जी तीलू को तेल कपास की बाटी जगमग जोत जले दिन राती, झुलसी रहो जी -------------------------------------------- जल कैसे भरूं जमुना गहरी जल कैसे भरूं जमुना गहरी खड़े भरूं तो सास बुरी है बैठे भरूं तो फूटे गगरी ,  जल कैसे भरूं जमुना गहरी                    ठा... Read more
clicks 143 View   Vote 0 Like   2:30am 2 Mar 2018
Blogger: Kavita Rawat
विवशता देखो इस पागल मन की कहता दूर नहीं हरदम तेरे करीब रहूँ समझ न आता राज प्यार का कैसे तुझको प्यार करूँ देख तेरी प्यार भरी निगाहें दिल तुझमें डूबने लगता इतना प्यार भरा है दिल में बरबस ही खिंचा चला आता चाहती हैं निगाहें तुझमें डूबी रहे बेबस निगाहें कैसे रोक पाऊँ समझ न आ... Read more
clicks 186 View   Vote 0 Like   2:00am 3 Feb 2018
Blogger: Kavita Rawat
राष्ट्रीय त्यौहारों में गणतंत्र दिवस का विशेष महत्व है। यह दिवस हमारा अत्यन्त लोकप्रिय राष्ट्रीय पर्व है, जो प्रतिवर्ष आकर हमें हमारी प्रजातांत्रिक शासन प्रणाली का भान कराता है। स्वतंत्रता के बाद भारतीयों के गौरव को स्थिर रखने के लिए डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद की अध्यक... Read more
clicks 184 View   Vote 0 Like   2:30am 25 Jan 2018
Blogger: Kavita Rawat
एक हमारा प्यारा तोता 'ओरियो 'है वह कहलाता बोली हमारी वह सीखता फिर उसको है दोहराता चोंच उसकी है लाल-लाल ठुमक-ठुमक है उसकी चाल घर-भर वह पूरे घूमता रहता मिट्ठू-मिट्ठू   कहता  फिरता सुबह पिंजरे से बाहर निकलता ऊँगली छोड़ सीधे कंधे बैठता टुकुर-टुकुर फिर मुँह देखता बड़ा प्यारा-प... Read more
clicks 249 View   Vote 0 Like   2:30am 5 Jan 2018
Blogger: Kavita Rawat
'ख्याल'कविता संग्रह नाम से मेरी सहपाठी निवेदिता ने खूबसूरत ख्यालों का ताना-बना बुना है। भोपाल स्थित स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी में ‘ख्याल’ का लोकार्पण हुआ तो कविताओं को सुन-पढ़कर लगा जैसे मुझे अचानक मेरे ख्यालों का भूला-बिसरा पिटारा मिल गया हो। जहाँ पहले स्कूल की पढ़ा... Read more
clicks 191 View   Vote 0 Like   2:30am 1 Jan 2018
Blogger: Kavita Rawat
कानून का निर्णय काले कौए को बरी लेकिन फाख्ता को दोषी ठहराता है निर्धन के लिए मुसीबत और धनवान के लिए कानून फायदेमंद होता है मुकदमे में किसान नहीं जमींदार को हमेशा सही माना जाता है धनवान के लिए एक कानून और निर्धन के लिए दूसरा होता है एक निर्दोष को दंड देने से दस दोषियों क... Read more
clicks 250 View   Vote 0 Like   2:30am 16 Dec 2017
Blogger: Kavita Rawat
हुए हम घायल प्यार में तेरे घायल ही हमको रहने दो जरूरत नहीं मरहम पट्टी की घाव दिल पर गहराने दो मुश्किल से बने हम दीवाने अब हमें होश में मत लाना कितना सूकूँ है इस प्यार में बनकर दीवाना समझ जाना मिले तुम घायल करने वाले जरा प्यार की हद गुजरने दो हुए हम घायल प्यार में तेरे घाय... Read more
clicks 160 View   Vote 0 Like   2:30am 30 Nov 2017
Blogger: Kavita Rawat
           कहा गया है, कि साधना जब सरस्वती की अग्निवीणा पर सुर साधती है तो साहित्य की अमृतधारा प्रवाहित होती है, जिससे हित की भावनाएं हिलकोरें मारने लगती है । इन हिलकोरों में जब सृजन की अग्नि की धाह आंच मारती है तो वह कलुषित परिवेश की कालिमा जलाकर उसके बदले एक खुशहाली से भरे ... Read more
clicks 209 View   Vote 0 Like   2:30am 1 Nov 2017
Blogger: Kavita Rawat
दो काम एक साथ हाथ में लेने पर एक भी नहीं हो पाता है। बहुत ज्यादा सोच-विचार वाला कुछ भी नहीं कर पाता  है।। जो कुछ नहीं जानता वह किसी बात में संदेह नहीं करता है। जो अधिक जानता है वह काम पर भी विश्वास कर लेता है ।। जो जल्दी विश्वास कर लेता है वह बाद में पछताता है । समझदार आदमी ... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   2:30am 25 Oct 2017
Blogger: Kavita Rawat
एक मान्यता के अनुसार दीपावली ‘लक्ष्मी जयन्ती’ अर्थात् लक्ष्मी के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है। निश्चित ही यह कल्पना अर्वाचीन है, क्योंकि प्राचीन देवताओं की जयन्ती या जन्मदिन की अवधारणा वैदिक काल में नहीं थी। लक्ष्मी एक वैदिक देवता है जो मूलतः भूदेवी या पृथ्वी का ... Read more
clicks 232 View   Vote 0 Like   2:30am 19 Oct 2017
Blogger: Kavita Rawat
कुछ हुई उनकी बात कुछ  हुई मुलाकात और वे प्यार समझ बैठे दिल देने की भूल कर  बैठे कहते सुनते आए से जिसे वे भी करने लगे प्यार बस इसी प्यार की खातिर आगे बढ़ते चले गए रोक न पाए अपने दिल को दिन को भी  मधुर सपने देखने लगे यादों की ताजगी में रातभर जगने लगे दिखते न थे जो घर के बाहर कभी ... Read more
clicks 216 View   Vote 0 Like   3:30am 13 Oct 2017
Blogger: Kavita Rawat
एक उम्मीद जिसकी नाउम्मीदी पर उठती है मन में खीज, झुंझलाहट निराश मन कोसता बार-बार उम्मीद उनसे जो खुद उम्मीद में जीते-पलते हैं उम्मीद उनसे लगा बैठते हैं परिणाम वही पश्चाताप दफ़न होती उम्मीदें जहाँ से जुड़ने की उम्मीद वहीं से टूटता मन सुनता कौन है बात उनकी जो दबा वक्त के क्र... Read more
clicks 135 View   Vote 0 Like   3:30am 9 Sep 2017
Blogger: Kavita Rawat
देश की स्वतंत्रता के लिए  से लेकर  तक क्रान्तिकारियों व आंदोलनकारियों के साथ ही लेखकों,कवियों और पत्रकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका  निभाई।  उस समय खूब लिखा गया।  खूब पढ़ा गया।  आज की तरह तब सम्प्रेषण के संसाधन बिलकुल न होते हुए भी वह सृजन आम आदमी तक पहुँचता था।  हर देशव... Read more
clicks 212 View   Vote 0 Like   6:12am 14 Aug 2017
Blogger: Kavita Rawat
रिमझिम सावनी फुहार-संग पावन पर्व रक्षाबंधन आया है घर-संसार खोई बहिना को मायके वालों ने बुलाया है मन में सबसे मिलने की उमंग धमा-चैकड़ी मचाने का मन है पता है जहाँ सुकूं भरी जिंदगी वह बचपन का घर-आंगन है याद है छोटी-छोटी बातों पर मुंह फुलाना कभी हंसते-गाते, खुशी-खुशी स्कूल ज... Read more
clicks 311 View   Vote 0 Like   3:30am 6 Aug 2017
Blogger: Kavita Rawat
बहिन विवाहित होकर अपना अलग घर-संसार बसाती है। पति-बच्चे, पारिवारिक दायित्व दुनियादारी में उलझ जाती है।। सतत स्नेह, प्रेम व प्यार की निर्बाध आकांक्षा मन में वह रखती है। पर विवशताएं चाहते हुए भी उसके अंतर्मन को कुण्ठित करती है।। रक्षाबंधन-भैया दूज पर बहिन-भैया मिलन के द... Read more
clicks 227 View   Vote 0 Like   6:26am 4 Aug 2017


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